रीता भाभी की चुदाई का खेल भाग-1

हेलो दोस्तों | कैसे हैं आप लोग | मैं रमेश एक छोटे से गाँव में रहता हूँ | मेरी उम्र 30 साल है | वैसे तो मै ज्यादा पढ़ा लिखा नही हूँ | पैसे की कमी की वजह से मैं पढ़ नही पाया | लेकिन फिर भी अपनी मेहनत से मैंने 12 वीं पास कर ली | और फिर वही अपने गाँव के बैंक में क्लर्क की नौकरी मिल गई | लेकिन वहां भी मेरी किस्मत ने मुझे धोका दिया | मुझे नौकरी से निकल दिया गया | फिर मैं मेहनत मजदूरी करके मै अपने घर का पेट पालने लगा | तभी मेरे एक दोस्त ने मुझे मुंबई शहर में एक नौकरी के बारे में बताया | मैं बहुत खुश हुआ कि अब मै अच्छे से अपने परिवार का खर्च उठा पाउँगा | वो मुझे शहर ले कर गया | जहाँ वो मुझे एक बंगले में ले कर गया | मुझे वहां साफ़ सफाई करने की नौकरी मिल गई | मै अपने काम से खुश तो नही था | लेकिन पैसे अच्छे होने के कारण मैंने वो नौकरी ले ली |

अब बात करते हैं उस बंगले की | उस बंगले में सिर्फ दो लोग रहते थे | मियां बीवी | मेरे मालिक बहुत बड़े बिसनेस मैन थे | वो हमेशा विदेश जाया करते थे | वो बहुत अच्छे थे | वो मुझे नौकर की तरह नही अपने छोटे भाई की तरह मानते थे | वो ज्यादातर बाहर ही रहते थे | अपनी कम्पनी के काम की वजह से तो मालकिन अकेले रह जाती थी | अब मैं अपनी मालकिन के बारे में बता दूँ | उनका फिगर तो एकदम मस्त था | दिखने में एकदम सेक्सी लगती थी | उनकी उठी हुई गांड तो बहुत ही ज्यादा मस्त थी | उनके बोबे भी बहुत बड़े – बड़े थे | जब वो तैयार होकर कही जाती तो ऐसा लगता की कोई परी आसमान से उतर कर आई है | मेरी भी अभी शादी नही हुई थी लेकिन उनको देख कर बस यही सोचता था | कि काश ये मेरी पत्नी होती | मैं तो कभी छोड कर जाता ही नही बस दिन रात जम कर चुदाई के मज़े उठाता लेकिन मेरी ऐसी किस्मत कहाँ |

