मम्मी की चूचियों का पानी -1

desi kahani

हाय रीडर्स.मेरा नाम आमिर है और मेरी उम्र 20 साल है है. मेरी एक छोटी बहन शुमैला है. वो अभी सिर्फ़ 18 साल की है और कॉलेज मैं है. माँ अब साल की हैं. माँ स्कूल मैं टीचर हैं और मैं यूनिवर्सिटी मैं हूँ. हम लोग करांची से है. पापा का 2 साल पहले निधन हो गया था. अब

घर मैं सिर्फ़ हम तीन लोग ही हैं. यह अब से 6 महीने पहले हुआ था. एक रात मम्मी बहुत उदास लग रही थी. मैं समझ गया वो पापा को याद कर रही हैं. मैने उनको बहलाया और खुश करने की कोशिश की. मम्मी मेरे गले लग कर रोने लगी. तब मैने कहा, मम्मी हम दोनो आपको बहुत प्यार करते हैं, हम लोग मिलकर पापा की कमी महसूस नही होने देंगे. शुमैला भी वहाँ आ गयी थी, वो भी मम्मी से बोली, हाँ मम्मी प्लीज़ आप दिल छोटा ना करिये. भाईजान हैं ना हम दोनो की देखभाल के लिये. भाईजान हम लोगो का कितना ख्याल रखते हैं.”हाँ बेटी पर कुछ ख्याल सिर्फ़ तेरे पापा ही रख सकते थे.”नही मम्मी आप भाईजान से कह कर तो देखिये.”खैर फिर बात धीरे धीरे नॉर्मल हो गई. उसी रात शुमैला अपने रूम मैं थी.

मैं रात को टायलेट के लिये उठा तो टायलेट जाते हुये मम्मी के रूम से कुछ आवाज़ आई. रात के 12 बज चुके थे और मम्मी अभी तक जाग रही हैं>,यह सोचकर उनके रूम की तरफ गया. मम्मी के रूम का दरवाज़ा खुला था. मैं खोलकर अंदर गया तो चौंक गया. मम्मी अपनी सलवार उतार कर अपनी चूत मैं एक मोमबत्ती डाल रही थी. दरवाज़े के खुलने की आवाज़ पर उन्होने मुड़कर देखा. मुझे देख वो घबरा सी गयी. मैं भी शर्मा गया की बिना दरवाजा बजाये आ गया. मैं वापस मुड़ा तो मम्मी ने कहा, “बेटा आमिर प्लीज़ किसी से कहना नही.” “नही मम्मी मैं किससे कहूँगा?” “बेटा जब से तेरे पापा इस दुनिया से गये है तब से आज तक मैं.” “शश्शश्श मम्मी मैं भी अब समझता हूँ. यह आपकी जरूरत है पर क्या करूँ अब पापा तो हैं नही.”फिर मैं मम्मी के पास गया और उनके हाथो को पकड़ कर बोला, “मम्मी दरवाज़ा बंद कर लिया करिये.” बेटा आज भूल गयी. फिर मैं वापस आ गया.

 

Loading...

अगले दिन सब नॉर्मल रहा. शाम को मैं वापस आया तो हम लोगो ने साथ में ही चाय पी. चाय के बाद शुमैला बोली, “भाईजान बाज़ार से रात के लिये सब्ज़ी ले आओ जो खाना है.” मैं जाने लगा तो मम्मी ने कहा, “बेटा किचन मैं आओ तो कुछ और सामान बता देती हूँ लेते आना. मैं किचन मैं जा कर बोला, क्या लाना है मम्मी? मम्मी ने बाहर झाँका और शुमैला को देखते हुये धीरे से बोली, “बेटा 5- 6 बैगन लेते आना लंबे वाले.” मैं मम्मी की बात सुन कर पता नही कैसे बोल पड़ा, “मम्मी अंदर करने के लिये?” मम्मी शर्मा गयी और मैं भी अपनी इस बात पर चुप हो गया और सॉरी बोल कर बाहर चला गया. मैने सब्ज़ी लाकर शुमैला को दी और बैगन लाया था जिनको अपने पास रख लिया. शुमैला ने खाना बनाया फिर रात को खा पीकर सब लोग सोने चले गये.

