जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -37

Sex stories in hindi अध्याय 37
निधि आज अजय के कमरे में नही गयी,उसे जाने क्यो कुछ डर सा लग रहा था,डर किससे अपने ही भाई से,क्यो जिसे वो इतना प्यार करती है जो उसे इतना प्यार करता है उससे क्या डर था निधि को,
लेकिन उसका दिल आज अजय के नाम से ही जोरो से धड़कने लगता शायद वो अब बड़ी हो रही थी,शायद उसे अब लाज की खबर हो रही थी,शायद उसे अब अपने जिस्म में उस संवेदना का अहसास होने लगा था जिसे सारी दुनिया पाप कहती है,
और अजय उस दिन के वाकये के बाद से अजय अपनी प्यारी बहन के लिए प्यार से भरा हुआ था ,अब स्तिथि कुछ अलग ही हो चुकी थी ,अब निधि डर रही थी और अजय मर रहा था…
पर प्यार की आग है ,कब तक कोई दबाएगा,एक ना एक दिन तो बाहर आना ही था,
अजय बेचैनी से निधि का इंतजार कर रहा था पर वो नही आयी ,आज दूसरा दिन था जब निधि उससे दूर भाग रही थी,ये उसके जीवन में पहली बार हो रहा था,उससे आखिर रहा नही गया,वो अपने कमरे से निकालकर निधि के कमरे में जाता है,दरवाजा बंद था,वो खटखटाता है,निधि दरवाजा खोलती है और अजय को देखकर थोड़ी सहम जाती है,

एक सफेद सादे से सलवार कमीज में निधि किसी जन्नत की परी सी लग रही थी,जैसे अभी अभी आसमान से जमीन में उतरी हो,शायद अभी अभी उसने अपना चहरा धोया था,कुछ पानी की बूंदे अब भी उसके चहरे पर खेल रहे थे,अजय को देखकर उसके नयनो ने सहम कर कुछ प्यार के मोती छोड़ दिए,वो नजर गड़ाकर नीचे देखने लगी,अजय ने उसे इस स्थिति में देखा और देखता ही रह गया,क्या उसने गलती कर दी थी,क्या उसने अपनी बहन को नाराज कर दिया था,क्या हुआ था निधि को जो ऐसे कर रही है ,उसने कभी भी निधि को ऐसे उदास नही देखा था,
“क्या हुआ मेरी जान मुझसे कुछ गलती हो गयी क्या,”अजय ने अपनी निगाहों को उसके प्यारे चहरे पर गड़ाया,निधि ने अपना मासूम सा चहरा हल्के से उठाया ,उसके आंखों का आंसू अब साफ नजर आ रहा था,उसके मासूम भोला सा चहरा लाल हो चुका था ,वो एक फरियादी निगाहों से अजय को देख रही थी,
“भैया गलती तो मुझसे हुई है,”निधि से अब नही रहा गया वो दौड़ कर अजय के सिने से लग गयी,अजय उसके सर को सहलाता हुआ
“क्या कह रही हो ,तुमसे कोई गलती हो ही नही सकती “
“भैया अब मुझे पता चला की आप मुझे क्यो दूर रहने को कहते थे,मैंने भी अपने जिस्म में वो संवेदना को महसूस किया है,अब मुझे समझ आया की भाई बहन क्यो एक उम्र के बाद एक दूसरे से दूर रहते है,हा भैया आप सही थे अब मैं जवान हो चुकी हु…….”
निधि जोरो से रोने लगी थी वही अपनी प्यारी सी लाडली बहन की बातो को सुनकर अजय के दिल में एक जोर का दर्द हुआ,मेरी बहन आज ये क्या कह रही है ,जो बात मैं हमेशा ही चाहता था की वो समझ जाए वो उसे इस तरह से समझेगी उसे ये यकीन ही नही हो रहा था,
“मेरी प्यारी बहन तू मेरे लिए हमेशा ही बच्ची रहेगी मैं तुझे प्यार करना नही छोड़ सकता मेरी जान”
अजय उसे अपने से अलग करता है और उसके चहरे पर चुममनो की झड़ी लगा देता है,निधि की आंखों का गीलापन अब लालिमा लिए हो जाता है,हल्की लाल आंखों में गीलापन और मासूमियत निधि की सुंदरता को चार चांद लगा रहे थे,,
उसके नरम लाल होठो की फड़कन उसके जज़्बातों की कसमकस का बयान कर रहे थे ,अजय ने उसके होठो को अपने दांतो से हल्के से दबाया निधि की आंखों में अजय के लिए बस प्यार था ,वो उसे रोक तो नही रही थी पर अपने को उसपर छोड़ दी थी वो कुछ करना भी नही चाहती थी,

हल्के हल्के वार से निधि में एक मदहोशी ने जन्म ले लिया वो अपने आंखों को बंद कर अपने भाई को बस महसूस करना चाहती थी,
उसके वो तड़फते होठ आज अपने को समर्पित कर चुके थे,अजय के दिल में भी वासना तो नही थी पर अब कोई भी ग्लानि के भाव भी नही थे,अब तो उसे बस अपनी बहन का प्यार चाहिए था,उसने निधि के नितंबो को अपने हाथो में थमा और उसे उठा लिया,निधि किसी गुड़िया सी उसके साथ उठती गयी उसने अपने पैरो को अजय ने कमर से लपेट लिया,अजय उसे उसके बिस्तर पर ले गया और उसके ऊपर सो गया,
अजय ने उसके होठो को अब अपने होठो से भर लिया,दोनो ने अपने आप को बस एक दूजे के लिए समर्पित कर दिया था…
एक कहानी बनने को थी ,प्यार से भरी हुई एक कहानी,एक दस्ता,एक आशिकी एक फकत सी बेताबी,एक हसीन सी मदहोशी,एक करवा,एक इठलाती सी नदी की धार जैसी मोहब्बत,एक तमन्ना,एक जज़बातों का तूफान,एक थमी सी धड़कन बढ़ी सी धड़कन……..
और मोहोब्बत के आग में जलते हुए दो जिस्म जो ना रिस्तो को जानते थे और ना ही दुनिया की रश्मो को, जानते थे तो बस एक दूजे की शोहबत और एक दूजे के लिए मोहोब्बत…
अजय के होठो ने निधि के गहराइयों को नापा और निधि बेहाल सी हो गयी,आज ये पहली बार था जब निधि अपने जिस्म की आग को महसूस कर पा रही थी ,ये वही भाई था जिसने कभी उसे अपने कंधे पे खिलाया था,अपने बांहो में झुलाया था,निधि उन बीते लम्हो को याद कर रो पड़ी उसे बहुत ही गहरे में ये यकीन हो चला था की जो वो कर रहे है वो गलत है,,,,,
अजय अपनी बहन को भरपूर प्यार देना चाहता था पर किस कंडीशन में…नही क्या उसकी मर्जी के बगैर उसे प्यार करे ये नही कर सकता था,निधि के आंसुओ का मतलब क्या है,..
“क्या हुआ मेरी रानी,”
“नही भैया ये सही नही है,मेरा मन अजीब सा लग रहा है,”
प्यारी सी भोली सी मासूम सी निधि,चहरे पर आया आंसू ,अजय ने उसके गालो में बहते आंसुओ को अपने होठो से अपने अंदर ले लिया,
“तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है मेरी जान ,मैं तुझे किसी भी कीमत में दुख नही पहुचा सकता ,मुझे मेरी प्यारी बहन से प्यार है बहुत ही प्यार है,और मुझे मेरी शरारती बहन चाहिए ऐसे बड़ी बड़ी बातें करने वाली नही..”अजय ने अपने हाथो से उसके चहरे को उठाते हुए कहता है,…निधि के होठो में एक मुस्कान आ जाती है ,हा उस झरने और झोपड़े वाले रात के बाद से मानो वो बड़ी सी हो गई थी जो हमेशा कहती थी की वो अपने भाई के लिए कभी भी बड़ी नही होगी वही आज अपने उसी भाई के लिये बड़ी हो गयी……
उसने फिर से अजय को देखा ,अब उसके आंखों में वही भोलापन था जिसका अजय दीवाना था,उसने आगे बढ़कर अजय के होठो को अपने होठो से लगाया और उसे बड़े ही प्यार से चूसने लगी…
“भैया i love you ,मुझे माफ् कर दीजिये की मैं आपसे ऐसा व्यवहार कर रही थी,मैं कैसे भूल गयी थी की आप मेरे वही भाई हो जिसने मुझे अपनी जान से ज्यादा प्यार किया है”..
निधि अब अजय के सीने से लिपट गयी,उसके उन्नत उरोजों ने अजय के सीने से गडकर उसे एक असीम आनंद दिया,वो अपनी प्यारी सी बहन की जवानी के अहसास में खोया उसके बालो को अपने हाथो से सहलाने लगा,
“मुझे भी माफ कर दे बहन की मैं तुझे कभी भी समझ नही पाया”
“आपको मुझे समझने की कोई भी जरूरत नही है भइया आप बस मुझे प्यार करो “निधि के चहरे पर फिर से वही शरारती मुस्कान खिल गयी जिसका अजय इंतजार कर रहा था…

अजय के अंदर से एक प्यार का बहाव हुआ और वो निधि को जोरो से पकड़कर उसे फिर से बिस्तर पर पटक दिया,और उसके ऊपर टूट पड़ा…
अजय ने जोरो से उसके चहरे को चूमना शुरू किया ,निधि बस हंस रही थी,उसकी खिलखिलाहट से पूरा कमरा गूंजने लगा था,धीरे धीरे उसकी खिलखिलाहट कम होने लगी ,वही अजय भी अब धीरे धीरे उसके बदन पर हाथ फेरता हुआ उसके होठो तक पहुचा और उसके होठो को धीरे धीरे से खाने लगा,
निधि के रसीले होठो का रस अब अजय के होठो को मिल रहे थे,निधि की हंसी ने अब हल्की और उत्तेजना से भरी हुई सिसकियों में बदल चुकी थी,अजय उसके सलवार के ऊपर से ही उसके उठे हुए मांसल नितंबो को सहला रहा था,दोनो ही उस झोंके में बहना चाहते थे,थोड़ी झिझक अब भी दोनो के जेहन में बाकी थी पर प्यार कहा कुछ देखता है………
निधि ने एक करवट मारी और अजय को अपने नीचे ले लिया,अब अजय बस अपनी जान की हरकतों को देख रहा था,वो उसके कपड़े को निकलने लगी और उसके नग्गे सीने में फैले बालो के जंगलो को अपने होठो से चूमने लगी,अजय के शरीर में एक झुनझुनाहट सी दौड़ी,उसने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया,निधि पागल सी हो गयी थी,वो उत्तेजित हो रही थी और उसने अजय के नीचे के वस्त्रों को भी निकल फेका,उसने उसके अंतःवस्त्रों को भी निकलने में देरी नही की,अजय खुद थोड़ा सा असहज हो गया पर निधि अब कहा उसकी सुनने वाली थी,अजय बस अपनी आंखे बंद किये उसके होठो की कोमलता को अपने शरीर में महसूस कर रहा था,छाती से होते} हुए वो उसके नाभि तक पहुची फिर कमर और फिर उसके लिंग तक,अजय का लिंग फूलकर और भी भयानक लग रहा था,कोई और लड़की होती तो शायद इसे देख डर ही जाती पर निधि पर तो प्यार का भूत सवार था,उसको शरीर की बनावट नही अजय के प्यार से प्यार था,अजय का लिंग बस उसके लिए वैसे ही था जैसा की उसके शरीर के बाकी के हिस्से,अपनी बहन की निश्छलता को देख अजय को बड़ा प्यार आ रहा था,वो उसके बालो को अपने हाथो से सहला रहा था,उसकी उत्तेजना अब थोड़ी काम हो चुकी थी वो बस बिना किसी उत्तेजना के उस प्यार के नए स्वरूप को महसूस करना चाहता था जो उसे निधि दे रही थी……..
