मेरी बहन की गांड-3

incest sex stories, blowjob sex kahani गिरजा आलोक का लंड चूस रही थी। लेकिन मेरी चुदाई देख कर बोली। आलोक, साले अपने भाई से कुछ सीख। देख कैसे चोद रहा है अपनी मौसी को? अब तू भी चोद डाल मुझे। शाबाश मेरे यार!”मेरे बिल्कुल बराबर गिरजा भी घोड़ी बन गयी और आलोक उसको चोदने लगा। वक्त के साथ चुदाई की रफ़्तार तेज़ होती गयी। मेरी माँ क़िसी थकी हुई कुत्तिया की तरह हाँफ रही थी। आलोक पूरे ज़ोर से मेरी माँ को चोद रहा था और मैं अपनी आंटी की चूत में लंड डाल रहा था।

मेरे अंडकोष आंटी की गांड से टकरा रहे थे। कमरे में चुदाई का संगीत गूँज रहा था। आलोक ने माँ की बगल में हाथ डाल कर उसकी चूची पकड़ी हुई थी और उसको ज़ोर से भींच रहा था।”ऊऊऊऊ बेटा चोद मुझे ज़ोर से चोद मादरचोद तेरा लंड मेरी चूत की गहराई तक घुस चुका है आआहह….मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा है बहुत सुख दे रहा है तेरा लंड बेटा…शाबाश चोद मुझे! गिरजा बोल रही थी। अपनी माँ और मौसेरा भाई को देख कर मेरा जोश भी दुगना हो गया और मैं आंटी को बेरहमी से चोदने लगा। ममता की साँस भी तेज़ी से चलने लगी और मैं उसकी पीठ पर किस करने लगा” आअहह. बेटा ज़ोर से चूम ले अपनी आंटी को चोद ले हरामी डाल दे सारा लंड मेरी चूत में है मार मुझे बेटा ज़ोर से मार…आआआहह शाबाश निखिल!” मैं आंटी की गांड को थाम कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।

मेरी बगल में गिरजा को मेरा यार चोद चोद कर निहाल कर रहा था। हम चारों पसीना पसीना हो रहे थे और मुझे मालूम था की फिल्म बहुत अच्छी बन रही है। लंड दोनो की चूत में “पचक, पचक” की आवाज़ करते हुए चुदाई कर रहे थे। आलोक अब गिरजा की चूत पर चोट मारने लगा। वो जैसे जैसे गरम होता गया, मेरी माँ की गांड को और ज़ोर से पीटने लगा। गिरजा की चूत लाल हो गई थी।
मैने भी उसको देख कर आंटी की गांड पर हाथ मारना शुरू कर दिया। मुझे लगा की फिल्म में ऐसा सीन बहुत पसंद किया जाऐगा। कोई 10 मिनिट के बाद आलोक बोला” निखिल मेरे यार क्यो ना पार्टनर बदल लिए जाये। तुम अपनी माँ का टेस्ट देख लो और मैं अपनी माँ का मुझे अपनी माँ भी बहुत मस्त माल लग रही है” मुझे अपने यार का ख्याल अच्छा लगा और मैने मौसी की चूत से लंड बाहर खींच लिया और उसके नंगे जिस्म से अलग हो गया।
आलोक ने गिरजा को छोड़ दिया और फिर मैं अपनी माँ को किस करने लगा। आलोक ने ममता के मूहँ में अपना लंड डाल दिया और बोला” माँ, चूस मेरा लंड तुझे इस पर अपनी बहन की चूत के रस का स्वाद आयेगा चख कर देख गिरजा आंटी की चूत कितनी नमकीन है! ममता आंटी उसी वक्त झुक कर अपने बेटे का लंड चूसने लगी। मैं अपनी माँ को अपने ऊपर चढ़ा कर चोदना चाहता था। इस स्टाइल मैं मुझे माँ की चूची साफ दिखाई पड़ेगी और उसको चूसने का आनंद भी मिल जाऐगा। मैने गिरजा की चूत को मसल कर कहा,’ माँ मैं अपना लंड उस चूत में घुसते देखना चाहता हूँ जहाँ से मैं पैदा हुआ था तेरा दूध देखना चाहता हूँ जिनको चूस कर मैं बड़ा हुआ हूँ तुझे उस लंड की सवारी करते देखना चाहता हूँ जो तेरी कोख से निकला है गिरजा मेरी रानी मेरी माँ अपने बेटे के लंड पर सवार होकर स्वर्ग का आनंद दे दो मुझे! मैं नीचे लेट गया और गिरजा बिना कुछ बोले मेरा लंड पकड़ कर मेरी कमर पर सवार हो गयी और मेरे सुपडे पर अपनी चूत को रगड़ने लगी।

