पिंक और रसीली चूत

desi aunty sex stories, desi kahani हैल्लो दोस्तों, आज में आपको अपनी लाईफ की एक रियल स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ। दोस्तों यह बात आज से 5 साल पुरानी है, तब मैनें चैटिंग करनी शुरू ही की थी कि मुझको भोपाल की एक लड़की मिली। वो बहुत स्वीट थी और फिर कुछ दिनों में हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई तो बातों-बातों में बाद में मालूम पड़ा कि वो शादीशुदा है और एक 12 साल के बेटे की माँ है। फिर 1 साल की दोस्ती के बाद हम लोगों ने पहली बार मिलने का प्रोग्राम बनाया। फिर जब वो छुट्टियों में अपने मामा के घर कोलकता जा रही थी, उसका टिकट एसी फर्स्ट क्लास में था। अब अकेली महिला होने के कारण उसको 2 बर्थ कप में सीट मिली थी। फिर अगले स्टेशन पर में भी ट्रेन में चढ़ गया, जैसा कि हम दोनों ने प्लान किया था और फिर जैसे ही मैंने पहली बार शीतल को देखा तो तब में दंग रह गया, वो बहुत खूबसूरत एक हथनी टाईप लेडी थी।

अब एक बार तो में उसको देखकर घबरा ही गया था, उसका वजन 140 किलोग्राम था और फिगर साईज 42-48-42 पक्का होगा, लेकिन हम एक अच्छे दोस्त थे तो में सब कुछ भुलाकर बहुत ही गर्म जोशी से शीतल और उसके बेटे से मिला और फिर हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे। फिर बात करते-करते कब 9 बज गये? हमें कुछ मालूम ही नहीं पड़ा और अब शीतल का बेटा सो गया था। अब मुझको भी थकान हो रही थी, तो तब में शीतल को आराम करने को बोला, क्योंकि 2 ही सीट थी। अब ऊपर वाली सीट पर उसका बेटा सो रहा था। तब वो बोली कि नीचे वाली बर्थ पर ही लेट जाऊं, लेकिन वो इतनी मोटी थी कि हम एक साथ नहीं आ सकते थे। तब उसने मेरा सिर अपनी गोदी में रख लिया और फिर हम लोग बातें करने लगे।

अब बात करते-करते उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरे मुँह को टच हो रहे थे, जिससे मेरे बदन में सिरहन दौड़ जाती थी और अब धीरे-धीरे मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था। तब इतने में मैंने अपना एक हाथ अपने सिर के नीचे रख लिया और शीतल की जांघो को सहलाने लगा था। तब वो कुछ भी नहीं बोली और अपनी आँखें बंद करके लेटी रही। तब मेरी हिम्मत बढ़ गयी और फिर मैंने अपने एक हाथ से उसके बूब्स को उसके ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया, यकीन करना दोस्तों मुझे उसके एक बूब्स को दबाने के लिए मेरे दोनों हाथों का यूज़ करना पड़ा था और फिर मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया। कितने बड़े-बड़े बूब्स थे उसके? जो ब्रा में भी जबरदस्ती बंद किए गये थे। फिर मैंने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर जैसे ही उसकी ब्रा का हुक खोला तो उसके दोनों जंबो साईज के बूब्स एकदम जंप करके बाहर आकर और बड़े-बड़े हो गये।

अब में पागलों की तरह उसके मोटे-मोटे निप्पल को चूसने लगा था और अब वो अपने एक हाथ से मेरे लंड को मसलने लगी थी। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरे बदन में आग लग गयी हो। अब हम दोनों की साँसे तेज-तेज चल रही थी और फिर मैंने शीतल को खड़ा करके उसकी साड़ी और पेटीकोट को भी खोल दिया। अब वो एकदम नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मैंने पहली बार किसी औरत को नंगा देखा था, उसके कूल्हें बड़े-बड़े थे, उसकी चूत एकदम क्लीन शेव, बहुत बड़ा पेट और उस पर इतनी बड़ी नाभि कि मेरा आधा लंड उसमें ही चला जाए। एक बार तो में अंदर ही अंदर डर गया था कि इसको सॅटिस्फाइड कर भी पाऊंगा या नहीं। फिर मैंने उसको बर्थ पर लेटाया और उसके दोनों पैरो को फैला दिया और फिर उसकी जांघो को चूमने लगा था। मैंने पहली बार चूत को इतने करीब से देखा था, जो कि अपने रस से एकदम गीली हो रही थी और इतनी बड़ी थी कि मेरा पूरा हाथ ही अंदर चला जाए।

