दोस्ती में लंड और चूत के मजे

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मेरा नाम सोहन है और मैं लखनऊ में नौकरी करता हूं, मैं एक सरकारी विभाग में काम करता हूं। मेरी उम्र करीब 40 वर्ष है। मेरे साथ मेंरी पूरी फैमिली रहती है, मेरे पिताजी भी कुछ समय पहले ही रिटायर हुए हैं और मेरी दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। मेरी पत्नी और मेरा एक छोटा लड़का है,  हम लोग साथ में ही रहते हैं। मेरे पिताजी बहुत ही समझदार हैं, उन्होंने एक-एक पैसा जोड़कर लखनऊ में घर बनाया और जब उन्होंने यहां पर घर बनाया था उसके बाद उन्होंने हमें एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया, जिससे कि आज मेरी बहनों की भी अच्छे घर में शादी हुई और मैं भी एक अच्छी नौकरी पर हूं। मेरी बहन भी जब हमारे घर आती है तो हमें बहुत ही खुशी होती है और मेरे पिताजी भी बहुत खुश होते, वह कहते कि जब भी तुम्हारी बहन घर पर आती हैं तो मैं बहुत ही खुश होता हूं और मुझे बहुत अच्छा लगता है, यह बात मुझे भी पता है कि वह मेरी दोनों बहनों से बहुत ही प्यार करते हैं।

जब भी उनका मन हो तो वह उनके घर पर ही कुछ दिनों के लिए चले जाते थे और जब मेरी बहनों के पास समय हो तो वह भी हमारे घर पर आ जाती थी। मेरी बहन मुझसे छोटी हैं और उन दोनों के पति बहुत ही अच्छे हैं, वह मेरा बहुत सम्मान करते हैं और मेरे पिताजी का भी बहुत आदर और सम्मान करते हैं। मेरी छोटी बहन की शादी में बहुत ही समस्याएं हुई क्योंकि उस वक्त मेरे चाचा ने बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया था और शादी के दिन उन्होंने मेरी बहन के ससुर के साथ बहुत बदतमीजी कर दी क्योंकि मेरे चाचा ने शराब पी हुई थी इस वजह से हमें उन्हें चुप कराना पड़ा और मेरी बहन के ससुर के आगे हमने हाथ पैर जोड़कर उन्हें मनाया क्योंकि वह भी बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि आपके घर में किस प्रकार का माहौल है। मेरे पिताजी ने ही सारी बात को संभाला और उन्होंने मेरे चाचा को बहुत ही डांटा हालांकि मेरे चाचा का व्यवहार भी ठीक है परंतु उस दिन उन्होंने कुछ ज्यादा ही शराब पी ली थी इस वजह से उन्हें कुछ भी होश नहीं था और वह बहुत ज्यादा बदतमीजी पर उतर आए।

