ऑफिस के बंद कमरे में

office sex stories

मेरा नाम सार्थक है मैं हरियाणा के पानीपत में रहता हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है और मैं यहीं पर काम करता हूं। मेरे पिताजी भी एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, मेरी मां ग्रहणी है और वह घर का सारा काम देखती हैं, मेरा बड़ा भाई बेंगलुरु में रहता है और वह वहीं पर नौकरी कर रहा है, उसे वहां पर नौकरी करते हुए काफी समय हो चुका है। मेरी नौकरी भी सही चल रही है, मैं एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता हूं। मुझे यहां पर नौकरी करते हुए साल भर से ऊपर हो चुका है इससे पहले मैंने कॉलेज की पढ़ाई की, उसके बाद मैंने यह कंपनी ज्वाइन कर ली इसीलिए मुझे ज्यादा तनख्वाह नहीं मिलती और सिर्फ मैं अपना जेब खर्चा निकाल लिया करता हूं और कभी मेरी सैलरी में से कुछ पैसे बच जाते हैं तो मैं घर पर दे देता हूं।

मेरे पिताजी मुझे हमेशा कहते हैं कि तुम पैसे जमा कर लिया करो, यह तुम्हारे भविष्य में बहुत काम आएंगे। मैं उन्हें कहता हूं कि मेरी तनख्वाह इतनी नहीं है कि मैं पैसे बचाता रहूं इसी वजह से मैं ज्यादा बचत नहीं कर पाता। वह लोग बहुत ही ज्यादा बचत पर ध्यान देते हैं और कहते हैं कि तुम्हें अपनी बचत करनी चाहिए,  यह तुम्हारे भविष्य में बहुत काम आएंगे। उन्हें भी पता है कि मेरी तनख्वाह इतनी नहीं है कि मैं अपने पैसे बचा सकूं और वह हमेशा ही मेरे बड़े भाई गौरव का उदाहरण देते हैं और कहते हैं कि उसने भी बहुत जल्दी जिम्मेदारी ले ली क्योंकि मेरा भाई हमेशा ही घर पर पैसे भेजता है। जब से वह नौकरी लगा है कभी भी कोई ऐसा महीना नहीं बीता जब उसने मेरे पिताजी को पैसे नहीं भेजे लेकिन पानीपत में मुझे इतनी अच्छी तनख्वाह नहीं मिल रही थी इसलिए मैं भी सोचने लगा कि मैं कहीं और इंटरव्यू दे देता हूं। मैं अपने माता पिता के साथ ही रहना चाहता था मैं नहीं चाहता था कि मैं उनसे अलग रहा हूं इसीलिए मैं अपने भाई के पास नहीं गया। मैंने अब अन्य जगह पर नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी लेकिन मुझे कहीं पर भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी।

