जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -31

chodan अध्याय 31
बारिस बढ़ने लगी थी और जगल का माहोल और भी शांत हो रहा था ,निधि और अजय अपने खयालो की दुनिया से बाहर आये और झोपड़ी के तरफ भागे ,आज इनके बीच कुछ ऐसा हो चूका था की दोनों ही बड़े गुमसुम से थे ,पर कब तक दोनों के बीच का प्यार तो खत्म नही हुआ था ,निधि को ये खामोशी बर्दास्त नहीं हो रही थी ,
“भईया मुझे उठाकर ले चलो “निधि ने अपने स्वाभाविक से लहजे में कहा ,अजय ने उसकी आँखों में फिर से वही मासूमियत देखि अजय मुस्कुराता हुआ उसे अपने बांहों में उठा लिया ,निधि के लिए अजय की मुस्कान ही बड़ी चीज थी ,वो अपने बांहों का हार अजय के गले में डाले हुए अपने शारीर का भार उसके ऊपर डाल दि ……
“भईया आई लव यु “निधि ने उसके सीने में अपने को छुपाते हुए कहा
“लव यु टू मेरी रानी “अजय ने उसके माथे को एक किस कर लिया

दोनों की बारिस में पूरी तरह से भींग चुके थे ,झोपड़े में पहुच कर अजय ने टार्च जलाया और वही पड़े हुए अपने शर्ट से निधि को फिर खुद को पोछा ,दिक्कत ये थी की अब दोनों को ही अपने कपडे उतरने थे क्योकि दोनों ही पूरी तरह से भींग चुके थे ,बहार बारिश जोरो पर थी और वो घास का झोपड़ा पानी से भीगा हुआ एक मादक गंध छोड़ रहा था ,ये वही अनुभव कर सकता है जिसे कभी ऐसे जगहों पर बरसात में रहने का अवसर मिला हो ,बेहद मादक और मस्त कर देने वाली गंध होती है और एक हलकी गर्मी झोपड़े में थी ,अजय पहले लालटेन जलाता है और टार्च बंद कर निधि को देखता है वो अपने कपडे उतर रही थी ,अजय घबरा सा जाता है क्योकि दरवाजा अभी भी खुला हुआ ही था ,वो जल्दी से दरवजा बंद करता है और लालटेन की रोडनी को बहुत ही धीमा कर देता है ,उस दुधिया से प्रकास में निधि का अंग अंग खिल कर दिख रहा था अजय सांसे रोके उसे देख रहा था ,,,,जिस शर्रीर को अजय ने पाल पोस कर इतना बड़ा किया था ,जिस जिस्म को अजय उसके बचपन से देख रहा था वही शारीर आज अचानक उसके अंदर वासना की लहरे पैदा कर देगा उसने सोचा ही नहीं था……….
