दोस्त के गांव में उससे अपनी चूत मरवाई

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मेरा नाम अंजली है और मैं कॉलेज में पढ़ती हूं। मेरा यह लास्ट ईयर है और मेरी उम्र 23 वर्ष है मुझे बचपन से ही नई नई जगह घूमने का बहुत ही शौक है। मैं बचपन से ही बहुत जगह घूमती रहती हूं मुझे अकेले ही घूमना बहुत अच्छा लगता है। कॉलेज में जितने भी मेरे दोस्त हैं वह सब मुझे घुमक्कड़ कहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि मेरे घूमने की बहुत ज्यादा आदत है। मैं दो-तीन महीने में कहीं नई जगह घूमने के लिए चली जाती हूं और मुझे नए नए लोगों से मिलना बहुत ही अच्छा लगता है। यह बात मेरे घर वालों को भी भलीभांति मालूम है और वह मुझसे कहते रहते हैं कि हम तुम्हें कभी भी नहीं रोकते हैं लेकिन तुम्हें अपना ध्यान खुद ही रखना है हमने तुम्हें कभी भी कहीं घूमने से नहीं रोका। मुझे मेरे पापा बहुत ही अच्छे लगते हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा ही मेरा सपोर्ट किया है। हमारे जितने भी रिश्तेदार हैं वह सब कहते हैं कि तुम अपनी बेटी को ऐसे ही घूमने देते हो, तुम उसकी चिंता भी नहीं करते लेकिन मेरे पापा हमेशा ही कहते हैं कि उसने कभी भी कुछ गलत काम नहीं किया इसलिए हम उसे कभी भी नहीं रोकते हैं।

जब उनके पास समय होता है तो वह भी मेरे साथ कहीं घूमने चल पड़ते हैं और हम लोग नई नई जगह जाना पसंद करते हैं। मैं लगभग अभी तक बहुत सारी जगह घूम चुकी हूं और मुझे नए लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है। मेरे कॉलेज में मेरे बहुत दोस्त हैं उनमें से एक का नाम सार्थक है वह मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त है और मैं उसे हमेशा ही चिढ़ाती रहती हूं क्योंकि वह कॉलेज में एक लड़की को पसन्द करता है लेकिन उसका वन साइड वाला प्यार है। वह उस लड़की को सिर्फ दूर से ही देखता है और खुश हो जाता है। मैंने उसे कितनी बार कहा कि तुम उससे बात क्यों नहीं करते लेकिन वह कहता है कि मेरी हिम्मत ही नहीं होती उससे बात करने की। यह बात मुझे भी मालूम है कि सार्थक बहुत ही शरीफ़ किस्म का लड़का है और उसे लड़कियों से बहुत शर्म आती है। मैंने जब सार्थक से बात की तो वह कहने लगा तुम तो हमेशा मेरी टांग ही खिंचती रहती हो, कभी तुम मेरी मदद भी कर दिया करो। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारी मदद क्यों करूं तुम्हें खुद ही उस लड़की को बोलना चाहिए। मैं उससे प्यार थोड़ी करती हूं तुम ही उस लड़की से प्यार करते हो इसलिए तुम्हे उससे बोलना चाहिए लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं बोल पाता और हमेशा ही डर जाता है। मेरे साथ के जितने भी दोस्त हैं वह सब उसे चिढ़ाते रहते हैं और कहते हैं कि तुम्हारे अंदर बिल्कुल भी हिम्मत नहीं है तुम किसी से भी बात नहीं कर सकते।