मैंने अपने सारे दोस्तों को कह दिया कि यदि तुम्हारी नजर में कहीं पर कोई अच्छी नौकरी हो तो तुम मुझे बता देना लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया इसीलिए मैं थक हारकर जिस कंपनी में नौकरी कर रहा था, वहीं पर मैं काम करने लगा लेकिन मुझे भी अब लगने लगा कि मुझे यहां पर काम करते हुए एक वर्ष से ऊपर हो चुका है लेकिन अभी तक मेरी तनख्वाह में कोई भी वृद्धि नहीं हुई है। इस बारे में मैंने अपने बॉस से भी बात की तो वह कहने लगे मैं तुम्हारी कुछ महीनों में ही तनख्वाह बढा दूंगा, तुम उसकी चिंता मत करो क्योंकि जब मैंने इस कंपनी मैं नौकरी करना शुरू किया था तो उन्होंने मुझे उसी वक्त कह दिया था कि  तुम्हें जब एक वर्ष से ऊपर हो जाएगा तो मैं तुम्हारी तनख्वाह बढ़ा दूंगा लेकिन उन्होंने अभी तक मेरी तनख्वाह नहीं बडाई। और ना ही उसके बारे में उन्होंने कोई जिक्र किया इसीलिए मुझे उनसे बात करनी पड़ी, जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने मुझे आश्वासन दे दिया और कहा कि दो महीने तुम रुक जाओ,  उसके बाद मैं तुम्हारी तनख्वाह जरूर बढ़ा दूंगा इसीलिए मैं उसी कंपनी में काम करने लगा। मैं अपना काम बहुत ही अच्छे से करता था मेरे काम में कभी भी कोई शिकायत नहीं रही। मैं अपने काम में ही बिजी था और काम करते हुए दो महीने से ऊपर हो गए लेकिन मेरे बॉस ने मेरी तनख्वाह नहीं बढ़ाई। मैं जब उनके पास गया तो वो कहने लगे कि कुछ दिनों में मैं तुम्हारी तनख्वाह बड़वा दूंगा लेकिन सिर्फ वो मुझे आश्वासन दे रहे थे और उसके सिवाय कुछ भी नहीं था इसलिए मैं समझ गया अब मुझे अपने भाई के पास ही जाना पड़ेगा। मैंने इस बारे में अपने पिताजी से बात की तो वह कहने लगी कि तुम गौरव के पास ही चले जाओ क्योंकि बेंगलुरु में तो बहुत नौकरियां हैं और तुम उसके साथ रहोगे तो उसकी भी मदद हो जाएगी। मैंने जब अपने पिताजी से कहा कि आप लोग भी तो यहां पर है तो आपका ध्यान कौन रखेगा, मेरे पिताजी कहने लगे कि हम लोग अपना ध्यान खुद रख लेंगे, तुम सिर्फ अपने आप की चिंता करो और तुम गौरव के साथ चले जाओ। मेरा मन बिल्कुल भी नहीं मान रहा था कि मैं अपने पिताजी को और अपनी मां को छोड़ कर जाऊं।

मैंने जब गौरव से इस बारे में बात की तो वह कहने लगा कि तुम मुझे अपना रिज्यूम भेज दो मैं किसी कंपनी में बात कर लेता हूं क्योंकि गौरव भैया को बेंगलुरु में काफी समय हो चुका है। उसे लगभग 3 वर्ष से ऊपर हो चुके हैं इसीलिए वह अब सबको अच्छे से जानता है। मैंने गौरव को अपना रिज्यूम भेज दिया और जिस कंपनी में मैं नौकरी कर रहा था वहां से भी मैंने काम छोड़ दिया। अब मैं घर पर ही था और मैं जितने दिन भी घर पर रहा मैं बहुत ज्यादा बोर हो रहा था। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे कहां जाना चाहिए क्योंकि मेरे साथ के जितने भी दोस्त हैं वह सब कहीं ना कहीं नौकरी कर रहे हैं या फिर अपना कुछ काम कर रहे हैं लेकिन मैं घर पर बोर हो रहा था। तभी कुछ दिनों बाद गौरव ने मुझे फोन किया और कहा तुम कुछ दिनों में बेंगलुरु आ जाना, मैंने तुम्हारे लिए एक कंपनी में बात कर ली है। मैं अब कुछ दिनों बाद बेंगलुरु चला गया। जब मैं बेंगलुरु गया तो मेरा भाई मुझसे मिलकर बहुत खुश हुआ और वह मुझसे माता पिता के बारे में पूछने लगा, मैंने उसे सब कुछ बताया कि वह लोग बहुत अच्छे से है। वह मुझसे पूछने लगा कि तुमने वह कंपनी क्यों छोड़ दी जहां पर तुम काम कर रहे थे। मैंने उसे कहा वह लोग मेरी तनख्वाह नहीं बढ़ा रहे थे और इतने कम में मेरा खर्चा नहीं चल पा रहा था, वह सारा खर्चा मेरा अपने ऊपर ही हो जाता था और मैं घर में कुछ भी नहीं दे पाता था इसीलिए मुझे लगा वह नौकरी मुझे छोड़ देनी चाहिए।

