जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -36

chodan अध्याय 36
किशन अपनी प्रेमिका के गले में हाथ डाले अपनी ही दुनिया में मगन अपने कमरे में बैठा था ,सुमन और किशन दोनो के बीच का प्यार अपने परवाने चढ़ने लगा था ,दोनो एक दूजे के हमेशा पास रहना चाहते थे ,किशन उसके गालो को चूमता है ,
“क्यो अब तो तुम ये नही कहोगी न की मैं कहा इतना अमिर और तुम एक गरीब की बेटी “किशन सुमन को थोड़ा और कस लेता है ,
“आप ऐसे क्यो कह रहे हो ,मैं तो आपसे तब भी उतना ही प्यार करती थी जितना आज करती हु,आप चाहे कुछ भी रहो आप मेरे पति हो “सुमन एक मुस्कान के साथ कहती है और उसके गालो को चुम लेती है ,किशन के चहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है ,
“अच्छा जी तो अपने पति को बस किस से मनाना चाहती हो ,मुझे तो और भी बहुत कुछ चाहिए “किशन उसे थोड़ा और जकड़ता है और सुमन हँसते हुए उसे अलग होने के लिए जोर लगती और उससे छूट जाती है ,

“मैन आपको पहले भी कहा था ना की शादी से पहले कुछ भी नही ,तो……और आप मेरे पति है लेकिन अभी आधे है जब शादी हो जाए तो पूरे होंगे ,”सुमन एक मस्तीभरी अदा से कह जाती है और किशन का चहरा थोड़ा मायूस से हो जाता है पर उसके चहरे की मुस्कान कम नही होती ,वो फिर से अपनी बांहे फैला देता है ,सुमन ना में सर हिलती है ,किशन उसे इशारे से प्लीज् कहता है ,सुमन अपने होठो पर एक हल्की सी मुस्कान लिए उसके पास आती है और उसके सीने में सर रखकर खुद को छोड़ देती है ,,,,किशन उसके बालो को सहलाता रहता है ,उसके घने बालो में वो अपनी उंगलिया फिरता है और उसके प्यारे चहरे को धयान से देखता है ,इतनी मासूमियत थी उसके इस चहरे में पर फिर भी कितनी दृढ़ता ,एक ओज का प्रवाह था जो बहुत ही शीतल था पर इस बात को भी प्रामाणिक करता था की वो कितनी मजबूत है …………
दोनो ने अपने होठो को एक दूजे के पास लाया दो काँपते हुए होठ बस मिलने ही वाले थे की एक जोरदार आवाज ने उन्हें हिला दिया..
“किशन “ किशन और सुमन दोनो ही चौककर और घबराकर उस शख्स की और देखने लगे ,चम्पा जैसे बुखार से कॉप रही हो ,आंखे लाल और चहरा गुस्से से तमतमाया हुआ,काँपते होठो से उसके शब्द तो निकल चुके थे पर वो कपन अब भी जारी थी,दोनो ही डर गए थे ……
“ये क्या कर रहा है “चम्पा की आवाज पहले से कम पर फिर भी जोर से थी,
“मा वो वो …”किशन अपनी जगह से उठता है

“खबरदार किशन अगर मैंने आज के बाद फिर से तुम्हे इस लड़की के साथ देखा तो ,ये लड़की निकल जा यहा से और आईन्दा मेरे बेटे के पास भी मत आना …”किशन और सुमन दोनो ही भौचक्के से चम्पा को देख रहे थे और उसके बोले हुए एक एक शब्द को समझने की कोसिस कर रहे थे,दोनो को जब यह समझ आया की उन्हें क्या कहा गया है तक देर हो चुकी थी चम्पा सुमन का हाथ पकड़कर उसे कमरे से बाहर निकल देती है और किशन की और पलटकर
“अगर तूने आज के बाद फिर से इस लड़की से संबध रखने की कोशिस की तो तू मेरा मरा मुह देखेगा”
ये बात दोनो ने ही सुनी थी सुमन रोती हुई अपने कमरे की तरफ भागी वही किशन बस अपनी मा को देखता रहा जो अभी तक इस रिस्ते से खुस थी अचानक उसे क्या हो गया था……

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