निधि उसके लिंग को अपने होठो से सहलाती है,लिंग में इससे थोड़ा झटका पड़ता है और वो उछाल पड़ता है ,जिससे निधि की हंसी छूट जाती है ,अपनी मासूम सी बहन की हंसी से अजय का दिल भी खिल उठता है,,,वो उसे बस ऐसे ही देखना चाहता था,हस्ते हुए खिलखिलाते हुए…..
अजय के पैरो तक को छुमने के बाद निधि अजय के ऊपर लेट जाती है अब बारी अजय की थी वो उसे नीचे कर उसके चहरे को देखता है,उसके शरीर और मन में अब हवस की एक रेखा भी नही थी,वो उसके बालो को प्यार से सहलाता है दोनो की नजरे मिलती है और होठ भी….

अजय धीरे धीरे उसके होठो को चूमता जाता है,उस रसीले होठो का ऐसा चुम्मन जो दोनो की सांसे भरने पर ही खत्म होता है,निधि के कोमल उरोजों की चोटी अजय का धयन अपनी ओर खिंचती है और वो उसे हल्के से मसलने लगता है,
“भाई aahhhhh…….love you “
अजय के हाथ पीछे जाकर उसके कमीज की चैन खोलते है और धीरे से उसे उसके जिस्म से निकल अलग करते है,जैसा की अजय को पता था की उसने अंदर कुछ भी नही पहना था,अजय को हसी आ जाती है और निधि उसे देख थोड़ी सी शर्माती है और उसे अपने ओर खिंचती है,दोनो के नग्गे जिस्म की गर्मी ने दोनो के प्यार की आग को हवा दे दी,अजय उसके होठो को चूमते हुए अपने शरीर को जब भी हिलाता था,निधि के विसाल स्तन उसके बालो से रगड़ खाते और एक सनसनी सी दोनो के शरीर में फैल जाती,
अजय के लिंग ने फिर से आकर ले लिया और वो उसे निधि के जांघो के बीच की गहरी खाई में रगड़ने लगा,निधि के मादक आवाजे कमरे में फैलने लगी थी,पर दोनो अब भी हवस और प्यार की उस सिमा के बंधन में थे,जो भाई बहन के रिस्ते की मर्यादा थी…अब ना अजय और ना ही निधि इस मर्यादा के बंधन में बांध कर रहना चाहते थे,निधि ने ही पहल की और अपने सलवार का नाडा खोल सलवार भी निकल फेका..
दोनो नग्गे जिस्म फिर से एक हो गए दोनो एक दूसरे को भरपूर प्यार देना चाहते थे ,पर दोनो अपनी मजबूरी पर रो पड़ते की वो उतना प्यार ही नही कर पा रहे थे जिससे दोनो की प्यास बुझ जाय,अब बस एक ही तरीका था,….
दोनो ही सेक्स की दुनिया में अनाड़ी थे,पर अजय के लिंग की दस्तक से निधि की योनि में कामरस का बहाव होने लगा था ,उत्तेजना चरम पर थी पर आगे क्या करना है किसी को भी नही पता था,आखिरकार दोनो ही हार गए,
“मुझे माफ कर दे बहन मुझे कुछ भी नही आता”अजय लगभग रोते हुए कहा
“हा जैसे मैं तो मास्टर हु ना”निधि भी रो रही थी उसने बड़ी ही मासूमियत से कहा.
