पड़ोस की कमसिन लड़की को चोदा

antarvasna

मेरा नाम संतोष है और मैं 19 वर्ष का हूं, मैंने इसी वर्ष अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी की है और  अपने पापा से कहा कि मुझे बीबीए करना है। उन्होंने मुझे कहा कि ठीक है जैसा तुम्हें उचित लगता है तुम अपने हिसाब से देख लो। मैं बीबीए  में एडमिशन लेने के लिए कई कॉलेजों मैं गया। मैंने सब कॉलेजों में जाकर खुद ही पूछा कि वहां का प्लेसमेंट किस प्रकार से है और वहां पर फीस कितनी पड़ती है। मैंने यह सब जानकारी लेने के बाद अपने पापा को उसके बारे में बताया तो वो कहने लगे कि ठीक है तुम्हें जो कॉलेज पसंद आ रहा है तुम वहीं पर एडमिशन ले लो। मैंने उन्हें कॉलेज की फीस बता दिया और उन्होंने कहा ठीक है तुम मुझसे कल पैसे ले जाना और बैंक में कॉलेज के नाम पर जमा करवा देना। मैं रांची का रहने वाला हूं। हमारे यहां पर बहुत कॉलेज हैं लेकिन मुझे जो सबसे अच्छा कॉलेज लगा वहीं पर मुझे एडमिशन मिल गया था क्योंकि 12वीं में मेरी परसेंटेज बहुत अच्छी है इस वजह से मुझे एडमिशन मिल गया।

जब मैंने एडमिशन लिया तो मैं अब रेगुलर कॉलेज जाने लगा और जब मैं कॉलेज जाता तो शुरुआत में तो हमारे कॉलेज में ज्यादा पढ़ाई नहीं हो रही थी क्योंकि सब नए बच्चे आए थे और सब लोगों का इंट्रोडक्शन हो रहा था। धीरे धीरे अब मेरा परिचय भी कई लड़कों से होता गया और वह लोग मेरे भी दोस्त बन गए। मैं एक दिन सुबह कॉलेज जा रहा था तो मेरे पड़ोस में रहने वाले भैया के यहां से एक लड़की भी कॉलेज के लिए जा रही थी। उसने भी मेरे कॉलेज की यूनिफॉर्म पहनी हुई थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वह लड़की कौन है क्योंकि मैंने उसे कभी भी उससे पहले उनके घर पर नहीं देखा था क्योंकि उन लोगों का हमारे घर पर अक्सर आना-जाना होता रहता था और वह हमारे घर पर प्रोग्राम्स में भी आते थे इस वजह से मैंने कभी भी उस लड़की को नहीं देखा। वह लड़की दिखने में बहुत ही सीधी और सिंपल सी लग रही थी। मैं सोच रहा था कि उससे कैसे बात करूं या फिर उसके बारे में कैसे जानकारी लू। मैं अपने कॉलेज में ही व्यस्त था और मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था लेकिन मुझे वह लड़की भी कॉलेज अक्सर दिखाई देती थी।

