चाचा की लड़की को दुकान के कमरे में रगड़ दिया

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मेरा नाम रोहन है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं, मेरे पिताजी का कपड़ों का कारोबार है और वह कपड़ों का काम करते हैं। उनकी बहुत बड़ी दुकान अहमदाबाद में है, वह काफी समय से उसे चला रहे हैं। मैं भी अपने पिताजी के साथ दुकान में रहता हूं। हम लोग सूरत से साड़ियां लाते हैं और साड़ियों को अपनी दुकान पर लाकर बेचते हैं। हम लोग बहुत ही कम मार्जिन पर अपने कस्टमर्स को साड़ियां बेचते हैं, जिससे कि वह लोग सिर्फ हम से ही साड़ी लेकर जाते हैं। मेरे पिताजी के बहुत ही पुराने कस्टमर हैं जो उनके पास से काफी समय से साड़ियां लेकर जा रहे हैं और धीरे-धीरे हम लोगों ने लड़कों के कपड़े भी रखना शुरू कर दिया इसीलिए मैं भी पिताजी के साथ ही दुकान पर बैठा करता था।

एक दिन मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि तुम्हारे चाचा का फोन मुझे आया था और वह अपना कुछ नया काम खोलना चाह रहे हैं यदि तुम उनके साथ काम करो तो तुम्हारे लिए भी अच्छा रहेगा। मेरे चाचा मुंबई में रहते हैं और वह वहीं पर कोई नया काम खोलने वाले थे इसीलिए मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं उनके साथ मुंबई चला जाऊं। मेरा छोटा भाई भी अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुका है और मेरे पिताजी के साथ काम करने लगा था इसी वजह से मेरे पिताजी कहने लगे कि तुम अपने चाचा के साथ ही चले जाओ और वहीं पर तुम नया काम शुरू कर दो। मैंने अपने पिताजी से पूछा कि क्या चाचा अहमदाबाद आने वाले हैं, वह कहने लगे कि कुछ दिनों बाद तुम्हारे चाचा अहमदाबाद आएंगे तो उनसे घर में ही बात कर लेना। मैं भी अब अपने पिताजी के साथ ही काम पर लगा हुआ था। एक दिन मेरे चाचा का फोन आया और वह कहने लगे कि मैं अहमदाबाद आ रहा हूं। कुछ दुनो बाद वह अहमदाबाद आ गए तो हम लोगों ने उस दिन बिजनेस के बारे में बात की। मेरे चाचा कहने लगे कि मैं भी अब मुंबई में साड़ियों को काम शुरू कर रहा हूं और मैंने एक शोरूम में जगह भी ले ली है। मेरे चाचा इससे पहले एक बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी करते थे परंतु अब वह रिटायर हो चुके हैं इसलिए वह यह सोच रहे हैं कि क्यों ना हम लोग मुंबई में ही कुछ काम शुरू करें। मेरे चाचा की एक ही लड़की है, उसका नाम रीमा है।

मेरे चाचा को कुछ ना कुछ काम करते रहना अच्छा लगता है इसीलिए उन्होंने इस बारे में मेरे पिताजी से बात की थी और मेरे पिताजी भी इस बात को मान गए कि हम लोग काम शुरू कर सकते हैं, उन्होंने इस काम के लिए हामी भर दी। चाचा भी बहुत खुश हो गए और कहने लगे कि ठीक है हम लोग अब काम शुरू कर देते हैं, तुम एक बार मुंबई में आकर लोकेशन देख लेना और हम लोग उसको किस तरीके से शुरू करेंगे वह भी हम लोग मुंबई में ही बात कर लेंगे। उन्होंने मेरे पिताजी से भी कहा कि आप भी आजायेगा और एक बार मुंबई में वह लोकेशन देख लीजिए क्योंकि मेरे पिताजी को बहुत अच्छा अनुभव है इसीलिए मेरे चाचा ने उन्हें मुंबई आने के लिए कहा। मेरे चाचा कुछ दिनों तक अहमदाबाद में हीं थे और वह पिताजी के साथ रहकर काम देखने लगे। पिताजी जिस प्रकार से अपने कस्टमर को देखते हैं वह सब मेरे चाचा देख रहे थे और वह काफी दिनों तक हैदराबाद में ही रुक गए। मेरे चाचा कहने लगे मैं अब मुंबई चालता हूं क्योंकि मुझे काफी दिन हो चुके हैं। तुम्हारी चाची और रीमा घर में अकेले होंगे इसलिए मैं मुंबई चले जाता हूं और तुम कुछ दिनों बाद मुंबई आ जाना। मैंने चाचा से कहा ठीक है आप चले जाइए, हम लोग कुछ दिन बाद मुंबई आ जाएंगे। मेरा छोटा भाई भी अब दुकान देखने लगा था इसलिए मेरे पिताजी को कोई भी दिक्कत नहीं थी। वह मुझे कहने लगे हम लोग मुंबई चलते हैं और वहां पर तुम्हारे चाचा ने जो जगह ली है वह हम देख लेते हैं। मेरे पिताजी ने चाचा को फोन किया और कहने लगे कि हम लोग मुंबई आ रहे हैं, चाचा कहने लगे ठीक है आप लोग आ जाइए। उसके बाद हम लोग मुंबई चले गए, जब हम लोग मुम्बई गए तो मैं काफी समय बाद अपनी चाची और रीमा से मिला था। मुझे उनसे मिलकर बहुत ही खुशी हुई और वह लोग भी मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए। मेरी चाची मुझसे कहने लगी कि तुम तो बिल्कुल भी नहीं बदले हो, तुम पहले जैसे ही हो। मैंने भी अपनी चाची से कहा कि आप भी बिल्कुल पहले जैसी ही हैं, आपके अंदर भी बिल्कुल बदलाव नहीं आया है।

हम लोग काफी समय के बाद मिल रहे थे इसीलिए वह लोग भी बहुत खुश थे और रीमा भी मुझसे मिलकर बहुत खुश थी। हालांकि रीमा मुझसे छोटी है लेकिन फिर भी वह मुझसे खुलकर बात करती है। मैंने रीमा से पूछा, क्या तुम्हारा कॉलेज खत्म हो चुका है, वह कहने लगी हां मेरा कॉलेज इसी वर्ष कंप्लीट हुआ है। मैंने रीमा से कहा कि फिर तो तुम भी हमारे साथ काम में मदद कर पाओगी, वह कहने लगी हां जब आप का काम शुरू हो जाएगा तो उसके बाद मैं भी आपके साथ मदद कर दिया करूंगी। उस दिन हम लोग घर पर ही थे और अगले दिन मेरे चाचा मुझे और मेरे पिताजी को वह लोकेशन दिखाने ले गए। उन्होंने एक बहुत बड़े कंपलेक्स में जगह ले ली थी। जब हमने वह लोकेशन देखी तो हमें बहुत पसंद आई। मेरे पिताजी बहुत खुश हुए और कहने लगी कि यहां पर तो काफी भीड़ भाड़ है और यहां पर तुम लोगों का काम अच्छे से चलेगा। मेरे चाचा कहने लगे ठीक है मैं यहां पर कुछ दिनों में काम शुरु करवा देता हूं। मेरे पिताजी ने मेरे चाचा को अच्छे से समझा दिया कि किस प्रकार से दुकान को सेट करना है और मेरे चाचा ने वह सब अपनी डायरी में नोट कर लिया। उसके बाद मेरे पिताजी अहमदाबाद लौट गए और मैं अब अपने चाचा के साथ ही काम करवा रहा था।

