मेरी फूटी किस्मत भाग – 1

Meri footi kismat part 1:

मैं सविता मुंबई हल्द्वानी की रहने वाली हूँ | मैं एक रईस परिवार से हूँ | पहले मैं बहुत खुश रहती थी अपने बच्चो के साथ लेकिन जब मेरे पति और मेरे बच्चो की कार दुर्घटना में मौत हुई है मैं बहुत टूट सी गई हूँ | मेरे पति एक जाने माने बिज़नस मैंन थे इनका कारोबार काफी बड़ा था | सॉरी मैं आप लोगो को उनका नाम नहीं बता सकती हूँ | उनकी मौत के बाद मेरे घर वालो ने मुझे बहुत फ़ोर्स किया दूसरी शादी के लिए पर मैंने मना कर दी क्यूंकि मैं उनसे बहुत प्यार करती थी | मैं उन्हें धोका नहीं दे सकती थी क्यूंकि मुझे बहुत अच्छे से पता था की मेरी मजबूरी में शादी होगी और वो भी उससे होगी जो सिर्फ पैसे से प्यार करेगा मुझसे नहीं इसलिए मैंने मना कर दिया | अब मैं कहानी पर आती हूँ |

मेरा जीवन बहुत ही व्यस्तता में चल रहा था जैसे तैसे मैंने कारोबार फिर से संभाल लिया था | मैं एक औरत हूँ ये मैं भूल चुकी थी मेरी सारी अंतर्वास्नाएं ख़त्म हो चुकी थी | एक दिन की बात है मैं रात के वक़्त मीटिंग से फ्री हो कर घर आ रही थी अपनी कार से कि अचानक एक साइकिल वाला मेरी कार से टकरा गया | भीड़ भी जमा हो गई थी मैं डर गई थी कि कहीं इसे कुछ हो तो नहीं गया मर तो नहीं गया मैं बहुत घबरा गई थी | मैं अपनी कार से उतर कर देखा तो वो जख्मी हो गया था | मैंने उससे पूछा ज्यादा तो नहीं लगी | उसने कहा नहीं मैं ठीक हूँ मेरे पास कुछ पैसे थे तो वो मैंने उसकी मलहम पट्टी के लिए दे दिए थे | एक तो वो नशे में था इसलिए लोगों ने कुछ नही कहा मुझसे | मैंने उसे अपना कार्ड दिया था और कहा था की मेरे बंगलो आ जाना मैं पैसे दे दूँगी उसने कार्ड लिया और मैं घर आ गई |

मुझे उस आदमी के बारे मैं ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं थी और मैं अपने पेपर वर्क में लग गई रात को 9 बजे खाना खाया और मैं सोने चली गई | रात के करीब 12:30 बजे होंगे मेरे घर की घंटी बजी मुझे लगा की कोई सपना देख रही हूँ मैं पर ये सपना नहीं था बार बार घंटी बजी जा रही थी मैं डर गई थी की इतनी रात में कौन होगा | अगर कोई मेरा अपना होता तो दिन में आता या फ़ोन कर आता रात में | मैं डर डर के नीचे ड़ोर तक गई |

मैंने पुछा की कौन है ?

बाहर से आवाज़ आई मालकिन मैं अनीता हूँ दरवाजा खोलिए |

मैंने फिर पुछा कौन अनीता मैं किसी अनीता को नहीं जानती ?

उसने कहा की आप दरवाजा तो खोलिए आपसे बात करनी है |

मैंने कहा सुबह आना मैं अभी दरवाजा नहीं खोलूंगी |

तो वो बोली अगर आप दरवाजा नहीं खोलेगे अभी तो आप पर मुसीबत आ जायगी |

मैंने भी मन सोचा की मरता क्या ना करता मैंने भगवान् का नाम लेते हुए दरवाजा खोला और देखा की वो एक काली सी महिला है | गंदे कपडे पहने हुए थे उसने…. मैंने पूछा क्या काम है ? तो उसने कहा की आपकी जिससे टक्कर हुई है मैं उसकी पत्नी हूँ | मैने कहा तो मैं क्या करूँ |

तब उसने कहा की मालकिन वो मर गए हैं और इतना बोल के रोने लगी जोर जोर से | मैंने उसे अन्दर बुलाया और पानी ला के दिया उसे समझाया और कहा की रुको कहाँ है तुम्हारा घर मैं चलती हूँ अभी | मैं भी एक औरत हूँ और पति खोने का गम समझ सकती हूँ ? इसलिए मैंने अपनी कार निकाली और उससे पूछा की तुम कहाँ रहती हो | तो उसने बताया की साप्ताल में रहती हूँ तो मैंने कहा की मुझे नहीं पता है पर मैं तुम्हे ले चल रही हूँ तुम मुझे रास्ता बताते रहना | उसने कहा ठीक है और हम दोनों निकल गये मेरी कार से | कुछ दूर तक तो ठीक था फिर वो बहुत तंग गलियों से ले के जाने लगी फिर ऐसा मोड़ आया वहाँ से कार नहीं जा सकती थी | फिर मैंने कार पार्क की और उसके साथ पैदल पैदल चल रही थी | उस गलियों में से बहुत अजीब सी बदबू आ रही थी मैंने अपनी सारी से नाक को ढँक लिया थोडा और आगे चलने के बाद कुछ आदमियों का झुण्ड खड़ा था और वो सब दारू पी रहे थे मूझे बड़ा ही भद्दा लग रहा था |