हमने किसी प्रकार से उनके आगे हाथ पैर जोड़कर इस रिश्ते को बचाया, नहीं तो वह कहने लगे थे कि हमें यह रिश्ता ही नहीं करना लेकिन अब मेरी बहन अपने पति के साथ बहुत खुश है और उसके पति भी उसका बहुत ख्याल रखते हैं। उनकी कुछ समय पहले ही एक छोटी बच्ची हुई है, मैं भी उसके घर गया था और उसे बधाइयां देकर आया। मेरे ऑफिस में एक नए व्यक्ति आये, उनका नाम संजय है और वह बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं। उनके और मेरे बीच में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और वह जब भी ऑफिस में होते तो हमेशा ही मुझसे बात किया करते थे, वह कहते थे कि पूरे ऑफिस में तुम ही एक अच्छे व्यक्ति हो। मैं उन्हें कहता कि ऐसा नहीं है ऑफिस में और भी अच्छे व्यक्ति हैं लेकिन हमारे ऑफिस में कुछ ज्यादा ही कानाफूसी होती थी जिसकी वजह से वह और लोगो से बहुत ही कम बात करते थे और सिर्फ मुझसे ही बात किया करते थे। वो किसी और से ऑफिस में बिल्कुल भी बात नहीं करते थे। वह ऑफिस में मुझसे सीनियर थे लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझसे एक दोस्ताना रिश्ता रखते थे। मैंने जब उनसे पूछा कि आपके घर में कौन-कौन लोग हैं तो वह कहने लगे कि मेरे घर में मेरी पत्नी और मेरे दो बच्चे हैं। मैंने उनसे पूछा कि आपके बच्चे क्या करते हैं तो वह कहने लगे कि मेरे बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन मुझे कभी भी उनके घर जाने का मौका नहीं मिल पाया था और ना ही वह मेरे घर पर कभी आए। मैंने एक दिन उनसे कहा कि आप मेरे घर पर चलिए क्योंकि मैं आपको अपने घर वालों से मिलवाना चाहता हूं, इसलिए मैं उस दिन उन्हें अपने घर पर ले आया। मैंने घर पर उनके लिए खाने का बंदोबस्त करवाया था और मैंने अपनी पत्नी से कहा था कि मेरे सीनियर हमारे घर पर आ रहे हैं, तुम उनका खाने का ध्यान रखना और अच्छे से उनके लिए खाना बना देना। मेरी पत्नी ने बहुत ही अच्छे से उनके लिए खाना बनाया हुआ था। जब संजय जी ने हमारे घर पर भोजन किया तो वह मेरी पत्नी की बहुत तारीफ करने लगे और कहने लगे कि आपने तो बहुत ही अच्छा खाना बनाया है, मेरी पत्नी तो बिल्कुल भी अच्छा खाना नहीं बनाती। मेरी पत्नी संजय जी से कहने लगी कि आप तो  मेरी कुछ ज्यादा ही तारीफ कर रहे हैं।

वह कहने लगे कि आप भी कभी हमारे घर पर आइए, मैंने उनसे कहा कि जब भी आप हमें अपने घर पर बुलाएंगे तो हम लोग जरूर आएंगे। उन्होंने कहा ठीक है मैं जब आपको बुलाऊंगा तो आपको मेरे घर पर आना ही पड़ेगा। हमने साथ मे बैठकर काफी बाते की, उसके बाद वह अपने घर चले गए। एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर से ही फोन किया और मेरी बात अपनी पत्नी से करवाई, उनकी पत्नी मुझे कहने लगी कि मेरे पति आपके घर पर आए थे और आपकी पत्नी के बने हुए खाने की कुछ ज्यादा ही तारीफ कर रहे हैं, इसलिए मुझे लगा कि मुझे भी आप लोगों को अपने घर पर इनवाइट करना चाहिए। वह कहने लगी कि आप भी हमारे घर पर आइए जिससे कि हमें भी अच्छा लगेगा। उन्होंने भी हमें अपने घर पर इनवाइट किया। मैंने अपनी पत्नी को कहा कि संजय सर की पत्नी ने हमें अपने घर पर बुलाया है, जब यह बात मैंने अपनी पत्नी से कही तो वह कहने लगी की आप ही उनके घर चले जाइए मैं नहीं आ पाऊंगी, मैंने उससे कहा कि तुम्हें मेरे साथ चलना ही होगा लेकिन वह कहने लगी कि मेरा आना संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि घर पर बहुत काम है इस वजह से मैं नहीं आ पाऊंगी और मेरी तबीयत भी कुछ ठीक नहीं है। उसके बाद मैं कुछ गिफ्ट लेकर उनके घर पर चला गया। जब मैं उनके घर गया तो संजय जी मेरे साथ ही बैठे हुए थे और वह मुझसे बात कर रहे थे।

