शादी में इशारों इशारों में भाभी को पटा लिया

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मैं हरियाणा के पानीपत का रहने वाला हूं, मेरा नाम राजेश है, मैं  पानीपत में अपने कपड़ों का काम करता हूं और मैं कपड़ों के लिए कई बार दिल्ली जाता हूं, मैं दिल्ली से ही सामान लेकर आता हूं और यहां पर बेचता हूं। एक बार मैं दिल्ली गया हुआ था और जब मैंने वहां से कपड़े लिए तो मेरी मुलाकात एक बहुत ही पुराने दोस्त से हुई, वह हमारे दूर का रिश्तेदार भी हैं और उसके पिताजी मेरे रिश्ते में मामा भी लगते हैं। जब मैं उससे मिला तो वह मुझसे मिलते ही खुश हो गया और मुझे उसने गले लगा लिया,  वह कहने लगा इतने वर्षों बाद तुम मुझे मिल रहे हो, मुझे तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई, मैंने उसे कहा कि तुम भी तो इतने वर्षों से पता नहीं कहां गायब हो गए थे। वह मुझे कहने लगा कि मैं कहीं गायब नहीं हुआ था मैं यही था, मैंने उसे कहा कि तुम दिल्ली में क्या कर रहे हो, वह कहने लगा बस मैं छोटा-मोटा काम कर रहा हूं, कुछ साल मैंने दुबई में काम किया और उसके बाद मैं अब दिल्ली में ही आ चुका हूं।

मैंने उसे पूछा कि तुम्हारे घर में सब लोग कैसे हैं, वह कहने लगा घर में तो सब लोग अच्छे हैं। वह मुझे कहने लगा की कहीं चल कर बैठते हैं, जहां पर हम लोग बात कर पाए, मैंने उससे कहा कि मुझे एक छोटा सा काम है वह कर लेता हूं उसके बाद हम लोग कहीं चल कर बैठते हैं। मुझे किसी व्यक्ति को कुछ पैसे देने थे क्योंकि मैंने उनसे सामान लिया था इसीलिए मैं उन्हें पैसे देने चले गए,  उसके बाद मैं और गगन एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे। मै गगन से कहने लगा कि जब से तुम लोग दिल्ली में आए हो उसके बाद से तो तुम लोगों का हमसे कोई भी संपर्क नहीं है, जब तुम लोग पानीपत में थे तो उस वक्त तुम हमसे मिल लिया करते थे लेकिन अब तो तुम बिलकुल भी हमसे संपर्क में नहीं हो। जब गगन से मैंने यह बात कही तो वह कहने लगा कि पिताजी की भी अब तबीयत ठीक नहीं रहती और ना ही वह कहीं जा सकते हैं इसी वजह से हम लोग पानीपत नहीं आते है। गगन मुझसे कहने लगा, लेकिन तुम तो मुझे फोन कर सकते थे, मैंने उसे कहा कि मैं भी अब अपने काम में बहुत बिजी हो गया हूं, मुझे भी बिल्कुल समय नहीं मिल पाता इसीलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया, नहीं तो मैं तुम्हें जरूर फोन करता।

गगन मुझसे पूछने लगा तुम क्या काम कर रहे हो, मैंने उसे बताया कि मैंने कपड़ों का कारोबार शुरू कर दिया है, मैं दिल्ली से कपड़े लेकर जाता हूं और पानीपत में सप्लाई करता हूं। गगन कहने लगा यह तो बहुत अच्छी बात है, तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैंने उसे बताया कि मेरा काम भी अच्छा चल रहा है और फिलहाल तो मुझे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही लेकिन अपने लिए समय निकालना थोड़ा मुश्किल हो गया है, अब मैं अपने काम में ही फंस कर रह गया हूं इसीलिए मैं बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पा रहा और ना ही मेरे पास ज्यादा समय रहता है। गगन और मैं अपनी पुरानी बातें याद करने लगे वह कहने लगा कि मैं और तुम पानीपत में कितने मजे करते थे,  हम दोनों ही कितनी शैतानियां क्या करते थे। मैंने गगन से कहा कि वह तो अब बीते कल की बात हो चुकी हैं लेकिन समय का पता ही नहीं चला कब समय निकल गया, अब इस बात को काफी वर्ष हो चुके हैं। गगन मुझे कहने लगा की मैं बातों बातों में तो यह बताना ही भूल गया कि मेरी शादी कुछ समय बाद है और तुम्हें मेरी शादी में जरूर आना है, मैंने उसे कहा कि तुम शादी करने वाले हो और तुमने मुझे बताया भी नहीं, गगन कहने लगा बस ऐसे ही मुझे किसी को बताने का भी समय नहीं मिल पाया। मैं जिस लड़की से प्यार करता हूं, वह हमारे मोहल्ले में ही रहती है और उसके घर वाले शादी के लिए पहले मान नही रहे थे परन्तु बाद में वह मान गए,  हम लोगों की शादी इंटर कास्ट मैरिज है इसी वजह से उसके घर वाले बिल्कुल भी मान नही रहे थे। जब वह मान गए तो हम लोगों ने भी जल्दी बाजी में सारा कुछ अरेंजमेंट करवाने की सोची और सोचा कि ज्यादा रिश्तेदारों को ना बताया जाए इसीलिए हमने दिल्ली में ही सारा कुछ अरेंजमेंट किया है और यही पर हम लोग शादी करवाने वाले हैं। मैंने गगन से कहा चलो यह तो अच्छी बात है कि तुम शादी कर रहे हो, कम से कम अब तुम्हारे जीवन में कुछ तो बदलाव आएगा। गगन मुझसे कहने लगा क्या तुमने भी शादी कर ली है, मैंने गगन से कहा नहीं मैंने अभी तक शादी नहीं की लेकिन मैं देख रहा हूं यदि कोई अच्छी लड़की मिलती है तो मैं जल्दी ही शादी कर लूंगा।

गगन और मेरी उस दिन काफी देर से बात हुई, मैंने कहा कि अब मैं चलता हूं क्योंकि मुझे देर हो रही है, मैं उस दिन वहां से अपने एक फ्रेंड के पास चला गया और वहां से मैंने अपना सामान रखवा दिया। अगले दिन मैं पानीपत वापस आ गया था,  मैं अपने काम में ही व्यस्त था और मैंने सोचा कि क्यों ना गगन को फोन कर लिया जाए। एक दिन मैन गगन को फोन कर दिया तो वह कहने लगा कि आज तुमने काफी दिनों बाद मुझे याद किया आज तुमने कैसे फोन कर दिया, मैंने उसे कहा कि बस ऐसे ही घर में तुम्हारे बारे में कुछ बात हो रही थी तो मुझे ध्यान आया कि क्यों ना तुम्हें मैं फोन कर लूं इसलिए मैंने तुम्हें फोन किया। जब मैंने गगन से बात करी तो वह खुश हो गया, वह कहने लगा चलो कम से कम तुमने मुझे याद तो किया, मैंने उससे पूछा कि शादी की तैयारी कैसी चल रही है, वह कहने लगा कि शादी की तो तैयारियां ठीक चल रही है। जब गगन ने मुझे कहा कि तुम्हे मेरी शादी में जरूर आना है तो मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा। मेरी उससे काफी देर तक बात हुई, कुछ दिनों बाद ही उसकी शादी थी तो मैं भी उसकी शादी में चला गया।

जब मैं गगन से मिला तो वह बहुत खुश हुआ और उसके परिवार वाले भी मुझसे मिलकर खुश हो गए, उसके घर वाले मुझसे कहने लगे कि क्या तुम्हारे मम्मी पापा नहीं आए, मैंने उन्हें बताया कि नहीं घर में कुछ काम था तो वह लोग नहीं आ पाए।  वह मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए, गगन ने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया लेकिन गगन की शादी में ज्यादा भीड़ नहीं थी।  गगन और मैं बैठे हुए थे, हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे, गगन मुझे कहने लगा मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मैंने अर्चना के पीछे बहुत ज्यादा पापड़ बेले और आखिरकार उसके घर वाले तैयार हो ही गए इसी वजह से मेरी उससे शादी होने जा रही है, मैं बहुत ही खुश हूं। गगन ने कहा मै थोड़ी देर बाद आता हूं क्योंकि कुछ रिश्तेदार आए हुए हैं उनसे मुलाकात करनी है। मैं अकेला बैठा हुआ था तो मेरे सामने एक महिला बैठी हुई थी वह बड़ी ही माल लग रही थी और मुझे बहुत देर से घूर रही थी। मैं भी उसे घुरने लगा। मुझे लगा कि उसकी आंखों में हवस है मैंने भी उसे इशारे किए तो वह भी मेरे  इशारे समझ गई और मुझसे अपनी  चूत मरवाने के लिए तैयार हो गई। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और कुछ देर मैंने उससे बात की। वह मुझे कहने लगी तुम हमारे घर पर चलो हमारे घर पर आज कोई भी नहीं है। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर पर चलता हूं। हम दोनों ही चले गए जब मैं उसके घर पर गया तो वह मेरे सामने बैठ गई मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। जब मैंने उसे जकड़ा तो वह मचलने लगी और मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। मैंने जब उसके गोरा और मुलायम स्तनों का रसपान किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने काफी देर तक उसके स्तनों का रसपान किया। मेरा लंड खड़ा हो गया तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उस महिला के मुंह के अंदर डाल दिया। वह मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक अच्छे से सकिंग कर रही थी। मैं भी उसके मुंह के अंदर झटके दे रहा था उसने काफी देर तक मेरे लंड को चूसा। उसने अपने मुंह से मेरे लंड को निकालते हुए कहा कि अब तुम मेरी चूत मे अपने लंड को डाल दो। उसने मुझे कहा कि तुम कंडोम लगा लो उसने मुझे कंडोम दिया मैंने उसे अपने लंड पर लगा लिया।

मैंने जब उसे घोडी बनाया तो मैंने जैसे ही उसकी चूत मे अपने लंड को डाला तो मेरा लंड आसानी से उसकी योनि के अंदर चला गया। मैं बड़ी तेज गति से उसे झटके मारने लगा वह बहुत ज्यादा मचल रही थी और अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी। मैंने उसे कहा कि तुम्हारी चूत बहुत ही टाइट है मुझे बहुत मजा आ रहा है लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाल लिया और अपने लंड को मैंने साफ कर लिया। वह मुझे कहने लगी मेरी इच्छा अभी पूरी नहीं हुई है तुम मुझे एक बार और मुझे चोदो जिससे की मेरी इच्छा पूरी हो जाए। उसने मुझे दोबारा से कंडोम दिए मैंने उन्हें अपने लंड पर लगाते हुए जैसे ही उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी और मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिया। वह कहने लगी जब तुम्हारा लंड मेरी योनि के अंदर तक जा रहा है मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है। मैंने उसे बडी तेज झटके देने शुरू कर दिए वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। जब वह  झडने वाली थी तो उसने अपनी चूत को टाइट कर लिया और मैं उसे धक्के मारता रहा। मैने उसे 15 मिनट तक चोदा लेकिन जब मेरा माल गिर गया तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाल लिया। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे भाभी ने मुझे अपना नंबर दे दिया। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे पति कहां है वह कहने लगी कि मेरे पति की पोस्टिंग गुजरात में है और वह काफी दिन से आए नहीं है इसलिए मेरी इच्छा पूरी नहीं हो पाई थी तुमने मुझे चोदकर मेरी इच्छा को पूरा कर दिया मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से तुमने मुझे चोदा। मैंने गगन की शादी अटेंड की और उसके बाद मैं अपने घर वापस चला गया।