मेरी सग़ी बहन ज्योति-3

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ऐसा बोलते बोलते मैंने दीदी की साड़ी निकाल दी. दीदी गुस्से से मुझे देख रही थीं.
मैं घबरा गया, दीदी ने कहा- मैंने तुझे कल रात को ही बोला था कि हम चुदाई नहीं कर सकते, क्योंकि हम दोनों भाई बहन हैं.. और वो भी सगे हैं.
मैंने बोला- हाँ मुझे पता है.
तो दीदी ने बोला- जब तुझे पता है तो तू क्या चाहता है.. और मेरी साड़ी क्यों निकाल रहा है?
मैंने कहा- मैं आपके साथ नहाना चाहता हूँ.

दीदी ने कहा- अभी तू नहा ले, मैं तो नहा चुकी हूँ. शाम को साथ में नहाएँगे.
मैं बोला- हाँ लेकिन अभी ये इस खड़े लंड का क्या करूँ?
तो दीदी ने कहा- बाथरूम में मुठ मार लेना.
उन्होंने मुझे धक्का देकर किचन से बाहर भेज दिया. मैं बाथरूम में चला गया और वहां देखा कि कल रात को दीदी ने जो ब्रा और पेंटी पहनी थी, वो वहां पे गीली लटकी हुई थी. मेरा काम हो गया ये देख कर मैंने दीदी की ब्रा को हाथ में लेकर सूँघा और उनकी अंडरवियर अपने लंड पर लगा कर मुठ मारने लगा.

मैंने अपना सारा माल दीदी की अंडरवियर में गिरा दिया और नहा कर बाहर आ गया. बाहर आकर देखा तो दीदी ने अपने कपड़े चेंज कर दिए थे. दीदी ने हल्का सा गाउन पहन लिया था, जिसमें उन्होंने अपनी ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि दीदी के निप्पल मुझे साफ़ दिख रहे थे.
ये देख कर मुझे पता लग गया कि दीदी ने ब्रा नहीं पहनी है. फिर हम लोग खाना खाने लगे. तभी दीदी का मोबाइल बजा, दीदी ने कॉल रिसीव किया. जीजाजी का फोन था और दीदी बात करते करते अपने बेडरूम में चली गईं. कुछ देर बाद दीदी वापस डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गईं.
मैंने देखा तो दीदी का चेहरा उतरा हुआ था. कुछ देर बाद मैंने उनसे कहा- आप कुछ उदास हो गई हैं, क्या बात है?

दीदी बोलीं- कुछ नहीं.. चल जरा बाजार तक हो कर आते हैं.
मैं उनके साथ चल दिया.
दीदी ने अपने लिए ब्रा-पेंटी का एक सैट खरीदा जो कि पर्पल कलर का था.
उन्होंने मुझसे पूछा- कैसा लग रहा है?
“अच्छा है ले लो.”
घर आने के बाद मैंने कहा- दीदी वो ब्रा पेंटी पहन कर दिखाओ ना अभी.
दीदी ने गुस्से भरी नज़र से मुझे देखा और कहा- तू फिर से शुरू हो गया?

मैं कुछ नहीं बोला और कमरे में जाकर सो गया.
कुछ देर बाद उठा तो मैंने देखा कि घर में सजावट हो रही थी.
मैंने दीदी को छेड़ा तो दीदी ने कहा- अभी कुछ मत कर.
मैं- ठीक है दीदी, लेकिन एक बात तो बताओ ये आपने घर को फूलों से क्यों सजाया है?
दीदी- वो तुझे कल पता चल जाएगा. आज दर्जी आने वाला है तू अपना नाप दे देना.
मैंने कहा- ठीक है.. पर क्या बनवाना है?
दीदी बोलीं- वो खुद सब कर लेगा तू बस नाप दे देना. बाकी कल बात करूँगी.

मैंने कहा- ठीक है, अब इतने दिन इंतज़ार कर लिया है तो एक दिन और सही.
मैं घूमने निकल गया बाद में घर आया तो दीदी के साथ खाना खाया और सो गए.
सुबह जब मैं उठा तो दीदी घर में झाड़ू लगा रही थीं. दीदी ने ढीली सी टी-शर्ट पहन रखी थी और नीचे एक शॉर्ट पहना हुआ था. दीदी झाड़ू लगा रही थीं. उनके मम्मे मुझे दिख रहे थे, तो मेरा लंड एकदम से तम्बू बन गया.
मैं तुरंत ही बाथरूम में भागा और मुठ मारने लगा. फिर नहा कर बाहर आ गया. अब मैं टीवी देख रहा था.
फिर शाम को जो दर्जी मेरा साइज़ ले गया था, वो आया और उसने दीदी को एक शेरवानी दी. वो दर्जी के साथ एक पंडित भी आया था. मैं कुछ नहीं समझा.

दीदी ने पंडित जी को बिठाया, मैंने देखा कि पंडित के पास काफ़ी सारा सामान था.
दीदी ने मुझसे बोला- जा जाकर नहा कर ये शेरवानी पहन ले.
मैंने बोला- क्यों दीदी?
दीदी ने बोला- सवाल मत कर, जल्दी से जा.
मैं बाथरूम में जाकर नहा के वापस आपने रूम में आ गया और सोचने लगा कि आख़िर ये सब मेरे साथ हो क्या रहा है?
मैंने शेरवानी पहन ली और अच्छे से तैयार हो गया. थोड़ी देर बाद दीदी मेरे कमरे में आईं. मैं दीदी को देखकर एकदम से चौंक गया. दीदी ने अपनी शादी का जोड़ा पहना हुआ था और काफ़ी सारे गहने भी पहने थे.
उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि आज उनकी शादी हो.

मैंने दीदी की शादी के वक़्त दीदी को इस रूप में देखा था. दीदी इस वक्त कोई परी से कम नहीं लग रही थीं.
मैं तो दीदी को देखता ही रह गया. दीदी मेरे पास आईं और मेरे माथे पर किस करके बोलीं- सागर मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. मुझे तुम्हारा लंड बहुत ही अच्छा लगता है. मैंने जब पहली बार तुम्हारा लंड देखा था, तभी मुझे तुम्हारा लंड भा गया था. मैं तुमसे चुदवाना चाहती थी. लेकिन हम आखिर हैं तो भाई बहन, इसलिए मैंने अपने आप पे कंट्रोल कर लिया. पर अब और नहीं हो सकता, वैसे भी तुम्हारे जीजाजी अब 3-4 महीने के बाद आएँगे, तो मैं कैसे 3-4 महीने में लंड के बिना रह सकती हूँ. इसलिए मैंने सोच लिया है कि मैं तुमसे शादी करूँगी और बाद में हम दोनों भाई बहन पति पत्नी बन कर सुहागरात मनाएंगे.

मैं तो ख़ुशी के मारे पागल हो गया. दीदी बोलीं- लेकिन तू बता, तू मुझसे प्यार करता है न.. और मुझसे शादी करना चाहता है ना?
मैंने तुरंत ही ‘हाँ’ कह दी, फिर क्या था, दीदी ने मुझे गले लगा लिया और वो मेरा हाथ पकड़ कर मेरे बेडरूम से बाहर ले गईं.
मैंने देखा वो पंडित ने सारी तैयारी कर चुका था. फिर हम दोनों वहां पर बैठ गए. पंडित ने मन्त्र पढ़ना स्टार्ट किया.
कुछ देर बाद पंडित ने कहा- एक दूसरे को हार पहनाइए.
हम दोनों ने एक दूसरे को हार पहनाया. इसके बाद मैंने दीदी को मंगलसूत्र पहनाया और फिर आखिर में हमने फेरे लिया. हम दोनों की शादी हो गई.
दीदी ने पंडित जी को 5000 रुपए दिए और पंडित चला गया.

फिर दीदी अपने रूम में गईं.. मैं तो आज एकदम से चकित हो गया था. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपनी सग़ी बहन से शादी करूँगा. लेकिन आज मैं खुश भी बहुत था क्योंकि मेरी बहन जैसी सेक्सी लड़की किसी तो आसानी से नहीं मिलती. दीदी संग चुदाई के बारे में सोचते ही मेरा लंड मेरी शेरवानी की पजामी में ही तम्बू बन गया था.
मैं दीदी में रूम में गया.. तो देखा रूम पूरी तरह से सजाया हुआ था और बेड भी फूलों से सज़ाया हुआ था. मैंने देखा कि दीदी अपने घूँघट में अपने मुँह को छुपाके बैठी थीं. मैंने जाकर दीदी का घूँघट ऊपर उठाया तो दीदी शर्मा गईं. दीदी ने अपना मुँह नीचे कर लिया.

मैंने दीदी की ठोड़ी पकड़ कर ऊपर की और बोला- ओह माय गॉड.. दीदी आप कितनी खूबसूरत लग रही हो.
दीदी ने मेरे होंठों पर अपनी उंगली रख दी और बोलीं- अब दीदी ना बोल.. मैं तेरी पत्नी हूँ. अब से मैं सिर्फ़ तेरी ज्योति हूँ, सिर्फ़ तेरी ज्योति हूँ.. मेरे सागर.
मैं ये सुन कर खुश हो गया. मैंने तुरंत ही दीदी के सारे गहने उतार दिए और दीदी की साड़ी भी उतार दी. दीदी वासना की देवी लग रही थीं. मैंने अपनी शेरवानी निकालनी चाही तो दीदी ने बोला- नहीं, मेरे स्वामी इसे मैं निकालूँगी.

दीदी ने मेरी शेरवानी और पजामी आदि को निकाल दिया. अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था और दीदी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं.
दीदी बोलीं- सागर जल्दी से मुझे इन कपड़ों के जाल में से आज़ाद करो.
मैंने तुरंत ही जोश में आकर दीदी का ब्लाउज फाड़ दिया और उनका पेटीकोट भी एक झटके में ही उतार दिया.
मैंने देखा कि दीदी ने कल जो अपनी पर्पल कलर की ब्रा और अंडरवियर दिखाई थी, वो आज उन्होंने पहनी थी.
मैं दीदी को होंठ पर किस करने लगा, तो दीदी ने भी मुझे रेस्पॉन्स देना शुरू कर दिया. उन्होंने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और जीभ से मेरा मुँह चाटने लगीं.
मैंने भी दीदी की ब्रा और अंडरवियर निकाल दिया.

दीदी ने कहा- तुम अपना लंड निकालो नहीं तो वो तुम्हारी अंडरवियर फाड़ देगा.
मैंने अपना अंडरवियर निकाल कर फेंक दिया.
दीदी मेरा लंड देखकर बोलीं- आज तो तेरा लंड और भी बड़ा और कड़क दिख रहा है.
मैंने दीदी के ऊपर चढ़ कर कहा- मेरे पास इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की नंगी लेटी हुई है, तो लंड को तो कड़क होना ही था.
दीदी ने अचानक मुझे अपने ऊपर से उतारा और बोलीं- रुको एक मिनट..
उन्होंने अपनी अलमारी खोल कर अन्दर से एक टेबलेट निकाल कर मुझे दी और बोलीं- इसको खा ले.
मैंने बोला- क्या है ये?

दीदी बोलीं- ये वो गोली है, जिसके खाने से तेरा लंड कल सुबह तक कड़क ही रहेगा.
मैंने जल्दी से वो गोली खा ली. फिर मैंने दीदी को अपनी गोद में उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया और जानवरों की तरह दीदी को चाटने चूमने लगा. दीदी के मम्मे अपने मुँह में लेकर काटने लगा तो दीदी ने बोला- आह धीरे करो.. मैं तुम्हारी बीवी हूँ.. मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ.
पर मैं तो वासना की भूख में पागल सा हो गया था.. तो मैंने कुछ नहीं सुना और बस दीदी के मम्मों को काटता रहा.
फिर मैंने दीदी की चुत को चाटना शुरू किया, तो दीदी ने कहा- मेरे राजा.. सागर.. मेरे पति देव, आज भर के चाट लो मेरी चुत को.. मैं अब सिर्फ़ तेरी हूँ और मैं हमेशा के लिए तेरी ही रहना चाहती हूँ.. अहह.. ओह… आईईई.. ओह राजा.. अब नहीं रहा जाता, जल्दी से डाल दे अपना लंड मेरी चुत में.. आहह..