विदेश से लौटने के बाद मामा ने कौमार्य भंग किया

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मेरा नाम सुरभि है मैं इलाहाबाद की रहने वाली हूं, मैंने इलाहबाद से अपनी पढ़ाई पूरी की है और जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई तो उस वक्त मेरे मामा का मुझे फोन आया और कहने लगे कि तुम हमारे पास दिल्ली कुछ दिनों के लिए आ जाओ। मेरे मामा अब दिल्ली ही आ चुके हैं, वह पहले विदेश में रहते थे लेकिन अब वह दिल्ली में सेटल हो चुके हैं और उन्होंने अपना रेस्टोरेंट खोल लिया है। मैंने मामा से पूछा कि क्या आपने अब यहीं पर रहने का विचार बना लिया है, वह कहने लगे कि हां मैंने अब यहीं पर रहने का विचार बना लिया है। मामा बहुत ही खुश थे क्योंकि मेरे मामा अब दिल्ली में ही आ चुके हैं। मैंने अपने मामा से पूछा कि क्या अपने घर पर भी इस बारे में बात की, वह कहने लगे कि नहीं मैंने घर पर अभी तक फोन नहीं किया है, मैंने तुम्हें ही यह बात बताई है, मैं तुम्हारी मम्मी को अभी फोन करने वाला हूं। मेरे मामा का मुझसे बहुत लगाव है और वह बचपन से ही मुझे बहुत ज्यादा प्रेम करते हैं।

मैं जब घर पर थी तो उस दिन मेरी मम्मी कहने लगी कि तुम्हारे मामा का फोन आया था और वह कह रहे थे कि कुछ दिनों के लिए सुरभि को दिल्ली भेज दो, वह लोग अब यहीं पर सेटल हो चुके हैं। मैंने अपनी मम्मी को बताया कि मुझे यह बात पता है कि मामा अभी यही पर सेटल हो चुके हैं। मैंने उन्हें कहा मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली चली जाती हूं, मैंने दिल्ली जाने का मन बना लिया क्योंकि मैं भी घर पर बहुत बोर हो गई थी। जब मैं दिल्ली गयी तो मेरे मामा मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और मेरी मामी कहने लगी कि तुम काफी समय बाद हमसे मिल रही हो, मैंने अपनी मामी से पूछा कि भैया कहां है, क्या वह यहां नहीं आए, मामी कहने लगी क नहीं वह वहीं पर जॉब कर रहा है और उसने कहा कि आप लोग दिल्ली में सेटल हो जाओ। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं अपने मामा से मिली, उस दिन मैं घर पर ही थी और मेरे मामा कहने लगे कि कल मैं तुम्हें अपना रेस्टोरेंट दिखाने के लिए लेकर चलता हूं, मैंने उन्हें कहा ठीक है कल हम लोग साथ में ही चलेंगे। अगले दिन जब हम लोग साथ में गए तो मैंने अपने मामा का रेस्ट्रोरेंट देखा,  मैंने कहा कि आपने तो बहुत बड़ा रेस्टोरेंट खोल लिया है, वह कहने लगे की मेरा पहले से ही सपना था कि मैं अपना एक खुद का रेस्टोरेंट खोलूं।

मेरे मामा पहले विदेश में रहते थे और वह वहीं पर काफी समय तक रहे, मेरे मामा मुझे कहने लगे कि तुम अब से रेस्टोरेंट में ही बैठ जाया करो क्योंकि मैं भी अकेला ही रहता हूं और मेरा टाइम पास भी हो जाया करेगा, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं आपके साथ कल से रेस्टोरेंट पर आ जाया करूंगी। मैं जब अगले दिन से रेस्टोरेंट में जाने लगी तो मैं अपने मामा के साथ अब थोड़ा बहुत काम करने लगी थी।   उनके स्टाफ में जितने भी लोग हैं उन सब से मेरे मामा ने मुझे मिलवा दिया था इसलिए वह सब लोग मुझे पहचानने लगे थे। उन लोगों से भी मेरी अच्छी बातचीत हो गई थी और मुझे भी उनसे बात करना अच्छा लगता था, मैं जब भी सुबह जाती तो वहां सब लोग मुझे मॉर्निंग विश किया करते। रमेश मामा का काम अच्छे से चलने लगा था और मुझे भी काफी समय हो गया था जब मैं मामा के साथ ही काम कर रही थी। मुझे मामा ने उसके पहले पैसे दिए थे और कहने लगे यह पैसे तुम अपने पास रखो, मैंने कहा कि इन पैसों का मैं क्या करूंगी, वह कहने लगे कि तुम यह पैसे अपने पास रखो क्योंकि तुमने अपना कीमती समय हमें दिया है। मैंने अपने मामा से मुस्कुराते हुए कहा कि मैंने आपको कौन सा कीमती समय दिया है, मामा कहने लगे कि तुम मेरे साथ मेरे रेस्टोरेंट में जब से बैठी हो तब से मेरा काम बहुत अच्छा चलने लगा है और तुम इतना काम भी करती हो उसके बदले मुझे तुम्हें कुछ तो देना ही था। मैंने अपने मामा से कहा कि मैं यह पैसे नहीं ले सकती लेकिन रमेश मामा मुझसे जिद करने लगे और कहने लगे कि तुम्हें पैसे रखने पड़ेंगे इसीलिए मैंने वह पैसे अपने पास रख लिए। मैं रेस्टोरेंट में ही बैठ जाया करती थी, मेरी  मुलाकात भी काफी लोगों से होने लगी और मेरी कुछ लोगों से अच्ची दोस्ती भी हो गई थी क्योंकि मेरे कोई भी दोस्त नहीं थे इसीलिए मेरी दोस्ती कुछ लड़कियों से होने लगी। जब वह रेस्टोरेंट में आती थी तो वह मुझे मेरा हाल-चाल पूछ लिया करते, मैं उन्हें हमेशा ही कहती की मैं अच्छी हूं और थोड़ा समय मैं उन लोगों के साथ भी बैठ जाती, जिससे उन्हें भी बहुत अच्छा लगता।

एक दिन मैं रेस्टोरेंट में बैठी हुई थी और उस दिन हमारे रेस्टोरेंट में काम करने वाले लड़के की तबीयत खराब हो गई, उसे बहुत तेज बुखार आने लगा। उस दिन रमेश मामा कहीं बाहर गए हुए थे और मैंने उन्हें फोन कर के इसकी जानकारी दी तो वह कहने लगे कि मैं कुछ देर बाद ही रेस्टोरेंट में पहुंचता हूं। जब मामा रेस्टोरेंट पहुंचे तब तक हम लोग उस लड़के को अस्पताल से वापस ला चुके थे और मामा ने मुझसे पूछा कि अब उस लड़के की कैसी तबीयत है, मैंने मामा को कहा कि अब वह लड़का पहले से अपने आपको अच्छा महसूस कर रहा है। मामा और मैं उस दिन जब रेस्टोरेंट से वापस जा रहे थे तो मामा मुझे कहने लगे कि तुमने अब बहुत ही अच्छे से काम संभाल लिया है। मैं सोच रहा हूं कि तुम हमारे साथ ही रहो और इस रेस्टोरेंट का पूरा काम तुम ही संभाल लो, मैंने उन्हें कहा कि मुझे अभी से आप इतनी बड़ी जिम्मेदारी मत दो क्योंकि मुझे इस चीज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, वह तो मैं आपके साथ काम कर के ही थोड़ा बहुत सीखने लगी हूं नहीं तो मुझे इन सब की कुछ भी जानकारी नहीं है।

रमेश मामा कहने लगे कि तुम अब बड़ी हो चुकी हो,  तुम बहुत ही समझदार हो और जिस प्रकार से तुम काम कर रही हो, मुझे बहुत अच्छा लगता है यदि तुम इसी प्रकार से मेहनत करती रही तो हम लोग अपना एक और रेस्टोरेंट खोल लेंगे। मैंने रमेश मामा से कहा कि मैं तो यही चाहती हूं कि आप अपना एक रेस्टोरेंट जल्दी से जल्दी खोलें, मामा कहने लगे कि तुम जिस प्रकार से मेहनत कर रही हो उसी प्रकार से तुम मेहनत करती रहो, मैं बहुत ही जल्द दूसरा रेस्टोरेंट भी खोल लूंगा और तुम इसका काम संभालते रहना, मैं दूसरे रेस्टोरेंट में बैठ जाऊंगा। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मेरे मामा मुझ पर इतना भरोसा करते हैं क्योंकि उनकी रेस्टोरेंट में अच्छी खासी कमाई होती है और कैश काउंटर की चाबी मेरे पास ही रहती है। मामा मुझ पर बहुत भरोसा करते हैं और कहते कि तुम बहुत ही भरोसे वाली लड़की हो और बहुत ही ईमानदार हो। जिस प्रकार से तुम मेहनत करती हो तुम जल्दी ही एक न एक दिन बहुत अच्छा मुकाम हासिल कर लोगी।मैंने मामा से कहा कि आप मुझ पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करते हैं। वह कहने लगे तुम बहुत ही मेहनती हो। मैं और मामा साथ मे ही रेस्टोरेंट में आते थे। हम दोनों साथ ही आते थे और ज्यादातर मैं ही रेस्टोरेंट का काम संभालने लगी थी। एक दिन मामा मेरे साथ बैठे हुए थे और मुझे कहने लगे कि अब तुम बहुत बड़ी हो चुकी हो लेकिन अब भी तुम पहले जैसी ही प्यारी हो उन्होंने मेरे गाल पर हाथ लगाया तो मुझे उस दिन एक अलग प्रकार की फीलिंग आई और जब उन्होंने मेरी जांघ पर अपने हाथ को लगाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने रमेश मामा के लंड पर अपने हाथ को रख दिया। उन्होंने अपने लंड से मेरे हाथ को हटाते हुए कहा कि तुम यह क्या कर रही हो। मैं कहने लगे कि कुछ भी तो नहीं कर रही मैं तो सिर्फ आपके लंड को देख रही थी। वह मुझे कहने लगे आओ अंदर चलते हैं मैं तुम्हें वहां अपना लंड दिखाता हूं। उन्होंने जब अपने लंड को मुझे दिखाया तो मैंने जब उनके लंड को अपने हाथ में लिया तो मैं  उनके लंड को हिलाने लगी और हिलाते हिलाते अपने मुंह के अंदर समा लिया। मैंने बड़े ही अच्छे से उनके लंड को अपने मुंह में लिया और उन्हें चूसने लगी।

मैंने काफी देर तक उनके लंड को सकिंग किया उसके बाद उन्होंने मेरे कपड़े उतारे तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह मेरे पूरे शरीर को चाटने लगे थे जिससे कि मेरी योनि से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। कुछ देर तक उन्होंने ऐसा ही किया उसके बाद जब उन्होंने मेरी चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बड़ा दर्द महसूस होने लगा और मेरी चूत से खून की पिचकारी उनके लंड पर गिर गई। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया हुआ था वह मुझे घोड़ी बनाकर चोद रहे थे। मामा कहने लगे कि मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा बदन इतना ज्यादा खिल चुका है नहीं तो मैं तुम्हें पहले ही चोद चुका होता। मैंने मामा से कहा कि मैं किसी बाहर वाले को अपनी इच्छा के बारे में नहीं कह सकती इसलिए मैंने आपसे ही कहा और आपने मेरी इच्छा को पूरा कर दिया। मैं बहुत ही खुश हूं आप जिस प्रकार से मुझे चोद रहे हो और अपने लंड को मेरी चूत मे डाल रहे हो। आपका मोटा लंड जिस प्रकार से मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा है मुझे आपका लंड अपनी योनि में लेने में बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है। आप मुझे इसी प्रकार से चोदते रहिए मेरे मामा ने इतनी तेज तेज मुझे धक्के मारे की जब उनका माल मेरी योनि में घुसा तो मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने पिचकारी से बड़ी तेजी से कोई चीज बाहर की तरफ निकाली हो। मेरे मामा ने मुझे गले लगा लिया और कहा कि तुमने मुझे आज बहुत बड़ी खुशी दी है। मैंने भी अपने मामा को कहा कि आपने भी आज मेरी इच्छा पूरी कर के मुझे खुश कर दिया। मैं अब रेस्टोरेंट का काम ही संभालती हूं और मैं पूरे लगन से काम करती हूं रेस्टोरेंट की बहुत अच्छा चलने लगा है और मेरे मामा भी मुझसे बहुत खुश रहते हैं।