जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -9

desi kahani अध्याय 9
इधर …..
डॉ के केबिन से निकलते ही मेरी की कातिल हसी ने विजय को मदहोश कर दिया वो उसके पीछे पीछे किसी पालतू की तरह जाने लगा,मेरी की बलखाती कमर और उभरे हुए गांड ने विजय की सांसे बढ़ा दि थी,एक तो मेरी का कातिल शारीर उसपर उसकी कातिल अदाए,विजय की हालत ही ख़राब थी,मेरी उसे बहार बने काउंटर पर ले गयी,और वही सोफे पर बैठा दिया,
“आप क्या पीना पसंद करेंगे,”बड़ी ही लिज्जत से अपने छातियो को विजय की ओर झुकाती हुई बोली ,विजय की निगाहे उसके बंद कबुतारो पर अटक गए जो बस फुदकने के लिए बेताब थे,विजय ने अपने सूखे गले से थूक को निगला और बड़ी मुस्किल में कह पाया ,
“जो आप पिला दे,”मेरी उसकी ये हालत देख जोर से हस पड़ी,और अपनी होठो पर अपनी जीभ फिर कर बोली ,

“चाय काफी या पानी क्या पियोगे,”विजय ने अपने मन में सोचा ,साली अगर मेरे गाव में होती तो अभी तक इसे पटक के चोद चूका होता,क्या करू भईया भी साथ है ,चांस लू या रहने दू,नहीं नहीं भाई को पता चल गया तो ,ये साली बहका रही है,कुछ तो हिम्मत दिखानी पड़ेगी हम भी ठाकुर है,विजय ने अपना गला साफ़ करते हुए अपने चहरे पर एक स्माइल लायी और
“मेडम जी दूध नहीं मिलेगा क्या,”विजय के चहरे पर एक हसी खिल चुकी थी की उसकी पूरी हिचक जाती रही ,वो पहले तो मेरी के बड़े बड़े बालो को देखा फिर उसके चहरे को मेरी के होठो में भी एक मुस्कान आ चुकी थी,
“नोटी बॉय ,दूध पीना पी तो टॉयलेट में आ जाओ,”विजय के तो जैसे बांछे खिल गए ,वो बड़ी बेताबी से मेरी के पीछे आया ,टॉयलेट में पहुचते ही मेरी ने दरवाजा बंद कर दिया ,और उसके ऊपर टूट पड़ी जैसे सदियों से पयासी हो ,ऊपर उसके शर्ट से बहार निकलते कबूतर विजय के लिए खास आकर्षण थे उसने देर नहीं करते हुए उसके शर्ट के बटन खोलने लगा ,पर मेरी ने उसका सर पकड़ कर अपने होठो के पास ले आई और उसके होठो को अपने होठो में भरकर चूसने लगी ,जैसे विजय को कुछ समझ नहीं आ रहा हो ,आज तक वो ही लडकियों पर भरी रहा था ,पर आज ये क्या हो रहा था ,एक औरत उसपर भरी हो रही थी ,विजय ने अपनी ताकत का इस्तमाल किया और मेरी को अपने दोनों हाथो से हवा में उठा दिया मेरी तो जैसे चुहक ही गयी ,विजय उसके कमर को पकड कर उसे किसी गुडिया की तरह उठा लिया और उसके जन्घो को अपने सर तक ले आया ,उसने उसकी स्कर्ट में अपने सर को घुसा दिया ,और बड़े ही सुखद आश्चर्य में पड़ गया क्योकि मेरी ने कोई भी अन्तःवस्त्र नहीं पहने था,उसकी कोरी बिना बालो की योनी उसके होठो के पास थी,उसने अपना सर उठाया और अपने होठो पर मेरी को बैठा दिया मेरी उसकी ताकत से हस्तप्रद सी हो गयी वही जैसे ही विजय ने अपनी नथुनों से उसकी योनी को जोर से सुंघा उसके नथुनों से आती हवा ने मेरी के योनी पर प्रहार किया और मेरी की योनी ने तेजी से पानी छोड़ना शुरू कर दिया विजय अपने जीभ को निकाल कर सीधे ही उसके योनी के दोनों फाको के बीच रगड़ने लगा,उसे उस नमकीन पानी का आभास हो गया मेरी विजय के सर में बैठी थी और उसके बालो को अपने हाथो से जकड रखा था,वो विजय के जानवरों जैसे ताकत और तरीके की दीवानी होती जा रही थी ,आज तक ना जाने कितने लोगो को उसने अपने जिस्म का स्वाद चखाया था पर ये पहला शख्स था जो मेरी पर भारी पड़ रहा था,और उसे अपने काबू में कर लिया था,मेरी के दिल से यही बात निकली साला मर्द तो यही है,बाकि सब तो …???