अजय को यु घूरता देख निधि भी शर्मा गयी ..वो लड़की जो कभी भी अपने भाई से नहीं शर्माती थी आज उसके सामने शरमा रही थी और वो भाई जो कभी भी अपने बहन के बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोच सकता था आज उसे नग्न देखकर उसका लिंग तनाव से भरने लगा था …अजय ने जल्दी से बिस्तर को बिछाया ,बिस्तर के नाम पर एक चटाई थी एक घास एक बना हुआ गद्दा और एक उसपर बिछाने के लिए कपडा ,एक झीना और पतला सा कपडा ओढ़ने को था .अजय ने जल्दी से सभी को जमाया और निधि जल्दी से उसके अंदर घुस कर वो पतली सी चादर ओढ़ ली ,अजय खुद अपने कपडे उतरने में शर्मा रहा था वजह था उसका अकड़ा हुआ लिंग ….वो अपने जींस को पहने हुए वही बैठ गया एक झरोखा भी उस झोपड़े में था जिससे बाहर की मनोहर प्रकाश किरणे अंदर आ रही थी ,और साथ ही ठन्डे ठन्डे हवा के झोके भी जो आकर दोनों को सिहरन से भर देते थे ….निधि को ठण्ड लगने लगी जो भी उसने ओढा था वो उसके ठण्ड को भगाने को काफी नहीं था ,

“भईया आओ ना ठण्ड लग रही है ,”अजय के मन में एक अजीब सी असमंजस थी ,ये क्यों था उसका लिंग का तनाव यु क्यों था ,की वो अपनी बहन को ठण्ड में यु सिहरता हुआ छोड़ कर बैठा है ,क्या हुआ है उसे ,वो इतना स्वार्थी कैसे बन गया है ,क्यों बन गया है ,वो अपनी बहन से प्यार क्यों नहीं कर पा रहा है ,ये लिंग उसे प्यार करने क्यों नहीं दे रही है ,ये क्यों इतनी उत्तेजित सा हो रहा ही ,अजय सर गडाए हुए सोच रहा था की निधि के दांतों के कडकडने की आवाजे अजय के कानो में पड़ी ,अजय का दिल दहल गया उसकी बहन को उसकी जरुरत थी और वो यु ,….अजय के आँखों में आंसू आ गए थे वो उठा और अपने शारीर से पुरे वस्त्र निकल फेका और लालटेन को बुझा दिया ,लालटेन के बुझाते हु कमरे में अँधेरा हो गया पर कहते है ना अँधेरा कितना भी घना क्यों ना हो एक प्रकाश की किरण के सामने कुछ भी नहीं है …..उस छोटे से झरोखे से चाँद की निर्मल रोशनी कमरे में आ रही थी और सोने पर उस झरोखे से चाँद के दर्शन भी हो रहे थे ,बदलो में छिपा हुआ चाँद कभी कभी प्रगट हो जाता कभी चिप जाता ,और बहार की तेज बारिस की फुहारे कभी कभी हवा के झोको के साथ होते हुए कमरे में आ जाते थे ,जो इस ठण्ड में हलकी सी और सिहरन पैदा कर देते ….कमरा पूरी तरह से दिख रहा था ,इतना प्रकाश तो था ,पर इतना भी नहीं था की सब स्पष्ट दिखाई दे ,

अजय आकर निधि से लिपट गया निधि के कसकर उसे जकड लिया ,उसके वक्ष हलके से गिले ही थे और ठण्ड के कारन उसके रोंगटे खड़े हुए थे ,अजय और निधि ने अपने अपने शारीर की गर्मी एक दुसरे से साझा की और दोनों को ही उस स्पर्श से एक सुखद अनुभूति हुई …इस सुखद अनुभूति से दोनों और भी पिघल गए और एक दुसरे के और पास आ गए ,निधि ने अपने एक पैर को अजय के कमर के ऊपर से उसे घेर लिया ,जिससे अजय का तना हुआ लिंग सीधे ही निधि के योनी की दीवारों पर रगडा गया ,अजय और निधि दोनों के ही मुह से एक हलकी सी आह निकली ,जहा अजय इससे थोडा घबरा गया वही निधि के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी ,अजय अपने लिंग को पकड़कर तिरछा करता