मेरा भाई मुझे कहने लगा कि तुम चिंता मत करो मैंने तुम्हारे लिए यहां पर बात कर ली है तुम कल इंटरव्यू देने के लिए चले जाना और वहां पर जो मैनेजर हैं वह मुझे बहुत अच्छे से जानते हैं और वह बहुत ही सज्जन व्यक्ति हैं। मैं जब इंटरव्यू देने गया तो वह मैनेजर मुझे ऑफिस में मिले, उन्होंने मुझे अपने बॉस से मिलवाया और मुझे नौकरी पर रख लिया। मुझे बेंगलुरु में अच्छी सैलरी मिल रही थी और मैंने वह कंपनी ज्वाइन कर ली। मुझे उस कंपनी में जाते हुए कुछ ही दिन हुए थे। इसलिए मैं ज्यादा लोगों से परिचित नहीं था परंतु एक लड़की जो कि अक्सर मुझे देखा करती थी, मैंने कभी भी उस पर ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब मुझे ऑफिस में थोड़ा समय हो गया तो मैं भी उसके हाव-भाव देखने लगा। वह हमेशा ही मेरी तरफ देखा करती थी। मैंने एक दिन उससे पूछ लिया कि आपका नाम क्या है, उसने अपना नाम मुझे शीतल बताया और मेरी उससे बात होने लगी। वह मुझसे पूछने लगी कि तुम कहां से हो मैंने उसे कहा कि मैं पानीपत का रहने वाला हूं और शीतल बेंगलुरु की रहने वाली थी। मैंने उससे उसका फोन नंबर भी ले लिया था और मेरी उससे अक्सर फोन पर बातें हो जाती थी और वह भी मुझसे बात करना पसंद करती थी। ऑफिस में जब मुझे समय मिलता तो हम लोग साथ में ही बैठकर लंच करते थे और उसके बाद साथ में ही ज्यादा समय गुजारते थे। जैसे जैसे मुझे शीतल के साथ रहते हुए समय हो गया था, वैसे ही मुझे उसका नेचर का पता चलने लगा। वह बहुत ही अच्छी लड़की है और मेरे साथ उसका व्यवहार बहुत ही अच्छा है, मुझे उसका व्यवहार बहुत अच्छा लगा। इसी प्रकार हम दोनों की बातें होती रही और समय ऐसे ही बीत रहा था। शीतल और मेरी फोन पर भी बातें होती थी तो मैं उसे फोन पर काफी देर तक बात करता था। एक दिन ऐसे ही बात करते करते अश्लील बातो तक पहुंच गई जब हम दोनों के बीच अश्लील बातें होने लगी तो उस दिन हम दोनों ने फोन सेक्स भी किया और जब मेरा माल गिर गया तो उस दिन में आराम से सो गया। अगले दिन जब मैं ऑफिस गया तो मुझे शीतल को देखकर बहुत ज्यादा मूड खराब हो रहा था मैं उसे अपने ऑफिस के पीछे एक बंद पड़ा कमरा है वहां पर ले गया।

वहां पर जब मैं उसे ले गया तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूसने लगी। काफी देर तक उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले कर चूसना जारी रखा मुझे बहुत अच्छा लगा जब वह इस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। काफी समय तक ऐसा करने के बाद मैंने शीतल की पैंट को नीचे कर दिया और उसकी चूतड़ों को मैं चाटने लगा उसकी योनि में एक भी बाल नहीं था और उसकी गांड बहुत ही मुलायम और अच्छी थी। मैं जब उसके चूतड़ों पर अपने हाथ से प्रहार करता तो वह लाल हो जाती मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो वह उछल पड़ी और आगे की तरफ जाने लगी। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए झटके देने लगा। मैंने उसे तेज तेज धक्के मारे और उसके मुंह से आवाज निकल जाती वह कहती कि तुमने तो मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं जिस प्रकार से उसे चोद रहा था वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी और उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ आ रहा था। वह भी अपने चूतडो को मुझसे मिला रही थी और मैं भी उससे उतनी ही तेजी से झटके दिए जा रहा था लेकिन उसकी चूतड़ों से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी और मैं बहुत ज्यादा पसीना पसीना होने लगा। मैं ज्यादा समय तक उसे धक्के नहीं दे पाया और मेरा वीर्य जब गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसकी चूतडो पर अपने माल को गिरा दिया मेरा वीर्य जैसे ही गिरा तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ।