देसी भाभी की गर्मी का फायदा उठाया

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मेरा नाम संतोष है मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूं, मैं घर पर ही रहता हूं क्योंकि मेरी पढ़ाई अभी कुछ समय पहले ही पूरी हुई है इसलिए मैं ज्यादा कहीं भी बाहर नहीं जाता। मेरे साथ के कुछ लड़कों की नौकरी लग चुकी है लेकिन मैं अब भी अपनी नौकरी के लिए ट्राई कर रहा हूं और मेरी अभी तक किसी भी अच्छी कंपनी में नौकरी नहीं लग पाई और ना ही मुझे कहीं से भी कोई ऐसा ऑफर आया है। मैंने कई जगह पर इंटरव्यू दिए हैं। मैं अभी तक इंटरव्यू देने के लिए जाता हूं और वहां से ही मैं अपने घर वापस लौट आता हूं लेकिन मुझे कहीं पर भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही है जिस वजह से मेरी गर्लफ्रेंड मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव डालने लगी क्योंकि मैंने उससे कहा था कि हम दोनों शादी कर लेंगे लेकिन मेरी कहीं भी  नौकरी नहीं लग पा रही है जिसकी वजह से मैं नहीं चाहता कि मैं उससे शादी करूं परंतु वह मुझसे कहने लगी कि तुम्हारी नौकरी कुछ समय बाद लग जाएगी तुम उसकी चिंता मत करो।

मैं उसे कहता हूं कि नौकरी लगना इतना आसान नहीं है जितना तुम सोच रही हो क्योंकि मैंने कई जगह पर नौकरी के लिए इंटरव्यू दिए हैं पर मुझे कहीं भी अच्छी सैलरी नही मिल पा रही है, यदि मैं तुमसे शादी करूंगा तो शादी के बाद तुम्हारी भी कुछ उम्मीदें हैं, मैं नहीं चाहता कि मैं उन उम्मीदों को पूरा ना कर पाऊ लेकिन वह मेरी बात बिलकुल भी समझने को तैयार नहीं है और मुझ पर बहुत ही दबाव डालने लगी इसीलिए मैं उसे ज्यादा नहीं मिलता और मैं उसका फोन भी नहीं उठाता। वह बहुत ही अच्छी लड़की है परंतु वह मेरी समस्याओं को नहीं समझ पा रही है यदि वह मेरी समस्याओं को समझ जाए तो उसे भी लगेगा की वाकई में मैं बहुत परेशानी में हूं। मेरे घर में मेरे पापा मम्मी भी बहुत परेशान हैं और वह कह रहे हैं कि तुम्हें इतनी पढ़ाई की लेकिन उसके बाद भी तुम्हारी एक अच्छी नौकरी नहीं लग पा रही है। मैंने उन्हें कहा कि नौकरी तो मेरी लग रही है पर मैं जिस प्रकार का काम चाहता हूं उस प्रकार से मुझे काम नहीं मिल पा रहा है, ना ही मुझे अच्छी तनख्वाह मिल रही है।

