जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -30

desi sex stories अध्याय 30
इधर अजय और निधि गाव से निकल चुके थे कोई उन्हें ना पहचान ले इसलिए वो स्कार्फ बांधे हुए थी वही अजय ने हेलमेट लगा रखा था ,दोनों पहाड़ी के निकट पहुच गए,पहले गाड़ी एक जगह लगाकर वो ऊपर चले गए क्योकि शाम होने ही वाली थी इसलिए पहले अजय ने कलवा के झोपड़े का जायजा भी ले लिया था ,एक आदमी के रहने के लिए परियाप्त जगह थी ,एक कोने में एक बिस्तर पड़ा था,और एक लालटेन और एक माचिस बस इतना ही ,घास की कुटिया थी जहा पर और किसी चीज की जरुरत ही नहीं थी ,लकड़ी का दरवाजा था जिसपर ताले का होना ना होना एक ही था ,पास के झरने की मनमोहक आवाज वहा तक आ रही थी…झरना देखने और पास के फूलो के बगीचे में घुमने से पहले वो पहाड़ी के ऊपर जाकर बाबा जी के दरसन कर लेना चाहते थे वही आश्रम से खाना खाकर निचे आने की योजना थी ,और बाबा जी को ये भी पता होना चाहिए की ये निचे है ,ताकि कोई भी परेशानी हो तो मदद मिल सके ,….
ऊपर जाकर बाबा जी से मिलने और फिर खाना खाने के सिलसिले में रात हो गयी ,एक सेवक ने उन्हें टार्च ला दिया …
“ठाकुर साहब कोई भी परशानी नहीं होगी यहाँ पर आपको आज चांदनी रात है आज तो झरने की सुन्दरता कमाल की होती है ,” सेवक ने बड़े ही आत्मीयता से कहा
“हा काका ,कालवा काका के झोपड़े में ही रात गुजरेंगे हम लोग ,कोई समस्या तो नहीं होगी ना ”
“अरे कोई भी समस्या नहीं होगी ,पिने को पानी और कुछ फल रख लो यहाँ से ,जगली जानवरों की भी दिक्कत नहीं है यहाँ पर आप बेफिक्र होकर जाइये ..”

दोनों ख़ुशी ख़ुशी निचे चले जाते है ,हलकी हलकी फुहारे पड़नी शुरू हो गयी थी ,कोई 6-7 बजे होंगे …निचे जाते जाते बारिस की बुँदे कुछ मोटी हो चुकी थी जिससे दोनों थोड़े से भीग भी गए थे ,
आज निधि ने एक पिंक रंग का सलवार कमीज पहना हुआ था जिसमे उसका दुधिया रंग निखर कर आ रहा था ,वही अजय एक टी शर्ट और जींस में था ,उसे अभी भी यही डर था की कही बारिश तेज ना हो जाए ,
झरने की मनोरम सुन्दरता को कर दोनों ही मंत्रमुग्ध हो गए ,पूरी चांदनी में झरने का बहता साफ़ पानी और निर्मल लग रहा था ,पास बनाये गए बगीचे के फूलो की सुगंध से पूरा वातावरण महक रहा था और झरने की मादक आवाज ने रोंगटे खड़े करने वाले शांति का अनुभव चारो और बिखेरे हुए थे ….दोनों पास के एक समतल सी रेत वाली जगह पर बैठे थे ,एक दूजे की बांहों में बठे बस झरने को देख रहे थे …
“भईया कितना प्यारा है ना यहाँ पर ,इसीलिए काका ने यहाँ पर अपनी झोपडी बनायीं है ,”
“हा कितनी शांति है यहाँ पर ,”
तभी कुछ लोग वहा और आ गए देखा की पास के गाव वाले ही थे जो ऊपर भी उन्हें दिखे थे ,अधिकतर प्रेमी जोड़े या नए शादी शुदा लोग से लग रहे थे ,इस जगह पर प्रेम खिल जाए तो कोई भी आश्चर्य ही नहीं …सभी युगल अपना अपना स्थान सुनिश्चित कर वह बैठ गए ,जैसे सभी को पता ही था की ये दोनों भाई बहन है तो सभी इनसे दूर ही रहे ,
“भईया यहाँ भी शांति नहीं है चलो गार्डन घूम के आ जाते है ,”
“अरे बेटा ये सबके लिए है ,और आज चांदनी रात है ना तो ये लोग थोड़ी देर यहाँ बैठने के लिए आते है यहाँ पर ,रात होने पर सब चले जायेंगे ,और गार्डन सुबह घूम लेंगे ना…”
“नहीं चलो ना भईया “निधि के जिद में अजय कुछ बोल ही नहीं पाता था
“चल ठीक है ”

