शादी से पहले अपनी चचेरी बहन की सील तोडी

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मेरा नाम आकाश है मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मेरे कॉलेज की पढ़ाई अभी कुछ ही वक्त पहले हुई है, मेरी उम्र 25 वर्ष है और मैं अपने पिताजी के साथ ही उनके कारोबार में हाथ बढ़ा रहा हूं। मेरे पिताजी का काम बहुत ही बड़ा है इसलिए मैंने उनके साथ उनके कारोबार में ही काम करना शुरू कर दिया है। मेरे पिताजी की बहुत बड़ी होलसेल परचून की दुकान है और हमारी दुकान में बहुत लोग आते हैं इसलिए मेरे पिताजी ने कहा कि तुम ही अब इस काम को आगे संभालो, अब मैं कुछ समय घर में ही आराम करना चाहता हूं। घर में मैं ही बड़ा हूं इसलिए मेरे ऊपर ही सारी जिम्मेदारियां हैं। मेरी बहना भी स्कूल की पढ़ाई कर रही है इसलिए सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है और मुझे ही अपने पिताजी के काम को आगे बढ़ाना है इसीलिए मैं बहुत ध्यान से अपने पिताजी के साथ काम कर रहा हूं, मैं उनके काम में पूरा ध्यान देता हूं।

मेरी भी बहुत सारे लोगों से मुलाकात होने लगी थी क्योंकि मैं भी उनके साथ काम कर रहा हूं इसलिए मैं भी अब कई सारे लोगों को पहचानने लगा। हमारा सामान जिन भी बड़े डीलरों से आता है उन सब से मेरे पिताजी ने मुझे मिलवा दिया था और अब मैं ही उनके साथ में डील करता हूं। मेरे पिताजी बहुत खुश हैं और वह कहने लगे कि तुमने काम को बखूबी करना शुरू कर दिया है और मुझे बहुत खुशी है कि तुम इस प्रकार से काम कर रहे हो। मैं अपने पिताजी को कहने लगा कि आपने भी तो मुझे बहुत अच्छे कॉलेज में पढ़ाया है, मुझे भी यह बात पता है कि मेरे पिताजी का कारोबार बहुत बड़ा है। जितने भी छोटे दुकानदार है वह सब हमारी दुकान से सामान खरीद कर ले जाते हैं। हम लोग उन्हें बहुत अच्छा रेट लगाते हैं इसीलिए वह लोग हमारे पास ही आते हैं। मैंने जब अपने पिताजी से एक दिन पूछा कि आपको यहां काम करते हुए कितने वर्ष हो चुके हैं, वह कहने लगे कि मुझे यह काम करते हुए 30 वर्ष हो चुके हैं, पहले मैं एक छोटी सी दुकान में काम करता था और उसके बाद ही मैंने अपना काम शुरू किया, अपना काम शुरू करने के लिए मैंने अपने एक रिश्तेदार से पैसे लिए थे शुरुआत में मुझे काम चलाने में बहुत दिक्कत हुई क्योंकि उस वक्त यहां बिल्कुल भी भीड़ नहीं हुआ करती थी, अब तो यहां पूरा बाजार बन चुका है लेकिन जब मैंने काम शुरू किया था उस वक्त यहां पर गिनी चुनी ही दुकान हुआ करती थी, उसके बाद धीरे-धीरे यहां पर मार्केट बनता गया और आज हमारी दुकान अच्छी चल रही है।

