प्रोफेसर की लड़की को

antarvasna

मेरा नाम राजीव है मैं कॉलेज में पढ़ने वाला छात्र हूं और मेरी उम्र 23 वर्ष है। मैं मुंबई का रहने वाला हूं, मेरे पिताजी विदेश में ही रहते हैं,  वह वहीं पर जॉब करते हैं। वह बहुत कम ही घर आते हैं। मेरी मम्मी ने हीं हमें बचपन से पढ़ाया है और वही हमारा ध्यान देती हैं। मेरे पिताजी बहुत कम ही आते हैं इस वजह से वह हम पर कभी भी ध्यान नहीं दे पाए लेकिन मेरी मां ने हम पर बहुत ही अच्छे से ध्यान दिया। वह हमें एक अच्छे कॉलेज में भी पढ़ा रही हैं। जब मेरी स्कूल की पढ़ाई खत्म हो गई थी तो उसके बाद उन्होंने मुझे एक अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलवा दिया और मेरी बहन भी मेरे साथ ही पढ़ती हैं। मैं कॉलेज से एमबीए कर रहा हूं और मेरी बहन का कॉलेज का यह आखिरी वर्ष है। कॉलेज में उसके साथ हमारे प्रोफेसर की लड़की आकांक्षा भी पड़ती है, जो कि मुझे बहुत पसंद है। वह मेरी बहन की बहुत अच्छी सहेली है,  वह अक्सर हमारे घर पर आती रहती है।

आकांक्षा के पिताजी बहुत ही सख्त किस्म के हैं और वह सिर्फ काम को लेकर ही बात करते हैं। अन्यथा वह किसी से भी बात नहीं करते। हम लोग उनसे बहुत ही डरते हैं और जब आकांक्षा हमारे घर पर आती है तो मैं उससे कई बार पूछ लेता हूं कि क्या तुम्हारे पिताजी घर में भी इसी तरीके का बर्ताव करते हैं, वह कहती है कि मेरे पिता जी का बहुत ही शांत स्वभाव है और वह बिल्कुल भी किसी के साथ ज्यादा बात नहीं करते। मैंने उसे कहा कि लेकिन वह कॉलेज में तो सब लोगों को बहुत डांट कर रखते हैं और सब बच्चे उनसे बहुत डरते हैं। आकांक्षा कहने लगी कि उनका व्यवहार ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, वह घर पर बहुत ही शांत रहते हैं और ज्यादा किसी के साथ भी बात नहीं करते। जब मुझे आकांक्षा ने मुझे यह बात बताई तो मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ। मैंने उससे कहा कि मुझे तुम्हारी बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है। मेरी बहन और उसके बीच में बहुत अच्छी दोस्ती है। मेरी बहन आकांक्षा के घर भी जाती है परंतु मैं आज तक कभी भी आकांक्षा के घर पर नहीं गया क्योंकि मुझे उसके पिताजी से बहुत डर लगता है, इस वजह से मैं आज तक कभी आकांशा के घर नहीं गया।

