लौड़ा छोड़ के हस्ती हो मेरा चुदाई मेरी याद करोगी

hindi sex story, antarvasna सुप्रभात दोस्तो | मैं आज अपने भांजे की एक हसीन घटना आपके लिए प्रकासित करने जा रहा हूँ | मेरे दस भांजे है और सारे भांजों की अपनी अलग कहानी है | मैं फिलहाल अपने बड़े भांजे की कहानी आपके सामने पेश करने वाला हूँ मेरा बड़ा भांजा वैसे तो सीधा सादा लगता है | परुन्तु वो वह कारनामा भी कर लेता है जो करने में अन्य लोग डरते है | मेरा बड़ा भांजा बहुत बेशर्म है | वह देहात के तालाबो में नंगा तक हो कर नहा चूका है | उन लोगो के लिए एक प्रेरणा भी है जो कुछ भी नया करने में शर्माते है | शर्माना वैसे तो एक उन्नति में रुकावट की वजह भी है | एक बार जब नंगा हो कर तालाब में नहा रहा था तभी वहा एक लड़का आ गया और वह भैसों को घुमा रहा था | उसने अपनी भैसे पानी में उतार दी | फिर क्या था भैसे पुरे पानी में इधर उधार घुमने लगे | उसे मजबूर हो कर पानी से बहर आना पड़ा | वहा पर लडकियां भी थी और मैं कुछ खरीदने के लिए देहात की तरफ गया था | उसे पानी से बाहर नंगा आना पड़ा | लडकियां और वहा पर मौजूद लोग उसे देखकर हसने लगे | मेरा भांजा इधर उधर भागकर कपडे खोज रहा था | क्योकि कपडे भी मैं अपने साथ ले आया था | उसने एक सज्जन से तोलिया मांगी और पहन कर उसका नंगापन छिपाया | लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ा अगली सुबह उठकर वो फिर नहाने के लिए पूरी तरह से नंगा हुआ और तालाब में नंगा हो कर नहाया | वहा एक लड़की ने उसे नंगा हो कर पानी में घुसते हुआ देख लिया था | उसने उसकी सहेलियो को बुलाया और वे सब कपडे धोते हुए हसने लगी | हम भी उन्हे देखकर हस्ते थे | लडकियां के हसने पर भी वह बेशर्मी रहता था और पानी में डुबकी लेने लगता था | उसने बेशर्मी की हद पार कर दी थी | उसे देहात के लोग बेशर्म बन्दे के रूप में पहचानते थे | उसने देहात में एक लड़की को पटाया भी था | इसलिए शहर को छोड़ कर वह एक महीने तक देहात में रहने के लिए आया था | वैसे तो उस शहर में उसका रोजगार था | वह अलग रोजगार नहीं करता था | वह सिर्फ एक रोजगार करता था और उतने में इतना कमा लेता था कि उसको बाकी के महीनो में छुट्टी व्यतीत करना मुश्किल नही पड़ता था |

मेरा बड़ा भांजा उसकी पटाई हुई लड़की को चोदता भी था | उसने देहात में उसकी गर्लफ्रेंड को झाड़ियो के पीछे ले जा कर चोदा था | मैं भी चुदाई के वक्त वहां उसे सतर्क करने के उद्देश्य से मौजूद रहता था | जब चुदाई चल रही होती थी तब मेरे बड़े भांजा का लंड उस लडकी की चूत के अन्दर घुसा हुआ था | मेरे भांजे ने उसके लम्बे लंड से उस लडकी की चुदाई की थी | चुदाई के दौरान मेरे भांजे ने उस लडकी को उसका लंड पकड़ा दिया | वो लडकी फिर उस लड़का का लंड लेकर चूसने लगी | कुछ समय तक उसके लंड को चूसने का सिलसिला चलता रहा | कुछ देर बाद लंड से माल गिरने लगा | मेरे भांजे को सलाह देने पर भी वह नही बदलता था और मेरे सामने उसकी गर्लफ्रेंड को चोदता था | हम लोग देहात में हमारी जमीन में रहते थे और हमारा कई सारे खेत है | उसने खेत में उसकी गाडी में बैठाल कर एक लड़की को लाया | दरसल यह कोई दूसरी लड़की थी और उसने रूपए देकर उसे घुमाने के लिए लेकर आया था | क्योकि वो धंधा करने वाली लड़की थी इसलिए उसने इस कारनामें को सरलता से कर पाया | चुदाई के वक्त मैं रखवाली कर रहा था | मैंने लड़की से पुछा तुम कितने रूपए लेती हो एक दिन का | उसने जवाब दिया मैं 500 रूपए लेती हूँ | हमारा देहात सबके लिए एक बहुत बढ़िया स्थान है क्योकि यहाँ पर सारी सुविधा मौजूद है अगर आपको रहना है तो | भले ही हम देहात में रहते है लेकिन हमे ऐसा लगता है हम शहर में रहते है | आपको बिजली की सुविधा मिलेगी बिजली से ले कर दवाई तक और अस्पताल भी हमारे देहात में है |