सब लोग सार्थक की बहुत टांग खींचते हैं और उसे बहुत ही चिढ़ाते हैं लेकिन वह फिर भी किसी की बात का बुरा नहीं मानता और हमेशा ही कहता है मुझे जब लगेगा मैं उसे उस दिन खुद ही बात कर लूंगा। सार्थक सबकी मदद कर देता है जब भी किसी को उसकी आवश्यकता पड़ती है तो वह सबसे आगे खड़ा होता है। एक बार हमारे कॉलेज में ही हमारे एक दोस्त से एक्सीडेंट हो गया था तो सार्थक ने उसकी हेल्प की और उसकी बहुत मदद की। वह उसके साथ ही था और उसने उसकी बहुत ज्यादा मदद की इसलिए उसे सब बहुत ही अच्छा मानते हैं। सार्थक हॉस्टल में ही रहता है और उसका घर राजस्थान में है। वह कभी भी किसी बात का बुरा नहीं मानता और हमेशा ही हर बात को मुस्कुराकर टाल देता है। वह मेरे साथ कई बार मेरे घर पर भी आया है। मेरे पापा और मम्मी कहते हैं कि सार्थक कितना अच्छा लड़का है हमेशा ही मुस्कुराता रहता है उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे उसे किसी भी प्रकार की कोई चिंता नहीं हो। मैं अपनी मम्मी पापा से कहती हूं कि वह बहुत ही खुश दिल लड़का है और वह हमेशा ही हंसता रहता है। हमारे कॉलेज में कुछ दिनों के लिए छुट्टी पढ़ने वाली थी तो मैं सोच रही थी छुट्टियों में कहां घूमने जाऊं। मैंने अपने पापा से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कि तुम्हें इस बार किसी अच्छी जगह जाना चाहिए। वह कहने लगे कि तुम यदि फॉरेन घूमना चाहती हो तो मैं तुम्हें वहां भिजवा देता हूं। मैं तुम्हारे लिए टिकट करवा दूंगा और रहने का सारा बंदोबस्त मैं तुम्हारा करवा दूंगा लेकिन मैंने अपने पापा से कहा कि मैं इस बार कोई अलग जगह घुमना चाहती हूं जिससे कि मुझे बहुत ही अच्छा लगे। मैंने अपने दोस्तों से इस बारे में भी बात की तो सार्थक मुझे कहने लगा कि तुम मेरे साथ मेरे घर चलो। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारे घर आ कर क्या करूंगी।

वह कहने लगा कि तुम मेरे घर पर चलो मैं तुम्हें बहुत ही इंजॉय कराउंगा और तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा जब तुम मेरे घर चलोगी। वह मुझसे बहुत ही जिद करने लगा और मैं उसके साथ उसके घर जाने को तैयार हो गई। मैंने इस बारे में अपने पापा से भी बात की तो वह कहने लगे कि तुम सार्थक के साथ जाओगे तो हमें कोई भी चिंता नहीं होगी क्योंकि वह बहुत ही अच्छा लड़का है और हम उसे बहुत ही अच्छी तरीके से जानते हैं। सार्थक और मैं इस बार उसके घर चले गए। जब मैं उसके घर पहुंची तो उसके घर का माहौल बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह लोग अभी भी ग्रामीण परिवेश में रहना ही पसंद करते हैं। सार्थक का घर एक छोटे से कस्बे में है वहां पर सब लोग एक दूसरे को बहुत ही अच्छी तरीके से पहचानते हैं। वहां कभी भी कोई कार्य होता है तो सब लोग एक दूसरे की बहुत मदद करते हैं। जब मैं सार्थक के घर में थी तो उसके घर वाले मुझसे बहुत ही अच्छी तरीके से बात कर रहे थे जिससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं उसकी मां के साथ में उनका घर का काम करने लगी और मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं उनके साथ उनके घर का काम करती हूं।

मैं उसकी भाभी के साथ भी कभी खाना बना देती तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है। जब मैं चूल्हे पर खाना बना रही थी तो मेर हाथ भी जल गया लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सार्थक मुझे अपने खेत दिखाने के लिए ले गया। जब वो मुझे अपने खेत दिखाने के लिए ले गया तो उनके खेत बहुत ही बड़े बड़े थे और वह लोग अभी भी बहुत ही खेती करते हैं जिससे की उनका बहुत अनाज होता है। वह सब वह बाजार में बेच देते हैं। मुझे सार्थक के साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब हम लोग खेत में जाते तो हम लोग वहां पर लगी ट्यूबवेल में नहा लेते थे और हमें बड़ा ही मजा आता जब हम दोनों वहां ट्यूबवेल में नहा रहे होते। हमारे साथ कुछ बच्चे भी होते थे और कभी हम दोनों ही होते थे। वह लोग ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं और उनके दोनों चाचा उनके साथ ही रहते हैं। वह लोग भी बहुत अच्छे से उनके साथ में रहते हैं। मैं जितने दिन उनके घर पर थी उन्होंने कभी भी झगड़ा नहीं किया और मुझे बहुत ही अच्छा लगता था जब मैं उन लोगों के बीच में प्रेम देखती थी। मुझे ऐसा लगता था जैसे वह लोग बहुत ही अच्छे तरीके से रहते हैं। शहरों में इस तरीके का प्रेम कहीं देखने को नहीं मिलता क्योंकि सब लोग अब अलग रहना पसंद करते हैं। उनके घर में बहुत ही ज्यादा भीड़भाड़ सी लगती थी क्योंकि वहां पर बहुत सारे लोग हो जाते थे और उनके आसपास के लोग भी उनके घर पर अक्सर आते रहते थे। हम लोग कभी कभार छत में भी सो जाते, छत में सोने का अलग ही मजा आता था।

उस दिन छत मे हम लोग साथ में ही सो रहे थे और सार्थक मेरे बगल में ही सोया हुआ था। वह बहुत ही गहरी नींद में था उसने अपनी पैंट के अंदर हाथ डाला हुआ था जब उसने अपनी पैंट में हाथ डाला था तो उसका लंड खड़ा हो रखा था। मैंने देखा कि उसका लंड पूरा खड़ा हो रखा है मैं उसके पास जा कर लेट गई और उसकी पैंट को धीरे से नीचे करते हुए उसके लंड को हिलाने लगी। उसके लंड को हिलाते हिलाते मैंने अपने मुंह में ले लिया और उसे बहुत अच्छे से चूसने लगी। सार्थक अभी भी नहीं उठा और मैं उसके लंड के ऊपर बैठ गई जैसे ही मैं उसके लंड पर बैठी तो उसका लंड मेरी योनि के अंदर तक जा चुका था। अब उसकी आंख खुल गई लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके लंड के ऊपर बैठी हुई थी। वह बड़ी तेजी से मुझे धक्के मारने लगा और मैं भी अपनी चूतड़ों को बड़ी तेजी से हिला रही थी। वह भी मुझे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस प्रकार से मुझे धक्के मार रहा था। मैंने अपनी चूतडो को हिलाना शुरु किया उसे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था और मुझसे बिल्कुल कंट्रोल नहीं हो रहा था। उसने मुझे घोड़ी बना दिया और जब उसने मुझे घोड़ी बनाया तो वह बहुत ही अच्छे से मेरी चूत मार रहा था। उसने मेरी चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और मेरे शरीर पर नाखून भी मार दिया। वह मुझे ऐसे ही धक्के मार रहा था उसने मुझे इतने तेज झटके मारे कि मेरा शरीर पूरा हिल जाता और उन्हें झटकों के बीच में मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी। उसे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मुझे इस प्रकार से धक्के मार रहा था। मेरा जब झड़ने वाला था तो मैंने अपनी योनि को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया और वह मुझे ऐसे ही धक्के मारने लगा। कुछ देर बाद मैं झड़ गई और वह मुझे अब भी ऐसे ही झटके दिए जा रहा था। जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गया तो वह शांत होकर बैठ गया। जब उसने अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगने लगा। अब हम दोनों एक साथ सो गए मुझे नहीं पता था कि सार्थक मुझे इतने अच्छे से चोदेगा। उसने मुझे इतनी तेज झटके मारे कि मेरी चूतडो में अब भी दर्द हो रहा था और मैं उसे पकड़ कर सो गई। जब मैं सुबह उठी तो मेरी चूत मे बहुत तेज दर्द हो रहा था वह  बहुत मीठा दर्द था मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मेरी चूत मे दर्द हो रहा था।