पहचान वाले की पत्नी ने दिल खुश कर दिया

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मेरा नाम अजय है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 32 वर्ष है। मेरी शादी को 4 वर्ष हो चुके हैं मैं अपनी शादी से बहुत ही खुश हूं और मेरी पत्नी मेरा बहुत ध्यान रखती है। मेरी पत्नी और मेरी मुलाकात एक इत्तेफाक से ही हुई थी, मेरी पत्नी का नाम काजल है। मेरी पत्नी और मेरे बीच में बहुत ही अच्छे संबंध है और हम दोनों ही एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं। एक बार मेरे घर पर चोरी हो गई थी और हमारे घर का काफी सामान उसमें चला गया, मेरे पास उस वक्त बिल्कुल भी पैसे नहीं थे क्योंकि मेरे बिजनेस में मेरा लॉस हो चुका था, यह बात मेरी पत्नी काजल को अच्छे से पता थी इसीलिए उसने मुझे कहा कि मैं अपने पिताजी से कुछ पैसे ले लेती हूं लेकिन मैंने उसे मना किया और कहा कि तुम अपने पिताजी से इस बारे में बिल्कुल भी जिक्र मत करना। उसके पिताजी को यह बात अच्छे से पता थी की हमारे घर पर चोरी हुई है और हमारा काफी सामान हमारे घर से गायब है।

आंचल ने मुझे बिना बताये अपने पिताजी से पैसे ले लिए, उसने वह पैसे मुझे दे दिए और कहा कि यह पैसे मैंने अपने खाते में जमा किए थे। मैंने जब उससे पूछा कि क्या वाकई में यह तुमने जमा किए थे, वह कहने लगी हां यह मैंने ही जमा किए थे। मैंने उसे कई बार पूछा कि कहीं तुमने यह पैसे किसी और से तो नहीं लिए हैं, उसने मुझे मना किया और कहा कि नहीं,  यह पैसे मैंने अपनी शेविंग में से ही तुम्हें दिए हैं, जब भी तुम मुझे कुछ पैसे देते तो मैं कुछ पैसे अपने खाते में जमा कर दिया करती थी। उस दिन मैं बहुत खुश हुआ और मैंने काजल को गले लगा लिया, मैंने उससे कहा कि तुम मुझे कितना समझती हो। काजल ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है और हर बार वह मेरा बहुत अच्छे से साथ देती है। मेरे माता-पिता भी काजल से बहुत खुश हैं और उन्हें भी उससे किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं है, वह हमेशा ही मुझे कहते हैं कि तुमने अपने जीवन में एक बहुत ही अच्छी लड़की को चुना है, वह लोग बहुत ही खुश हैं।

