मेरी चूत का उजड़ा चमन फिर से बसा दो

hindi sex story, desi kahani हेल्लो दोस्तो | चलो कुछ खास करते है मतलब कुछ पुराने कारनामो को सबके सामने उजागर करते है | आप ने अपनी पुरानी लाइफ में क्या किया है ? कुछ ऐसा जिसे जानकार लोग आप पर गर्व करे | ऐसा कार्य करो जिसे करके आप को गर्व हो | दुनिया में बहुत लोग गर्व को पाने में भरोसा करते है | मैंने भी कुछ ऐसा कार्य किया | आज मैं बंगलोरे में रहता हूँ पहले में राजस्थान में रहता था | काम के सिलसिला में बेंगलोर में रहता हूँ | मैंने बेंगलोर में अपना व्यापार शुरु किया है | वहा मुझे आमदनी अधिक है इस कारण से मुझे वहां रहना पडता है | बेंगलोर व्यापार के लिहाज से अत्यधिक शानदार भी है क्योकि इस शहर में बाहर के देशो से आने वालो लोगो के लिए भी बहुत कुछ है |

इसलिए मैं अब कुछ ऐसा किस्सा सुनाना वाला हूँ जिससे सुनकर आप ख़ुशी से नाच उठोगे मैंने एक लड़की को पटाने की लाख कोशिश की लेकिन वह नही पटी | उसके बाद मैंने दूसरी लड़की पर कुछ कोशिश की और उसने भी मुझे कुछ ख़ास महत्व नहीं दिया | मैं भी आपकी तरह एक सीधा सा साधारण सा बन्दा हूँ मैं रोजाना लडकियां पटाने की कोशिश में लग जाता था | लेकिन मैं एक बार भी कोई लड़की को नहीं पटा नहीं पाता था | मैंने एक लड़की को पटाने की पूरी कोशिश की परून्तु कुछ उल्टा हो गया | सब कुछ आजमा लिया पर एक दिन बड़ी मुश्किल से मुझे मौका मिला उसे चोदने का और उसकी चुदाई कर के एक विजेता बन गया में | लेकिन कैसे मैंने उसे हासिल किया | चलो मालूम करते है |

उस लड़की ने मुझे एक बदमाश लड़का समझकर मेरे खिलाफ उसके पापा को बता दिया | उसके पापा ने मुझे बुलाया और मझे उसकी लड़की के आस पास भी ना भटकने की सलाह दे दी | मैंने भी ऐसा कुछ नही करने का वादा करके उसके पापा से विदा ली | उसके पापा ने मुझे धमकी दी और पीटा भी था | उसके पापा की पिटाई का मैंने विरोध भी किया और उसके पापा से छमा भी मांगी थी | उसके बाद मैंने उस लड़की से भी छमा मांगी और उसके बाद मैं ने उससे दोस्ती करने की गुजारिश की |

पर इस चीज़ का उस पर कोई असर नहीं हुआ उसने मुझे कहा हमारी दोस्ती होना मुस्किल है | मैंने उस लड़की से हुई घटने के विषय में मेरी एक बहन को बताया और वह यह सुनकर हसने लगी | अगले दिन जब मैं कॉलेज गया मेरे ग्रेजुएशन का फर्स्ट इयर चल रहा था तब वह लड़की भी वहां आई हुई थी | उसने मुझे देखा और उसका सर दाये तरफ घुमा लिया | वह पल मेरे लिए दर्द भरा था क्योकि वह मुझसे नफरत करने लगी थी | अगली सुबह उठ कर और नये कपडे पहनकर मैं अपने कॉलेज गया और वहां पर मैंने अपनी एक सहेली से उस लड़की के विषय में बताया कि वह मुझसे नफरत करती है | उसकी नफरत को दूर करना के लिए मैंने मेरी सहेली के पैर भी पड़े |

पैर पड़ने पर मेरी सहेली मेरी सहायता करने के लिए तैयार हो गयी है | मैं अपनी खबर कॉलेज की सहेली के द्वारा उस तक पहुँचाया करता था | शुरु में खबर पहुँचाने का सिलसिला हमने सतर्क रह कर किया | बिना सतर्कता के हम बड़े खतरे में आ सकते थे | उस लड़की को अगर हमारे खेल के बारे में मालूम चल जाता तो वो मुझ से दोस्ती नही करती | उस लड़की को बिलकुल मालूम नही चला कि हमने खेल खेला है ताकि दोस्ती हो जाये | उस लड़की का नाम सीमा था और मैं उसके लिए रोजाना कॉलेज जाता था और सीमा भी रोज कॉलेज आती थी | सीमा से दोस्ती करने के खातिर मैंने पूरी तैयार की थी | कॉलेज की सहेली को खर्चा भी देता था ताकि वह मेरे खेल को सरलता से चला सके | हर महीने के इस खेल के लिए मैंने कॉलेज की सहेली के ऊपर करीब दस हजार रुपय खर्च कर दिए | खेल के दौरान उसने मेरी तारीफ की सीमा के सामने | मैं यह खबर भी भिजवाता था कि मैं एक सुधरा हुआ लड़का हूँ | मैं कॉलेज की सहेली से अपनी बड़ाई अलग अलग तरीके से करवाता था | मेरी सहेली यह कहती थी वह कॉलेज भी आता है और खर्चा चलाने के लिए काम भी करता है | इतना कुछ करता है इसलिए उसे सारे लोग एक आदर्श लड़का मानते है | मेरी सहेली उसके बारे में मुझे सब कुछ बताती थी | वह क्या खाती है और उसके कितने भाई और बहन है |

उसने बताया कि सीमा की एक बहन है जो बाहर रहती है और वह डॉक्टर है | वह सीमा और उसके घर वालो से मिलने के लिए छुट्टी पर आती थी | उसका बड़ा भाई भी एक ठेकेदार है जो बाहर रहता था | सीमा उसके घर की सबसे छोटी लड़की थी | वह रोजाना कॉलेज आती थी और उसका भी फर्स्ट इयर चल रहा था | हमारे कॉलेज की गर्मियों की छुट्टी होना वाली थी इसलिए मैं वक्त रहते उससे दोस्ती करने की कोशिश कर रहा था | लेकिन सीमा से दोस्ती कर पाना मेरे लिए एक तरीके से सरल तो हो गया था लेकिन वक्त लग रहा था | इतना कुछ करने के बाद भी सीमा से मेरी दोस्ती नही हो पाई थी | सीमी मुझ से पर अब नफरत नहीं करती थी | जब वह मुझे देखती थी तो घूरती रहती थी | मेरी सहेली अक्सर मुझसे मिलने के लिए सीमा को सलाह देती थी लेकिन सीमा कभी भी मुझ से मिलने के लिए हाँ नहीं करती थी |

मैंने उससे पहचान बनाने की पूरी कोशिश की परुन्तु मैं उससे पहचान नहीं बना पा रहा था | क्यूंकि वह मुझ से सिर्फ एक अनजान की तरह बरताव करती थी | मैं वैसे भी उसके लिए एक अनजान ही तो था | जिसने उसे पटाना के लिए शुरुआत में घूरा और उसके पापा ने उसे पीटा इसके आलावा दूर रहने की धमकी भी दी | इतना कुछ यह दरशाता है कि मैं उसके लिए एक अनजान था | लेकिन मुझे पूरा भरोसा था की मैं उसे एक दिन पटा लूंगा और इसलिए मैंने रोज कुछ नया करने कि कोशिश की | अब मैंने उसे हसाने का खेल खला ताकि वह मुझ से मिलने के लिए तैयार हो जाये | मैं अक्सर कुछ नया करता था जैसे अपनी गाड़ी का स्टैंड लगाये बिना उसे गिरा देता था ताकि वह हसने लगे और वह हस्ती भी थी |

मैंने फिर कुछ नया किया जैसे अपने रूपए गिराकर उसे खोजने के लिए इधर उधर देखता था ऐसा करना मेरे लिए उसे एक सही इशारा पहुंचता था | क्योकि मैं अक्सर उसके पास में अपने पैसे गिरा देता था | वह सिर्फ हस्ती थी लेकिन मेरे पैसे उठाकर मुझे नहीं देती थी | मैं अक्सर यह तरीका खोजने में लगा रहता था की मैं कैसे उससे दोस्ती करूँ | खेल में मैंने सारे तरीके अपनाए लेकिन मुझे सफलता नहीं मिल रही थी | मैंने कुछ ऐसे करने का तय किया जिससे सब कुछ सरल हो जाये | उसके पापा से दोस्ती करने के लिए मैंने खेल खेला और अब की बार सब तयारी कर के इस खेल को खेला | मुझे मालूम था की मैं सफल हो सकता हूँ इसलिए मैंने उसके पापा के पास पहुंचकर एक रुमाल गिरा दिया और उसे उठाकर उसके पापा को दिया | उसके पापा ने मुझे पहचान लिया और उन्होंने मुझ से कहा ये मेरे रुमाल नहीं है कोई और का होगा | मैंने जोर देते हुआ कहा यह आप का है ले लो | वरना मैं भी नहीं लेने वाला | आखिर मैंने रुमाल को ले लिया पर मुझे खेद था कि मैं कुछ ख़ास नही कर पाया था क्योकि सीमा के पापा से मेरी दोस्ती नहीं हो पाई थी | मैं उसके पापा की सहयता करने में लगा हुआ था ताकि मुझे एक मौका मिल जाये कुछ ख़ास पहचान बनाने का | अगर मैं रूपए गिराता तो उसके पापा को मालूम चल सकता था की मैं खेल रचा कर उन्हे फासने की कोशिश कर रहा हूँ क्योकि उनकी लड़की को हँसाने के लिए भी मैं ऐसा ही कुछ पैतरा अपना चूका था | मैंने अपने एक दोस्त की सहायता लेने का फैसला लिया और उसे एक खेल की तहत मैंने उसे उसके पापा से दोस्ती करने के लिए भेजा और मेरे खेल वाले दोस्त ने उसके पापा से दोस्ती कर ली | मैंने एक कंपनी शुरु करने का नाटक किया और किराये का कमरा ले कर एक कंपनी शुरु भी कर ली |

मेरे कंपनी में कुछ भीड़ भी रहती थी और वह लोग इसलिए आते थे क्योकि वो मालूम करने की कोशिश करते थे कि कम्पनी में कार्य क्या होता है ? मेरे दोस्त तय खेल के दौरान सीमा के पापा को मेरी कंपनी में लाया | हमने उस के पापा को कंपनी में लम्बी सी बैटने वाली कुर्सी में बैठा दिया | मेरा दोस्त उसके पापा के बाये तरफ की कुर्सी में बैठा था | फिर मैं साहब की तरह कंपनी के अन्दर से बाहर आया और उसके पापा को बिना देखे बाहर निकल गया | फिर लौटकर आया और कंपनी के अन्दर घुसा | उसके पापा को नमस्ते किया और उसके पापा के लिए चाय और समोसा भी मंगवाया | बस ये काम मेरा हो गया और अगले दिन ना जाने कैसे लड़की अपने आप सेट |

उसके बाद मेरा मुख्या मकसद जो चुदाई था वो पूरा होने वाला था और मैंने उसके लिए उसको अपने घर पर बुलाया | वो अच्छी लड़की थी इसलिए शायद दिक्कत हो रही थी पर मैंने मौका देखकर उसको किस कर लिया | मुझे लगा अब सब खत्म पर उसने शर्मा के मेरा हौंसला बुलंद कर दिया | मैंने भी उसको बाहों में भरा और सोफे पर ही उसके कपडे उतारना शुरू कर दिए और उसको किस करता रहा | वो भी मुझे छू रही थी | मेरा खड़ा लंड उसके सामने था पर मैं उसे उसके मुंह में नही दे सकता था | इसलिए मैंने उसे वहीँ लिटाया और उसकी चूत में हलके से लंड घुसा दिया | वो चीख पड़ी पर मैंने उसको धीरे धीरे चोदना चालु रखा |

उसकी चूत से खून भी निकल रहा था | पर उसके बाद भी वो मुझसे कह रही थी आराम से चोदो मुझे | मैं आराम से करते करते तेज़ हो गया और उसकी छूते के छेद को फाड़ने लगा | मेरा मोटा लम्बा लंड उसकी बच्चेदानी तक जा रहा था और वो मदहोशी में चुदवा रही थी और चुदते वक़्त अपने छोटे छोटे दूध मसल रही थी | उसकी सुरीली और मादक आवाज़ ने मुझे चोदने पर मजबूर कर रखा था और चोदते चोदते मैंने उसकी चूत में ही अपना माल गिरा दिया | पर उसने उठ के उसे साफ किया और कहा कोई दिक्कत नही |