आलोक ने ममता को पलंग के कोने तक खींच लिया और उसकी टाँगों को अपने कंधे पर टीका लिया। ममता ने वासना के कारण अपनी आँखें बंद की हुई थी और सिसकारी भर रही थी। गिरजा की आँखों में वासना के लाल डोरे झलक रहे थे जब वो मेरा लंड अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी। मैने माँ की कमर कस के पकड़ ली और अपनी कमर उठा कर लंड माँ की चूत में डाल दिया। मेरा लंड माँ की चूत में फट से घुस गया और वो सिसकारी भर उठी”
मर गयी मेरी माँ उफ्फ बेटा तुमने तो मुझे आनंद से ही मार दिया निखिल अपने बेटे के लंड का मज़ा क्या होता है मुझे तो पता ही ना था है निखिल, डाल दे पूरा मेरी चूत में शाबाश बेटा चोद अपनी माँ को तेरा बिजनस अच्छा है चुदाई की चुदाई कमाई की कमाई वा बेटा क्या लंड है मुझे पसंद है आलोक भी, अब मेरा भी यार है मुझे धन्य कर दिया मेरे बेटे अपनी माँ की चूची चूस ले और चूत चोद ले! मैं भला अपनी माँ के आदेश की पालना क्यो ना करता।

आदेश भी इतना मज़ेदार था की मैने गिरजा की मस्त चूची को थाम लिया और उसके निपल चूसने लगा। माँ मेरे लंड पर उछलने लगी आलोक, साले मुझे भी ज़ोर से चोद जैसे निखिल अपनी माँ को चोद रहा है। अगर तेरे अंदर भी मादरचोद बनने का शौक है तो अपनी माँ को चोद डाल आज जी भर के ऊह्ह्ह हाँ ज़ोर से कस के डाल मादरचोद।…आलोक बेटा और ज़ोर से!” आलोक की रफ़्तार भी तूफ़ानी हो चुकी थी” ओह्ह्ह्हह्ह माआआ ममता मेरी माँ आज तक ऐसी चुदाई नहीं की है मैने…
जब तुम मुझे बेटा कह कर पुकारती हो तो मेरे लंड की शक्ति दोगुनी हो जाती है आआआ ।…।मैं अब रुक ना सकूँगा मेरी माँ !”मुझे भी लग रहा था मेरा लंड जल्द ही झरने वाला है। गिरजा भी अब अपनी गांड तेज़ी से ऊपर नीचे कर रही थी। कमरा चुदाई की सिसकारीयो से गूँज रहा था। लंड रस और चूत रस की महक कमरे में फैल चुकी थी। मैं और आलोक तेज़ी से धक्के मार कर दोनो औरतों को चोद रहे थे।

मेरे अंडकोष अब मेरा रस मेरे लंड की तरफ उठा रहे थे और एक कामुक चीख मार कर मैं झरने लगा,” ऊऊऊ…।।हाईई…।ऊऊऊओ…आआआआः!” गिरजा का जिस्म ऐसे काप रहा था जैसे उसको बहुत बुखार हो। वो पागलों की तरह चुदाई के आनंद सागर में डूब रही थी। मेरी माँ की चूत से रस की धारा बहने लगी। उधर आलोक ताबड तोड़ अपनी माँ को चोद रहा था।
ममता की चूची को आलोक के हाथ मसल रहे थे और दोनो मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे, बेटा, मैं झड़ गयी। चोद आलोक मेरे लाल…मेरी चूत पानी छोड़ रही है ऐसी चुदाई तो तेरे नपुंसक बाप ने भी नहीं की कभी…बेटा चोद डाल अपनी चुदासी माँ को! ” उसी वक्त मेरे लंड का पानी निकल गया। और आलोक भी धक्के मारता हुआ खलास होने लगा। धीरे धीरे चुदाई का तूफान शांत होने लगा और हम दोनो अपनी अपनी माँ के ऊपर ढेर हो गये।

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