नौकरानी की गांड शावर के नीचे मारी

gaand chudai ki kahani

मेरा नाम राकेश है और मैं नागपुर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है। मेरी पत्नी और मैं ऑफिस में साथ में ही काम करते हैं, हम दोनों ने एक दूसरे को अपने ऑफिस में ही पसंद किया था और मुझे रंजना बहुत अच्छी लगी इसलिए मैंने रंजना से शादी का फैसला कर लिया था। मेरे घर वालों को भी रंजना से कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि मैं घर में एकलौता हूं और रंजना भी अपने घर में इकलौती है। उसके पिताजी भी एक अच्छी नौकरी पर हैं और वह लोग एक संपन्न परिवार से हैं इस वजह से मेरे पिताजी को बिल्कुल भी आपत्ति नहीं थी। वह मेरी और रंजना की शादी को लेकर बहुत खुश है। मेरी मम्मी भी रंजना को बहुत पसंद करती थी क्योंकि रंजना का हमारे घर पर पहले से ही आना जाना था इसी वजह से वह लोग उसे अच्छे से जानते थे।

जब हम दोनों की शादी हुई तो हम दोनों बहुत ही खुश थे और हम दोनों अपने ऑफिस साथ ही जाते और साथ ही आते थे परंतु अब हमारे ऑफिस में बहुत ज्यादा काम बढ़ गया है, जिसकी वजह से हम लोग बहुत थक जाते हैं और शाम को जब हम घर आते हैं तो उसके बाद हम लोग डिनर करने के तुरंत बाद ही सो जाते हैं। मेरे माता-पिता अब गांव में ही रहते हैं, वह लोग बहुत कम ही नागपुर में आते हैं क्योंकि मेरे पिताजी ने गांव में ही कुछ काम कर लिया है और वह वहीं रहते हैं। मैंने उन्हें मना किया था कि आप  गांव में कुछ काम मत खोलिए परंतु वह मेरी बात बिल्कुल नहीं माने और गांव चले गए क्योंकि मेरे पिताजी अभी कुछ समय पहले ही रिटायर हुए थे और वह कहने लगे कि मैं अब गांव में ही रहना चाहता हूं। रंजना और मैं साथ में रहते हैं, हम दोनों अपने बच्चे की तैयारी कर रहे थे परंतु अभी तक हम दोनों का बच्चा नहीं हो पाया। मैंने एक बार रंजना से बात की कि क्यों ना हम लोग अपनी ही कोई कंपनी खोलें जिससे कि हम दोनों को काम करने में आसानी हो। रंजना ने कहा कि ठीक है हम दोनों अपना ही कोई काम शुरू कर लेते हैं इसीलिए मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया और रंजना अभी काम कर रही थी। रंजना की तनख्वाह से हमारा घर का खर्चा चल जाता था और बाद में मैंने भी एक ऑफिस ले लिया।

मेरी जितनी भी सेविंग थी मैंने वह अपने ऑफिस में लगा दिया और अपना काम शुरू कर दिया। जब मैंने अपना काम शुरू किया तो शुरूआत में मुझे थोड़ा दिक्कत हुई लेकिन जब रंजना मेरे साथ समय निकालने लगी तो हम दोनों का काम अच्छे से चलने लगा। अब हम दोनों बहुत अच्छे से काम कर रहे थे और मुझे भी बहुत खुशी थी कि हमारा काम अब अच्छे से चलने लगा था लेकिन हम दोनों के पास बिल्कुल भी वक्त नहीं होता था, हम लोगों को अपने क्लाइंट्स को भी हैंडल करना पड़ता था और अपना काम भी संभालना पड़ता था। हम लोग नहीं चाहते थे कि हम किसी को काम पर रखें क्योंकि हम दोनों बहुत ही अच्छे से काम कर रहे थे इस वजह से मैंने किसी को भी अपने ऑफिस में काम पर नहीं रखा था। हम दोनों ही काम संभाल रहे थे और रंजना ने भी ऑफिस से इस्तीफा दे दिया था इसलिए वह मेरा पूरा साथ देती थी। जब से उसने मेरे काम में हाथ बढाना शुरू किया तो तब से मुझे बहुत राहत महसूस होने लगी। हम दोनों को घर की साफ सफाई के लिए भी वक्त नहीं मिल पा रहा था इसलिए हमने कामवाली को घर में रखने के बारे में सोचा लेकिन रंजना ने मना कर दिया और कहने लगी कि मैं घर का काम कर लेती हूं तो तुम्हें किसी को काम पर रखने की क्या जरूरत है क्योंकि मैं भी अक्सर काम के सिलसिले में बाहर जाता था और रंजना भी बिल्कुल नहीं चाहती थी कि हम लोग किसी को काम पर रखें। जब मैं अपने काम के सिलसिले में बाहर जाता तो रंजन अकेली होती थी। मुझे उसकी चिंता भी है परंतु मैं अपने काम को आगे बढ़ाना चाहता था इसी वजह से मैंने उसे कई बार कहा कि मैं घर में किसी को रख देता हूं ताकि तुम्हारा साथ भी हो जाया करेगा और तुम्हें अच्छा भी लगेगा लेकिन उसने मुझे साफ मना कर दिया और अब वह घर पर कई बार अकेली ही रहती थी जब मैं बाहर होता था।

एक दिन मैं अपने काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और जब मैं वापस लौटा तो मुझे स्टेशन में एक लड़की दिखी, जो कि बहुत गरीब लग रही थी और वह बिल्कुल ही बुरी स्थिति में थी। मैं अब चाय पी रहा था तो उसी वक्त वह लड़की उस दुकान पर आई जहां पर मैं चाय पी रहा था और उस चाय वाले से कहने लगी कि आपके पास कोई काम है तो आप मुझे काम पर रख लो लेकिन उस चाय वाले ने भी मना कर दिया और जब मैंने उससे बात की तो मैंने उसे पूछा कि तुम कहां की रहने वाली हो, तो वह कहने लगी कि मैं झारखंड की रहने वाली हूं। मैंने उससे पूछा कि तुम यहां पर क्या कर रही हो तो वह कहने लगी कि मेरे माता-पिता का देहांत हो चुका है और मैं बहुत ही बुरी स्थिति में थी। एक दिन मैं ट्रेन में बैठ गई और मैं नागपुर पहुंच गई लेकिन तब से मुझे कहीं पर भी कोई काम नहीं मिला। मैंने उस लड़की का नाम पूछा तो उसका नाम लता है। मैंने उसे कहा कि यदि तुम्हें मेरे घर पर काम करना है तो तुम मेरे साथ चल सकती हो, उसके पास कोई भी रास्ता नहीं था इसलिए वह मेरे साथ ही चल पड़ी। जब वह मेरे घर पर आई तो मेरी पत्नी पूछने लगी कि यह कौन है, मैंने उसे सारी घटना बताई और उसके बाद मेरी पत्नी ने कुछ भी नहीं कहा। लता अब हमारे साथ हमारे घर पर रहती थी और वह घर का भी सारा काम करती थी। वह घर का बहुत ही अच्छे से काम करती थी इसलिए हम दोनों को ही घर की बिल्कुल भी टेंशन नहीं थी और हम अपना काम करते थे।

मुझे बहुत अच्छा लगता था जब लता घर का काम संभाल लेती थी और हम दोनों अपना काम निश्चिंत होकर कर पाते थे। अब मैं जब बाहर जाता तो लता मेरी पत्नी की देखभाल भी करती थी। एक दिन मैं उससे पूछने लगा कि तुमने कितनी पढ़ाई की है, तो वह कहने लगी कि मैंने 10वीं तक पढ़ाई की है और दसवीं के बाद मेरा स्कूल छूट गया था क्योंकि हमारे घर की स्थिति ठीक नहीं थी इस वजह से मुझे स्कूल छोड़ना पड़ा लेकिन दसवीं में मेरे बहुत अच्छे नंबर आए थे। जब उसने अपनी मार्कशीट दिखाई तो मुझे लगा कि वाकई में यह तो पढ़ने में बहुत अच्छी थी। अब उसका हमारे घर पर घरेलू संबंध ही बन चुका था। जब मेरे माता-पिता भी हमारे पास आते तो लता उनका बहुत ध्यान रखती थी और मुझे बहुत अच्छा लगता था जब वह मेरे माता पिता का भी ध्यान रखती थी और मेरी पत्नी का भी ध्यान रखती थी। जब कभी मैं अपने ऑफिस से लेट आता तो लता ही खाना बना कर रखती थी। रंजना भी बहुत खुश थी क्योंकि उसकी भी बहुत मदद हो जाया करती थी। एक बार मैं और रंजना कहीं बाहर घूमने गए हुए थे, जब हम लोग बाहर से घूम कर लौटे तो हम दोनों बहुत ही खुश थे क्योंकि काफी समय बाद मुझे रंजना के साथ कहीं घूमने का मौका मिला था, नहीं तो हम दोनों ही काम में बहुत व्यस्त हो गए थे, मैं बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पा रहा था और ना ही रंजना के पास वक्त होता था। जब हम लोग इतने समय बाद बाहर गए तो हम दोनों बहुत खुश हो रहे थे। उस दिन मैं बहुत ज्यादा थक गया था और मैं जल्दी सो गया। जब हम लोग सुबह उठे तो हम लोग जल्दी काम पर चले गए और लता ने हमारे लिए सुबह का नाश्ता बना दिया था, हम दोनों ने नाश्ता किया और उसके बाद जल्दी से हम लोग अपने ऑफिस चले गए। हम दोनों ऑफिस में काम कर रहे थे लेकिन तभी मुझे मेरे फ्रेंड का फोन आया और मुझे मुंबई जाना था इसलिए मैं जल्दी से घर गया औए जल्दी ही अपना सामान पैक कर लिया, लता ने मेरे लिए खाना बना दिया था। लता मुझे कहने लगी कि आप खाना खा लीजिए मैं नहा लेती हूं।

जब उसने मेरे लिए खाना लगाया तो वह नहाने के लिए चली गई खाना खाने के बाद मुझे बहुत तेज बाथरूम आने लगा। मैंने जैसे ही दरवाजे को खोला तो लता भी बाथरूम में नहा रही थी और वह पूरी नंगी  शावर मे नहा रही थी उसके पूरे बदन से पानी टपक रहा था। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके बालों को पकड़ हुए उसके मुह मे अपने लंड को डाल दिया। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। उसने अपने गले के अंदर तक मेरे लंड को ले लिया मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था वह जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। काफी देर तक उसने ऐसा ही किया और उसके बाद मैंने भी उसकी चूतडो को चाटना शुरू किया। हम दोनों ही पूरी तरीके से गिले हो चुके थे। मैंने जब उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा लेकिन उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेजी से उसने झटके देने लगा उसे भी मजा आने लगा था। जब वह मुझसे अपनी चूतडो को मिला रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन कुछ झटको के बाद मुझे उसकी गांड की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रही थी और मेरा वीर्य गिरने वाला था। जैसे ही मेरा वीर्य लता की गांड में गिरा तो मैंने तुरंत अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया। उसकी गांड से खून निकल रहा था और मेरा वीर्य भी टपक रहा था लेकिन उस भी बहुत मजा आया। उसके बाद हम दोनों एक साथ शावर में नहाए और मैं जल्दी से तैयार होकर मुंबई के लिए निकल गया।