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एक दिन आकांक्षा हमारे घर पर आई हुई थी। वह मुझसे कहने लगी कि हम लोग कोई फ्लैट देख रहे हैं यदि तुम्हारी नजर में हो तो तुम मुझे बताना। मैंने आकांक्षा से कहा कि मेरे पिताजी हमारा पुराना फ्लैट बेचने के बारे में सोच रहे थे, मैं इस बारे में अपनी मां से बात करूंगा और तुम्हें उसके बाद बता दूंगा। मैंने जब इस बारे में अपनी मां से बात की तो वह कहने लगी कि वह प्रॉपर्टी हम बेचना चाह रहे हैं क्योंकि वहां पर हमारा जाना बिल्कुल भी नहीं हो पाता, इसी वजह से हम लोग उसे बेच रहे हैं और यहीं पास में कोई प्रॉपर्टी खरीद लेंगे। जहां पर हम लोग रहते हैं वहां से हमारा फ्लैट बहुत काफी दूर है और वह काफी समय से बंद ही पड़ा है। मैंने जब इस बारे में अपनी मां से बात की तो उन्होंने आकांक्षा से बात की और मेरी माँ ने आकांक्षा से कहा की यदि तुम्हारे पिताजी एक बार यह फ्लैट देख ले तो उसके बाद ही कुछ वह फैसला लेंगे इसलिए उन्हें तुम उस फ्लैट की फोटो दिखा देना। मैंने आकांक्षा के नंबर पर उस फ्लैट की फोटो सेंड कर दी और उसके बाद उसने अपने पिताजी को वह फोटो दिखाई। उसके पिताजी को वह फ्लैट काफी पसंद आया और वह जिस प्रकार का फ्लैट देख रहे थे वह उसी प्रकार का है। मैं और मेरी मां उन्हें अपने साथ वह फ्लैट दिखाने ले गए थे। जब उन्होंने वह फ्लैट देखा तो वह कहने लगे की मुझे तो यह फ्लैट अच्छा लग रहा है इसलिए आप अपने पति से इसके बारे में बात कर लीजिएगा। उसके कुछ समय बाद ही मेरे पापा भी घर आ गए और हम लोग आकांक्षा के घर चले गए। जब हम आकांक्षा के घर गए तो उसके पिताजी और मेरे पिताजी के बीच में उस फ्लैट को लेकर बात हो गई। हमसे वह फ्लैट आकांक्षा के पिताजी ने खरीद लिया और उसके बाद हम लोग भी अपने लिए कोई दूसरा फ्लैट देखने लगे। मेरे पिताजी ने हमारे पास में ही एक नई साइट चल रही थी, वहां पर फ्लैट बुक कर लिया और उसके बाद वह काफी दिनों तक घर पर ही थे। हम लोग भी बहुत खुश है क्योंकि मेरे पिताजी काफी समय बाद घर लौटे थे।  हम लोग उस दिन बाहर भी जाने वाले थे।

जब हम लोग बाहर जाने वाले थे तो उसी वक्त आकांक्षा भी आ गई और आकांक्षा को मेरी बहन ने कहा कि तुम भी हमारे साथ चलो लेकिन पहले वह मना करने लगी,  फिर मेरे पिताजी ने उसे  कहा तो वह मना नहीं कर पाई। मेरे पिताजी कहने लगे कि मैं तुम्हारे पापा से फोन पर बात कर लूंगा। मेरे पापा ने आकांक्षा के पिताजी से बात की और कहा कि आकांक्षा हमारे साथ ही आज बाहर जा रही है इसलिए वह हमारे घर ही रुकेगी। आकांक्षा के पिता जी ने भी मना नहीं किया और अब हम लोग तैयार होने लगे। आकांक्षा भी उस दिन हमारे साथ ही चल पडी। हम लोग अपने घर से जा रहे थे लेकिन ट्रैफिक बहुत ज्यादा होने की वजह से हमें बहुत लेट हो गई। हम लोगों ने पहले मूवी देखने का प्लान बनाया था लेकिन हमें लेट हो गई इसलिए हमें वह शो कैंसिल करना पड़ा और उसके बाद वाली टिकट हमें लेनी पड़ी। जब हम लोग मॉल पहुंचे तो उस वक्त काफी भीड़ हो रखी थी और कुछ देर बाद सो शुरू हो गया। हम सब लोग मूवी देखने लगे। मैं काफी समय बाद अपनी फैमिली के साथ कहीं बाहर निकला था इसलिए मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था और मेरे पिताजी भी बहुत खुश थे। वह कहने लगे कि तुम लोगों के साथ में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

