सेठ ने चोदी रंडी की चूत

मुन्नीबेगम बरामदे में खड़ी हुई रस्ते जाते हुए मर्दों को लुभाने के लिए अपनी ढीली चोली पहन के खड़ी थी. होंठो पर लिपस्टिक और पान मिल के एक अलग ही रंग बनाये हुए थी. भड़काऊ टी-शर्ट में उसके पास खड़ी वो ३-४ लड़कियां भी मुन्नी के जैसे ही रंडियां थी जो अपनी किस्मत के ग्राहक को निहार रही थी. रस्ते पर चलते हुए मर्दों में से १०% तो दलाल थे जो हर नए दिखने वाले इन्सान को साहब मस्त माल हैं, चलोगे कह के अपने कमीशन का जुगाड़ कर रहे थे. आप का स्वागत हैं मुंबई के रंडी बाजार के वो रस्ते पर जहाँ दिन में सेंकडो चूतें चुद जाती हैं.

मुन्नी ने पान की पिचकारी मारी ही थी की पीछे से गायत्री दीदी की आवाज आई, मुन्नी एक सेठ आया हैं बैठेंगी उसके साथ?

गायत्री दीदी इस कोठे की मालिकिन थी, हर रंडी की चूत की कमाई का बड़ा हिस्सा उसकी जेब में ही जाता था. रुआबदार चहरा और बड़ी गोल आँखों वाली गायत्री भी एक जमाने में यहाँ रंडी हुआ करती थी. फिर किस्मत के साथ से वो खुद का कोठा खोलने में कामियाब हो गई.

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मुन्नी ने अपने होंठो के ऊपर की चूर सुपाड़ी को हाथों से साफ़ करते हुए कहा, क्यूँ नहीं दीदी!

आजा, इतना कह के गायत्री आगे बढ़ी. मुन्नी भी उसके पीछे चल पड़ी.

कमरे में सेठ बैठा था जिसने माथे पर टोपी पहनी थी और उसकी उम्र कुछ ५० की तो थी ही. बगल में उसके एक चमड़े का पाकिट था और आँखों पर सोनेरी फ्रेम के चश्मे.

ये सेठ हिमांशु हैं, सूरत से हैं और हीरे के दलाल हैं बहुत बड़े, गायत्री ने इस अंदाज से सेठ का परिचय दिया.

मुन्नी कुर्सी पर ऐसे बैठी की उसका पल्लू निचे गिरे. सेठ को उसने अपनी चुंचियां दिखा दी, सेठ के मुह ,में भी वो बड़े मम्मे देख के पानी आ गया. फिर नजाकत से मुन्नी बेगम ने अपने पल्लू को उठा के अपने चुन्चो को सेठ की नजर से दूर किया. मानो उसने सौदे से पहले सेठ को माल दिखाया!

सेठ जी, ये मेरी सब से अच्छी लड़की हैं, प्यार से हम उसे मुन्नी कहते हैं. मुन्नी आप के साथ बैठेंगी. क्यूंकि आप को सेठ रतनदास ने भेजा हैं इसलिए आप को भी सही सर्विस देंगी ये लड़की मेरी. मुन्नी सेठ को ले के ऊपर के गेस्ट रूम में जाओ.

जी दीदी.

ऊपर का गेस्ट रूम सिर्फ बड़े बकरों के लिए खोला जाता था. वरना २००-३०० रूपये के ग्राहकों के लिए तो वही चद्दर का पर्दा और ४ फिट चौड़ा चुदाई का कमरा. मुन्नी सीडियां चढ़ते हुए अपने कुलहो को नजाकत से इधर उधर मटका रही थी. हिमांशु सेठ वो बड़ी गांड को देख के पीछे पीछे चल रहा था.

इस मजले पर एक दो लड़कियां और थी जो कमरे के बहार खड़ी खड़ी खुसपूस कर रही थी. मुन्नी के पीछे इस सेठ को देख के एक ने मुन्नी को आँख भी मारी.

सक्कल खोल के मुन्नी ने सेठ को अदंर लिया. पलंग पर पाकिट रख के सेठ अपने कुर्ते के बटन खोलने लगा. मुन्नी ने दरवाजा अन्दर से बंध किया और वो भी अपनी साडी को खोलने लगी. सेठ ने कुर्ता उतारा, उसका मोटा पेट बनियान को फाड़ने की कगार पर था.

मुन्नी, तुम्हारा असली नाम क्या है?

साहब रंडी का नाम नहीं होता कोई, आज मुन्नी तो कल चमेली, फिर बसंती या बानू!

फिर भी माँ बाप ने कोई नाम तो दिया होंगा.

सेठ जी छोड़े वो सब, आप बैठ कर जाओ आप इस कमरे से निकल के मुझे याद नहीं करने वाले फिर मेरा इतिहास टटोलने की कोई जरुरत नहीं हैं.