मेरे पापा पुलिस में है, उन्हें बहुत ही जल्दी गुस्सा आ जाता हैं। उन्हें यदि कुछ भी बात बुरी लगती है तो वह अपना गुस्सा उसी समय निकाल देते हैं इसी वजह से हमारे घर पर उनसे कोई ज्यादा बात नहीं करता। मेरे पिताजी सिर्फ काम की ही बात करते हैं, उसके अलावा वह किसी से कुछ बात नहीं करते परंतु मैं भी बहुत ज्यादा परेशान हो गया था और मेरे अंदर ही अंदर कुछ ऐसा चलने लगा कि मैं सोचने लगा मुझे कुछ नया करना चाहिए, मुझे अपना काम खोलने की सूची। मैंने इस बारे में अपने पिता जी से भी बात की तो वो कहने लगे कि यदि तुम्हे पैसों की आवश्यकता है तो तुम मुझे बता देना, मैं तुम्हारी आवश्यकताओं को पूरा कर दूंगा। मैंने उनसे कहा कि पैसों की तो आवश्यकता है ही क्योंकि मैं अपना काम शुरू करना चाहता हूं। उन्होंने मुझे कुछ पैसे दे दिए और मैंने अपना एक छोटा सा स्टार्ट अप डाल दिया। मैंने अगरबत्ती बनाने का काम शुरू कर दिया। जब मैंने यह काम शुरू किया तो मैं खुद ही मार्केटिंग किया करता था और उस सिलसिले में मैं अक्सर इधर उधर रहता था। मैं सुबह ही अपने घर से चला जाता हूं और शाम को ही मेरा घर लौटना होता था। मेरी मम्मी हमेशा कहती थी कि तुम बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हो, मैं उन्हें कहता कि मेहनत तो मुझे करनी ही पड़ेगी, नहीं तो मेरा काम आगे कैसे बढ़ेगा। मैं बहुत ही खुश था और मेरी मम्मी भी बहुत खुश थी। अब धीरे-धीरे मैं मार्केट में काम के सिलसिले में उतर जाता था और जब मुझे समय होता तो मैं घर पर ही रहता था। हमारे पड़ोस में आकांक्षा भाभी रहती थी, उनके और उनके पति के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी और उनके अक्सर झगड़े होते रहते थे। मैंने उनसे कहा कि यदि आप मेरे साथ जुड़कर काम करें तो मुझे बहुत खुशी होगी क्योंकि उनके कोंटेक्ट बहुत ही अच्छे थे और उनके जितने भी संपर्क थे वह बहुत ही अच्छे लोगों से थे क्योंकि उनके पिताजी एक बहुत से बड़े दुकानदार हैं जो कि शहर के जाने माने है। मैंने उन्हें कहा कि यदि आप मेरा सामान अपने पिताजी की दुकान पर रखवा दे तो आपका मुझ पर बहुत ही बड़ा एहसान होगा, वो कहने लगी कि ठीक है मैं इस बारे में अपने पिताजी से बात करूंगी यदि वह हां कह देते हैं तो मैं तुम्हारा सामान उनकी दुकान में रखवा दूंगी, तुम उसके लिए बिल्कुल निश्चिंत रहो। कई दिन हो गए थे लेकिन उन्होंने शायद अपने पिताजी से बात नहीं की थी और मैं भी अपने काम में बिजी था इसलिए मैं भी उनसे ज्यादा बात नहीं कर पाया।

एक दिन मैं भी छत पर टहल रहा था और वह भी छत पर ही थी वह छत पर कुछ कपड़े सुखाने आई हुई थी, उन्होंने मुझे देखते हुए कहा कि तुम आजकल क्या कर रहे हो, मैंने उन्हें कहा कि मैं अपना काम कर रहा हूं। वह पूछने लगे कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैंने उन्हें बताया कि काम तो अच्छा चल रहा है लेकिन क्या आपने अपने पिताजी से मेरे बारे में बात नहीं कि, वो कहने लगी कि मैंने उनसे बात की लेकिन मैं तुम्हें बताना भूल गई और मुझे भी तुमसे मिलने का बिल्कुल समय नहीं मिल पाया। मैंने उनसे कहा कि आपके पिताजी ने क्या कहा, तो वह कहने लगी कि मेरे पिताजी ने कहा कि अभी उनके पास तो सामान रखा हुआ है लेकिन कुछ दिनों बाद तुम उन्हें जाकर मिल लेना और मैं भी तुम्हारे साथ ही उनसे मिलने चलूंगी। मैंने आकांक्षा भाभी से कहा कि यह तो बहुत ही अच्छी बात है और मैं बहुत ज्यादा खुश था, मैंने उनसे कहा कि हमें कब चलना है तो वो कहने लगी कि कुछ दिनों बाद चलते हैं क्योंकि आज कल मेरे घर का कुछ ज्यादा काम है इसी वजह से मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकती, हमारे घर पर पेंटिंग हो रही है, वह कुछ दिनों बाद खत्म हो जाएगी तो उसके बाद मैं तुम्हारे साथ चल पड़ूंगी।

