दोस्त की बीवी की गर्मी को शांत कर दिया

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मेरा नाम राजेंद्र है और मैं 35 वर्ष का हूं। मेरी शादी को 7 वर्ष हो चुके हैं और मैं अपनी पत्नी के साथ ही जयपुर में रहता हूं। मेरी शादी बड़ी ही मुश्किल हालातो से हुई थी क्योंकि मेरी शादी के लिए मेरे पिता बिल्कुल भी राजी नहीं थे। वह मेरी पत्नी को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे क्योंकि उसका रंग सांवला है और वह दिखने में इतनी सुंदर भी नहीं है लेकिन हम दोनों की विचारधारा एक दूसरे से बहुत मिलती थी इस वजह से मैंने आंचल से शादी की और आंचल ने मेरा बहुत ही साथ दिया। मेरे पापा ने उसे बहुत ही बुरा भला कहा लेकिन उसके बाद भी उसने बिल्कुल बुरा नहीं माना और वह मेरे साथ ही डटी रही। आंचल के जीजा ने हम लोगों का बहुत ही साथ दिया था।

वह पुलिस में है इस वजह से मेरे पिता ने मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहा और उन्होंने मेरे पापा को बहुत ही समझाया कि आंचल बहुत ही अच्छी लड़की है यदि तुम उससे राजेंद्र की शादी नहीं कर पाओगे तो तुम्हें उसकी तरह लड़की मिलना मुश्किल है, वह घर को बहुत ही अच्छे से संभाल लेगी। उस वक्त मेरी जॉब भी अच्छी नहीं थी, मैं एक छोटी सी कंपनी में नौकरी किया करता था और सिर्फ अपने घर का खर्चा ही चला पा रहा था। यह बात आंचल को भली-भांति मालूम थी और आंचल उसके बावजूद भी मेरा साथ देने को तैयार थी। उसके लिए बहुत ही अच्छे घरों से रिश्ते आए थे क्योंकि उसके पिता एक बड़े अधिकारी हैं लेकिन उसने फिर भी मेरा साथ दिया और मुझसे शादी के लिए तैयार थी। उसकी इस बात से मैं बहुत खुश था और मुझे भी लगता था कि जब आंचल ने मेरा साथ दिया है तो मैं भी उसका साथ कैसे छोड़ सकता हूं इसीलिए मैंने उसका पूरा साथ दिया और हम दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। जब मैं घर गया तो मेरे पिता बहुत ही गुस्सा थे उन्होंने कई दिनों तक तो मुझसे भी बात नहीं किया और ना ही आंचल से उन्होंने बात की। मैंने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन उन्हें फिर भी मेरी बात समझ नहीं आ रही थी और वह मेरी कुछ भी बात सुनने को तैयार नहीं थे और मुझे कह रहे थे कि तुम्हें तो मर ही जाना चाहिए था, जब कोई लड़का अपने बड़ों का सम्मान नहीं कर सकता तो उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है। मैंने अपने पापा से कहा कि यदि मैं आंचल से शादी नहीं करता तो क्या मुझे उस की तरह लड़की मिल पाती। वो कहने लगे कि तुम्हें उससे भी सुंदर लड़की मिल जाती।

मैंने अपने पापा से कहा कि सिर्फ सुंदरता से ही यदि किसी का आकलन किया जा सकता तो फिर हम लोग कभी गलत और सही को पहचान ही नहीं पाते लेकिन उसके बावजूद भी आँचल मेरे साथ ही खड़ी थी। मेरी कोई अच्छी नौकरी भी नहीं है फिर भी आँचल मेरे साथ ही थी। मेरे पिता जी मेरी कुछ भी बात सुनने को तैयार नहीं थे और मेरी मां को भी आंचल पसंद नहीं थी लेकिन फिर भी वह मान ही गई और उन्होंने इस चीज को स्वीकार कर लिया की आँचल हमारे घर की बहू है और हमें ही उसका ध्यान देना है। वह आंचल से बात करने लगी थी। आंचल घर का सारा काम किया करती थी। धीरे धीरे आंचल और मेरी मां के बीच में बहुत अच्छा संबंध बन गया और वह दोनों ही एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे लेकिन मेरे पापा अभी भी मुझसे बहुत गुस्सा थे और वह आँचल से बिल्कुल भी बात नहीं करते थे। जब भी वह खाना बनाती तो वह उसके हाथ का खाना भी नहीं खाते थे लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भी समझ आने लगा और वह अब उससे कभी कभार बात कर लिया करते थे। जब हमारा बच्चा हुआ तो मेरे पिता जी बहुत खुश हो गए और वह आंचल से बात करने लगे। अब धीरे धीरे वह आँचल को अच्छा मानने लगे थे। मेरे पिताजी हमारे बच्चे के साथ ही टाइम बिताया करते थे और अब मेरे बच्चे की उम्र 5 वर्ष की हो चुकी है। अब हमारे घर में बहुत ही अच्छा माहौल है क्योंकि पहले जिस प्रकार से हमारे घर का माहौल था उससे बहुत ही तनाव रहता था। पर अब हमारे घर पर बहुत अच्छा माहौल रहता है जिससे मुझे भी बहुत खुशी होती है और कई बार ऐसा लगता है कि हमारे घर वाले बहुत ही खुश हैं।

मैं जिस कंपनी में नौकरी करता हूं वहां पर मुझे बहुत ही अच्छी सैलरी मिलती है और मुझे उस कंपनी में भी काम करते हुए काफी समय हो गया। एक दिन मेरे बॉस ने मुझे कहा कि तुम्हें दिल्ली ऑफिस के काम से जाना पड़ेगा क्योंकि वहां पर आजकल काम कुछ अच्छे से नहीं हो रहा है इसलिए तुम्हें कुछ समय के लिए दिल्ली ही रहना पड़ेगा। मुझे यह सुनकर थोड़ा बुरा लगा क्योंकि मैं घर से दूर कभी भी नहीं गया था। जब से मैंने काम शुरू किया तब से मैं जयपुर में ही काम कर रहा था लेकिन मुझे काम के सिलसिले में दिल्ली जाना ही था। जब मैंने यह बात आँचल को बताई तो उसे बहुत ही बुरा लगा और वह कहने लगी कि तुम कितने समय तक दिल्ली में रहोगे। मैंने उसे कहा कि मैं एक साल तक दिल्ली में रहूंगा और जब मैंने उसे यह बात कही तो उसे थोड़ा बुरा लगने लगा और वह कहने लगी कि मैं तुम्हारे बिना घर में कैसे रहूंगी। मैंने उसे कहा कि घर में  मम्मी-पापा तुम्हारा ध्यान रखने के लिए हैं। वो कहने लगी वह तो सही है लेकिन फिर भी मुझे टेंशन तो होगी ही। मुझे भी लग रहा था कि वाकई में मैं भी दिल्ली में कैसे रहूंगा लेकिन मुझे जाना ही था। अब मैं दिल्ली जाने की तैयारी करने लगा। मुझे दो दिन बाद दिल्ली जाना था। मैंने अपने पुराने दोस्त को फोन कर दिया जिसका नाम सुरेश है, वह दिल्ली में ही कई सालों से रह रहा है। मैंने जब उसे अपने दिल्ली आने की जानकारी दी तो वह बहुत खुश हो गया और कहने लगा कि तुम मेरे घर पर आ जाना। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारे घर पर ही रहूंगा क्योंकि अभी मेरे दिल्ली में रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं हुई थी।

कुछ समय बाद ही मुझे ऑफिस से कोई घर रहने के लिए मिलने वाला था, जब तक वहां पर मेरा रहने का बंदोबस्त नहीं हो जाता तब तक मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगा। सुरेश कहने लगा कि तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो, तुम मेरे साथ ही मेरे घर पर रहना। अब दो दिन बाद मैं दिल्ली के लिए चला गया। जब मैं दिल्ली पहुंचा तो वहां से मैंने सुरेश के घर का एड्रेस लिया और सीधा ही उसके घर पहुंच गया। जब मैं सुरेश के घर गया तो उसने मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया। उसकी पत्नी का नाम निकिता है और वह बहुत ही अच्छी और सभ्य महिला लग रही थी क्योंकि मैं उसे पहली बार ही मिला था। मैं सुरेश की शादी में भी नहीं जा पाया था जिस वजह से वह मुझसे बहुत ही गुस्सा था और जब मैं उसके घर पहुंचा तो वह मुझसे वही बात कर रहा था कि तुम मेरी शादी में भी नहीं आए थे। सुरेश के भी दो बच्चे हैं उसका बड़ा लड़का भी 5 साल का हो चुका है। उसकी और मेरी शादी लगभग एक ही वर्ष में हुई थी। उसने मुझसे पूछा कि तुम यहां कितने समय तक रहोगे। मैंने उसे कहा कि मैं एक साल के लिए दिल्ली रहूंगा, कुछ समय बाद कंपनी मुझे घर भी दे देगी। अब हम दोनों अपनी पुरानी बातें कर रहे थे और अब शाम हो चुकी थी। सुरेश ने अपनी अलमारी से शराब की बोतल निकाल ली और कहने लगा कि आज काफी समय बाद हम दोनों साथ में बैठे हैं तो शराब के कुछ पैक तो बनते ही हैं। अब वह मेरे लिए पैक बनाने लगा और मैंने वह पैक पीने के बाद सुरेश से कहा कि मैं ज्यादा नहीं पियूंगा लेकिन वह मुझसे जिद करने लगा और उसने मुझे जबरदस्ती ही बहुत ज्यादा शराब पिला दी। अब सुरेश को भी नशा हो चुका था और मुझे भी बहुत नशा हो गया। निकिता ने कहा कि तुम दोनों खाना खा लो। हम दोनों ने खाना खा लिया। उसके बाद सुरेश अपने कमरे में सो गया और मैं भी उनके गेस्ट रूम में लेटा हुआ था लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं सिर्फ आंचल के बारे में सोच रहा था। मुझे कभी झपकी आती और फिर अचानक से मेरी आंखें खुल जाती।

मुझे नींद बिल्कुल भी नहीं आ रही थी मैं जब बाथरूम में गया तो उसके कछ देर बाद निकिता भी बाथरूम में आ गई। जब वह बाथरूम में आई तो मैं बाहर ही बैठा हुआ था वह मुझे कहने लगी कि आप अभी तक सोए नहीं है। मैंने उसे कहा कि मुझे नींद नहीं आ रही है अब वह भी मेरे पास बैठ गई। जब वह मेरे पास बैठी तो उसने मैक्सी पहनी हुई थी और उसके स्तन लटक रहे थे। मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा था मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। पहले वह हिचक रही थी लेकिन बाद में वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी। उसने मेरे लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह के अंदर समा लिया। उसने बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया अब उससे बिल्कुल नहीं रहा गया और वह सोफे पर लेट गई। उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया मैंने तुरंत ही उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया।

जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह अपनी मादक आवज से मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगी। मैंने उसे और भी तेजी से चोदना शुरू कर दिया मैं उसे बड़ी तेज झटके मार रहा था जिससे कि उसका पूरा शरीर हिलने लगा। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और मैं उसे इतनी तेजी से चोदे जा रहा था कि उसे बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसे घोड़ी बना दिया उसे घोड़ी बनाकर चोदने लगा जब वह मुझसे अपनी चूतडो को टकराती तो मुझे बहुत अच्छा लगता। मैं उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था। मुझसे बिल्कुल  भी  रहा नही गया और उससे भी बिलकुल नहीं रहा जा रहा था तो उसने भी बड़ी तेज तेज अपने चूतड़ों को मुझसे टकराना शुरू कर दिया। जिससे कि उसके अंदर की उत्तेजना बाहर आने लगी और उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी निकलने लगी मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था और मेरा वीर्य उसकी योनि में जा गिरा। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मुझे बहुत ही सुकून मिला और मैं उसके बाद अपने कमरे में जाकर आराम से सो गया।