है और निधि अपने कमर को और भी सटा देती है जिससे अजय का लिंग उसकी जन्घो में रगड़ खा जाता है ,फिर से दोनों की एक मादक आह निकल आती है ,अजय का लिंग इस छुवन से और भी अकड़ सा जाता है और झटके मरने लगता है ,निधि की आँखे उस अहसास से हलके से बंद हो रही थी वही अजय की आँखों में आंसू आने लगे ,वो चाहकर भी इसे कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था ,ये गलत था उसका दिल चीख चीख कर यही कह रहा था…गलत गलत होता है ,ये तेरी बहन है जिसे तू जिंदगी में अपने आप से भी जादा प्यार किया ,अब क्या हुआ सिर्फ जिस्म की आग ने तुझे इतना अँधा बना दिया की तू अपने बहन से अपनी जान से …..ऐसी हरकत अजय के आँखों का पानी छलकने लगा था वो सिसकिय ले रहा था ,उसके मन में उठी हुई इस हलचल का असर उसके लिंग में भी पड़ने लगा वो हलके हलके मुरझाने लगा ,निधि आखे खोले अपने भाई को देख रही थी ,उसके आँखों से गिरते हुए आंसू को देख रही थी वो अपने भाई की दुविधा को पहचान पा रही थी इसका साबुत था उसका कुछ भी ना कहना और उसके आँखों से बहाने वाले वो अनमोल आंसू की बुँदे ………कुछ देर तक अजय अपने ही खयालो में रहा जब वो आँखे उठा कर निधि को देखा तो निधि को भी उसने रोता हुआ पाया,
“क्या हुआ मेरी रानी “अजय ने अपने हाथो से निधि के चहरे को मलते हुए कहा ,
“भाई आपका प्यार कभी भी मेरे लिए गलत नहीं हो सकता ,कोई भी फुल की खुशबू कभी माली के लिए गलत नहीं होती,माली ही तो होता है जिसने बागो को सीचा है ,अब अगर वो थोड़ी खुसबू ले भी ले तो क्या ये गलत है ,भईया मेरा ये जिस्म एक फुल है और इसकी सुगंध बस आपके लिए है ,क्योकि आप ही इसके माली हो …….”
निधि की समझदारी भरी बाते सुनकर अजय के चहरे में एक मुस्कान सी आ गयी ,उसने अपनी प्यारी सी गुडिया को अपने पास खीचा ,उसके स्तनों को अपने चौड़े और मजबूत सीने से सटाया ,

“मेरी गुडिया इतने समझदारी भरी बाते कर रही है ,तू फुल है मेरी जान और मैं इसे हमेशा ही सम्हाल कर रखूँगा ,इसे गन्दा नहीं होने दूंगा ”
“आपका प्यार मुझे मिलेगा तो मैं और खिल जाउंगी भाई ,गंदगी सोच में होती है किसी काम में नहीं “निधि की आँखे अब भी भरी थी वो अपने भाई को कसकर पकड़ी थी दोनों नग्गे जवान जिस्म एक दूजे में सामने को तैयार थे पर ये तो बस प्यार में ही हो सकता है की कोई भी उत्तेजना उनमे नहीं थी था तो बस एक अनोखा सा प्यार ,……….
दोनों बड़े ही देर तक यु ही एक दुसरे से लिपटे रहे धीरे धीरे दोनों के जिस्म की ठंडक कम होने लगी पर मौसम की ठंडक ने दोनों को अलग होने नहीं दिया ,जब जस्बातो की आंधी थोड़ी कम हुई तो अजय उठकर बहार देखता है रात घनी हो चुकी थी ,बारिस अब भी अपने सबाब पर था चाँद गाने बदलो में कही छिप सा गया था ,पूर्णिमा की ये रात घोर अमावास सी लग रही थी ,निधि भी उठकर उस झरोखे से बहार देखती है और फिर दरवाजा खोलकर बहार निकल पड़ती है ,अजय उसे ऐसा करते देख घबरा जाता है ,वो उसके पीछे भागता है निधि दौड़ते हुए बारिश में भीगते हुए झरने की तरफ जाने लगती है ,कैसी पागल लड़की है ,जिस्म में कोई भी कपडा नहीं तेज बारिश ,सुनसान सन्नाटे से भरा हुआ माहोल ,घनी रात जो अब अंधियारी भी हो चुकी है और ये है की ऐसे ही निकल भागी ,
अजय जाते जाते टार्च और एक निधि के कपड़ो को साथ रख लेता है वो जब निधि के पास पहुचता है निधि एक चट्टान पर लेटे हुए थी ,चाँद फिर से कुछ किरणे बिखेरता है ,दुधिया रोशनी में निधि का दुधिया जिस्म चमक रहा था ,अजय उसके पास जाता है निधि उसे पकड़ कर अपने ऊपर खीच लेती है ,और उसके होठो में अपने होठो को लगा उसकी गहराई में गोते लगाने लगती है ,….अजय फिर से उत्तेजित होने लगाया है उसका लिंग फिर से पुरे आकर में आने लगता है और निधि के जन्घो के बीच दस्तक देने लगता है ,निधि उसे अपने ऊपर खीच कर सुला लेती है दोनों ही जिस्म एक दूजे में लिपट रहे थे ,कभी निधि ऊपर तो कभी अजय निधि अजय के लिंग को पकड़ अपने योनी की दीवारों में रगडती है ,अजय को इसका भान होते ही उसे एक झटका लगता है और वो उठाकर खड़ा हो जाता है ,वो बड़ी बड़ी आँखों से निधि को देखे जा रहा था ,,,,,निधि की आँखे थोड़ी नशे में थी वो अधखुली ही थी वो बड़े ही आग्रह और प्रेम से अजय को देख रही थी जैसे कह रही है छोड़ भी दो ये दुनिया दारी की बाते और आजाओ मुझे अपना बनाने …लेकिन अजय ……….अजय के हाथ पाँव काप रहे थे वो अपने प्यार से अलग नहीं होना चाहता था पर कुछ मरियादा की लकीरे थी जो उसे अपने प्यार से अलग किये हुए थी ,वो उठाकर सीधे झोपड़े की ओर चला जाता है ..
झोपड़े में जाकर वो खुदको पोछता है और कपड़ो को फिर से निचोड़ कर सुखा देता है ,वो दरवाजे से झाकता है निधि अब भी दरवाजे के बहार कड़ी थी ,बाल बिखरे हुए थे पुरे नग्न शारीर से पानी की धारे बह रहे थे वो दरवाजे के बहार ही थी पर झोपड़े में नहीं आ रही थी ,अजय उसे धयान से देखता है पुरे गिले शारीर में उसकी आंखो का पानी साफ़ दिखाई पड़ रहा था ,अजय के आँखों में भी पानी था और निधि की आँखों में भी ,,,निधि तैयार थी लेकिन अजय नहीं अजय चाहता था की ये रात कैसे भी खत्म हो जाय और निधि चाहती थी की ये रात कभी भी खत्म मत हो ……………………..

अजय आज पहली बार निधि के प्रति ऐसे व्यवहार कर रहा था ,की निधि बहार खड़ी भीग रही हो और अजय उसे अंदर भी ना बुलाय ,,….निधि के आंसू बाहरी नहीं थे वो उसके जेहन के किसी कोने से आ रहे थे ,वो अपने भाई को अपने सबकुछ को आज ऐसे उससे मुह मोड़ते देख रही थी …….अजय से रहा नहीं गया वो बहार जाता है निधि को उठाने की कोसिस करता है निधि ने उसका हाथ झटक दिया उसके चहरे पर एक दुःख साफ़ दिख रहा था दुःख था अपने भाई के मुह मोड़ लेने का दुःख उसकी अवमानना का दुःख …
निधि हाथ छुड़ाती है पर अजय फिर से उसका हाथ पकड़ने की कोसिस करता है वो बस उसे अंदर लाना चाहता था ,निधि फिर हाथ छुड़ा लेती है ,अब अजय से सहन नहीं हुआ वो अपनी प्यारी फुल सी बहन पर अपने बल का प्रयोग नहीं करना चाहता था पर उसे थोड़ी जबरदस्ती करनी पड़ी वो उसे जबरदस्ती उठाने की कोसिस करने लगा पर निधि ने चिल्लाते हुए उसे अलग कर दिया अजय डर के उसे छोड़ दिया ……दोनों एक दुसरे के आमने सामने बिलकुल ही नग्गे खड़े थे ,जोरदार होने वाली बारिस दोनों को भीगा