त्रिलोक ने मेरी चूत की सील तोड़ी

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मेरा नाम श्वेता है मैं लुधियाना की रहने वाली हूं, मेरी उम्र 26 वर्ष है और मैं बचपन से ही अपने मोटापे से परेशान हूं। मैं अपने मोटापे से इतना ज्यादा परेशान हूं कि मैं अच्छे से चल भी नहीं पाती। मैं अपने स्कूल के समय से ही अपने मोटापे से इतना ज्यादा परेशान हूं कि मुझे स्कूल में सब लोग मोटी कह कर बुलाते थे और मुझे उस वक्त बहुत बुरा लगता था इसीलिए मैं स्कूल में भी किसी से अच्छे से बात नहीं करती थी। मुझे यह बात बहुत बुरी लगती थी जब सब लोग मुझे मोटा कहकर बुलाते थे। मैंने कई बार अपने घर पर इस बारे में बात की,  मेरे मम्मी और पापा मुझे हमेशा ही सपोर्ट करते थे और कहते थे कि तुम बिल्कुल भी मोटी नहीं हो लेकिन अब मुझे लगने लगा है कि मैं वाकई में मोटी हूं और इसी वजह से मुझे कई बार शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है क्योंकि मेरा वजन इतना ज्यादा है कि मैं जब भी किसी पब्लिक प्लेस पर जाती हूं तो सब लोग मुझे घूर कर देखते हैं।

मुझे अपने आप से बहुत ज्यादा शर्म आती है, मुझे लगता है कि मैं वाकई में बहुत मोटी हूं, तभी सभी जगह मेरा मजाक बनाया जाता है, यदि मैं अपने किसी भी फंक्शन में जाती हूं तो वहां पर भी मुझे कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है और मुझे लगता है कि मेरा मोटापा मेरे लिए अभिशाप बन चुका है यदि मैंने इसे जल्दी से कम नहीं किया तो मुझे कहीं बीमारियां ना हो जाये। मैंने इस वजह से खाना भी कम कर दिया है लेकिन खाना कम करने की वजह से भी मेरा मोटापा बिल्कुल नहीं घटा, मैं अभी भी पहले के जैसे ही हूं। मुझे जब मेरी कॉलेज की सहेलियां मिलती है तो वह सब मुझसे अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बात करती हैं और कुछ लड़कियों की शादी भी हो चुकी है, वह लोग भी अपनी फोटो फेसबुक पर डालते हैं। मैं सोचती हूं कि मैं कब अपनी फोटो फेसबुक पर डालूंगी और कब सारे दोस्त मुझे लाइक करेंगे। मुझे अब अपने आप को जल्दी से बदलना था इसलिए मैं अब सुबह जोगिंग पर जाने लगी लेकिन उसके बावजूद भी मुझ पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ रहा था, ना ही मेरा मोटापा कम हो रहा था।