सब मुझे घूरे जा रहे थे क्यूंकि मैंने डिजाइनर साडी पहनी हुई थी और मेरा ब्लाउज डीप गले का था | सब मुझे बहुत गन्दी निघाहों से देख रहे थे फिर जैसे तैसे मैं उसके घर पहुंची तो देखा की वो बहुत गरीब थी और एक झोपड़े में रहती थी | मैंने देखा की उसका घर अन्दर से भी गन्दा था और उसका पति लेटा हुआ था | मैं पास नहीं गई उसके क्यूंकि मुझे बहुत घिन आ रही थी और मैं जल्द से जल्द वहाँ से निकलना चाहती थी | मैंने उससे कहा की मुझे बहुत दुःख है तुम्हारे साथ ऐसा हुआ तुम्हे मेरी कोई भी जरुरत हो तो मुझे बताना मैं हेल्प कर दूँगी | तो उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा और कहा की अरे मैडम हमे आपकी ही तो हेल्प चाहिए और उसका पति उठ गया | ये देख के मैरे पैरों तले जमीन खिसक गई | मुझे समझते देर ना लगी की ये मेरे साथ कुछ गलत करना चाहते हैं | मैंने उसकी पत्नी के मुह पर क खीच के तमाचा मरा उतने में मुझे पीछे से किसी ने जकड लिया था | वो बहुत ही पहलवान टाइप का आदमी मालूम पड़ रहा था | क्यूंकि वो बहुत हट्टा कट्टा था और उसने मुझे बहुत मजबूती से पकड रखा था और वो सब हंसने लगे | मैं बेजोड़ कोशिश करने लगी उससे छूटने की पर मैं असफल रही |

मैंने पुछा तुम सब ये क्या कर रहे हो क्या चाहते हो मुझसे ?

तो उसके पति ने कहा की कुछ नहीं बस हमे पैसा चाहिए | मैंने बोला किस बात के पैसे मैंने जितना तुम्हारा नुक्सान किया है उतना ही दूँगी मैं पैसा |

उतने में उसने मुझे जोर का थप्पड़ मारा मैंने बहुत गुस्से से उसके मुंह पे थूक दिया | तो जिसने मुझे पीछे से पकड़ा था उसने मुझे धकेल दिया उस गंदे बिस्तर पर | तबै मैंने उसे देखा और ये वही आदमी निकला जो वहाँ खड़े हो कर अपने दोस्तों के साथ दारू पी रहा था | मैंने उनसे विनती की बहुत मन्नते मांगी की मुझे छोड़ दो मुझे जाने दो तुम जितना पैसा बोलोगे मैं दूँगी | मैं मन में बोल रही थी की मैंने उसे अपना कार्ड देकर बहुत बड़ी गलती कर दी | मैं बिस्तर पर ही रोने लगी  और उनसे बोल रही थी मुझे प्लीज छोड़ दो |

तब वो पहलवान आदमी मुझसे बोला की ठीक है हम तुम्हे छोड़ देंगे पर हमे बदले में तुमसे 10 लाख रुपय चाहिए मैंने उनसे कहा कि मैं दे दूँगी कल | पर मुझे अभी जाने दो और मैं उठ कर खड़ी हो गई तब उसने मेरा रास्ता रोकते हुए बोला की हम लोगो को तुमने पागल समझ रखा है क्या ? जो हम तुम्हे जाने देंगे तो मैंने कहा की मैं पैसे तो दे रही हूँ न | तब उसने कहा की मादरचोद तू यहाँ से पुलिस के पास जायगी और हमे अन्दर करेगी इतने चुतिया नहीं हैं हम | फिर मैंने पूछा की क्या चाहते हो तुम लोग मुझेसे और उसने बोला की हम तुम्हे पहले चोदेंगे उसके बाद ही तुम्हे यहाँ से जाने देंगे | ये सुन के मैं बहुत डर गई थी क्यूंकि मेरे पति के गुजर जाने के बाद मैंने कभी चुदाई नहीं की थी | मैंने उन्हें मना करने लगी और कहा की मैं पुलिस में नहीं बताउंगी पर मुझे जाने दो | मैं कल तुम्हारे पैसे दे दूँगी | उसने नहीं माना और फिर से मुझे धक्का दे दिया बिस्तर पर मैं रोने लगी |

तब उसने उस औरत को जाने को कहा और तीन और आदमियों को बुलाने को कहा मैं डर गई थी की की अब मेरा क्या होगा मैं मर जाउंगी | पर उन्हें इस बात से क्या मतलब होता फिर वो आदमी मेरे पास आया और मेरी साडी एक ही झटके मैं फाड़ दी और मैं ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई | फिर सब लोग मुझ पर टूट पड़े जैसे कुत्ते हड्डी पर टूटते हैं | सबने मिल के मेरे पूरे कपडे फाड़ दिए और मैं नंगी उनके सामने खड़ी रही और मायूस रही फिर वो आदमी बैठ गया जमीन में और सबसे पहले (जिससे मेरी टक्कर हुई थी) आया मेरे पास और मुझे छूने लगा | मैंने उसका हाथ पकड़ के अलग कर दिया तो उसने मुझे जोरदार जकड लिया और मैं जोर जोर से छूटने की कोशिश करने लगी | फिर उसने मुझे कहा की अब अगर तूने कुछ भी करने से मना कर दिया तो मैं तुझे यहाँ ही मार डालूँगा | मैं डर गई उसके बाद उसने मुझे फिर से चूमना चालू किया तो मुझे करंट सा लगा | जो मेरी अंतर्वस्सना इतने सालो से दबी रही वो आज सामने आ गई वो भी इन जैसे गंदे हांथो में |

दोस्तों ये मेरी अधूरी कहानी है मैं अगले पार्ट में बताउंगी की आगे मेरे साथ क्या क्या हुआ |