फिर मैंने उसकी चूत के होंठो को फैला दिया, ऊफ कितनी पिंक और रसीली चूत थी शीतल की? उसकी चूत का दाना इतना बड़ा और मोटा था कि में उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था जैसे कि उसकी निप्पल हो। अब शीतल एकदम पागलों की तरह मेरे बालों को नोचने लगी थी। फिर उसके दाने को चूसते- चूसते मैंने अपनी 2 उंगलियां उसकी चूत में डाल दी, जो कि इतनी आसानी से चली गयी थी कि एक बार तो में हैरान रह गया था और अब में ज़ोर-जोर से शीतल की चूत को अपनी उंगलियों से चोदने लगा था और उसके दाने को चूसने लगा था। फिर मैंने अपने दूसरे हाथ की भी दोनों उंगलियां उसकी चूत में डाल दी। अब शीतल उत्तेजना के कारण उउऊहह, आहह और ज़ोर से करो चिल्लाने लगी थी और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी।

अब उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल हो रहा था, उसकी चूत एकदम भीगी हुई थी। फिर मैंने अपनी चारो उंगलियाँ एक साथ उसकी चूत में डालकर उसको चोदना शुरू कर दिया। सच बोलूं तो में उसकी चूत की आग अपनी उंगलियों से ही खत्म करना चाहता था, क्योंकि मुझको लगता था कि मेरे लंड से उसका कोई भला नहीं होगा। अब शीतल के ज़ोर-जोर से मेरे लंड को चूसने के कारण मैंने भी अपनी चारों उंगलियाँ उत्तेजना में अंदर तक डाल दी थी। अब उसकी चूत पूरी फैल गयी थी, ऊफ कितनी गर्म चूत थी उसकी, एकदम आग निकल रही थी। अब शीतल का बुरा हाल हो रहा था और अब वो अजीब-अजीब आवाजों में बोले जा रही थी प्लीज मुझे चोदो मुझे चोदो बोलकर चिल्लाने लगी थी और में उसकी चूत को बेहरमी से चोदता जा रहा था। तब इतने में उत्तेजना के कारण उसका पानी निकल गया, जो कि सीधा मेरे मुँह में आ गया था। एक बार तो मुझको थोड़ा अजीब लगा और फिर मैंने अपना मुँह हटा लिया और फिर एकदम से अपना मुँह शीतल के गर्म-गर्म पानी से गीली चूत पर अपना मुँह लगा दिया और ज़ोर-जोर से अपनी लंबी जीभ निकालकर चाटने लगा था। तब मैंने जाना कि चूत में भी कितने टेस्ट होते है? और फिर हम लोग कुछ नॉर्मल हुए।

शीतल की चूत में अभी तक आग लग रही थी, उसमें से इतना रस टपक रहा था जैसे उसकी चूत में कुछ फट गया हो। फिर शीतल ने मुझे बर्थ पर लेटा दिया और खुद खड़ी हो गयी थी और अपने बड़े-बड़े कूल्हें मेरे मुँह पर रख दिए थे। अब मुझको कुछ भी गंदा नहीं लग रहा था, बल्कि अब मुझे नये-नये मज़े आ रहे थे। फिर मैंने उसके कूल्हें फैलाकर उसकी गांड में अपना मुँह दे दिया, वाउ क्या स्मेल थी उसकी? और अब में ज़ोर-जोर से उसकी गांड को चाटने लगा था। फिर जब उसकी गांड चाटते-चाटते ढीली हो गई, तब मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड में डाल दी, जो कि बहुत मुश्किल से गयी थी, क्योंकि शीतल की गांड कुँवारी थी। तो तब वो दर्द से करहा उठी और फिर हम लोग 69 में एक दूसरे के लंड और चूत से खेलने लगे। अब मैंने शीतल की चूत को चाटने के साथ-साथ उसकी गांड में भी अपनी दो उंगलियां घुसा दी थी। दोस्तों फिर मैंने उसकी गांड मारी और खूब मजा किया ।।

धन्यवाद …