यह सब कहते हुए वह चली गई और मैं भी अपने घर आ गया। मैं हमेशा ही उनके घर पर देखा करता था कि उनका काम कितना हुआ है, मैं सोच रहा था जब उनका काम पूरा हो जाए तो मैं भी उनसे बात कर लूंगा। अब उनका काम खत्म हो गया था और मुझे कई दिनों बाद आकांक्षा भाभी दिखी। मैंने उनसे कहा कि आपके घर में क्या पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है, वह कहने लगी हां हमारे घर पर पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है, हम लोग कल मेरे पापा के पास चलते हैं। मैंने उनसे पूछा कि हमें किस समय जाना है, तो वह कहने लगी कि तुम सुबह के वक्त तैयार हो जाना। मैंने उनसे कहा ठीक है मैं सुबह तैयार हो जाऊंगा और आप मेरे साथ मेरी गाड़ी में ही चलना। मैंने अपने कुछ सैंपल रख लिया और सुबह मैं आकांक्षा भाभी को लेकर उनके पिताजी के पास चला गया। जब मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझसे मेरे सैंपल मांगे, मैंने जब उन्हें सैंपल दिखाएं तो वह कहने लगे कि यह तो मेरी दुकान पर चल जाएंगे, मैं तुमसे कुछ सामान मंगवा देता हूं। उन्होंने मुझे कुछ सामान का ऑर्डर दिलवा दिया और मुझे पता था कि यदि एक बार यह मेरा सामान खरीद ले तो उसके बाद सामान बहुत बिकने लगेगा। जब उन्होंने मुझे सामान के लिए कहा तो मैं बहुत खुश हो गया। अब हम लोग अपने घर वापस लौट रहे थे। मैंने रास्ते में आकांक्षा भाभी से कहा कि आपने मेरा बहुत ही बड़ा काम करवा दिया है, मैं इस बात से बहुत खुश हूं। वह कहने लगी कि तुम मेरे पड़ोसी हो, मुझे भी अच्छा लगेगा यदि तुम्हारा काम चल पड़े और हम लोग रास्ते में बात करते हुए जाने लगे। मैं अपनी कार ड्राइव कर रहा था और आकांक्षा भाभी मुझसे बात करने पर लगी हुई थी। मैं आकांक्षा भाभी को देखे जा रहा था क्योंकि उनके चुन्नी नीचे गिर गई थी और उनके स्तन मुझे दिखाई दे रहे थे मैंने अब उनकी जांघों पर हाथ रख दिया और उन्हें सहलाने  लगा वह मेरे इशारे समझ चुकी थी हम घर पहुंच गए। जब हम घर पहुंचे तो वह कहने लगी कि तुम घर पर चलो मैं उनके साथ उनके घर पर चला गया मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और उनकी गांड पर मेरा लंड रगडने लगा मेरा पूरा लंड खड़ा हो चुका था और उन्होंने भी मुझे कसकर पकड़ लिया।

उन्होंने मेरे होठों को जैसे ही किस किया तो मैं समझ चुका था कि इनके अंदर की गर्मी बाहर निकलने लगी है। मैंने उनको पूरा नंगा कर दिया और उनकी योनि को चाटना शुरू कर दिया काफी देर तक मैंने उनकी योनि को चाटने के बाद उनके स्तनों का भी रसपान किया। उनके चूचो पर मैंने अपने दांत के निशान मार दिए और उनके होठों से मैंने खून निकाल दिया था। कुछ देर तक उन्होंने मेरे लंड को सकिंग किया जब मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाला तो वह चिल्लाने लगी। मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और बड़ी तेजी से मैंने उन्हें धक्के दिए मैंने इतनी तेज तेज धक्के मारे कि उनका पूरा शरीर गर्म होने लगा और मुझे भी बहुत मजा आने लगा। कुछ देर बाद मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया उनकी नरम और मुलायम गांड को मैं चाटने लगा। मैंने जैसे ही अपने लंड को उनकी गांड के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी और उनकी गांड से खून भी निकलने लगा। मैंने उनके चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेजी से मैं उन्हें झटके दिए जा रहा था। मेरा लंड उनकी गांड के अंदर तक जा रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक उन्हें ऐसे ही धक्के देना जारी रखा जिससे कि मेरा वीर्य पतन हो गया। उसके बाद मुझे उनके पिताजी से बहुत बड़ा ऑर्डर मिलने लगा मैं आकांशा भाभी की भी इच्छाओं को पूरी कर दिया करता था इसलिए वह अपने पिताजी से मुझे बहुत ऑर्डर दिलवा देती। मेरा काम भी बहुत अच्छा चल पड़ा था और मैं बहुत पैसे भी कमाने लगा था।