देहात में बीमार होने पर मैं अस्पाताल में भर्ती भी हुआ | वहां पर मुझ से मिलने उसकी गर्लफ्रेंड आई हुई थी लेकिन वह उसकी सहेली के साथ आई थी | उसने मुझे कुछ फल दिए ताकि मुझे कुछ फायदा पहुंचे | मेरे रिश्तेदार आये हुए थे उन्होंने मेरे लिए संतरे और अंगूर भी लाये थे | उसकी गर्लफ्रेंड को मैंने संतरा दिया और उसने मुझे धन्यावाद दिया | अंगूर भी उसने खाए और उसके बाद मेरा भांजा भोजन ले आया | मैंने उसकी गर्लफ्रेंड को अपने हिस्से का थोडा सा भोजन दिया और मुझ से मिलने आये लोग ने भी थोडा कुछ खाया | अस्पताल का वक्त मेरे लिए बहुत बोर होने वाला था क्योकि आस्पताल से बाहर जाने की अनुमती नहीं थी | नहीं मालूम उसकी गर्लफ्रेंड क्यों अक्सर अस्पाताल आती थी | ऐसा भी हो सकता था मेरे बहाने वो मेरे भांजे से मिलने आती थी | लेकिन मेरा भांजा मेरे भोजन की व्यवस्ता में लगा रहता था और उसकी गर्लफ्रेंड के पहुचने के बहुत देर बाद अस्पाताल पहुचता था | पहले भोजन देने के बाद वह उसकी गर्लफ्रेंड से दुनिया भर की बाते करता था | वह लड़की हमारे लिए एक परिचित के सामान हो गयी थी | वह देहात में ही रहती थी लेकीन मुझ से मिलने के बाद और हमारे रिश्तेदारो से आधिक घुलने के कारण वह हमारे शहर में भी घुमने का वादा भी करती थी |

जब मैं स्वस्थ्य हुआ तो हमारा रिश्तेदार ने उसकी गर्लफ्रेंड को हमारे शहर रीवा चलने का अनुरोध किया और उसके साथ दूसरी लडकियां जैसे उसकी सहेलिया भी हमारे साथ आई | हमारे रिश्तेदारों ने हमारे लिए तीन कारो की व्यवस्था की | हम लोग कार में बैठकर रीवा की तरफ चल पड़े | रीवा शहर रह्वासन के लिए एक उत्तम स्थान है लेकिन भारत के अन्य शहरो के मुकाबले रीवा उतना कुछ नहीं | भारत के कुछ प्रमुख शहरो में भी उसकी गर्लफ्रेंड मेरे रिश्तेदारो के साथ घूम चुकी है जैसे सतना, बिलासपुर, रायपुर, इत्यादी | मेरा भांजा वैसे तो बेशर्म है लेकिन कामकाजी भी है मतलब खास कार्य आने पर सब कुछ छोड़ कर ख़ास कार्य जैसे किसी को अस्पाताल लेना और उसके लिए सारी व्यवस्ता करना वह इस कार्य को सबसे अधिक महत्व देता था | मुझे कुछ कार्य की वजह से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना पडता है | इसलिए मैं अपने भांजे को ले कर जाता था | मैं एक बार सतना गया हुआ था और बीमार पड़ गया था तब उसने मेरे लिए वक्त पर दवाई लाई और भोजन उपलब्द करवाया था | ऐसा नहीं है क्यूंकि उसने यह सीख मुझ से ही पायी है मैंने ही उसे सिखाया है कैसे अपने बुजुर्गा और छोटा को तकलीफ होने पर उनकी सहायता करना | मेरा भांजा भी जब बीमार हो जाता तो मैं उसकी दवाई करवाता था | जब वह छोटा था तो सतना में उसकी तबियत बिगड़ गयी थी और उसकी तबियत में सुधार नही आ रहा था | तब मैंने उसके लिए यहाँ वहां भागा दौड़ी की थी यह सब उसको मालूम है तभी वह मेरे और हमारे रिश्तेदारो के लिए बीमार पड़ने पर दवाई की व्यवस्था और सेवा करता है |

दुसरे लोग उसे बेशर्म के रूप में पहचानते हो क्योकि वो देहात में हरकत ही कुछ बेशर्म वाली करता है लेकिन हमारे रिश्तेदारो के लिए वह एक मजबूत नीव की तरह है जो वक्त पड़ने पर हमेशा सहायता प्रदान करता है | उसकी तुलना में अभी तक कोई दूसरा भांजा नहीं है | भले दस भांजे है परुन्तु हुनर सिर्फ एक में है और वह सबसे बड़े भांजे में ही है | हम एक दिन रीवा मेरे कार्य के वजह से गए थे और हम दोनों उधर पर किराये के कमरे में रुके हुए थे उसने फिर एक धंधे वाली लड़की लाई थी तभी मैं किराये के कमरे से बाहर निकल रहा था | तभी वह उसे ले कर खडा था | वह उसे किराये के कमरे में घुस रहा था तो मैंने उसे रोका और लड़की को बाहर रहने को कहा और मेरे भांजे को उसको ले जाने के लिए कहा | मेरे समझाने के कारण उस दिन के बाद से उस में फर्क आया | अगर वह उस दिन उसे धंदे वाली लड़की को चोदता तो सब कुछ समाप्त हो सकता था | क्योकि अगर उस को कोई पकड लेता और उस वक्त में भी आस पास घूम रहा था |

अगर उसकी बदनामी होती तो मेरी भी बदनामी होती | इस बदनामी के भय से मैं ने उसको समझाया और ऐसा करने पर मुझे बहुत लाभ हुआ | मैं  कुछ दिन बाद मेरे भांजे से दूरी बनाने लगा क्योकि वह बेशर्म था और उसके खुलेपन की हरकतों से मुझे कभी भी तकलीफ झेलने पड़ सकता था | एक दिन वो लडकी को लेकर खेत पर चुदाई कर रहा था | जब वो लडकी को खेत पर चोद रहा था तब उसने उस लडकी की गांड के अन्दर उसका लंड घुसेड़ा हुआ था | उसके बाद उस लडकी ने उसका लंड अपने हाथ से पकडकर उस लडकी के गांड के अन्दर मेरे भांजे का लंड डाल लिया | मेरा भांजा उस लडकी को चोदने के लिए धक्के दे रहा था | उसकी चूत से टपकता हुआ रस मुझे भी उत्तेजित कर रहा था और उनकी मादक प्रक्रिया को देख कर मेरा लंड भी खड़ा हो चूका था | मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाला और अपने लंड को हिलाने लगा | उसके बाद मेरे भांजे ने उस लड़की को उल्टा किआ और उस लड़की की गांड में अपने लंड का प्रवेश करवा दिया | बस फिर क्या था वो चिल्लाने लगी और इधर मैं हिलाने लगा | मेरे लंड का टोपा मोटा था इसलिए मेरे लंड से हल्का सा खून निकल आया पर मुझे सेक्स चढ़ा हुआ था इसलिए मुझे कोई फर्क नही पड़ा | पर मेरे भांजे ने मुझे देख लिया और कहा मामा आओ इसकी चूत मारो | मैं तुरंत पहुंह गया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उसके दूध दबाने लगा |

अब दो लंड से वो रंडी चुद रही थी और हम तीनो को मज़ा आ रहा था | आधे घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गए और उसके बाद ना जाने क्या बदलाव आ गया हमारे अन्दर | अब वह नहाता तो है लेकिन नंगा नहीं होता है | इस तरह मैं और वह भी बदनाम नहीं हो पाते | मेरी राय ने उस पर बहुत फर्क लाया है और उसी के बदौलत आज सब कुछ सरल हो गया है |