नवीन ने मालिश करने के बाद चोदा

शादी कर के मुझे अभी केवल दो महीने ही हुए थे और मेरे सारे अरमान ख़ाक में मिल चुके थे. मैंने एक राजकुमार के सपने देखे थे लेकिन पति की गोरी चमड़ी के निचे एक राजकुमारी रहती थी क्यूंकि वह पुरुष के शरीर में महिला का दिल थे. मुझे गे समाज से कोई गिला नहीं है, भगवन ने उन्हें ऐसा बनाया है वह क्या करे, लेकिन शादी कर के मेरी जिन्दगी भी तो ख़राब न करते. जिस हिम्मत से वह मुझे कह सकते है की तुम अपने लिए कुछ देख लेना मैं तुम्हारी चूत के लिए योग्य नहीं हूँ. मेरे उपर तो जैसे की आभ फटा था उस दिन…पर जैसे उपर वाले की मरजी, मैं इसे छोड़ भी नहीं सकती थी क्यूंकि मेरे घरवालो के उपर शरम का पहाड़ लदा था जो मेरी जिन्दगी से भी बड़ा था. मैंने कुछ दिन तक पति को चुदाई के लिए राजी करने की कोशिश की लेकिन एक दिन उस ने मुझे साफ़ कह दिया की वह चुदाई के लायक ही नहीं है, उसे केवल मर्द अच्छे लगते हैं. मैं मनोमन अपने चूत के लिए एक योग्य लंड की तलाश में लग गई.

मेरी नजर तभी नवीन के उपर पड़ी, नवीन मेरे पति के साडी के शो रूम पर काम करता था और उसकी उम्र होंगी केवल 20, लेकिन वह एकदम तगड़ा और सशक्त था. उसके बाजू में मुझे वह दम लगा जो मेरी चूत को शांत कर सके. मैंने अब धीरे धीरे नवीन को लाइन देना चालू कर दिया. नवीन पहेले खचक रहा था लेकिन एकाद महीने में वह भी मुझे स्माइल देने लगा. एक दिन जब वोह घर पति का टिफिन लेने आया तो मैंने टिफिन पकडाते हुए उसके हाथ का लम्बा स्पर्श किया, उसने मेरी तरफ देखा और मैंने उसे आँख मारी. वह हंस पड़ा और चला गया. मैंने अपने पति को साफ़ कह दिया के मैं नवीन से चुदाई करवाउंगी. पति को इससे कोई एतराज नहीं था क्यूंकि उसे भी एक बच्चा चाहिए था जो उसके बस की बात नहीं थी. मैंने उसे कह दिया की जब मैं कहूँ वह नवीन को घर भेज दें बाकी मैं सब संभाल लुंगी. एक दिन सास, ससुर और मेरी जेठानी कोमल खरीदी के लिए बाजू के शहर जा रहे थे, मुझे भी जाना था लेकिन मैंने बीमारी का बहाना करके जाना केंसल कर दिया. मैंने दोपहर के 12 बजे पति को फोन किया की वह कुछ भी बहाना कर के नवीन को घर भेज दें. मेरे पति गुलशन ने कहाँ ठीक है. नवीन कुछ 15 मिनिट के बाद ही बेल बजा रहा था घर के बहार. मैंने उसे लुभाने के लिए पारदर्शक साडी, और काली ब्रा पहन रखी थी.

नवीन को मैंने हस्ते हुए घर के अंदर लिया और उसने तुरंत पुछा मेडम साब ने बोला है की आप को कुछ काम है. मैंने कहाँ हां क्या आप मेरी मदद करोंगे. उसने कहा हां बोलिए ना. मैंने कहा गुलशन बता रहे थे की आप मोच वगेरह के लिए मसाज करते है. नवीन बोला हां मेडम वोह तो ऐसे ही कभी कभी दुकान पर कर देते है हम. मेरी चूत के अंदर चुदाई का कीड़ा सलवटे ले रहा था, मेरी नजर नवीन के तगड़े बाजुओ पर ही थी और मैं खुली आँखों से उन बाजुओ से कस के जकड़ कर चुदाई करवाने के सपने देख रही थी. नवीन बोला, बीबीजी आपको कहाँ मोच आई है, उसके बोलते ही मैं अपने चुदाई के दिन-स्वप्न से बहार आई. मैंने उसे कहा पहले आप चाय तो लो, मालिक का टेंशन मत लो, उनको मैंने बोला है की आप को देर भी हुई तो दिक्कत नहीं है. मैंने उसे ठंडा पानी और रूहअफज़ा पिलाया. नवीन को मैंने तिरछी नजर से देखा था आर वह मेरी गांड की तरफ नजरे गडाए हुआ था. उसके लंड को चूस कर मैं भी उससे चुदाई करवाना चाहती थी लेकिन अभी एकदम से नहीं कहे सकती थी के नवीन लाओ तुम्हारा लंड…..!