तब करीब रात के बजे मम्मी मेरे रूम मैं आ कर बोली, “बेटा बैगन लाये थे?”हाँ मम्मी पर बहुत लंबे नही मिले और मोटे भी कम है.”कोई बात नही बेटे अब जो है सही है.”बहुत तलाश किया मम्मी पर कोई भी मुझसे लंबे नही मिले.”क्या मतलब बेटा.” मैं बोला, “मम्मी मतलब यह की इनसे लंबा और मोटा तो मेरा है.”तब मम्मी ने कुछ सोचा फिर कहा, “क्या करें बेटा अब तो जो किस्मत मैं है वही सही है.” फिर मेरी पेन्ट के उभार को देखते हुये बोली, “बेटा तेरा क्या सच में बहुत बड़ा है?”हाँ मम्मी 8 इंच है.”हाँ बेटा तेरे पापा का भी इतना ही था. बेटा अपना दिखा दो तो तेरे पापा की याद ताजा हो जाये.”लेकिन मम्मी मैं तो आपका बेटा हूँ.”हाँ बेटा तभी तो कह रही हूँ. तू मेरा बेटा है और अपनी माँ से क्या शर्म तू एकदम अपने पापा पर गया है. देखूं तेरा वो भी तेरे पापा के जैसा है या नही?”तब मैने अपनी पेन्ट उतारी और अंडरवेयर उतारा तो मेरे लंबे तगड़े लंड को देख मम्मी एकदम से खुश हो गई. वो मेरे लंड को देख नीचे बैठी और मेरा लंड पकड़ लिया और बोली, “हाँ आमिर बेटा तेरे पापा का भी एकदम ऐसा ही था. हाँ बेटा यह तो मुझे तेरे पापा का ही लग रहा है. बेटा क्या मैं इसे थोड़ा सा प्यार कर लूँ?”

मम्मी अगर आपको इससे पापा की याद आती है और आपको अच्छा लगे तो कर लीजिये. बेटा मुझे तो ऐसा लग रहा है की मैं तेरा नही बल्कि तेरे पापा का पकड़े हूँ. फिर मम्मी ने मेरे लंड को मुँह मैं लिया और चाटने लगी. यह मेरे साथ पहली बार हो रहा था इसलिये मेरे लिये सम्भलना मुश्किल था. मै 6-7 मिनिट मैं ही मैं उनके मुँह मैं झड़ गया. एक मिनिट बाद मम्मी ने लंड मुँह से बाहर निकाला और मेरे पास बैठ गयी. मैं बोला, “सॉरी मम्मी आपका मूँह गन्दा कर दिया. “हाँ बेटा तेरे पापा भी रोज़ रात को मेरे मुँह को पहले ऐसे ही गंदा करते थे फिर मेरी चूत” मम्मी इतना कह कर चुप हो गई. मैं उनके चेहरे को देखते हुये बोला, “फिर क्या क्या करते थे पापा? मम्मी जो पापा इसके बाद करते थे वो मुझे बता दो तो मैं भी कर दूँ. आपको पापा की कमी महसूस नहीं होगी.” मम्मी मेरे चेहरे को पकड़ कर बोली, “बेटा यह जो हुआ है एक माँ और बेटे मैं नहीं होता. लेकिन बेटा इस वक़्त तुम मेरे बेटे नही बल्कि मेरे शौहर हो. अब तुम मेरे शौहर की तरह ही करो. वो मेरे मुँह मैं अपना झाड़ कर अपने मुँह से मेरी चूत चाटते थे फिर मुझे..” “मम्मी अब जब आप मुझे अपना शौहर कह रही है तो शर्मा क्यों रही हैं. सब कुछ खुल कर कहिये ना.”बेटा तू सच कहता है, चाट ले मेरी चूत चाट और फिर मुझे चोद जैसे तेरे पापा चोदते थे. ठीक है मम्मी आओ बिस्तर पर चलो.

