जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -44

hindi sex stories अध्याय 44
शहर का एक आलीशान बार जो तिवारियो का था ,एक पर्सनल कमरे में एक सोफे पर महेंद्र बैठा था,पास ही बजरंगी भी बैठा था,तभी कमरे में अजय विजय और कलवा आते है,सभी को देखकर महेंद्र खड़ा हो जाता है और सभी से गले मिलता है,
सभी बैठकर बातें करने लगते है महेंद्र बहुत ही परेशान सा दिख रहा था वो पूरी बात अजय को बताता जाता है जिसे सुनकर विजय का खून तो खोलता है पर अजय बड़े ही ध्यान से सुन रहा है……
महेंद्र अपनी बात का अंत करता है …….
“मैं सभी सह सकता हु लेकिन उन्हेंने जो मेरी बेटियों (निधि और सुमन)के साथ किया वो ,हिम्मत कैसे हो गयी उनकी उनसे ऐसे बात करने की,और ये साला इंस्पेक्टर भी उन्हें अरेस्ट करने को तैयार ही नही,सभी मंत्री साले मुह फेर कर बैठ गए,क्या हो गया है हमारी इज्जत का सभी कहते ही की वो अपना हाथ नही फसा सकते अरे साले हमारा दिया ही तो खा रहे है और अब ….”ये कहते हुए महेंद्र अपना पूरा पैक एक सांस में खत्म कर देता है…..तभी एक वेटर आकर पेग बनाने लगता है ,कलवा और अजय मना कर देते है पर विजय ललचाई निगाह से उसे देखता है पर अजय के पास होने से वो भी मना कर देता है जिसे महेंद्र देख लेता है उसके चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ….वो कोल्ड्रिंक मांगता है और विजय के कोल्ड्रिंक में चुपके से दो बड़े पेग मिला कर उसे पीने का इशारा करता है ,विजय के चहरे पर चमक आ जाती है ,अजय भी उसे शराब मिलते देखता है पर कुछ नही कहता…अजय बोलना शुरू करता है ……..

“मामाजी अब ये हमारी इज्जत पर बात आ गई है,और ये लड़का (अभिषेक)बहुत ही चालक है इसे दिमाग से ही हराया जा सकता है ताकत से नही,कोई भी नेता अपना हाथ सीधे इस मामले में नही डालेगा उन्हें भी तो वहां से वोट चाहिए.,आप फिक्र मत करो मैं देख लूंगा,धनुष चुनाव भी जीतेगा और हमारे सभी विरोधी जमीन में भी मिल जाएंगे.लेकिन मार से नही प्यार से,आप कुछ भी नही करेंगे अब से पूरा मामला मैं देखूंगा….”
एक शांति सी वहां पर छा गयी ,कलवा और बजरंगी वीर को याद करने लगे कैसे वो बड़े से बड़े मसलो पर बड़े ही शांत ढंग से सोचता था,अजय पर वीर की छाप साफ दिखती थी…….
“सबसे पहले हमे इस इंस्पेक्टर का ट्रांसफर किसी ऐसे जगह करवाना होगा की सभी को समझ आ जाय की हमारे खिलाफ जाने से क्या होता है….पर सीधे नही इसका कोई पुराना मामला निकलना पड़ेगा,फिर हमे धनुष का एक संगठन बनाना पड़ेगा जो बहुत मजबूत हो और जिसमे सभी तरह के लोग हो ,ताकि हमे सबकी सहानुभूति मिल सके,गरीब पिछडो को साथ लेना होगा,जो आपके और हमारे घरों में खेतो में मजदूरी करते है उनके बच्चों को आगे लाकर उन्हें भी दूसरे पदों में खड़ा करना होगा…फिर रही सेठो की बात तो उनकी लाइफ लाइन उनका धंधा है,उन्हें तोडना है तो उनके सभी धंधों पर चोट करना होगा,अगर तिवारी और ठाकुर अपना धंधा मिला ले और बांट ले तो हमारे सामने वो कुछ भी नही है,हर समान हम उनसे सस्ते में खरीदेंगे और सस्ते में ही बेचेंगे,उनके माल की कमी बाजार में कर देंगे उन्हें माल ही नही मिल पायेगा,फिर देखते है साले कैसे नही आते हमारे पास…

आपकी नदी के किनारे जो बगीचे की जमीन है वहां से आने जाने वाली सभी गाड़ियों रो रोककर उनसे पैसे लो,आपकी जमीन से गाड़ी निकल रहे है तो आपका पैसा लेना भी जायज है और इससे उनकी लागत भी बढ़ जाएगी,लेकिन सभी सेठो से दुश्मनी नही की जा सकती कुछ को अपनी तरफ भी मिलना पड़ेगा,जो हमारे पुराने वफादार है और जो अभी चुप बैठे हुए ही उन्हें अपनी तरफ मिला लेते है ,कम से कम वो दुसरो को बस भड़का दे तो उनकी ताकत कम हो जाएगी,20 % भी हमारे तरफ आ गए तो पूरा मार्केट हम अपनी तरफ खिंच लेंगे,रही कॉलेज की बात तो जो लड़के अभी तक नही पड़ पा रहे थे उन्हें ये बताओ की ये कॉलेज ही हमने यहां खुलवाया है ,धनुष को हर बच्चे से अच्छे से बात करने को कहो,निधि और सुमन अब लड़कियों को मिलने का काम करेंगी………जब बड़े घर के बच्चे गरीबो से प्यार से बात भी कर दे तो वो उनके गुलाम हो जाते है ,प्यार की ताकत बहुत होती है मामाजी,और प्यार बस दिखावे का ना हो वो सचमे उनकी समस्या सुने और समझे तो कुछ ही दिन में सब हमारे ही हो जाएंगे ,और रही उन लड़को की बात जो मेरी बहनों को सुना कर गए तो उनका कुछ भी करने की अभी जरूरत नही है उनमे से कई खुद ही आकर उनसे माफी मांगेंगे..बाकियों को इंस्पेक्टर ठाकुर सम्हाल लेगा…(सभी उसे देखते है) हा हालात को देखते हुए उसकी पोस्टिंग यहां करनी होगी वो हमारा भरोसेमंद आदमी है ,अगर कुछ मार पिट की नोबत आती है तो सब कुछ आराम से निपटा लेगा……….बस जीत हमारी ही होगी और लोग भी हमे पहले से ज्यादा प्यार और इज्जत देंगे,ये महज एक चुनाव नही है ये हमारे वजूद को और भी पुख्ता करने का समय है…………..”
सभी अजय को ध्यान से अपलक देख रहे थे उसका दिमाग पूरी प्लानिंग करके आया था,सभी उसकी बात से सहमत थे…………..

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