एक दिन मैंने अपने दोस्त से कहा कि यार मुझे इस लड़की का नंबर दिलवा दो, मैने उसे सारी बात बताई कि वह लड़की मेरे पड़ोस में ही रहती है, तो वह कहने लगा कि तुम्हारे पड़ोस में रहते हुए भी तुम उस लड़की का नंबर नहीं ले सकते, तुम एक नंबर के डरपोक हो। जब उसने यह बात कही तो मुझे भी वाकई में बहुत ज्यादा बुरा लगा। उसके बाद मेरे दोस्त ने उसके बारे में जानकारी प्राप्त करवाली और वह मुझे कहने लगा कि उस लड़की का नाम पारूल है और वह फार्मेसी की स्टूडेंट है। मुझे जब भी पारूल दिखती तो मैं उससे बात कर लिया करता था क्योंकि मैं कॉलेज की बस में ही जाता था और वह अपने जीजा के साथ जाती थी। उसके जीजा ही उसे कॉलेज तक छोड़ा करते थे और उसे लेने भी वही आते थे। इस वजह से मेरी उससे ज्यादा बात नहीं हो पा रही थी और वह भी मुझे अक्सर देख लिया करती थी। जब भी मैं अपने घर से  कॉलेज के लिए जाता तो वह मुझे हमेशा ही दिखाई दे जाती। अब वह भी हमारी कॉलेज बस में जाने लगी थी। जब वह हमारी कॉलेज बस में जाती तो मैं उसे देखा करता था और वह भी मुझे अक्सर देख लिया करती थी। मुझे अब लगने लगा था कि मुझे अब उससे बात कर लेनी चाहिए लेकिन मेरे अंदर हिम्मत नहीं हो रही थी। वह मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी उसके बावजूद भी मेरे अंदर हिम्मत बिल्कुल नहीं हो रही थी और मैं सोच रहा था कि मैं उसे कुछ दिनों बाद बात करूंगा लेकिन फिर भी मैं उससे बात नहीं कर पाया। उसी दौरान हमारे कॉलेज में हमारे सीनियरओं ने हमें फ्रेशर पार्टी दी और जब वह हमें फ्रेशर पार्टी दे रहे थे तो हमारे साथ के सारे बच्चे आए हुए थे और हम लोगों ने बहुत ही मस्ती कि। सब लोग बहुत ही खुश थे और कह रहे थे कि पार्टी में तो मजा ही आ गया। अब सब लोगों का परिचय भी हो चुका था। हम लोगों का भी परिचय हमारे सीनियरो से हो गया था और मैं हमेशा की तरह ही बस में आ जाता। फिर भी मैं पारुल से बात नहीं कर पाता था।

एक दिन वह मेरी बगल वाली सीट में ही बैठ गई, जब वह मेरी बगल वाली सीट में बैठी हुई थी तो उस दिन ना जाने मेरे अंदर कहां से हिम्मत आ गई और मैंने उससे बात कर ली। मैंने उसे कहा कि आप तो हमारे पड़ोस में ही रहते हैं, वो कहने लगी कि वह मेरी दीदी हैं जो आपके पड़ोस में रहती हैं। मेरी आपकी मम्मी से भी मुलाकात हो चुकी है। उसने मुझसे मेरा नाम पूछा तो मैंने उसे अपना नाम बता दिया। उस दिन उससे बात कर के मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने कोई जंग जीत ली हो और मैं बहुत ही खुश था कॉलेज में मेरे दोस्त मुझे कह रहे थे कि आज तुम कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे हो, ऐसी क्या बात हो गई है जो तुम इतने खुश दिखाई दे रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि खुशी की बात तो है ही क्योंकि मैंने पारुल से बात कर ली और उसने भी मुझसे बात की। पारुल भी बहुत ज्यादा खुश थी। जब वह मुझसे बात करती थी तब हम दोनों के बीच में बातें होने लगी और हम दोनों कॉलेज में भी मिल लिया करते थे। वह कॉलेज में जब भी मुझसे मिलती तो मेरे हाल-चाल पूछ लिया करती थी। एक दिन वह मुझे कैंटीन में मिल गई और मैंने उससे पूछा  क्या तुम मेरे साथ बैठ सकते हो, तो वह कहने लगी कि ठीक है मैं तुम्हारे साथ बैठ जाती हूं। अब वह मेरे साथ ही बैठी हुई थी। हम दोनों बहुत ही बातें कर रहे थे और उस दिन मैंने पारुल से उसका नंबर भी ले लिया, जब मैंने उससे उसका नंबर लिया तो वह मुझे कहने लगी कि क्या तुम मुझे फोन भी करोगे या फिर मेरा नंबर ऐसे ही ले रहे हो। मैंने उसे कहा कि नहीं मैं तुम्हें फोन भी करूंगा। वह भी धीरे-धीरे मुझसे बहुत बातें करने लगी और अब वो मेरे साथ कंफर्टेबल हो कर बातें कर रही थी। उसे मेरे साथ बात करना भी अच्छा लग रहा था और मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था।

