ऑफिस की शादीशुदा महिला को गेस्ट रूम में चोदा

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मेरा नाम अजय है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं। मैं एक फाइनेंस कंपनी में जॉब करता हूं और मुझे यहां पर जॉब करते हुए काफी समय हो चुका है इससे पहले मैं किसी और कंपनी में जॉब करता था लेकिन मुझे यहां पर अच्छा पैकेज मिल रहा था इसलिए मैंने यहीं पर जॉइन कर लिया। मैंने जब से यहां पर ज्वाइन किया है उसके बाद से मैंने कई बड़ी डील की है जिसकी वजह से मेरे बॉस मुझसे बहुत ही खुश रहते हैं और वह कहते हैं कि तुम ऐसे ही काम करते रहोगे तो एक दिन तुम बहुत ही तरक्की कर लोगे। मैंने उन्हें कहा मैं तो अपना सौ प्रतिशत ही देता हूं। वह मुझसे बहुत ही खुश रहते थे और मैं मुझसे कभी गलती भी हो जाती तो वह माफ कर दिया करते यदि किसी महीने मैं उन्हें ज्यादा काम कर के नहीं दे पाता तो भी वह मुझे कहते कि कोई बात नहीं तुम अगले महीने अच्छा काम कर लेना लेकिन वह और लोगों को बहुत ही डांटते रहते थे क्योंकि वह लोग अपना काम अच्छे से नहीं करते थे और अपने काम में सिर्फ टाल ब्राई करते थे लेकिन मैं बिल्कुल भी ऐसा नहीं करता था जिसकी वजह से वह बहुत ही खुश होते थे और कहते थे कि जिस प्रकार से तुम काम कर रहे हो वह बहुत ही अच्छा है।

मेरे बॉस और मेरे बीच में बहुत ही दोस्ताना संबंध है। वह हमेशा ही मेरे साथ दोस्त की तरह से बर्ताव करते थे और मुझसे बहुत ही प्यार से बात किया करते। मुझे उनका व्यवहार बहुत ही अच्छा लगता था और जिस प्रकार से वह मुझसे बात करते थे वह मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। हमारे ऑफिस में एक लड़की आई उसका नाम सरिता है लेकिन वो शादीशुदा थी उसकी नई-नई शादी हुई थी। वह बहुत ही ज्यादा सुंदर थी। मैं उससे शुरुआत में बात नहीं करता था क्योंकि वह बहुत ही कम बात करने वाली लड़की थी। वह ऑफिस में सिर्फ काम को लेकर बात किया करती थी और कुछ भी किसी से बात नहीं करती थी। वह काम के सिलसिले में मुझसे बात कर लिया करती थी क्योंकि वह ऑफिस का ही काम संभाला करती थी इस वजह से मुझे उससे बात करनी ही पड़ जाती थी। जब मैं उससे बात करता तो मैं उससे सिर्फ काम की बात ही किया करता था लेकिन अब धीरे-धीरे हम दोनों के बीच में बातें होने लगी, मुझे ऐसा लगने लगा कि शायद मैं उससे उसके बारे में पूछ सकता हूं। एक दिन मैंने उससे पूछ ही लिया कि तुम्हारी शादी कब हुई। वह कहने लगी कि मेरी शादी को एक वर्ष से ऊपर हो चुका है।