विजय अपने जीभ का कमाल दिखा कर मेरी को पागल ही कर दिया था,विजय के अंदर का जानवर जगाने लगा था जो की जब जाग जाये तो बड़ा ही खतरनाक हो जाता है ,विजय उसकी योनी को ऐसे खा रहा था जैसे कोई कुत्ता किसी चाकलेट केक को खाए ,अपने पूरा सर उसने उस छोटे से छेड़ में डालने की ठान ली थी,उसके दांत जब जब योनी को रगड़ते मेरी की आहे निकल पड़ती उसे इतना मजा आ रहा था की उसके आँखों से आंसू आने लगे ,
“अआह्ह्ह आह्ह ओ ओ ओ बेबी बेबी सक इट सक इट ,माय होली जीजस मैं मर जाउंगी ओह ओह ओह बेबी ,नो नो नो “विजय ने अपने दांतों से उसकी योनी की दीवारों को काटना चालू कर दिया हलके हलके किये वार ने मेरी की हालत इतनी ख़राब कर दि की वो विजय के बालो को नोचने लगी ,उसने पूरी ताकत से विजय के बालो को उखाड़ने लगी पर विजय नहीं माना वो रोने लगी ,हा लेकिन वो आंसू मजे के थे मजे के अतिरेक के ,वही विजय को पहली पबार इतनी दुधिया गोरी और चिकनी चुद मिली थी जिसके फांके भी गुलाबी थे वो उसे कैसे छोड़ देता ,मेरी अपने सर झुका के विजय के गले तक ले आई और उसके दांतों से जो भी चमड़ी आई उसने अपने दांत गडा दिए ,पर वो तो साला हवसी जानवर ,सांडो की ताकत वाला विजय था इस फूल का प्रहार उसपर क्या असर करता पडले में वो उसका कमर उठा कर अपने दांतों को उसकी योनी में रगड़ दिया ये प्रहार मेरी नहीं सह पायी और एक जोरदार चीख के साथ झड गयी ,उसे इसका भी भान नहीं रहा वो क्लिनिक में है,विजय का चहरा पूरी तरह से भीगा हुआ था उसने उसके पानी को चूस चूस कर पिया उसे भी इस बात का इल्म ना रहा था की वो क्लिनिक में है ,उसने मेरी को निचे उतरा तो मेरी जैसे मरी हुई थी,बिलकुल बेसुध लेकिन उसके चहरे पर तृप्ति के भाव थे पर विजय का डंडा तो अब पुरे जोर में खड़ा था जसने उसके स्कर्ट को निकल फेका पर मेरी की हालत देख थोडा रिलेक्स करने की सोची मेरी को अपने सीने में चिपका लिया ,मेरी बेसुध सी उसके ऊपर अपने को पूरी तरह से छोड़ चुकी थी ,थोड़ी देर बाद रिलेक्स होकर जैसे ही मेरी आँखे खोली उसने विजय को पकड़ कर एक जोर का किस उसके होठो में दिया
“थंक्स विजय तुमने जो किया वो कोई नहीं कर पाया ”

“अरे थंक्स छोड़ अब मेरा भी…”विजय इतना ही बोला था की दरवाजे में खटखट हुई ,आवाज अजय की थी जिसे सुनकर विजय का खड़ा डंडा पूरी तरह से मुस्झा गया उसे याद आया की मेरी किस तरह चीखी थी,वो डर और शर्म से पानी पानी हो गयी वही मेरी की हसी निकल पड़ी,विजय ने उसका मुह दबाया और
“बस आता हु भईया दो मिनट “विजय बड़ी ललचाई नजरो से उसके योनी को देखा फिर उसके तरबूजो को ,उसका चहरा यु उदास हो गया था जैसे किसी बच्चे के हाथो से कोई चोकलेट छीन ले,मेरी उसकी ये स्थिति देख उसके गालो में बड़े ही प्यार से किस किया और
‘कोई बात नहीं मेरी जान ,मेरी इस गुलाबो में आजतक सिर्फ दो ही मुसल गए है,एक तो डॉ का और एक मेरे पति का लेकिन तुझे भरोसा दिलाती हु तीसरा तेरा होगा,तूने तो मुझे खुस ही कर दिया “विजय को उसकी बात से थोड़ी रहत मिलती है वो जल्दी अपनी हालत दुरुस्त कर वह से निकलता है मेरी अब भी अंदर थी बहार अजय नहीं होता वो अपने भाई की इज्जत बचने के लिए क्लिनिक के बहार निकल गया था,विजय सर निचे किये हुए अजय के पास पहुचता है ,अजय उसके चहरे के डर को देखता है और उसे अपने भाई पर बड़ा प्यार आता है ,और उसके चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है पर वो कुछ कहता नहीं और वो घर की ओर चल देते है,…..