अकेले रहने की वजह से मालकिन बहुत ही उदास रहने लगी थी | जो मुझे अच्छा नही लग रहा था | फिर मैं मालकिन को हंसाने की कोशिशे करने लगा | जिसके लिए मुझे ज्यादा टाइम तक मालकिन के पास रहना पड़ता था | लेकिन उनके फिगर ने तो मुझे घायल कर के रख दिया था | अब तो मै उनके नाम की मुठ भी मारने लगा था | जब उन्हें देखता तो एकदम बिजली सी दौड़ जाती थी पुरे शरीर में | अब तो मैं उनका दीवाना हो गया था | अब मै उनसे बात भी करने लगा वो भी बहुत जल्दी मुझसे घुल मिल गई | अब तो मुझसे अपनी सारी बातें बताती थी | अब मै उन्हें मालकिन नही भाभी जी बोलने लगा था | मुझे भी उनसे बात करने में एक अलग ही मज़ा आने लगा था | एक बार मैं रात में पेसाब करने के लिए जा रहा था तभी कुछ आवाज सुनाइ दी | मैंने सुना की कोई करह रहा था | पहले तो मैं डर गया की कही भाभी को कुछ हो तो नही गया | मै दौड़ के उनके कमरे की तरफ गयातो देखा की भाभी जी के कमरे का दरवाजा थोडा सा खुला हुआ था | फिर मैंने जो देखा मेरी आँखें खुली की खुली रह गई | भाभी जी अपने बेड पे नंगे सिर्फ ब्रा पैंटी में थी | वो जोर जोर से अपनी चूत में कुछ अंदर बाहर कर रही थी | और जोर जोर से आह्ह्ह्ह… आऔह्ह्ह्ह… ऊह्ह्ह .. की आवाज़े निकल रही थी | ये सब देख कर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था | मन तो कर रहा था कि अभी जाके चोद दूं | लेकिन फिर कैसे भी मैंने अपने आप को शांत किया | और फिर अपने कमरे में आकर दो बार मुठ मारी और सो गया | ये सब देख कर अब मन बना लिया था की भाभी जी को ओने लंड का स्वाद तो जरूर चखाऊंगा | अगले दिन भैया आ गए | मैंने सोचा अब तो मै एस बारे में कोई बार नही कर पाउँगा फिर पता चला की भैया शाम को जाने वाले है | जैसे ही भैया गए मैं भाभी के कमरे में गया | तो देखा की वो जोर जोर से रो रही थी | मैंने पूछा की क्या हुआ तो पहले तो उन्होंने कुछ भी बताने समाना कर दिया | लेकिन बहुत पूछने पर बताने लगी | किभैया अपने काम में इतना व्यस्त रहते है कि भाभी के लिए टाइम नही निकाल पाते | मै समझ गया की भाभी जी लंड की भूखी है | जो उन्हें भैया से नही मिल पा रही थी | अब वो बस चुदना चाहती थी | वो रोते रोते अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया था | अब उनके शरीर की गर्मी से अब मेरा बुर हाल हो रहा था | मेरा लंड एकदम तन गया था मानो चूत मिल जाए तो एक दम फाड़ के रख दे | अब मुझसे संभाला नही गया | मैंने बहुत कोशिश की | लेकिन कुछ भी नही हुआ | वो मेरे कंधे पर सर रख कर रोये जा रही थी | मैंने झट से उन्हें अपने दोनों हाँथो से उठाया | और उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया | अब उनके बूब्स मेरे शरीर से टच हो रहे थे | उन्होंने अभी कच भी नही बोला | मेरी हिम्मत और बढ़ गई | थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने फिर उन्हें उठाया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए |

भाभी जी भी मग्न हो गई | वो भी जोर जोर से मेरे होंठो को चूम रही थी | वो एकदम खो सी गई थी | अब ये सिल सिला करीब 5 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा फिर मैंने थोड़ी और हिम्मत की | और भाभी जी को बेड पे सीधा लिटा दिया | और एक बार फिर से उनके होंठो का रश पीने लगा | उनके होंठ तो ऐसे थे जैसे उनमे जूस भरा हो | और मै उस जूस को पी रहा था | मैंने सोचा आज तो मै मस्त चुदाई करूँगा भाभी जी की | अब मैंने अपना एक हांथ भाभी जी के एक बूबे पर रख दिया और जोर से दबाया | वो करांह उठी | आह्ह्ह्ह…… | अब मैंने अपना हांथ उनके ब्लाउज के अन्दर दाल दिया और जोर जोर से उनके बोबे को दबाने लगा | वो भी मज़े ले रही थी | मै उन्हें पागलो की तरह किस किये जा रहा था | धीरे धीरे मैं नीचे बढ़ने लगा फिर मैंने उनकी ब्लाउज खोल दी | और एक हाथ से उनके एक बूबे को दबा रहा था तो एक बूबे को किस कर रहा था | भाभी जी मज़े से खो गई थी | अब तो बस वो आह्हह.. आह्हह की आवाज़ निकाल रही थी | अब मै उनके बूबे को जैसे ही मुह में लेना वाला था | कि अचानक एक जोर का झटका लगा | भाभी जी ने मुझे एक झटके में मुझे खुद से अलग कर दिया | और बहुत ही गुस्से से मुझे देखने लगी | मै बहुत डर गया था | सोच अब तो मेरी ये नौकरी गई | उसके साथ ही अब क्या क्या होने वाला था | मै भाग के अपने रूम में चला गया | अब बस यही डर था कि भाभी जी कहीं मेरी शिकायत न कर दें भैया से |

बाकी कहानी अगले भाग में…

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