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मुझे कभी भी अपने पिताजी से इस बारे में पूछने का मौका नहीं मिला था क्योंकि मैं जब कॉलेज में पढ़ता था उस वक्त मैं उनके साथ बहुत कम बैठता था और मुझे उनके काम से ज्यादा मतलब नहीं था लेकिन अब मैं उनके साथ काम कर रहा हूं इसलिए मुझे उनसे यह बात जननी थी। हमारी दुकान में जो भी व्यक्ति एक बार आता था वह हमसे ही दोबारा सामान लेकर जाता था क्योंकि जो भी हमारे डीलर हैं वह हमें बहुत कम दामों पर सामान देते हैं और हम लोग भी छोटे दुकानदारों को थोड़ा बहुत मार्जिन रखकर उन्हें सामान दे दिया करते हैं। अब मैं काम को अच्छे से संभालने लगा था तो मेरे पिताजी घर में ही रहते थे और वह बहुत कम दुकान पर आते थे। मैं भी उन्हें कहता था कि अब आप घर पर ही रहा कीजिए क्योंकि मेरे पिताजी ने काफी वर्षों से काम किया है इसलिए मैं चाहता हूं कि अब वह आराम करें। वह भी अब निश्चिंत हो चुके थे क्योंकि मैंने अब दुकान का काम अच्छे से संभालना शुरू कर दिया था इस वजह से वह अब दुकान में कम ही आते थे। हमारी दुकान पर काफी लोग काम करते हैं और वह बहुत समय से हमारी दुकान पर काम कर रहे हैं। हमारी दुकान में राकेश अंकल है जो मेरे पिताजी के साथ काफी पहले से हैं, जब से मेरे पिताजी ने दुकान खोली है उस वक्त से ही वह उनके साथ काम कर रहे हैं। मैं जब भी दुकान में बैठा रहता हूं तो वह मुझे मेरे पिताजी के बारे में हमेशा ही बताते रहते हैं और कहते हैं कि तुम्हारे पिता ने बहुत ही मेहनत की है, मैं उनके साथ शुरू से ही काम कर रहा हूं और उन्होंने मुझे कभी भी कोई तकलीफ नहीं होने दी।

एक समय ऐसा भी था जब दुकान से इतनी कमाई नहीं होती थी लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझे समय पर पैसे दे दिया करते थे और कहते थे कि आपको भी अपना परिवार चलाना है, मुझे तुम्हारे पिताजी की बात हमेशा ही अच्छी लगती है इसीलिए मैंने उसके बाद तय कर लिया कि मैं अब इसी दुकान में काम करूंगा। मेरे पिताजी भी राकेश अंकल पर बहुत भरोसा करते हैं क्योंकि वह बहुत ही ईमानदार हैं और जब कभी मेरे पिता दुकान में नहीं आ पाते थे तो राकेश अंकल ही दुकान का सारा काम संभालते थे लेकिन अब मैं दुकान पर काम देखने लगा हूं इसलिए राकेश अंकल सारा हिसाब किताब का काम देखते हैं। मेरे पिता और उनके बीच में बहुत अच्छी दोस्ती है। वह हमारे घर भी अक्सर आते रहते हैं और उनके परिवार वाले भी हमारे घर पर आते हैं। मेरे पिताजी भी उनकी बहुत तारीफ करते हैं और कहते हैं कि राकेश बहुत ही ईमानदार व्यक्ति हैं। एक बार हमारी दुकान में एक लड़का काम करता था, वह अक्सर दुकान से पैसे चोरी करता था लेकिन मुझे इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। एक दिन राकेश ने उसे पकड़ लिया और उसके बाद मैंने उसे दुकान से निकाल दिया, राकेश हमेशा ही मेरा अच्छा चाहता है। मेरे चाचा एक दिन हमारे घर पर आये और कहने लगे कि पायल की शादी होने वाली है, हम सब लोग बहुत ही चौक गए, हम लोग चाचा से कहने लगे कि वह तो अभी पढ़ाई कर रही है।