मैंने उसे कहा कि यह शादी तो तुम्हारे घरवालों की मर्जी से ही हुई होगी। वो कहने लगी नहीं यह मैंने अपनी खुद की मर्जी से की थी क्योंकि मैं रोहित को बहुत ही पसंद करती थी। रोहित सरिता के पति का नाम है। जब सरिता ने मुझे बताया कि वह बहुत ही खुश है तो मुझे लगा कि शायद वह अपने पति के साथ बहुत खुश होगी लेकिन वह जब ऑफिस में रहती तो बहुत ही गुमसुम रहती थी और मुझे भी लगता था कि शायद उसे किसी प्रकार की कोई दिक्कत है। लेकिन वह किसी को भी बताना नहीं चाहती थी। मुझे लग रहा था कि मुझे भी सरिता से क्या मतलब है क्योंकि वह ऑफिस में ही मुझसे मिलती है और उसके बाद तो मेरा उससे कोई भी संबंध नहीं है और ना ही हम लोग इतने अच्छे दोस्त हैं इसलिए मैं इस बात को भूल गया और अपने काम पर ही लगा रहा। सरिता भी ऑफिस में आती और अपना काम कर के वह भी घर चली जाती थी। मैं भी अपने काम पर ही लगा रहता था और जब मुझे समय मिलता तो मैं अपने घर वालों के साथ में समय बिता लिया करता हूं। धीरे धीरे काफी समय बीत चुका था। एक दिन मैं सरिता के बगल में ही बैठा हुआ था क्योंकि मैंने सरिता को कोई फाइल दी थी और उसे ही उसका काम करना था। जब मैं उसके बगल में बैठा हुआ था तो उसके फोन पर फोन आ रहा था लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी उसने वह फोन रिसीव किया ही नहीं। जब मैंने उसे कहा कि तुम्हारा फोन आ रहा है तो वो कहने लगी कोई बात नहीं लेकिन मेरी नजर उसके फोन पर पड़ गई, उसने अपने फोन पर अपने पति का नाम सेव किया हुआ था। अब मेरे दिमाग में कुछ तो ऐसी बात आई कि मुझे लगने लगा इन दोनों के बीच में कुछ ना कुछ बहुत बड़ी दिक्कत चल रही है जिसे सरिता मुझे बताना नहीं चाहती।

मैंने उससे बातों ही बातों में पूछ लिया कि क्या तुम्हारे पति के साथ तुम्हारे संबंध ठीक नहीं है तो वो कहने लगी नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है। वह भी मुझे कुछ बताना नहीं चाहती थी और वह चुपचाप अपने काम पर लगी हुई थी लेकिन मुझे लगने लग गया था कि वह बहुत ही परेशान है। थोड़ी देर बाद वह रोने लगी। वह बहुत रो रही थी तो मुझे बहुत ही बुरा लगने लगा। मैंने उसे पूछा कि क्या बात हो गई तो वह कहने लगी कि मैं बहुत ही परेशान हो चुकी हूं। मैंने उसे बोला कि ऐसी क्या बात हो गई लेकिन वह  अभी कुछ बात नहीं कर रही थी और सिर्फ रोने पर लगी हुई थी। मैंने उसे चुप कराने की कोशिश की तो वह चुप नहीं हो रही थी उसके बाद मैंने उसके आंसू पोंछते हुए उससे पूछा कि क्या हो गया, तो वह कहने लगी कि रोहित और मेरे बीच में रिलेशन बिल्कुल भी ठीक नहीं चल रहा है, हम दोनों के बीच में बहुत झगड़े होने लगे हैं। मैंने उसे पूछा कि तुम दोनों ने तो लव मैरिज की है तो तुम्हारे बीच में झगड़े क्यों हो रहे हैं। वह कहने लगी कि पहले तो रोहित का व्यवहार बहुत ही अच्छा था परंतु अब वह बदलने लगा है उसने अपनी नौकरी भी छोड़ दी है और वह कहता है कि तुम्हारे मम्मी-पापा ने मुझे कुछ भी नहीं दिया और अब घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर आ चुकी है।