वह कहने लगे कि आपकी पत्नी क्यों नहीं आई, मैंने उन्हें बताया कि उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी, इस वजह से वह नहीं आ पाई। उनकी पत्नी किचन में खाना तैयार कर रही थी और फिर मैं उनके बच्चों से भी मिला। जब मैं उनके बच्चों से मिला तो उनके बच्चे बहुत ही अच्छे थे, मैंने उन्हें गिफ्ट दिए। मैं उनके लिए कुछ चॉकलेट भी लाया हुआ था, मैंने उनके बच्चों को चॉकलेट दी। जब मैंने उनकी पत्नी को देखा तो मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ क्योंकि वह मेरी कॉलेज की क्लासमेट थी, हम दोनों क्लास में एक साथ ही थे। उसने भी मुझे पहचान लिया और कहने लगी कि मुझे तुम देखे देखे से लग रहे हो, जब मैंने उसे बताया कि मैं यही कॉलेज में पढ़ता था तो वह मुझे पहचान गई और मुझसे मिलकर बहुत खुश हुई। संजय जी भी बोलने लगे आपकी तो पुरानी पहचान है। उनकी पत्नी का नाम ललिता है और मैं उन्हें कॉलेज के समय से ही चाहता था लेकिन मैंने उन्हें कभी भी अपने दिल की बात नहीं कही और उसके कुछ समय बाद ही उनकी शादी हो गई थी। ललिता भी मेरे पास आकर बैठ गई और वह मुझसे कॉलेज के दोस्तों के बारे में पूछने लगी। मैंने उनसे कहा कि मेरे टच में कुछ ही लोग हैं बाकी तो मेरे संपर्क में नहीं है। हम लोगों ने काफी बातें की, उसके बाद वो कहने लगी अब भोजन कर लेते हैं। भोजन करने से पहले मैंने उन्हें गिफ्ट दिया और उसके बाद मैं भोजन करने लगा। भोजन करने के कुछ समय बाद मैं उनके घर से अपने घर चला गया। जब मैं अपने घर आया तो मेरी पत्नी मुझसे उनके बारे में पूछने लगी, मैने उसे बताया कि वह तो मेरी कॉलेज की ही मित्र हैं और मैं उन्हें पहले से ही जानता हूं। अगले दिन जब मैं ऑफिस गया तो संजय जी मुझसे पूछने लगे, कल तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं हुई। मैंने कहा नहीं मुझे कोई भी समस्या नहीं हुई।

मैंने उनसे ललिता का नंबर भी ले लिया था और हम दोनों की फोन पर बात हो जाया करती थी। वह मुझे फोन पर मेरे दोस्तों के बारे में पूछा करती थी। मैं ललिता से फोन पर बात करता था और मैंने एक दिन उसे अपने लंड की फोटो भेज दी वह कहने लगी तुमने यह क्या भेज दिया है मैंने उससे कहा कि मेरा बड़ा मन था तुम्हें चोदने का लेकिन कॉलेज के समय में तो मैं तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर पाया। उसने मुझे कहा कि आज तुम घर पर आ जाओ मेरा भी बहुत मन है मैं संजय जी के घर पर चला गया। जब में संजय जी के घर पर गया तो ललिता ने सारे कपड़े खोले हुए थे उसके स्तन मुझे दिखाई दे रहे थे उसकी योनि को देखकर मैं पागल होने लगा। मैंने उसे जल्दी से बिस्तर में लेटा दिया और उसके स्तनों को चूसने लगा मैंने काफी देर तक उसके स्तनों का रसपान किया और उसके बाद मैंने उसकी योनि को भी बहुत देर तक चाटा। मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था और मैंने अपने लंड को ललिता के मुंह के अंदर डाल दिया। उसने बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसना जारी रखा। ऐसा करने के बाद मैंने भी उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया और जैसे ही मैंने अपने लंड को ललिता की योनि में डाला तो वह अब भी बहुत टाइट थी। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और बड़ी तेजी से उसे चोदने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब मैं ललिता को धक्का मार रहा था। काफी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी गांड को मैं चाटने लगा। मैंने जब उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो उसे मजा आने लगा। मैं उसकी गांड को बहुत ही अच्छे से मार रहा था उसकी गांड से खून भी निकल रहा था और मुझे बड़ा मजा भी आ रहा था। मैंने उसे बड़ी तेज तेज झटके दिए जिससे कि उसका पूरा पसीना आने लगा मेरा वीर्य जैसे ही ललिता की गांड में गिरा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं उसे पकड़कर उसके बिस्तर में लेट गया अब उसका जब भी मन होता तो वह मुझे अपने पास बुला लेती और मैं उसको खुश कर दिया करता था।