जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -38

chodan अध्याय 38
अजय की नींद निधि के हिलाने से खुली,अभी सुबह नही हुई थी पर निधि की कसमसाहट से अजय के लिंग जो की अब भी निधि के योनि में फसा था,कुछ गुदगुदी दी हुई,दोनो की नींद टूट चुकी थी ,दोनो ने एक दूजे को देखा,क्या सुबह थी वो,…
ये नया अहसास था दोनो के ही लिए.
अजय ने बड़े ही प्यार से उसके बालो को सहलाया तो निधि भी शर्माकर उसके बाजुओ में खुद को समेट ली……..

अजय ने अपने लिंग को हल्के से चलाया,जिसके छुवन से ही निधि की योनि ने पानी जैसा चिपचिपा से रस छोड़ दिया,और अजय के लिंग को अपने अंदर पूरा आने को सहायक हो गया,अजय का लिंग भी ऐसे फूला जैसे अब गुब्बारे में हवा भर दी गयी हो और अब बस वो फूटने वाला ही हो…अजय अपने आप ही अपने कमर को आगे पीछे करने लगा था,हल्के हल्के धक्कों से दोनो ही प्यार के असीम दरिया में गोते लगाने लगे…
जन्नत का मजा उनके लिये खुल चुका था और वो वहां से बाहर ही नही आना चाहते थे…
दोनो के अंगों की चमड़ी के मिलान से इतना मजा भी हो सकता है ये तो शायद उन्हें भी नही पता था,पर जो हो रहा था उससे उनका इनकार भी नही था,वो बस अपने आंखों को बन्द किये इस मजे को अपने अंदर जितना हो सके उतना इकट्ठा कर रखना चहते थे,
दोनो की सांसे अब फूलने लगी थी ,लेकिन अजय ने हार नही मानी उनसे धक्के थोड़े तेज कर दिए,निधि को सहन मुश्किल हो गया था,उसकी आहों से कमरा गूंज रहा था,

“aaaahhh aahhh bhaaaa ईईईईई yaaaaa “
उसकी चीख से पूरा कमरा गूंज गया,निधि ने एक तेज धार छोड़ी और अजय के नीचे दबे हुए उसके तेज धक्कों को सहती हुई निढाल हो गयी,,अजय ने जब निधि को देखा तो उसकी आंखों में आंसू था,
अजय घबरा गया वो तो अपनी नाजुक सी बहन को कोई भी तकलीफ नही दे सकता था फिर कैसे वो उसे इस तरह से दर्द में तड़फता देख सकता था,वो तुरंत रुक गया…..

“क्या हुआ जान ,मेरी बहन दर्द हुआ क्या”
अजय के इस प्यार को देखकर निधि के होठो पर एक मुस्कान खिल गयी,..वो अजय के बालो को अपने उंगलियों में फसा कर उसे अपने ऊपर खिंच लिया और उसके होठो से अपने होठो को मिलाकर एक लंबा से चुम्मन दिया…
“नही भैया कोई भी दर्द नही था,इतना मजा तो मुझे जिंदगी में कभी भी नही आया ……”निधि की हालात कुछ अजीब ही थी आंखों में पानी था,योनि में पानी था ,और होठो में एक प्यारी सी मुस्कान…अजय का लिंग अब भी उसके योनि में पूरी तरह से कसा हुआ था,पर वो अब फिर से उसे चुम कर उसे अपने ऊपर लिटा कर सो गया,वो मानो झड़ना ही नही चाहता था क्योकि झड़ने का मतलब था की उसे अपनी प्यारी बहन से अलग होना पड़ता,और अजय को ये बिल्कुल भी मंजूर ना था…..
सुबह की रोशनी जब घर में फैली तो दोनो की नींद खुली देखा तो निधि वहां से जा चुकी थी ,अजय उठा उसने अपनी हालत देखी और खुद पर ही मुस्करा दिया,उसके लिंग में निधि की योनि के कुछ बाल फसे थे और चादर में खून के धब्बे,उसने ध्यान से देखा तो उसे अपने लिंग में भी एक काटा हुआ घाव से दिखाई दिया,पहले प्यार का दर्द भी मीठा होता है,अजय बस मुस्कुरा कर वहां से उठ जाता है……..