उसके कुछ समय बाद मैंने बहुत मेहनत की और अब मेरा कारोबार भी सही चलने लगा है क्योंकि उस घाटे के बाद मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की और अपने आप को सिर्फ अपने काम के प्रति पूरा निछावर कर दिया इसीलिए मैं अपने काम में सफल हो पाया और मेरी सफलता के पीछे कहीं ना कहीं मेरी पत्नी काजल का भी बहुत बड़ा हाथ है, यदि वह उस वक्त अपने पिताजी से मदद नहीं लेती तो शायद मैं अपने नुकसान की भरपाई नहीं कर पाता। उसने काफी समय बाद मुझे इसकी जानकारी दी कि मैंने वह पैसे अपने पिताजी से लिए थे लेकिन मैंने भी उसे कुछ नहीं कहा क्योंकि उसने अच्छे काम के लिए ही पैसे लिए थे। मैंने उसे वह पैसे लौटा दिये और कहा कि तुम यह पैसे अपने पिताजी को दे देना, काजल मुझे कहने लगी कि पिताजी को पैसे देने की क्या जरूरत है, कौन सा वह हम लोगों से पैसे मांग रहे हैं। मैंने काजल से कहा कि तुम इस बात को नहीं समझोगे, तुम सिर्फ उन्हें पैसे वापस कर दो। काजल ने वह पैसे वापस कर दिए थे और उसके बाद से उसके पिताजी की नजरो में मेरी इज्जत भी बहुत बड़ गई, वह मेरी बहुत ही रिस्पेक्ट करते हैं और मेरा बहुत ही सम्मान करते हैं क्योंकि उन्हें मेरे बारे में अच्छे से पता है कि मैंने अपने जीवन में कितनी मेहनत की है, यह सफलता मुझे बहुत मेहनत से मिली है। काजल के पिता जी ने एक दिन मुझे घर पर बुलाया और कहा कि तुमने वह पैसे क्यों लौटाये, मैंने उन्हें कहा कि वह पैसे तो मुझे लौटाने हीं थे क्योंकि आपने मेरे बुरे समय में मदद की थी इसलिए मैंने आपको वह पैसे वापस लौटा दिए। मैं किसी भी प्रकार की मदद नहीं लेता लेकिन काजल ने मुझसे उस वक्त झूठ बोला था इसलिए मैंने वह पैसे रख लिए थे लेकिन जब उसने मुझे बताया कि वह पैसे उसने आप से लोए तो मुझे अच्छा नहीं लगा और मैंने आपको वह पैसे लौटा दिए। काजल के पिताजी मेरी बहुत तारीफ करने लगे, वह कहने लगे की हमने एक सही लड़का चुना है, तुमने जिस प्रकार से अपने बिजनेस को दोबारा से उठाया है, वह बहुत ही कम लोग कर पाते हैं क्योंकि इतना नुकसान होने के बावजूद भी तुमने हिम्मत नहीं हारी और अपने बिजनेस को दोबारा से तुमने पटरी पर ला दिया।

मैंने उन्हें कहा कि मैंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और उसके बाद सब कुछ सही होतो चला गया। काजल के पिता मुझसे बहुत ही खुश रहने लगे और उस दिन के बाद से तो वह मुझसे ज्यादा ही प्रभावित हो गए। एक बार मैं अपने काम के सिलसिले में भोपाल गया, मैं भोपाल में होटल में रुक गया, भोपाल में मैं अपना माल सप्लाई करता था इसीलिए मैं वहां किसी पार्टी से मिलने के लिए गया हुआ था, वह लोग भोपाल के बहुत बड़े व्यापारी हैं। जब मैं उनसे मिला तो वह मुझसे बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे एक अच्छा खासा आर्डर दे दिया, वह मुझसे पूछने लगे की आप कितने दिनों तक भोपाल में रुकने वाले हैं, मैंने उन्हें कहा कि मैं कुछ दिनों तक भोपाल में रहूंगा क्योंकि मुझे और भी काम है। उन्होंने मुझे अपने घर पर आने का न्योता दिया और कहा कि आप हमारे घर पर कल आ जाए, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं कल आपके घर पर आ जाऊंगा, आप मुझे अपने घर का पता दे दीजिए। उन्होंने मुझे अपने घर का पता दे दिया और कहा कि आप कल हमारे घर पर आ जाइए यदि आपको किसी भी प्रकार से रास्ते में कोई दिक्कत हो तो आप हमें फोन कर देना।