हा हा हा, सेठ हंसा और उसने अपनी लह्न्गी का नाड़ा खोला. उसका लहंगा जमीन पर गिरा और चड्डी में उसके लंड का आकार दिखने लगा. मुन्नी ने देखा की वो एक साधारण से कम साइज़ का लंड होगा. लेकिन असली साइज़ तो चड्डी खोलने के बाद ही पता चलने वाली थी. मुन्नी ने अपने सारे कपडे खोल दिए थे और वो एकदम नंगी थी. हिमांशु सेठ उसकी चूत को देख रहा था.

चलीये सेठ उतार दीजिए बाकी के कपडे भी. इतना कह के मुन्नी ने खुद अपने हाथ से चड्डी को निचे सरकाया.

अरे ये क्या!

सेठ के लंड को देख के मुन्नी अपनेआप को हंसने से रोक नहीं सकी. साढ़े तिन इन्चा वो लंड किसी छोटे बच्चे की लुल्ली जैसा ही था. सेठ के चहरे पर शर्म उभर आई.

मुन्नी ने अपने हाथ से लंड को पकड़ा और देखा की वो आधे से ज्यादा टाईट था. लेकिन फिर भी वो साइज़ में बहुत ही छोटा था.

हंसो मत यार, मैं जानता हूँ मेरा छोटा हैं लेकिन खड़ा तो वो भी होता हैं और मुझे भी चोदना होता हैं.

अरे माफ़ करो सेठ जी, लेकिन मैंने इतना छोटा कभी देखा नहीं था इसलिए हंस पड़ी.

मुन्नी, आज मुझे खुश कर दो और किसी को मेरे लंड की साइज़ के बारे में मत कहना, गायत्री को भी नहीं. अगर तुम मुझे खुश रखोंगी तो मैं तुम्हे हर हफ्ते आके इतने पैसे दूंगा की तुम खुद को अमीर कह सकोंगी.

सेठ की बात में पॉइंट था. मुन्नी ने लंड को अपनी उंगलियों से सहलाया और वो उसे हिला हिला के बड़ा करने का व्यर्थ प्रयत्न करने लगी. सेठ ने अपना बनियान उतारा और वो पलंग के ऊपर बैठ गया.

इसे चुसो ना मुन्नी.

मैं ऐसे नहीं चुसुंगी डायरेक्ट, पहले कंडोम पहन लीजिये आप.

इतना कह के मुन्नी ने गद्दे को ऊपर किया और वहां पड़े हुए कंडोम का पेकेट सेठ को दिया. सेठ ने लंड पर कंडोम पहना लेकिन उनका लंड ढंकने के बाद भी कंडोम अनरोल होना बाकी था. उनका छुटकू लंड कंडोम में आते ही मुन्नी ने अपने होंठ उसके ऊपर रख दिए. वो लंड को चूसने लगी और सेठ की आँखे बंध हो गई. मुन्नी बेगम छुटकू लोडे को अपने होंठो के दरवाजे में जोर से दबाने लगी. सेठ हिमांशु को लगा की वो स्वर्ग में विहर रहे हैं.

२ मिनिट्स लंड चुसाने के बाद सेठ ने अपना लंड मुन्नी के मुहं से निकाला और अब वो चूत लेने के लिए तैयार थे. मुन्नी बेगम ने पलंग में अपनी टाँगे खोली और लोडे को एक हाथ से पकड के अपनी चूत के छेद पर रख दिया. सेठ ने हल्का झटका दिया और उनका छोटे लंड का आधा हिस्सा चूत में घुसा. मुन्नी बेगम के लिए तो वो कुछ भी नहीं था, ९ ९ इंच के लंड ले ले के अब यह चूत पूरी लंड\खोर बन चुकी थी.

सेठ ने और एक झटका दिया और पूरा लंड अन्दर कर दिया. वो हिलते रहे लेकिन मुन्नी बेगम को तो जैसे कुछ अनुभव ही नहीं हो रहा था. वो लोडा सिर्फ चूत के होंठो से लड़ रहा था, चूत का अन्दरूनी हिस्सा तो लोडे से महरूम ही था. सेठ अपने होंठो से मुन्नी की चुन्चिया चूस रहा था और जोर जोर से अपनी कमर को हिला के लंड अन्दर बहार कर रहा था.

सेठ की साँसे फुल गई और उसके माथे पर पसीना आ गया. दूसरी ही मिनिट उसके लोडे से वीर्य की बुँदे निकल के कंडोम के प्लास्टिक में रह गई. सेठ ने लंड को चूत से निकाला और कंडोम को निकाल के लहंगा पहन लिया. मुन्नी बेगम भी कपडे पहन के खड़ी हो गई.

क्यूँ कैसा रहा सेठ?

मजा आ गया रानी! ये ले!

यह कह के सेठ ने ५०० की हरी पत्ती मुन्नी बेगम को थमा दी. यह मुन्नी बेगम की बक्षीश थी. मुन्नी बेगम मन ही मन हंस रही थी की साला खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोडा बारह आना!