वो गांड मुझे अभी भी याद है

मैंने अपने कपडे पहेने और मैं जल्दी टिफिन का बॉक्स लेकर 10:20 की बस पकड़ने के लिए भाग सा ही पड़ा, मैं अब इस बेबसी भरी जिंदगी से सच में थक गया हूँ…वही सुबह काम जाना और रात तक वही अपनी गांड मराना और फिर दूसरी सुबह उठ के कुत्ते की तरह भाग पड़ना…वैसे मेरा जीवन इतना दुश्कर शादी के पहेले नहीं था..तब मैं रेखा के साथ सेट था और मेरा खाना वही ऑफिस में ले आती थी…अब साला बिहार जा के ब्याह कर आये सोचा था की उलझने कम होंगी लेकिन यहाँ तो बढ़ गई है..सब्जी लाना..राशन लाना, दूध लाना और ओफिसमे चूतिये बोस की गाली खाना…मुझे आज भी रेखा के साथ बिताए हुए वह पल याद आते है…तो मेरा लंड और मन दोनों रो पड़ते है…चलिए में अपना मन हलका करने के लिए आपको रेखा के साथ किए गांड-संभोग की कहानी बताता हूँ…शायद मेरा मन फ्रेश हो जाए और आप को थोडा मनोरंजन मिले…!

रेखा मुझ से उम्र में 5 साल बड़ी थी और वह हमारे दफ्तर की हेड-क्लार्क थी, मैं तब मुंबई में नया था और मुझे भिंडी बाजार की रांडो से ही सेक्सका सुख तब नसीब था. रेखा थोड़े वक्त में ही मुझ से सेट हो गई और अपने पति से तलाक के बाद शायद वोह भी एक तगड़ा लंड ढूंढ रही थी, मेरा मोटा शरीर शायद उसे पेलवाने के लायक लगा और मैं भी उसकी महेरबानीयों को देख समझ गया की दाल काली हो चली है गजोधर…! रेखा किसी न किसी बहाने मुझे ऑफिस में रोक लेती और हम अक्सर लास्ट घर जाने वाले क्लार्क होते थे. एक दिन रेखा ने जब अपनी तगड़ी गांड मेरे लंड के समीप रख दी तो मुझे उसकी गांडकी गर्मी का अहेसास हो गया और मैं तबसे उसके साथ गुदा-मैथुन के सपने देख रहा था. थोड़े दिन के बाद ही वह मेरे और भी करीब आ गई और हम दोनों ऑफिस के एकांत को चुदाई का मैदान बनाते रहे…! उसकी चूत मेरे अकेलेपन का इलाज और मेरा लंड उसकी चूतकी भूख का खाना बन गए थे…!

उस दीन शनिवार था और रेखा को मैंने इशारे में रुकने के लिए कह दिया, शाम को सब के जाने के वक्त तक हम फाईलों में गोते लगाते रहे…जैसे ही सब गए में उठ के रेखा के केबिन में चला गया. मेरे वह जाते ही रेखा अपनी साडी को अपने चुन्चो से हटाने लगी, मेरा लंड उसके उभरे हुए स्तनों को देख कम्पने लगा और मैंने दरवाजा अंदर से बंध करके उसके बड़े चुन्चो को हाथ में लेकर जोर जोर से दबा दिए,रेखा के सेक्सी चुंचे सेक्स अपील के लिए मस्त थे और वह 30 की होने के बावजूद सेक्सी और हॉट थी…! मैंने रेखा को आज पहेले ही कह दिया की मैं उसकी गांड मारना चाहता हूँ. रेखा हंसी और वोह अपनी गांडमें लंड लेने को तैयार ही लगी. मैंने उसे वही अपने नित्य सेक्स टेबल पर लेटा दिया, उल्टा करके और मैं उसकी साडी, ब्लाउज, ब्रा और पेंटी खोलने लगा. साथ साथ मैंने अपने लंड को भी कपड़ो के बंधन से दूर कर लिया था और मैं उस बड़े टेबल पर चढ़ के बैठ गया.

मैंने अपने हथेली में मस्त थूंक निकाला और पुरे लंड पे थूंक मल दिया, मैंने लंड के अग्रभाग को थूंक से पूरा भिगो दिया था. अब मैंने दोनों हाथों से रेखा की गांडको फेला दी, और मेरा लंड उसके छेद पर टिका दिया…गांडकी गर्मी मुझे लंड पर अच्छी तरह महेसुस हो रही थी और मेरे लंड में अब उत्तेजना की एक लहर दौड़ सी गई…! रेखा भी अपने होंठो को दांतों से दबाये हुए अपनी उत्तेजना को दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थी. मैंने अब लंड को धीमे से अंदर करना चाहा पर, यह गुदा बहु टाईट थी और लंड अंदर जाने में जैसे के कतरा रहा था, तभी रेखा ने अपना थूंक उँगलियों पर निकाला और उसने मेरे लंड पर उसे मला, उसने बिना एक पल गवांये लंड को गांडके अंदर धकेला और आधा लंड गांडके अंदर घुस गया.

जैसे ही आधा लंड गांडके अंदर गया मुझे लंड के चारो तरफ गांडकी गर्मीका अहेसास होने लगा, मैंने अब धीमे धीमे लंड को पूरा इस देसी गांड के अंदर पेल दिया…रेखा के मुहं से आह..ओह..अह्ह्ह…ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे उद्गार निकलने लगे और वह अपने दोनों हाथों से कूलो को पकड कर गांडको फेलाने लगी…! गांडके फैलते मुझे भी लंड के इर्दगिर्द प्रेशर कम होता नजर आया और अब मैंने रेखा को धीमे धीमे लंड गांडके अंदर बहार देना शरु कर दिया. रेखा की धीमी धीमी आवाज से निकलती चीखे कमरे में उत्तेजना को और बढ़ा रही थी, मेरा पहेला गांड-संभोग एक हसीं मौके पर चल रहा था. मैंने अपने धक्के अब तेज किये और रेखा की आवाजे भी साथ साथ बढ़ने लगी.

थोड़ी देर के बाद मे ही मुझे लगा की लंड अब बरस पड़ेगा, मैंने हाथ लम्बे कर रेखा के स्तन पकडे और एक तीव्रता के साथ उसकी गांडको झटके देने शरु कर दिए…ओह ओह्ह आह आह्ह्हह्ह…ठपाक ठपाक की आवाजे मिक्स हो चली और मैं और भी जोर लगाने लगा. एक मिनिट के बाद ही मेरा पतन हुआ और मेरा लंड वीर्य के फव्वारे छोड़ने लगा, मैंने लंड बहार निकाला गांड से और वीर्य रेखा के गुदा के छेद से बहार बह रहा था…..मैंने कपडे पहेने और रेखा ने अपनी गांडको ऑफिस के कागजो से साफ़ कियां और वोह भी तैयार हो गई…!

दोस्तों आप ही बताईये ऐसी आज़ाद जिन्दगी और सेक्स करने के मौके, ना खाना पकाने की टेंशन ना सब्जी लाने की टेंशन…रेखा अब मुझ से दूर रहेती है क्यूंकि उसे लगता है की मैं बीवी की चूत के आगे उसके भुला चुका हूँ…उसे क्या पता मुझे उसकी सेक्सी गांड अपनी बीवी की चूत से भी अच्छी लगती है…!