हम दोनों भाइयों ने दोनों सहेलियों को एक साथ बजाया

kamukta

मेरा नाम रमेश है मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है और मैं पटना में ही काम करता हूं। मेरे पिताजी एक सरकारी कर्मचारी हैं और वह कुछ समय बाद रिटायर होने वाले हैं। मेरा काम भी अच्छे से चल रहा है और मेरे घर पर सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है परंतु उसी बीच में मेरे भाई हरीश का फोन आता है और वह मुझे कहता है कि तुम मेरे पास कुछ समय के लिए बेंगलुरु आ जाओ, मैंने उससे पूछा कि मैं बेंगलुरु आकर क्या करूंगा, वह कहने लगा कि मुझे काफी अकेला महसूस हो रहा है यदि तुम मेरे पास आ जाओगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा इसलिए मैं सोचने लगा कि मैं उसके पास चला जाऊं। मैंने अपने पिताजी से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे यदि तुम्हें बेंगलुरु जाना है तो तुम चले जाओ क्योंकि काफी समय से हरीश भी हमसे मिलने नहीं आया है और तुम उसके हाल चाल देख लेना, मेरी मां भी कहने लगी कि तुम उसके पास कुछ दिनों के लिए हो आओ।

मैंने अब अपने ऑफिस में कुछ दिनों की छुट्टी ले ली, मैं अपने ऑफिस से बहुत कम ही छुट्टी लेता हूं क्योंकि मुझे कभी भी ऐसा कोई काम नहीं होता कि मुझे कहीं छुट्टी लेकर जाना हो यदि घर का कोई काम होता है तो वह मेरे पिताजी कर लेते हैं। हरीश भी काफी समय से बेंगलुरु में रह रहा है, वह मुझसे दो वर्ष छोटा है और वह बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पिताजी ने उसे पढ़ने के लिए बेंगलुरु भेज दिया था, उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई भी बेंगलुरु से की और उसके बाद वह वहीं पर नौकरी करने लगा लेकिन मेरे दिमाग में यह बात घूम रही थी की हरीश ने मुझे बेंगलुरु फोन कर के क्यों बुलाया, मैं बहुत चिंता में था और जब मैंने उसे पूछा तो वह मुझे कुछ भी नहीं बता रहा था और कह रहा था बस तुम मेरे पास कुछ दिनों के लिए आ जाओ। मैंने अपनी ट्रेन की रिजर्वेशन करवा लिया और उसके बाद मैं हरीश के पास कुछ दिनों के लिए चला गया। जब मैं हरीश के पास पहुंचा तो वह घर पर ही था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम आज अपने ऑफिस नहीं गए, वह कहने लगा कि मैं आज अपने ऑफिस नहीं गया क्योंकि मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। मैंने उससे पूछा कि तुमने मुझे क्यों बुलाया, वह कहने लगा कि मैं बहुत परेशान हूं।