जब मैं उसे ध्यान से देख रहा था तो वह भी बहुत खुश नजर आ रही थी और मैं भी अंदर ही अंदर से बहुत खुश था। मैंने पारूल से कहा कि तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगती हो, तुम्हारा नेचर जिस प्रकार से है वह बहुत ही अच्छा है और तुम्हारा स्वभाव भी बहुत शांत है। पारूल और मैं हमेशा ही कॉलेज बस में आते और घर भी साथ ही जाया करते थे। हम दोनों के बीच में अब बहुत बातें होने लगी थी। हम लोग कॉलेज के बारे में भी बातें किया करते थे और कहते थे कि हमारा कॉलेज बहुत ही अच्छा है। पारुल भी बहुत खुश थी उस कॉलेज में पढ़ कर क्योंकि उसके पिता का देहांत हो चुका है इसीलिए वह अपनी बहन के साथ रहती है। उसके पापा एक सरकारी नौकरी में थे और उसकी मम्मी उसे खर्चा भेज दिया करती है। अब मुझे काफी सारी बातें पारुल के बारे में पता चलने लगी थी। मैं उसे फोन पर भी बातें किया करता था और वो भी मुझसे फोन पर ही बातें करती थी। मुझे उससे बात कर के बहुत ही अच्छा लगता था और वह भी कहीं ना कहीं मुझसे बात कर के बहुत ही खुश होती थी। मुझे पारूल जब भी छत में दिखाई देती तो मैं उससे बात कर लेता और कहता कि तुम क्या कर रही हो, मैं उसे अपने छत से ही फोन पर बात किया करता था। जब मैं उसे छत से फोन करता हूं तो वह भी छत पर आ जाती थी।

एक दिन हमारे घर पर कोई भी नहीं था मैंने सोचा मैं पारूल को बुला लेता हूं क्योंकि उस दिन मेरा मन बहुत ज्यादा सेक्स करने का हो रहा था। मैंने जब पारुल को फोन करते हुए अपने घर पर बुलाया तो वह कहने लगी कि तुमने मुझे कुछ काम से बुलाया है। मैंने उसे कहा कि हां मुझे तुमसे एक बहुत ही जरूरी काम है। जैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो वह मुझे कहने लगी कि तुम यह क्या कर रहे हो लेकिन मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और मैं उसे किस करने लगा। मैं उसे बहुत अच्छे से किस कर रहा था मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटाते हुए उसके कपड़े खोल दिया। जब मैंने उसके कपड़े खोल तो उसकी योनि में एक भी बाल नहीं था और उसके स्तन बहुत ही मुलायम और टाइट थे।

मैंने जब उसके स्तनों पर अपनी जीभ को टच किया तो वह मचलने लगी और थोड़ी देर बाद मैंने उसके स्तनों के बीच में अपने लंड को रगडना शुरू कर दिया। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसके दोनों स्तनों के बीच में अपने लंड को रगड रहा था। अब उसकी योनि से पानी निकलने लगा और मैंने तुरंत अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो उसकी चीख निकल पड़ी और उसकी योनि से खून निकलने लगा। जब उसकी योनि से खून निकल रहा था और वह बहुत ज्यादा मचलने लगी। वह पूरे मूड में आ गई वह अपने मुंह से तेज आवाज निकाल रही थी। मैं उसे बड़ी तीव्र गति से चोदे जा रहा था लेकिन उसका खून अब भी नहीं रुक रहा था और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मारता जाता जिससे कि उसका शरीर पूरा गर्म होने लगा था और मुझे भी ऐसा लग रहा था जैसे मेरा वीर्य गिरने वाला है। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दिया और वह मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूस रही थी। उसने मेरे लंड को इतने अच्छे से चूसा की मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर ही जा गिरा उसने वह सब एक ही झटके में अपने अंदर ले लिया। उसके बाद से तो पारूल और मेरे बीच में बहुत बार सेक्स संबंध बन चुके हैं और कई बार मैंने उसे गोलियां भी खिला दी क्योंकि वह प्रेग्नेंट हो गई थी।