फिर मम्मी को अपने बेड पर लेटाया और उनको पूरा नंगा कर दिया. मम्मी की चूचियाँ अभी भी सख़्त थी. 2-3 साल से किसी ने टच नही किया था. मैने चूत को देखा तो मस्त हो गया. मम्मी की चूत टाइट लग रही थी. 40 की उम्र मैं मम्मी 30 की ही लग रही थी. मम्मी को बेड पर लेटा कर अपने कपड़े अलग किये. फिर मम्मी की चूचियाँ पकड़ कर उनकी चूत पर मुँह रख दिया. चूचियों को दबा दबा चूत चाटने लगा. और मेरा लंड कसने लगा. 8-10 मिनिट के बाद मम्मी मेरे मुँह पर ही झड़ गई. वो अपनी गांड तेज़ी से हिला कर झड़ रही थी. मैंने मम्मी की झड़ती चूत मैं 1 मिनिट तक जीभ डाले रखी. फिर उठकर ऊपर गया और चूचियों को मुँह से चूसने लगा. “हाअ आहह बेटा चूस अपनी मम्मी की चूचियों को. हाँ चूसो इनको हाँ कितना मज़ा आ रहा है बेटा एक साथ.”

मेरा लंड अब फिर खड़ा हो गया था. 4-5 मिनिट के बाद मम्मी ने मुझे अलग किया और फिर मेरे लंड को मुँह से चूस कर खड़ा करने के बाद बोली, “बेटा अब चड़ जा अपनी माँ पर और चोद डाल.” मैने मम्मी को बेड पर लेटाया और लंड को मम्मी के छेद पर लगा कर गप से अंदर कर दिया. अब मैं तेज़ी से चुदाई कर रहा था और दोनो चूचियों को दबा दबा कर चूस भी रहा था. मम्मी भी नीचे से गांड उछाल रही थी. मैं धक्के लगाते हुये बोला, “मम्मी शाम को जब आपने बैगन लाने को कहा था तभी से दिल कर रहा था की काश अपनी मम्मी को मैं कुछ आराम दे सकूँ. मेरी तमन्ना पूरी हुई. बेटा अगर तू मुझे चोदना चाहता था तो कोई गोली ले आता. अब तू मेरे अंदर मत झड़ना. आज बाहर झड़ना फिर कल मैं गोली ले लूँगी तो ख़तरा नही होगा तब अंदर डालना पानी चूत मैं गर्म पानी बहुत मज़ा देता है. करीब 10 मिनिट के बाद मेरा लंड झड़ने वाला था तो मैने उसे बाहर किया और मम्मी से कहाहाँ मम्मी अब मेरा निकलने वाला है. हाँ बेटा ला अपने गर्म पानी से अपनी मम्मी की चूचियों को भिगो दे.

फिर मैंने मम्मी की चूचियों पर पानी निकाला. और झड़ कर अलग हुआ तो मम्मी अपनी चूचियों पर मेरे लंड का पानी लगाती हुई बोली, “बेटा तू एकदम अपने बाप की तरह चोदता है. वो भी ऐसा ही मज़ा देते थे. हाँ बेटा अब तू सो जा. फिर मम्मी अपने रूम मैं चली गई और मैं भी सो गया. अगले दिन मम्मी बहुत खुश लग रही थी. शुमैला भी मम्मी को देख रही थी. नाश्ते पर उसने पूछ ही लिया, “मम्मी आप आज बहुत खुश लग रही हो?”हाँ बेटी अब मैं हमेशा खुश रहूंगी.”क्यों मम्मी क्या हो गया?”वो भी मुस्कुराती हुई बोली.”कुछ नही बेटी तुम्हारे भाईजान मेरा खूब ख्याल रखता है ना इसलिये.”हाँ मम्मी भाईजान बहुत अच्छे हैं.”फिर वो कॉलेज चली गई और मैं यूनिवर्सिटी. उस रात मम्मी ने गोली ले ली थी और अपनी चूत मैं ही मेरा पानी ले लिया था. हम दोनो माँ बेटे 1 महीने तक इसी तरह मज़ा लेते रहे.
दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में . . .
धन्यवाद .

error: