जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -45

hot kahani अध्याय 45
अजय के प्लान पर अमल होना शुरू हो गया और उसका रिजल्ट बहुत जल्द ही दिखाना शुरू हो गया,
पहली चीज जो हुई वो थी तिवारियो के परिवार से एक नए नेता का उदय एक ऐसा नेता जो सचमे ही दुसरो के दुखो को सुनता समझता और उसे हल करने की पुरजोर कोसिस करता था,धनुष के मन में ना जाने ये दया का भाव कहा से पनपा पर दुसरो के तकलीफों को सुनते हुए वो भावभिभोर सा हो जाता उसके आंखों में आंसू आ जाते और वो सच्चे दिल से उनकी मदद को तत्पर रहता,उसका जमीदारो वाला रुआब भी जाता रहा वो इतना विनम्र और शांत हो गया था की उसे जानने वाले भी हैरान थे,पर लोगो के लिए ये एक बड़ी तसल्ली की बात थी ,अजय और ठाकुर तो ऐसे भी अपने दयाशीलता के लिए प्रसिद्ध थे पर तिवारियो के परिवार में ये पहला शख्स था,अब उसे कॉलेज के चुनाव से भी मतलब नही रह गया था,और वो सभी से मिलता था साथ ही निधि और सुमन भी लड़कियों के बीच बहुत ही पॉपुलर हो गए थे ,ऐसे भी वो बहुत ही संवेदनसील तो पहले से ही थे अब उन्हें मौका मिला था की वो दुसरो की मदद कर सके वो अपनी पूरी ताकत लगा रहे थे,,,,,,लोग उन्हें देखते तो उनका दिल गदगद हो जाता सुमन को गरीबी और अभाव का बहुत ही ज्ञान था जो उसे लोगो से इंटरेक्ट होने और मुस्किलो को सही तरह से समझने में मदद कर रहा था ,कुल मिला कर हवा धनुष के तरफ बहने लगी जो लोग उन्हें गालिया देते नही थक रहे थे वो अब उनकी तारीफ करते नही थकते थे,उन्हें उनकी सच्चाई दिखाई दे रही थी,अभिषेक बुरी तरह से झल्ला गया था ,लोग उसका साथ देना छोड़ रहे थे ,जो गुंडे उसने पाले थे वो सभी अब ठाकुर के निशाने पर थे और अधिकतर जेल में थे उसके डर से कई अभिषेक का साथ छोड़ चुके थे………..
इधर सेठो की हालात खराब हो चुकी थी और धंधे में हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए वो जमीदारो और ठाकुरो के आगे झुक ही गए,वहां सभी कुछ तो इन दोनो परिवारों का ही था ,इनकी लड़ाई के कारण ही दूसरे अपना धंधा जमा पाए थे ,दोनो परिवारों का मिलने की खबर जंगल के आग की तरह फैल गयी थी और सभी को पता था की अब इनसे मुकाबला करना लगभग ना मुमकिन ही,…यहां तक की अभिषेक के पिता ने भी अपने हाथ उठा लिए………………..

लेकिन अभिषेक ने हार नही मानी थी उसे अब भी यकीन नही हो रहा था की उसके इतने मेहनत से बनाया गया किला कुछ ही वॉर से ढह गया है…उसने मन में कुछ ठाना और धनुष से मिलने चला गया…उस समय धनुष निधि और सुमन केम्पस में ही बैठे किसी मुद्दे पर बात कर रहे थे साथ ही वहां और भी बहुत से लोग बैठे थे…अभिषेक धनुष के पास जाता है,सभी उसे ही देखने लगते है….
“धनुष मैं इस चुनाव से अपना नाम वापस ले रहा हु…”
सभी अब भी उसे ही देख रहे थे…
“क्यो क्या हुआ “
“मुझे लगता है की मैं ये चुनाव नही जीत सकता”
“तो इसमें क्या हुआ ,असली बात जितना नही लड़ना है,और हम लोकतंत्र में रहते है मेरे दोस्त यहां सभी को अधिकार है की वो चुनाव लड़े और लोगो की सेवा करे,मैं कौन होता हु तुम्हे रोकने वाला,और तुमने जो किया वो बहुत ही बड़ा काम था तुमने पहली बात इस क्षेत्र में दो सबसे ताकतवर परिवारों के विरुद्ध लड़की लड़ी और मुझे लगता है की लोकतंत्र के लिए ये बहुत जरूरी है की एक मजबूत विपक्ष सदा मौजूद रहे….”
धनुष अब बड़ी बड़ी बाते करना भी सीख गया था ,जिसे देख कर निधि बहुत इम्प्रेष हुई,साथ ही वहां मौजूद सभी लोग भी …

“नही धनुष मुझे गलत मत समझना लेकिन मैं हार के डर से नही बल्कि तुम्हारे किये काम से खुस होकर चुनाव से अलग होना चाहता हु,मैंने ये चुनाव किसी का भला करने के लिए नही लड़ा था ,मैं तो बस खुद को दिखना चाहता था,(अभिषेक ने निधि को देखा,निधि उसके किये इशारे से थोड़ी हस्तप्रद सी हुई पर उसे समझ आ रहा था की जब से वो कॉलेज में आयी तबसे अभिषेक उसे देखा करता है पर कभी भी उससे बात करने की हिम्मत शायद वो नही जुटा पाया,शायद इसी लिए उसने खुद को साबित करने के लिए ये कदम उठाया था,निधि ने मन में ही एक मुस्कान जगाई लेकिन उसे होठो तक नही आने दिया) लेकिन मैं जब से तुम्हे लोगो की मदद करते देखा है तबसे मेरे दिल में एक बेचैनी सी हो गयी है ,मैंने ये चुनाव जितने के लिए क्या नही किया लेकिन तुम बस लोगो की मदद कर रहे हो,मैंने तुम्हे और तुम्हारे परिवार को बदनाम करने की साजिशें रची और तुम अब भी मुझसे इतने प्यार से बात कर रहे हो ,”
अभिषेक के आंखों में पानी आ चुका था जिसे देखकर धनुष भी अपनी जगह से उठकर उसके गले लगा लिया,
‘मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हु धनुष ,मुझे कोई भी पद नही चाहिए बस तुम्हारे साथ काम करने का एक मौका चाहिए मैं कभी भी तुम्हे निराश नही करूँगा”
“ह्म्म्म “धनुष उससे अगल होता है,
“मुझे अपने भैया से बात करनी होगी तुम थोड़ी देर को यही रुको “