मैं उस दिन अपने दूसरी पार्टी से मिलने चला गया और उनके साथ में काफी समय तक बैठा रहा। उसके बाद जब मैं होटल में आया तो मैंने अपनी पत्नी काजल से फोन पर बात की, वह मुझसे पूछने लगी की तुम घर कब आ रहे हो, मैंने उसे कहा कि मैं दो-तीन दिनों में घर आ जाऊंगा। वह मुझसे कहने लगी कि मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है, मैंने उसे कहा कि बस दो-तीन दिन बाद ही मैं घर वापिस लौट आऊंगा। अगले दिन जब मैं संजीव जी के घर गया तो मुझे उनका घर आसानी से मिल गया। जब मैं उनके घर पर पहुंचा तो वह घर पर नहीं थे, वह किसी काम से कहीं बाहर गए हुए थे। मैंने घर की बेल बजाई तो उनकी पत्नी बाहर आई और वह कहने लगी कि संजीव जी कहीं बाहर गए हुए हैं, मैंने जब उन्हें अपना परिचय दिया तो वह कहने लगी कि आप कुछ देर बैठ जाइये, वह मुझे कह कर गए हैं कि जब अजय जी घर पर आए तो आप उन्हें घर पर ही रुकने को कह दीजिए। उन्होंने मुझे पहचान लिया और मुझे घर पर बैठने के लिए कहा, मैं उनके घर पर बैठ गया और संजीव जी का इंतजार करने लगा। मैं काफी देर तक संजीव जी का इंतजार करता रहा और इसी बीच उनकी पत्नी मेरे साथ आकर बैठ गई। जब वह मेरे पास आकर बैठी तो उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी और उस मे उनका बदन अच्छा लग रहा था। उनकी गांड उठी हुई थी और उनके स्तन उनके ब्लाउज से बाहर कि तरफ झाक रहे थे। मैंने उनसे कहा कि आपकी शादी को कितना समय हो चुका है वह कहने लगी हमारी शादी को अभी 1 वर्ष हुआ है। मुझे लगा शायद संजीव जी ने शादी काफी लेट से की होगी क्योंकि संजीव जी की उम्र भी ठीक-ठाक है। उनकी पत्नी की आंखों में मुझे हवस दिखाई देने लगी। जब वह किचन में जा रही थी तो बड़े ही मटकते हुए जा रही थी उनकी गांड मेरे नजरों के सामने थी। जब वह मेरे पास आई तो मेरे सामने ही बैठ गई मैं भी अपने जगह से खड़ा उठ गया और उनके बगल में जाकर बैठ गया। मैंने जैसे ही उनकी जांघ पर हाथ रखा तो उनके शरीर से गर्मी बाहर निकलने लगी। वह मेरे इशार समझ चुकी थी मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। उनके बड़े बड़े स्तन जब मैं दबा रहा था तो वह भी उत्तेजना में आ गई।

मैंने उन्हें वहीं सोफे पर लेटा दिया उनके होठों को मैने काफी देर तक किस किया। मैंने जब उनके ब्लाउज के बटन को खोला तो उनके स्तनों को मैंने अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया और बड़े अच्छे से चूसा। उसके बाद जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उन्होंने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेना शुरू कर दिया और अपने गले के अंदर तक उतार लिया। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस रही थी काफी देर उन्होंने ऐसा ही किया। उसके बाद जैसे ही मैंने उनकी साड़ी को उठाया तो उनकी योनि देख कर मेरा मूड खराब हो गया उनकी योनि से पानी बाहर की तरह निकल रहा था। मैंने जब अपने लंड को उनकी चूत पर टच किया तो धीरे धीरे मैने अपने लंड को उनके अंदर अपने लंड को घुसा दिया। मेरा लंड उनकी योनि के अंदर गया तो वह चिल्लाने लगी। वह मादक आवाज निकाल रही थी और मेरा साथ देने लगी। उन्होंने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया और मैंने बड़ी तेज गति से उन्हें झटके देने शुरू किए। मैं उन्हें बड़ी तेज झटके दे रहा था मै ज्यादा समय तक उनकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया। वह कहने लगी मैं आपके लंड को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हू। जब वह झड गई तो उन्होंने अपने दोनों पैरों से मुझे कस कर जकड लिया और मुझसे कहने लगी मेरा तो झड चुका है आप मुझे ऐसे ही धक्के देते रहिए। मैं भाभी को ऐसे ही चोद रहा था और बड़ी तेजी से झटके मार रहा था। मैंने उन्हें आधे घंटे तक बड़े अच्छे से चोदा आधे घंटे बाद मेरा माल गिर गया। मैंने अपने लंड को उनकी योनि से बाहर निकाला और मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। भाभी ने भी अपने कपड़े ठीक किया उसके बाद संजीव जी घर आ गए और कहने लगे कि आपकी भाभी ने आपको कोई तकलीफ तो नहीं होने दी। मैंने उन्हें कहा नहीं भाभी ने तो मुझे खुश कर दिया। मैं काफी देर तक उनके साथ ही बैठा रहा और उसके बाद में अपने होटल में चला गया।