मैंने उसे पूछा कि तुम किस प्रकार से परेशान हो, तुम्हारी नौकरी भी अच्छे से चल रही है और घर में सब लोग कुशल मंगल भी हैं। वह कहने लगा कि मेरा एक लड़की के साथ अफेयर चल रहा था लेकिन अब उसके घर वाले उसकी शादी कहीं और कर रहे हैं इसलिए मैं बहुत ही परेशान हो गया हूं। वह लड़की भी मुझसे शादी करना चाहती है परंतु उसके घर वाले मुझसे उसकी शादी नहीं करवाना चाहते। मैंने उस लड़की का नाम पूछा तो उसने कहा कि उसका नाम आकांक्षा है और वह मेरे ऑफिस में काम करती है। मैंने उसे बोला कि इसमें परेशान होने वाली कौन सी बात है, तुम सब्र रखो सब ठीक हो जाएगा। वह कहने लगा कि कैसे ठीक हो जाएगा, मैंने उससे कहा कि अब मैं आ गया हूं, मैं उससे बात कर लूंगा और उसे समझा दूंगा। हरीश मुझसे कहने लगा कि आकांक्षा तो मुझसे शादी के लिए तैयार है परंतु उसके घरवाले बिल्कुल भी तैयार नहीं है, वो कह रहे हैं कि तुम हमारी लड़की के लायक बिल्कुल भी नहीं हो। मैंने उनसे पूछा कि मैं एक अच्छी नौकरी करता हूं और मेरे घर से भी सब लोग सम्पन है, उसके बावजूद भी आप मेरी शादी आकांक्षा से नहीं करवाना चाहते। वह कहने लगे कि हमने आकांक्षा के लिए लड़का पहले से ही देखा हुआ है और हम नहीं चाहते कि तुम्हारी शादी हम आकांक्षा से करवाएं। मैंने अपने भाई को समझाया और उसे कहा कि तुम अपने काम पर ध्यान दो, मैं कुछ दिनों के लिए तुम्हारे साथ ही हूं, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो और हम लोग आकांक्षा से बात कर लेंगे। वह कहने लगा मैंने ऑफिस से  कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले रखी है मैं ऑफिस भी नहीं जा रहा हूं और घर पर ही हूं। मैंने हरीश को कहा कि तुम अपने काम पर जाते रहो उससे तुम्हारा मन लगा रहेगा। वह कहने लगा कि मैं जब भी आकांक्षा को देखता हूं तो मुझे उसे देखकर लगता है कि यदि उसकी शादी किसी और के साथ हो गई तो मैं अपना जीवन कैसे बिता पाऊंगा। मैंने हरीश से कहा कि तुम इस प्रकार से सोचोगे तो तुम कभी भी आकांक्षा के साथ शादी नहीं कर पाओगे, मैंने हरीश को समझाया तो वह अपने ऑफिस जाने लगा और उसने एक दिन मुझे ऑफिस से फोन किया और कहने लगा कि आज तुम मेरे ऑफिस के पास वाले होटल में आ जाओ।

मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं वहां पर आता हूं तुम वहीं पर रहना। उसने मुझे उसके ऑफिस के सामने वाले होटल का एड्रेस मैसेज कर दिया। जब उसने वहां का एड्रेस मैसेज किया तो मैं ऑटो से उस होटल में पहुंच गया, हरीश ने वहां पर एक रूम ले रखा था, उसके साथ में आकांक्षा और उसकी एक दोस्त की थी। जब हरीश ने मेरा परिचय आकांक्षा से करवाया तो मुझे वह बहुत अच्छी लगी और मुझे ऐसा लगा कि हरीश ने बहुत अच्छी लड़की चुनी है। उसने दूसरी लड़की से भी मेरा परिचय कराया, उसका नाम संजना है और वह भी दिखने में बहुत अच्छी थी। मैं हरीश के सामने ही बैठा हुआ था और मैं आकांक्षा से बात कर रहा था। आकांक्षा मुझसे कहने लगी कि मैं भी हरीश के साथ शादी करना चाहती हूं लेकिन मेरे पिताजी शादी के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। मैंने आकांक्षा से कहा तुम्हारे दिल में हरीश के लिए कोई जगह है या नहीं। वह कहने लगी कि मैं हरीश के साथ ही अपना जीवन बिताना चाहती हूं परंतु मैं अपने घर वालों के खिलाफ जाकर भी शादी नहीं कर सकती। मैंने आकांक्षा से कहा कि हमारे घर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है यदि तुम्हारी शादी हरीश से हो जाएगी तो तुम बहुत खुश रहोगी।

आकांक्षा मुझसे कहने लगी कि मुझे भी यह बात पता है कि हरीश एक बहुत अच्छा लड़का है और वह मेरे बिना नहीं रह सकता, मैं भी उसके बिना नहीं रह सकती परंतु मेरी भी कुछ मजबूरियां हैं इसीलिए मैं हरीश के साथ शादी नहीं कर सकती। संजना भी कहने लगी कि आकांक्षा की कुछ मजबूरियां है इसलिए वह हरीश के साथ शादी नहीं कर सकती। मैंने उन दोनों से कहा कि यदि आकांक्षा की मजबूरी है तो हरीश भी तो आकांक्षा को चाहता है यदि तुम्हारे पास कोई रास्ता है तो तुम ही मुझे बता दो कि हमें क्या करना चाहिए। मैंने भी आकांक्षा से कह दिया कि यदि तुम हरीश के साथ शादी नहीं करोगी तो हम लोग उसकी शादी किसी और लडकी से करवा देंगे। अब वह बहुत जोर से रोने लगी और कहने लगी कि यदि आप किसी और से हरीश की शादी करवा देंगे तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। मैंने उसे कहा कि इस वक्त हरीश पर भी ऐसी ही बीत रही है जैसे तुम पर इस वक्त बीत रही है इसलिए तुम यदि हरीश के साथ शादी कर लो तो तुम दोनों ही बहुत खुश रहोगे। अब वह भी हरीश से शादी के लिए मान गई और कहने लगी कि मैं अपने पिताजी से इस बारे में बात कर लूंगी यदि वह मना भी करेंगे तो उसके बावजूद भी मैं हरीश के साथ शादी कर लूंगी। वह दोनों मेरे सामने ही गले लग गये। अब आकांक्षा रो रही थी और हरीश उसे चुप करा रहा था। मैं यह सब देख रहा था और संजना भी मेरे बगल में बैठी हुई थी। मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि आकांक्षा शादी के लिए तैयार हो चुकी है और उसके चेहरे पर जो मुस्कुराहट थी वह मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। हरीश और आकांक्षा किस कर रहे थे मुझे यह सब देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा था। उन दोनों ने एक दूसरे को बहुत  अच्छे से किस करना शुरू कर दिया। मैं और संजना यह सब देख रहे थे मैं भी संजना के पास में ही बैठा हुआ था। मैंने भी संजना की जांघ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया मैंने जब उसके मोटे मोटे जांघ पर हाथ फेरा तो वह भी उत्तेजित हो गई और मैंने भी उसे पकड़ कर उसके होठों को किस करना शुरू कर दिया। मैंने उसके होठों को इतने अच्छे से किस किया कि उसे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था।

मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए जब मैंने संजना को नंगा कर दिया तो हरीश ने भी आकांक्षा को नंगा कर दिया। हम दोनों ही भाई उन दोनों के मुंह में अपना लंड डाल रहे थे। वह दोनों बहुत अच्छे से हमारे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस प्रकार से मेरे लंड को चूस रही थी। मैंने संजना के दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया जैसे ही मैंने उसकी योनि में आपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और अपने मुंह से सिसकियां निकालने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे धक्के मार रहा था उसकी योनि से खून की पिचकारी निकल गई। मुझे बहुत मजा आया वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी मैंने भी उसकी योनि के अंदर तक अपने लंड को डाल रखा था। हरीश ने में आकांक्षा को घोड़ी बना रखा था और वह उसे बड़े ही अच्छे से चोद रहा था आकांक्षा भी अपने मुंह से बड़ी तेज तेज सिसकियां ले रही थी। हम दोनों भाई उन दोनों को बहुत अच्छे से चोद रहे थे। मैंने संजना को घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते हैं जैसे ही मैंने अपना लंड संजना की योनि में डाला तो वह चिल्लाने लगी और मैंने उसके चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया। मैंने उसे इतनी देर तक झटके मारे की उसके मुंह से आवाज निकल रही थी। वह कहने लगी कि मुझसे अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है लेकिन मैं उसे बड़ी तेजी से झटके मार रहा था। आकांक्षा और हरीश का हो चुका था इसलिए वह दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे और आकांक्षा हरीश का लंड हिला रही थी। मैं संजना को बड़ी तेजी से झटके देता संजना भी अब अपनी चूतडे मुझसे मिलाने लगी लेकिन उसकी योनि से भी ज्यादा गर्मी बाहर निकलेगी लगी और मेरा वीर्य  उसकी योनि में गिर गया। जब मैने अपना लंड उसकी चूत से निकाला तो वह खुश हो गई। हम चारों ने अपने कपड़े पहने। उसके कुछ समय बाद आकांक्षा और हरीश की शादी हो गई।