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धनुष अजय से बात करता है और अजय उसे थोड़ी में कॉलेज पहुचने का कहकर फोन रख देता है,वो लोग फिर से बातें करने लगते है और अभिषेक ने ज्ञान से धनुष और सभी लोग प्रभावित होते है जैसे की उसे पहले भी राजनीति का थोड़ा ज्ञान था,धनुष मन में ही उसकी सिफारिस अजय से करने की ठान लेता है साथ ही एक हलचल सी निधि के जेहन में भी होती है इतना हेंडसम सा लड़का,और बड़ा ही प्रभावी,नाक नक्श के अलावा निधि को उसके साहस हिम्मत ने भी बड़ा प्रभावित किया था,साथ में उसकी वो आंखे जो हमेशा ही निधि को चोर निगाहों से देखती थी ,निधि भी अपने जवानी के ऐसे मुकाम में थी जहा उसके सीने में भी ऐसी बातो से हलचल होनी तो स्वाभाविक था,उसे कॉलेज का पहला दिन याद आया जब अभिषेक को उसने पहली बार देखा था वो उसे दूर से ही घूर रहा था जो की निधि को बिल्कुल भी पसंद नही आया था ,पर धीरे धीरे उसे वो पसंद आने लगा था ,खासकर जब उसने धनुष के सामने अपना नामांकन डाल दिया…और आज उसने ये भी इशारों में काबुल लिया था की ये उसने निधि के लिए ही किया था ,और भी शायद वो उसके लिए ही धनुष के साथ मिलने को तैयार हो गया हो…सोचकर निधि के चहरे में एक मुस्कान आयी पर ये मुस्कान अब मन तक सीमित नही रह सकी और उसके होठो भी साथ ही हिल गए…….
अजय ने आकर सभी का अभिवादन किया धनुष ने उसे सभी बातें बताई और अपना सुझाव दिया ,इससे पहले की वो कुछ कहता निधि ने अजय को अलग में लेजाकर थोड़ी बात की और मुड़कर अभिषेक को देखते हुए मुस्कुरा दिया ,,अभिषेक को अपना तीर निशाने पर लगता हुआ दिखा…
“हम्म्म्म मैंने बहुत सोचसमझकर एक फैसला किया है,धनुष मुझे लगता है की अभिषेक के पास बहुत नॉलेज है जो की इस कॉलेज के बहुत ही काम आएगा,अभी ये कॉलेज नया है और इसे एक एक्सपीरियंस नेता की जरूरत ही और मुझे नही लगता की तुम्हे इस पद का कोई भी मोह है ,इसलिए मुझे लगता है की अभिषेक को ही कॉलेज का प्रेजिडेंट बनाना चाहिये …:”
सभी स्तब्ध से अजय को ही देखने लगे थे,लेकिन निधि और धनुष इससे संतुस्ट से दिख रहे थे ,यहां तक की अभिषेक के चहरे में भी कोई भी एक्सप्रेशन नही था उसे भी समझ नही आ रहा था की आखिरकार हो क्या गया उसे लगा था की शायद कोई छोटा मोटा पद उसे दे दिया जाएगा पर यहां तो प्रेजिडेंट का पोस्ट ही उसे दिया जा रहा है वो भी उनके द्वारा जिसका उसने इतना विरोध किया था ,,,,,सभी अपने कानो की खराबी समझकर थोड़ी देर तक रुके रहे पर जैसे ही धनुष ने अभिषेक के गले से लगकर उसे बधाई दी सभी को होश आया ,साथ ही निधि और सुमन ने भी उसे हाथ मिलाकर बधाइयां दी ,निधि से हाथ मिलते हुए उसने थैंक्स कहा और उसका जवाब निधि ने मुस्कुराते हुए वेलकम कहकर दिया,अभिषेक के दिमाग में ये तो साफ हो चुका था की निधि भी उसमे इंटरेस्ट ले रही थी ,

तभी एक लड़का खड़ा हुआ और जोरो से चिल्लाया
“धनुष भैया “
“जिंदाबाद “सभी लोग जोरो से नारे लगाने लगे …
“निधि दीदी “
“जिंदाबाद “
लेकिन धनुष ने उसे रोक और धनुष ने नारा लगाया
“अभिषेक भैया “
“जिंदाबाद”
“हमारी एकता “
“जिंदाबाद “…………

इधर
महेंद्र को समझ नही आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,अजय के ऊपर उसे पूरा भरोषा था बार जीती सीट किसी और को ऐसे ही दे देना उसके समझ के परे था ,तभी निधि, सुमन ,धनुष ,अजय विजय ,तिवारियो की हवेली में पहुचते ही ….महेंद्र ये देखकर भावविभोर हो जाता ही और उन्हें अपने गले से लगा लेता है ,उनका परिचय रामचंद्र से करवाता है ,उसे अपनी आंखों में एक क्षण को तो विस्वास ही नही होता….कभी भी इसकी उम्मीद नही थी की वो अपने नाती नातिनिनो को कभी देख भी पायेगा…वो गले लगाकर रोने लगता है,बच्चे भी अपने नाना से मिलकर बहुत खुस होते है माहौल बिल्कुल ही बदल सा जाता है ,खासकर निधि को देखकर रामचंद्र को अपनी बेटी की याद आ जाती है ,वो उसे अपना सबकुछ लूट देने को तैयार हो जाता है…भावनाए उफान पर थी वही बजरंगी भी सुमन को झकडे खड़ा था,वो अभी भी उसकी मा से नही मिल पाया था हा उसतक खबर जरूर पहुच चुकी थी पर शायद आज वो उसके साथ ही उनके घर जाय या बाली को सब पता चलने तक और उसके शांत होने तक इंतजार करे……भावनाओ का सैलाब खत्म होने पर अजय,विजय ,धनुष,बजरंगी और महेंद्र थोड़े अलग से जाकर बैठे निधि को तो उसके नाना छोड़ने को तैयार नही थे ना ही निधि उन्हें….
“मुझे माफ कर दीजिये मामा जी मैंने आपसे पूछे बिना ही फैसला कर लिया “
“अरे बेटा मुझे तुमपर पूरा भरोषा है की तुम कुछ भी गलत नही करोगे,पर मुझे ये बात समझ नही आयी “
धनुष और विजय हसने लगे
“मामाजी इससे पहले तो हमारी इज्जत समाज में बढ़ेगी ,दूसरा मैं अपने भी को मामूली से कॉलेज का प्रेजिडेंट नही बल्कि इस स्टेट का मुख्यमंत्री बना देखना चाहता हु…”