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ठंडा पिलाने के बाद मैंने नवीन को बेडरूम में बुलाया और मैं खुद पलंग के उपर उलटी लेट गई. मैंने साडी हटाई और उसको मेरी चिकनी कमर दिखाते हुए कहाँ यहाँ पर मोच आई है. मैंने उसे कमर के और गांड के बिच का हिस्सा दिखाया था. नवीन बोला ठीक है मेडम आप आँखे बंध करके लेटे रहें. वो पलंग के उपर चढ़ गया और उकडू बैठ गया. मैंने उसे कहाँ आप मेरे पाँव पर बैठ जाओना तो मुझे पैर के दर्द में भी राहत होगी. वोह मेरी गांड के थोड़े उपर पाँव के उपर बैठ कर मसाज करने लगा. मैं जानबूझ कर कराहने की एक्टिंग करने लगी. नवीन के घुटने मेरे जांघो को साइड से छू रहे थे. वोह मेरे कमर के निचले हिस्से को दबा रहा था और मुझे पुरुष स्पर्श से एक अलग ही नशा चढ़ रहा था. मैंने नवीन को कहा, और निचे…..!

नवीन के हाथ लगभग मेरे कूलों को छू रहे थे और मैंने तभी उसे कहा, मजा आ रहा है..आपके हाथों में तो जान है नवीन. यह शायद नवीन को चुदाई के लिए उकसाने के लिए काफी था. वह मेरे कूलों के करीब अपना लंड ले आया, मुझे उसके लंड की गर्मी अपनी गांड पर महसूस हो रही थी. वो अभी भी कूलों के सिर्फ थोड़ी उपर मसाज कर रहा था. मैंने आँखे खोली और पलट के उसकी तरफ देख के हंस दिया, नवीन पसीने में डूबा था. यह जवान इंडियन लड़का शायद पहेली बार किसी भाभी की गांड के इतने करीब पहुंचा था. मैंने जैसे उसकी तरफ देख हंस दिया उसकी हिम्मत खुलने लगी और वह लौड़े को और भी जोर से गांड के उपर गडाने लगा. नवीन बोला, मेडम आपकी साडी बिच में आ रही है इसलिए मसाज सही नहीं हो रहा, मैंने कहा उतार दो ना फिर. नवीन के हाथ मेरे पल्लू को हटाने लगे. उसने धीमे से पल्लू हटा दिया. अब में केवल ब्लाउज में उसके सामने पड़ी थी. मैंने आगे होते हुए कहा, नवीन ब्लाउज भी उतार दो ना मुझे कमर पे भी अच्छेवाला मसाज करवाना है. नवीन का लंड गांड को बेहद खुसी दे रहा था. उसने जैसे ही ब्लाउज उतारा मैंने बिना रुके उसके लंड को हाथ में भर लिया.

नवीन का लंड हाथ में लेते ही वह एंठने लगा और मैंने उसे कहा, नवीन मुझ से रहा नहीं जाता, प्लीज़ अपने कपडे उतार दो और मुझे भी नंगा कर दो. नवीन ने मेरे कपडे फट से उतारे और वह खुद भी पेंट और शर्ट निकाल के चड्डी में आ गया. मैंने अपने हाथ से उसकी लंगोट निकाली और उसके कड़े लंड की आँखों से ही चुदाई करने लगी. मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और मुझे चुदाई की एक तलब सी लगी पड़ी थी. मैंने उसके लंड को हाथ से तोला, बिलकुल जवान लंड था और मेरी चूत के लिए बिलकुल सही साइज़ था इसका. मैंने नवीन को पलंग की उपर लिटा दिया और खुद उसकी जांघो के बिच बैठ गई. नवीन अभी भी एंठ रहा था. मैंने अपना मुख चलाया और उसके लंड के सुपाडे को मुहं में दबाया. नवीन के मुहं से आह ओह निकलने लगा और मैं अब उसके लंड को क्रमश: और मुहंके अंदर घुसाने लगी. तक़रीबन आधे से ज्यादा लंड मुहं में घुसते ही वह जैसे की मेरे गले तक पहुँच चूका था और मुझ से और आगे लिया भी नहीं गया. मैंने लौड़े को मस्त चुसना चालू किया और नवीन लंड को मेरे मुहं में धकेलने लगा. मैंने उसके जांघ पर हाथ रख उसके झटको को अंकुशीत किया. नवीन भी चुदाई के लिए उत्सुक था बिलकुल मेरी तरह. नवीन मेरे चुंचे और गाल, कंधे पर हाथ फेर रहा था. मैं भी उसके हाथों का स्पर्श मस्त मजे से भोग रही थी.

नवीन का लंड अब बिलकुल तन के लकड़े जैसा सख्त हो चूका था और मेरी चूत भी मस्त गीली हो चुकी थी, मैंने चुदाई करवाने के लिए नवीन का लंड मुहं से निकाला. नवीन भी चुदाई मारने को बेताब ही था. मैं अपनी टाँगे फैला के पलंग पर लेटी और नवीन लंड हाथ में लिए चूत के करीब पहुँचा. उसने अपना लंड मेरे चूत के समीप कर दिया. मैंने उसके लंड को अपने हाथ से पकड के चूत के ऊपर सहलाया. क्या असीम सुख था चुदाई का जिस से मैं कितने दिन से विमुख थी. नवीन ने लंड अंदर थोडा धकेला और मैं एंठ पड़ी, नवीन ने मेरे स्तन मेरे मुहं में भर लिए और वह लंड को चूत के अंदर धीमे धीमे धकेलने लगा. कुछ ही देर में उसका पूरा लंड मेरी चूत की तह तक पहुँच चूका, और फिर चालू हुई चुदाई की रेस. उसका लंड चूत से रेस में जितने के लिए अंदर बहार हो रहा था. और मेरी चूत लौड़े को अपने अंदर पूरा समा के उससे आगे होने की दौड़ में थी. लंड और चूत की रेस में कोई भी जीते, चुदाई जरुर अच्छी मिल रही थी हम दोनों को. नवीन के मस्तक पर पसीने की धार थी और मेरे पेट और सीने पर भी पसीना आया था. नवीन के झटके बढ़ते गए और साथ ही उसका एंठना भी. मैं भी मस्त हिल हिलके उसे ज्यादा से ज्यादा मजा देने की कोशिस कर रही थी. नवीन लंड को जैसे की चूत के अंदर से पीछे गांड के रस्ते निकालना हो वैसे तीव्र झटके दे रहा था.

नवीन के लंड से अब लावा बहने लगा और इस चुदाई के रस ने मेरी चूत को जैसे की पिगला दिया. मैंने नवीन को एकदम कस के जकड लिया और मेरे चुंचे उसकी छाती से चिपक गए. मैंने अपनी चूत टाईट कर के उसके लंड का सारा रस चूत के अंदर भर लिया. नवीन भी मुझे कमर से खिंच के और जकड़ने लगा. मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगाये और हम दोनों एक मिनिट तक एक लंबी लिप किस करने लगे. इसी बिच मेरी चूत भी तृप्त हो गई. नवीन ने जकड़ ढीली की और मैं आँखे बांध कर के वही लेटी रही. जब मैंने आँखे खोली नवीन अपने कपडे पहन चूका था, मैंने उससे ऊँगली से इशारा किया और वो जैसे झुका मैंने उसको कोलर पकड के अपनी तरफ खिंच के उसके होंठ पर दुबारा अपने होंठो से ताला लगा दिया. हम किस करते रहे….! मैंने उठ के उसे अपने पर्स से 500 का नोट दिया, वैसे भी पति के पैसे अच्छे काम में ही यूज़ करने थे ना. नवीन से मैंने उसका मोबाइल नम्बर ले लिया और उसे कह दिया की मैं उसे हफ्ते में एकाद बार बुलाऊंगी. वोह बोला,साहब…मैंने कहा साहब का टेंशन तू मुझ पे छोड़ दे.

नवीन से चुदाई करवाते मुझे आज पुरे दो साल हो चुके है, उसका और मेरा एक बेटा भी है, जिसे मेरे पति ने समाज के लिए अपना बताया हुआ है.