उसके बाद हम सब लोग मूवी देख रहे थे। जब मूवी खत्म हुई तो उसके बाद हम लोग मॉल से बाहर निकले और वहीं मॉल में ही एक रेस्टोरेंट में बैठ गए। मेरे पिताजी ने हमें मैंनू कार्ड दिया और पूछने लगे कि तुम लोग क्या खाओगे। उसके बाद हम लोगों ने अपने-अपने आर्डर दिए और कुछ देर बाद हम लोग वहां से डिनर करते हुए अपने घर चले गए। जब हम लोग वापस जा रहे थे तो उस वक्त ट्रैफिक कम था और हम लोग जल्दी से घर पहुंच गए।  हम लोग घर पहुंचे तो हम लोग काफी देर तक बैठकर बात कर रहे थे। मेरी बहन और आकांक्षा रूम में ही बैठे हुए थे और वह लोग अपने फोन पर ही गेम खेल रहे थे। मैं अपने पापा के साथ बैठ कर बात कर रहा था और उन्हें कह रहा था कि आप इस वक्त काफी समय बाद घर आ रहे है, जब भी आप घर आते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। मेरे पिताजी भी कहने लगे कि मैं सोच रहा हूं कि अब मैं मुंबई में ही आ जाऊं और यही पर रहकर कुछ काम शुरू कर दू क्योंकि काफी समय हो चुका है और मैं भी चाहता हूं कि तुम लोगों के साथ समय बिताऊँ। मैंने भी अपने पिताजी से कहा कि यदि आप मुंबई आ जाएंगे तो अच्छा रहेगा क्योंकि यहीं पर आप कुछ काम शुरू कर लीजिए। हम लोगों की उस वक्त काफी बात हुई और उसके बाद मेरे मम्मी पापा भी अपने रूम में चले गए। मैं, आकांक्षा और अपनी बहन के साथ बैठ गया। वह लोग मोबाइल में गेम खेल रहे थे और मैं भी उनके साथ बैठा हुआ था। हम तीनों ही आपस में बात करने लगे। मुझे आकांक्षा के साथ बात करना अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद मेरी बहन सो गई और आकांक्षा अब भी मोबाइल में लगी हुई थी। मैं उसके पास में बैठा था मैं उस से चिपक कर बैठा हुआ था इसलिए उसकी गांड मुझसे टकरा रही थी और उसके स्तनों मुझसे टकराने लगे। मैंने जैसे ही उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वह मेरे इशारे समझ चुकी थी और वह भी पूरी तैयार हो चुकी थी। मेरा लंड खड़ा हो गया था और मैंने जैसे ही आकांक्षा के होठों को अपने होठों मे लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा और मैं उसे किस करने लगा। हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से किस कर रहे थे। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था अब हम दोनों से ही बिल्कुल भी नहीं रहा गया। मैंने जब आकांक्षा के कपड़े उतारे तो उसके छोटे छोटे चूचे देखकर मेरा मन खराब हो गया और उसके चूचो को मै मुंह में लेने लगा। मैने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुह मे डाल दिया वह मेरे लंड को चूसने लगी वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को सकिंग करने लगी।

काफी देर तक उसने ऐसा ही किया उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया तो उसकी योनि पूरी गीली हो चुकी थी और मैने अपने लंड को उसकी चूत मे डाल दिया मैं अब उसे धक्के देने लगा। मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के मारे उसकी सील टूट चुकी थी उसकी योनि से खून निकलने लगा था। उसे बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसे झटके दिए जा रहा था और मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था मैं जिस प्रकार से उसके चोदता जाता। वह पूरे जोश में आ चुकी थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी वह मुझे कहने लगी कि तुम मुझे घोडी बना कर चोदो। मैंने उसे घोडी बना दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह मचलने लगी। उसे बड़ा मजा आ रहा था वह अपनी बड़ी-बड़ी चूतडो मेरे लंड से मिला रही थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करके बहुत मजा आ रहा है यह मेरा पहला बार है लेकिन मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। वह जिस प्रकार से अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं भी उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जाता जिससे कि हम दोनों से ही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ। जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसकी योनि से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और आकांक्षा ने मेरे लंड को अपने मुंह में समा लिया और उसे अच्छे से चूसने लगी थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मेरा वीर्य उसके मुंह में ही गिर गया और उसने मेरे माल को अपने अंदर ले लिया।

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