अब हम दोनों ने ही पूरी दुकान का काम करवा दिया। हम लोगों ने अपने पिताजी को फोन किया, उसके बाद मेरे पिताजी ने सूरत से साड़ियों का आर्डर हमारे पास भिजवा दिया। अब हमने काम शुरू कर दिया था और काम भी अच्छे से चलने लगा, बाद में तो इतने कस्टमर हमारे पास नहीं आ रहे थे लेकिन फिर भी हमारा काम ठीक चल रहा था। रीमा भी कभी कभी दुकान में आ जाती थी क्योंकि वह खाली रहती थी इसीलिए दुकान में आ जाती थी। मेरे चाचा भी बहुत खुश है क्योंकि जिस प्रकार से दुकान का रिस्पॉन्स मिल रहा था, इतनी उम्मीद उन्हें भी बिल्कुल नहीं थी। एक दिन हम लोग आपस में बैठकर ही बात कर रहे थे कि दुकान का काम अच्छे से चल रहा है। मेरे चाचा कहने लगे कि मुझे इतनी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी, जितनी बिक्री दुकान में हो रही है। हम लोगों ने कुछ लोग काम पर रखे हुए थे और वह भी काम अच्छे से कर रहे थे। हमने एक कमरा अपने लिए अंदर बनाया हुआ था।  उसमें हम लोग दोपहर के वक्त आराम करते थे। जब मेरे चाचा दुकान में रहते तो वह कुछ देर आराम कर लिया करते थे। कभी तो रीमा भी उस कमरे में बैठकर आराम कर लेती थी। हम लोग दोपहर का खाना भी वहीं बैठकर खाते थे। मेरे पिताजी भी बीच में कभी कबार मुंबई आ जाते थे और वह देखते थे कि काम किस प्रकार से चल रहा है। वह भी बहुत खुश है क्योंकि काम बहुत अच्छा चलने लगा था इसीलिए वह कहने लगे कि अभी और भी अच्छी तरीके से तुम्हारा काम चल पड़ेगा यदि तुम इसी प्रकार से कस्टमर्स को अच्छा सामान देते रहोगे। हम लोग मुंबई में भी बहुत कम दामों पर सामान दे रहे थे इसलिए हमारे पास अब काफी कस्टमर हो गए थे और वह हमसे ही सामान लेकर जाते थे। रीमा भी अब दुकान में काफी बैठने लगी थी और वह दुकान का सारा काम संभालने लगी।एक दिन मेरे चाचा और रीमा दुकान में थे उस दिन मैं भी दुकान का काम संभाल रहा था लेकिन मेरे चाचा की तबीयत खराब हो गई। वह कहने लगे कि मैं घर जा रहा हूं तुम दोनों दुकान का काम संभाल लेना। हम दोनों ही दुकान का काम संभाल रहे थे दोपहर के वक्त हम लोग कमरे में चले गए क्योंकि दोपहर में कोई भी कस्टमर नहीं था इसलिए हम दोनों ही आराम करने लगे। रीमा लेटी हुई थी और मैं उसके बगल में ही बैठा था।

मै रीमा की गांड को दबाने लगा मुझे उसकी गांड दबाना अच्छा लग रहा था। वह भी उठ गई और उसे भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ उसने भी मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरे लंड को बाहर निकलते हुए अपने मुंह के अंदर समा लिया। रीमा ने जब मेरे लंड को अपने मुंह में समा लिया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। काफी देर तक उसने मेरे लंड को सकिंग किया और उसके बाद जब हम दोनों ही पूरे मूड में थे। मैंने रीमा के कपड़े उतारे तो उसका बदन बड़ा ही सेक्सी था उसकी गांड पूरी बाहर की तरफ निकली हुई थी और उसके स्तन भी बड़े टाइट थे। मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू कर दिया और उसके चूचो पर मैंने दांत भी मार दिया। अब मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसने भी अपने दोनों पैर चौडे कर लिए और जब उसने अपने दोनों पर चौडे किए तो मैंने उसकी चूत पर अपना लंड लगा दिया उसे बड़ा अच्छा महसूस हुआ अब मैं उसे बड़ी तेजी से चोदे जा रहा था। उसे भी अच्छा लग रहा था जब मैं उसे चोद रहा था वह बहुत चिल्ला रही थी और अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी। वह मेरा पूरा साथ देती और अपने मुंह से मादक आवाज निकाल कर मुझे अपनी तरफ आकर्षित करती। कुछ देर बाद मैंने उसे घोडी बना दिया घोड़ी बनाते ही मैंने जैसे उसकीचूत मे लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी। मैंने उसकी गांड को कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। मैंने उसे इतनी तेज झटके मारे की मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था और उसकी चूत से खून बाहर आने लगा था। उसकी योनि टाइट थी मैं ज्यादा समय तक उसकी टाइट चूत को बर्दाश्त नहीं कर पाया मैंने उसकी योनि से अपने लंड को बाहर निकालते हुए रीमा के मुंह में डाल दिया उसने बहुत अच्छे से मेरे लंड को  सकिंग करना शुरू कर दिया जैसे ही मेरा वीर्य रीमा के मुंह में गिरा तो उसने सारा ही माल अपने अंदर ले लिया।