मैंने उसे कहा यह तो बहुत ही गलत बात है सरिता मुझसे कहने लगी कि मुझे यदि पहले यह सब पता होता तो शायद मैं कभी भी रोहित से शादी नहीं करती, मैं अपनी जगह गलत हूं इसलिए मैं अपने माता पिता को उसके बारे में नहीं बता सकती यदि मैंने उन्हें बताया तो व क्या सोचेंगे। मुझे यह बात सुनकर बहुत ही बुरा लगा और मैंने उसे कहा कि तुम इस बारे में रोहित से बात क्यो नहीं कर लेती। वह कहने लगी कि मैंने रोहित से बहुत बार बात की लेकिन उसे कुछ भी समझ नहीं आता और वह सिर्फ मुझसे झगड़ा करता रहता है मुझे ही घर का सारा खर्चा संभालना पड़ रहा है। यह बात सुनकर मुझे बहुत ही बुरा लगा अब मुझे सरिता को देखकर बहुत ही बुरा लग रहा था। मैंने उसे कहा कि तुम्हें मेरी किसी भी प्रकार की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना। वह जब ऑफिस आती तो मुझसे अपनी बातें शेयर करने लगती। उसे भी बहुत हल्का महसूस होता क्योंकि वह किसी और को यह सब बातें नहीं बता सकती थी। वह ना तो अपने घर पर बता सकती थी और ना ही अपने दोस्तों से इस बारे में बात कर सकती थी इसलिए वह मुझे ही सब बातें बताया करती थी। एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं सरिता को मूवी लेकर चलू। मैंने जब उसे पूछा तो वह कहने लगी, नहीं मैं नहीं आ सकती लेकिन मैं उसे जिद कर के अपने साथ मूवी ले गया। जब वह मूवी देख रही थी तो वह बहुत ही खुश हो रही थी। मुझे उसके चेहरे पर खुशी देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि वह काफी समय से हंसी भी नहीं थी और वह रोहित की वजह से बहुत ज्यादा टेंशन में थी लेकिन अब उसे बहुत अच्छा लगने लगा और वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुम्हारे साथ बहुत ही अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों अक्सर घूमने चले जाते थे और जब भी उसके पास समय होता तो वह मेरे साथ घूमने आ जाया करती थी।

एक दिन वह ऑफिस में आई और उस दिन वह कुछ ज्यादा ही दुखी थी मैंने उसे कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं। जब मैंने उसे गले लगाया तो उसके स्तन मुझसे टकराने लगे। सरिता का मन भी खराब होने लगा उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया। हम दोनों अब अपने ऑफिस के गेस्ट रूम में चले गए जब हम दोनों वहा गए तो मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया क्योंकि गेस्ट रूम की चाबी मेरे पास ही रहती थी। जब मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया तो मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और मैंने उसके स्तनों को देखा तो वह बहुत ही टाइट और सुडौल थे। मैंने जैसे ही उन्हें अपने मुंह में लिया तो उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा वह पूरे मूड में आ गई।

मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह मे लेते हुए चूसने लगा। मैं उसके चूचो को जब अपने मुंह में लेता तो  वह बहुत ही खुश होती। उसके कुछ देर बाद मैंने जब उसकी योनि में अपने लंड को डाल दिया तो उसकी योनि अब भी बहुत टाइट थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे धक्के मार रहा था। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी और मै उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था। उसका शरीर पूरा खिलने लगा वह अब मेरा पूरा साथ देने लगी। वह अपने मुंह से भी बड़ी मादक आवाज निकाल रही थी। कुछ देर तक मैंने उसे ऐसे ही चोदा और उसके बाद मैंने उसे अपने ऊपर से बैठा दिया। जब वह मेरे ऊपर बैठी तो वो अपने चूतड़ों को बड़े ही अच्छे से ऊपर नीचे कर रही थी और बहुत खुश नजर आ रही थी। मैं भी उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के मारे की वह कुछ देर बाद झड़ गई और मेरे ऊपर बैठी रही। मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के मारे उन्ही झटको के बीच में ना जाने कब मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर ही गिर गया। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाला तो मैं बहुत ही खुश हुआ और सरिता मुझे कहने लगी कि तुम्हारे साथ सेक्स करते हुए मुझे बहुत अच्छा लगा। उसके बाद से हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध बहुत बार बन चुके हैं और अब वह बिल्कुल भी टेंशन में नहीं रहती।