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मैं सुबह बहुत मेहनत करती लेकिन उसके बावजूद भी मुझ पर कोई भी असर नहीं दिख रहा था। मेरा वजन थोड़ा सा काम होता और उसके बाद दोबारा से बढ़ जाता। मैंने खाना भी कम कर दिया था जिसकी वजह से मुझे कई बार चक्कर भी आ जाते थे और मुझे लगता था कि चक्कर आने से मैं कहीं गिर ना जाऊं। एक बार मेरी कॉलेज की सहेली मुझे मिल गयी,  वह कहने लगी कि तुम आजकल घर पर ही रहती हो, मैंने उसे कहा कि हां मैं आज कल घर पर ही रहती हूं मैंने अपनी जॉब भी छोड़ दी है। वह कहने लगी कि तुमने अपनी जॉब क्यो छोड़ी, मैंने उसे अपनी समस्या के बारे में बताया। मैने उसे कहा कि मैं अब बहुत ज्यादा मोटी हो चुकी हूं और ऑफिस में भी मुझे कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था इसी वजह से मैंने अपनी जॉब छोड़ दी। मेरी सहेली कहने लगी कि तुम्हें अपने आप से हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, तूम यदि कोशिश करो तो तुम्हारा वजन जरूर कम हो जाएगा। मैंने अपनी सहेली को बताया कि मैंने काफी कोशिश की लेकिन उसके बावजूद भी मेरा वजन कम नहीं हो रहा है। मुझे लग रहा है कि शायद मेरा वजन अब कभी कम नहीं होगा। मैं डाइटिंग भी शुरू कर दी लेकिन उसके बावजूद भी ना तो मेरा वजन घट रहा है और नहीं मुझ में किसी भी प्रकार का परिवर्तन आ रहा है। मेरी सहेली कहने लगी कि वह सब तो ठीक है लेकिन तुमने अपने आप को सब दोस्तों से अलग कर लिया है। ना तो तुम किसी के संपर्क में रहती हो और ना ही तुम किसी से बात करती हो।  मैंने उसे कहा कि मुझे भी लोगों से बात करनी है परंतु मुझे कई बार लगता है कि यदि मैं किसी से मिलने जाऊंगी तो कहीं वहां सब लोग मेरी बेजती ना कर दे, इसी डर से मैं ज्यादा किसी के साथ संपर्क में नहीं हूं। मेरी सहेली मुझे कहने लगी कि कुछ दिनों बाद मैंने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी है और तुम्हें उस में जरूर आना है, मैंने उसे कहा कि तुमने यह पार्टी किस खुशी में रखी है, वह कहने लगी कि मेरे पिताजी रिटायर होने वाले हैं तो मैंने सोचा उनके लिए मैं एक छोटी सी पार्टी रख लूं और अपने जितने भी परिचित हैं, उनको मैं इनवाइट करूं इसीलिए मैं तुम्हें यह सब बोलने आई थी, तुम्हें जरूर उस पार्टी में आना है।

मैंने उसे कहा ठीक है मैं जरूर तुम्हारे घर पर आऊंगी। यह कहते हुए वह चली गई। कुछ दिनों बाद मैं अपनी सहेली के घर पर गई, उसके घर पर ज्यादा लोग नहीं थे इसलिए सब लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे। जब मैं अपनी सहेली से मिली तो उसने मुझे अपने दोस्तों से मिलाया। उसके बाद मैं उसके पापा से मिली और मैंने उसके पापा को गिफ्ट दिया। मेरी सहेली ने मुझे पार्टी में आए एक लड़के से मिलवाया, उसका नाम त्रिलोक है। तिलोग जब मुझसे मिला तो मुझे थोड़ा अनकंफरटेबल सा लग रहा था क्योंकि वह दिखने में बहुत ही हैंडसम था। मुझे ऐसा लगा कि शायद वह भी मुझे घूर घूर कर देख रहा है,  मैं उससे अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी इसलिए मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की,  उसके बाद मैं एक कोने पर चली गई और चेयर पर बैठ गई। जब मैं चेयर में बैठी हुई थी तो उस वक्त त्रिलोक मेरे पास आया और मुझसे बात करने लगा। मैं उससे बात करते हुए शर्मा रही थी लेकिन वह मुझसे खुलकर बात कर रहा था और मुझसे कहने लगा कि तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो, मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे ऐसा लगा कि शायद वह मेरा मजाक बना रहा है इसीलिए मैं वहां से उठ कर चली गई, उसके बाद मैंने उससे बात नहीं की। जब पार्टी खत्म हो गई तो मैं अपने घर चली गई।

कुछ दिनों बाद मुझे त्रिलोक का फोन आया और त्रिलोक कहने लगा कि तुम्हें मेरी बात का इतना बुरा लगा तो मैं उसके लिए तुम्हें सॉरी कहना चाहता हूं। मैंने त्रिलोक से कहा कि तुमने उस दिन क्या यह बात मजाक में कही थी, त्रिलोक कहने लगा कि नहीं मैंने यह बात मजाक में नहीं गई थी। उस दिन तुम वाकई में सुंदर लग रही थी इसलिए मैंने तुम्हें यह बात कही। मैंने त्रिलोक से कहा कि मैं एक मोटी लड़की हूं और मैंने आज तक ज्यादा किसी के साथ बात नहीं की लेकिन त्रिलोक मुझे कहने लगा कि तुम मुझे वाकई में अच्छी लगी इसलिए मैंने तुम्हें यह बात कही। मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया और कहा कि मैं अपने मोटापे से परेशान हूं इसी वजह से मेरा कॉन्फिडेंस भी अब गिरने लगा है। त्रिलोक कहने लगा कि तुम चिंता मत करो, यदि तुम मेहनत करोगी तो तुम्हारा वजन जरूर कम हो जाएगा। त्रिलोक ने मुझे बहुत सपोर्ट किया और मुझे उस दिन बहुत अच्छा लगा। मैंने त्रिलोक से कहा कि अभी मैं कहीं जा रही हूं, मैं तुमसे बाद में बात करती हूं। अपना काम निपटाने के बाद मैं बैठी हुई थी लेकिन मेरे दिमाग से यह बात निकल गई कि मुझे त्रिलोक को फोन करना है इसीलिए मैंने उसे फोन नहीं किया। थोड़ी देर बाद त्रिलोक का फोन मुझे आ गया और वह कहने लगा कि तुमने मुझे फोन नहीं किया, मैं तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था। वह मुझसे काफी बात कर रहा था और मुझे उससे बात करना भी अच्छा लग रहा था। वह जिस प्रकार से मुझे सपोर्ट करता मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी और त्रिलोक की फोन पर बात होने लगी थी। मैं उससे सिर्फ पार्टी में ही मिली थी, उसके बाद हमारा मिलना नही हुआ। एक दिन मुझे त्रिलोक ने कहा कि क्या तुम थोड़ा बहुत टाइम निकाल सकती हो हम दोनों कहीं मिल लेते हैं। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने आती हूं। मैं उससे मिलने के लिए चली गई और जब वह मुझे मिला तो हम दोनों ही एक पार्क में जाकर बैठ गए वह मुझसे बात कर रहा था और मुझे उससे बात करना अच्छा लग रहा था। हम दोनों मजाक कर रहे थे वह मेरी मोटी जांघ पर अपने हाथ को रख रहा था। जब उसने अपने हाथ को मेरी जांघ पर रखा तो मैं मचलने लगी और मुझे मजा आने लगा।

उसने मेरी जांघ को दबा दिया और मैं उसके इशारे समझ गई हम दोनों ही पूरे मूड में थे और मैंने भी त्रिलोक को किस कर लिया। जब मैंने उसे किस किया तो वह मुझे कहने लगा कि अब हम दोनों कहीं चलते हैं। मैंने उसे कहा कि हम लोग मेरे घर चलते हैं मैं और त्रिलोक मेरे घर पर चले गए हम दोनों कमरे में थे तो उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिया और वह मुझे कहने लगा तुम्हारा गदरया हुआ शरीर तो मुझे अपनी तरफ खींच रहा है। जब उसने मेरे होठों को चूसा तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा वह मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे पूरे शरीर को उसने बड़े ही अच्छे तरीके से चाटा जिससे कि मेरी योनि के अंदर से पानी बाहर आने लगा था और मैं पूरे मूड में थी। त्रिलोक ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसके  लंड को मुंह में ले लिया और बड़े अच्छे से चूसने लगी उसका पानी भी निकलने लगा था। वह कहने लगा कि मुझसे बिल्कुल कंट्रोल नहीं हो रहा है। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा किया और धीरे धीरे मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डालने लगा जैसे ही उसका लंबा और मोटा लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बड़ा दर्द महसूस होने लगा और मैं चिल्लाने लगी मेरी सील टूट चुकी थी मेरी योनि से खून निकलने लगा। वह कहने लगा कि मुझे अच्छा लगा जिस प्रकार से तुम ने मुझे चोद रहे हो। मैं अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी और त्रिलोक मुझे बड़ी तेजी से झटके दे रहा था उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया। त्रिलोक ने मेरी बड़ी-बड़ी चूतडो पर अपने लंड को टच किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगता। उसने बहुत देर तक मुझे ऐसे ही चोदा लेकिन मैं ज्यादा देर तक त्रिलोक के लंड की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाई और मै झड़ चुका थी। उसके बाद वह भी झड़ गया और कहने लगा कि मुझे तुम्हें चोदकर बहुत ही अच्छा लगा।

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