अजय की बात से सभी हस्तप्रद से हो गए ,अभी तक दोनो के परिवार से किसी ने भी प्रोफेशनल राजनीति नही की थी तो सबका चौकाने स्वाभाविक ही था………
“बेटा ये तुम क्या कह रहे हो और इसमें तो बहुत ही समय लगेगा “
“हा बिल्कुल लगेगा ,पर मैंने धनुष के अंदर एक बात देखी है ,वो राजनीति और समाजसेवा के लिए ही बना है ,मैं चाहता हु की ये अपनी साख ना केवल इस कॉलेज और इस क्षेत्र में बल्कि पूरे प्रदेश में फैलाये और किसी भी पार्टी से जुड़कर नही ,खुद का एक संगठन बनाकर जो की अभी तो राजनीति में सक्रिय नही होगा ,पर जब होगा तो पूरे दम के साथ होगा….अभी अपने संगठन में अच्छे और कर्मठ लोगो को जोड़ता जाय ,जो की काबिल भी है और परिवारवाद और गंदी राजनीति के कारण काबिल होकर भी कुछ नही कर पा रहे है ,दुसरो को मौका देकर ही आगे बढ़ा जा सकता है ,और ये हमारी पहली पहल थी…
अपने अभी इस चुनाव में देख ही लिया होगा की हमारे ही पैसे से नेता और मंत्री बने लोग भी मुसीबत में हमसे मुह मोड़ लेते है तो क्यो न इन लोगो को भी राजनिति से साफ कर दे और ऐसे लोगो को सत्ता में बैठाए जो की हमारे लिए और जनता के लिए काम करे ,……………”
उसकी बात से सभी थोड़े सोच में पड़ गए फिर महेंद्र उठाकर उसको गले से लगा लेता है …………

इधर
घने जंगल में एक छोटी सी पहाड़ी के नीचे एक पत्थर में बैठा वो शख्स अभिषेक को दखते ही उसपर बरस पड़ा…
“क्या सोचा था मैंने की तू दोनो परिवार को हराकर उनकी इज्जत को मिट्टी में मिला देगा लेकिन तू साले दोगला निकल लड़की और सत्ता के लालच में तूने मुझे धोखा दिया …”
वो शख्स बंदूक की नोक अभिषेक के माथे पर टिका देता है,
“अगर धोखा ही देना होता तो तुम्हारे पास क्यो आता “
अभिषेक की बात सुनकर वो थोड़ा सा शांत होता है….
“चुनाव जीतकर भी क्या हो जाता ,लेकिन सोचो अगर अजय की लाडली मेरी हो जाय तो क्या होगा…ऐसे भी मैं उसे पाना चाहता था,मेरा काम भी हो जाएगा और उसके जरिये तुम्हारा काम भी हो जाएगा ,और मेरे नाम वापस लेने से निधि के ऊपर मेरा सॉलिड सा इम्प्रेशन पड़ा है ,जो लड़की मुझे बिल्कुल भी भाव नही दे रही थी अब वो अजय से मेरी सिफारिस करती है ,तुझे क्या लगता है की अब भी मैं उसे नही पटा पहुँगा ,”
“हम्म्म्म पटा उसे और जितना चाहता है चोद उसे ,मैं चाहता भी यही हु की उसके घर की सभी लड़कीयो को मैं रंडी बना कर रख दु”
उसके आंखों में खून सा उतर गया था,
“चोदने के अलावा भी आता है तुम्हे कुछ ….इससे तो मैं उसकी पुरी की पूरी जायजाद भी हड़प सकता हु….”अभिषेक ने एक शैतानी हँसी हँसी …और उस शख्स के चहरे पर भी एक मुस्कान खिल गयी…….

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