वह कहने लगे कि हां वह तो पढ़ाई कर रही है परंतु वह जिस कॉलेज में पढ़ती है उसी कॉलेज में उसने एक लड़का पसंद कर लिया है और वह बहुत जिद कर रही है कि मुझे उससे ही शादी करनी है इसी वजह से मैंने उन दोनों की शादी तय कर दी। मेरे पिताजी मेरे चाचा से कहने लगे कि तुमने तो हमसे एक बार भी इस बारे में जिक्र कर नही किया। चाचा कहने लगे कि यह सब बहुत जल्दी में हो गया इसलिए मैं आपसे बिल्कुल भी बात नहीं कर पाया। मेरे चाचा भी जयपुर में रहते हैं और उनका भी अपना काम है, वह हार्डवेयर का काम करते हैं। मेरे पिताजी कहने लगे कि शादी कब है, वह कहने लगे बस कुछ दिनों बाद उन दोनों की मैंने शादी तय करदी है, बस जल्दी बाजी में अपने सब रिश्तेदारों को बोल रहा हूं। मेरे पिताजी कहने लगे कि तुम्हें पैसों की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना या फिर हमारे लायक कोई भी सेवा हो तो हमें तुम जरूर बता देना। मेरे चाचा कहने लगे ठीक है मुझे आपकी मदद की आवश्यकता होगी तो मैं आपको जरूर बता दूंगा। वह यह कह कर चले गए और कुछ समय बाद पायल की शादी का दिन नजदीक आ गया। लड़के के परिवार वाले भी जयपुर में ही आए हुए थे और वह लोग जयपुर में उन दोनों की शादी करना चाहते थे। हम लोग भी अपने चाचा के घर जल्दी चले गए और दुकान अंकल ही देख रहे थे। मैं जब पायल से मिला तो मैंने उसे कहा तुमने तो बहुत जल्दी शादी का फैसला कर लिया, वह कहने लगी कि बस यह सब बहुत जल्दी में हो गया। पायल और मैं हमउम्र हैं इसलिए मेरी उससे बहुत जमती है लेकिन जब से वह कलकत्ता गई है। उसके बाद से मेरी उससे ज्यादा बात नहीं हो पाई। वह शादी से बहुत खुश है और मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे होने वाले पति कब आने वाले हैं, वह कहने लगी कि उनका परिवार दो दिन बाद यहां आएगा। हम लोग तब तक शादी की तैयारियां कर रहे थे। अब मैं भी पायल के साथ मदद करने लगा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके साथ मदद कर रहा था। मैं पायल की मदद कर रहा था वह मुझे कहने लगी कि तुम इतना काम मत करो।

मैंने उसे कहा कि तुम्हारी शादी है तो मैं तो काम करूंगा यदि मैं काम नहीं करूंगा तो कोई बाहर वाला आकर करेगा। हम दोनों बहुत थक चुके थे उसके बाद हम लोग कमरे में आराम करने के लिए चले गए। जब हम दोनों कमरे में बैठे हुए थे तो पायल की आंख लग गई और वह सो गई। मैं भी उसके पास में ही लेटा हुआ था लेकिन उसने अपनी चूत मे उंगली डाल रखी थी। मैं जब उसके पास गया तो मैंने उसकी सलवार को नीचे उतारा तो उसकी योनि से पानी बाहर निकल रहा था। मैंने जैसे ही अपनी जीभ को उसकी योनि पर लगाए तो वह बहुत खुश हो गई और मुझे भी बहुत अच्छा लगा। मैंने अपने लंड को निकालते हुए उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और उसकी योनि के अंदर अपने लंड डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो उसकी चूत से खून की पिचकारी निकल गई वह बहुत तेज चिल्लाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे झटके दे रहा था और वह भी मेरा पूरा साथ देती जाती। वह अपने मुंह सिसकिया निकल रही थी। वह कहने लगी कि तुमने तो मेरे साथ पहले ही सुहागरात मना ली है। उसे बहुत अच्छा लगने लगा था इसलिए वह मेरा साथ दे रही थी। उसने अपने पैर इतने चौडे कर दिए कि मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी। मेरा लंड उसकी योनि की गहराई मे जाता तो मुझे मजा आ रहा था वह बहुत खुश हो रही थी। वह अपने पैरों को और चौड़ा कर लेती मैं भी उसे उतना ही तेज गति से झटके देता जितना वह अपने पैरों को चौड़ा करती। मुझसे उसकी चूत की गर्मी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। वह अपने पैरों  से मुझे जकडने लगी और मैंने भी उसे बड़ी तेज गति से झटके दिए और उन्हें झटकों के बीच में मेरा माल उसकी योनि में गिर गया। उसके बाद हम दोनो ने अपने कपड़े पहने और काम पर लग गए। उसके कुछ समय बाद उसकी शादी हो गई वह जब भी अपने घर आती है तो मैं उसे हमेशा ही चोदता हूं।

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