“तो क्या करे,मुझे तुझे प्यार करना है ,और करना ही है,बहुत करना है जान”
अजय उसके होठो पर फिर से टूट पड़ा,दोनो की आंखों में आंसू उस बेचैनी के थे की वो एक दूजे को टूटकर प्यार नही कर पा रहे थे,दोनो फिर से अपने होठो को मिलाप को बेहद ही उत्तेजित लेवल में ले गए और अजय ने धीरे से अपने कमर को आगे खिसकाया ,कामरस से भीगी हुई निधि की योनि का सुराख इतना नही था की वो अजय के इस विशाल से लिंग को अपने अंदर ले ले,नतीजा यही हुआ की लिंग फिसल कर उसके बाजुओ पर जा टकराया,अजय फिर से रो पड़ा,निधि ने उसके गालो को सहलाया और अपना हाथ नीचे ले जाकर उस छेद को ढूंढा जो शायद उम्र के इस पड़ाव में भी बेहद उपेछित सी थी,उसने अजय के लिंग को पकड़कर उस छेद पर रगड़ा,अजय ने सही समय में अपनी काबिलियत दिखाई और धीरे से कमर पर जोर दिया ,उस छेद ने भी अपना गुणधर्म दिखाते हुए लिंग को अपने अंदर आने की इजाजत दे दी पर बिल्कुल ही अनछुई सी योनि के फैलाव के निधि को दर्द की लहर सी महसूस हुई ,अजय को मार्ग तो मिल गया था पर सफर अब भी बाकी था…
“आआआआहहहहहहह भईया “निधि की हल्की चीख ने अजय को रुकने पर मजबूर कर दिया ,अजय का लिंग भी पहली बार इस अजीब से अहसास को महसूस कर रहा था,उसकी चमड़ी ने पहली बार अपना स्थान छोड़ा था और उसे भी एक दर्द ने घेर लिया था,
दोनो एक दूसरे के आंखों में झांके दोनो के चहरे पर एक मुस्कान फैल गयी,

“भइया मैं अब पूरी तरह से आपकी हुई’
निधि के दिल की गहराइयों से निकली ये बात अजय के दिल की गहराइयों तक पहुची और दोनो के होठ फिर से मिल गए ,फिर से उत्तेजना ने अपना काम किया और इसबार बिना किसी मेहनत के अजय धीरे धीरे ही अपनी कमर को हिलाने लगा,दोनों को ही पता था की वो क्या कर रहे है पर बस कर रहे थे…
अजय का लिंग धीरे धीरे निधि की योनि में अपनी जगह बनाता गया काम रास ने अपना काम बखूबी किया था,वो लिंग को पूरी तरह से भिगो चुका था,और उत्तेजन ने दोनो को दर्द सहने की असीम शक्ति दे दी थी,लिंग अब पूरी तरह से निधि के योनि की सैर कर रहा था,बिना किसी रोकटोक के बिना किसी बाधा के…….दोनो ही प्रेम के पंछी अपने जज़बातों का बयान अपना प्यार एक दूसरे पर लूटा कर कर रहे थे,होठ अब भी अलग नही हुए थे ना ही कोई भी संभावना थी..एक शांति सी दोनो के जेहन में थी क्योकि एक असमंजस की एक भावनाओ की,दीवार टूटी थी…अब दोनो के बीच कोई भी दीवार नही रह गयी,प्यार बेपर्दा हो चुका था,और दोनो जिस्म ,दोनो मन एक हो चुकी थी…..
कमरे में और दोनो के मानो में फैली शांति ने उनकी कामुक उत्तेजना को समाप्त कर दिया था,रह गयी थी तो बस एक प्यार की लहर……
निधि के कामरस से गीले अजय के लिंग ने अब अंदर बाहर करना बंद कर दिया था,वो उसी गर्म गुफा में आराम कर रहा था ,और निधि अजय से लिपटी हुई बस अजय के शरीर से मिलने वाले प्यार महसूस कर रही थी दोनो बस इसी गहराई में दुबे रहे जब तक की उनकी आंखे नही लग गयी……….