रही थी वो दोनों बस एक दूजे के चहरे को देख रहे थे ,निधि के चहरे में अब दुःख की जगह गुस्सा था ,उसकी आँखे लाल हो चुकी थी इतनी देर से पानी में भीग रही थी की उसे खुद पता नहीं था पर ठण्ड का कही नामोनिसन नहीं था ,अजय को ने उसे प्यार से समझाने की कोसिस की पर बात नहीं बन पा रही थी ,आखिर अजय के सब्र का बांध भी टूट गया वो उसकी ओर झपटा निधि ने पुरे ताकत से उसे अलग करना चाहा पर अजय अब सचमे ताकत का प्रयोग कर रहा था ,वो उसके मुह को अपने हाथो से पकड़कर उसके होठो में अपने होठो को डाल देता है और उसके होठो को अपने पूरी ताकत से चूसने लगता है ,निधि पहले तो छटपटाती है पर थोड़ी देर में अजय के बालो को पकड़कर उसका साथ देने लगाती है ,
बड़ा ही अजीब सा दृश्य था …दोनों भाई बहन बिलकुल नग्गे जोरो की बारिश में एक सुनसान और निर्जन जंगल में खड़े है और एक दूजे से चिपके हुए अपनी पूरी ताकत से एक दूजे के होठो को खा रहे है ……..उनके प्यार का उफान जब पुरे शबाब में था तो अजय ने निधि की कमर को पकड़कर उठाया निधि ने भी अपने पैर्रो को अजय के कमर में जकड लिया अजय उसे झोपड़े में ले आया और दोनों के होठ एक क्षण के लिए भी अलग नहीं हुए थे ,अजय दरवाजा लगता है और निधि को बिस्तर मे सुला देता है सबकुछ करते हुए भी दोनों एक दूजे से अलग नहीं हुए थे आज उन्हें एक दुसरे से कोई अलग नहीं कर सकता था ,दोनों किसी जगली जानवरों जैसे तब तक एक दुसरे के होठो को खाते रहे जब तक की सांसो ने अंतिम जवाब नहीं दे दिया ,….दोनों हफ्ते हुए अलग हुए और एक दुसरे के आँखों में देखकर फिर से अपने होठो को मिला लिया ……

जब ये उफान थमा तब तक दोनों के मन में प्यार ही बच गया था …..
“बहुत जिद्दी हो गयी है तू आजकल ,क्या जरुरत थी पानी में ऐसे भीगने की ”
“आप मुझे छोड़कर क्यों गए ,”
“नहीं तो और क्या करता जो तू कर रही थी ना वो …….हम भाई बहन है मेरी जान ,मैं तुझे कुछ ऐसा नहीं कर सकता जिससे तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाए ”
निधि ने अजय को बड़े प्यार से देखा और उसके होठो में एक प्यारी सी किस ली
“कौन कहता है की इससे मेरी जिंदगी बर्बाद हो जायेगी ,भाई याद रख लो आज नहीं तो कल लेकिन मुझे अगर कोई कलि से फुल बनाएगा रो वो आप ही बनोगे समझे “निधि में गंभीरता और शरारत दोनों के मिश्रण से कहा ,अजय के चहरे पर एक मुस्कान तैर गयी
“बड़ी बड़ी बाते करती है कहा से सिखा ये सब ”
“आपके प्यार से ”
“अच्चा ,तेरी तो “अजय फिर से अपनी चंचल शरारती बहन के होठो को अपने होठो में भर लेता है ,वो उसके स्तनों से खेलता है उसके जन्घो को,निताम्भो को जी भर के मसलता है पर हवस…..हवस कही खो गयी थी बस प्यार ही बाकी था ना अजय के लिंग में कोई तनाव था ना ही निधि को अजय का लिंग चाहिए था ,दोनों को बस एक ही चीज चाहिए थी एक दुसरे का बेपनाह प्यार ,………..और प्यार की कामना नहीं की जाती वो किया जाता है बिना किसी उम्मीद के ,बिना कुछ पाने की चाहत के …
दोनों एक दूजे में लिपदे कब नींद के आगोश में खो गए पता ही नहीं चला ….

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