दोनों कुछ देर तक पास के गर्दन ही घूमते रहे ,बारिस की फुहारे अभी भी थी पर रुकने को स्थान ठो उनके पास था ,और वो फुहारे इतने अच्छे लग रहे थे की उनसे बचने का कोई भी प्रयास वो नहीं कर रहे थे …एक दो घंटे तक वो वही घूमते रहे,छोटी सी जगह थी पर बहुत से अलग अलग फूलो का संग्रह वहा पर था इसलिए दोनों को मजा आ रहा था ,वो फिर झरने में कुछ देर बैठने को चले गए इसबार झरना पूरी तरह से सुना था ,कोई भी नहीं दिख रहा था ,निधि थक चुकी थी और फुहारों में पूरी तरह से भींग भी चुकी थी ,उसकी कमीज पूरी तरह से उसके शारीर में आकर के चिपक चूका था और उसके बदन की मसलता पूरी तरह से दिख रही थी ,अजय की नजर बार बार उसके स्तनों ,उसके बड़े चौड़े निताम्भो और उसकी पतली कमर में चले जाते ,पता नहीं ये क्या हो रहा था ,क्यों हो रहा था पर अब निधि के शारीर का एक आकर्षण अजय के अदर आ रहा था ,औरत के शारीर को वो निधि से ही तो जानता था ,कभी भी किसी लड़की या औरत के ऊपर उसने गलत निगाह नहीं डाली थी ,पर आज अपने ही बहन पर ,,……नहीं नहीं ये तो बस प्यार था ,,,हा प्यार थोडा जिस्मानी सा प्यार ………
दोनों झोपड़े में अपने जूते उतर रेत में चलने के लिए नग्गे पर झरने की ओर निकल पड़े ,निधि थके हुए थी इसलिए अजय ने निधि को अपने कंधे पर उठा लिया,निधि अपने बांहों के घेरे अजय के गले में डाले थी ,अजय को अनायास ही ये महसूस हुआ की बालो के भीग जाने से निधि को सर्दी सी लग रही है वो अपना शर्ट उतर निधि के बालो को पोछता है निधि एक प्यारी सी मुस्कान उसे देती है ,वो अपना शर्ट वही छोड़कर नग्गे बदन ही उसे उठा लेता है निधि उसके कसे हुए मजबूत और चौड़े सीने में अपने सर को ठिकाकर अपने भाई के बदन की गर्मी का अहसास करती है ,निधि उससे जितना चिपक सकती थी चिपक गयी ,अजय रेत में चलता हुआ किसी अच्छे से जगह की तलास कर रहा था पुरे वातावरण में बस झरने की आवाज थी ,दोनों भी अभी चुप थे ,अजय ने निधि को निचे उतरा निधि ने अजय को पेशाब जाने का इशारा किया ,अजय ने भी सहमती में सर हिलाया ,निधि पास के ही एक झाडी के पीछे चली गयी ,थोड़ी देर में वो दबे पाँव वापस आती है और अजय के कान में धीरे से …
“भईया चुप रहना कोई आवाज मत करना आपको कुछ दिखाना है ”
“क्या …..”निधि उसके होठो में अपने उंगलियों को रख देती है ,इधर बारिस की फुहारे कुछ और तेज होने लगी थी …निधि अजय का हाथ पकडे एक पेड़ के पास जाकर रुकी अजय ने चाँद की रोशनी में वहा जो देखा वो बस एक टक उसे देखता ही रह गया ……..

पास ही झाड़ियो के आड़ में दो जिस्म नग्गे एक दूजे में समां रहे थे ,अजय को उस लड़की का चहरा देख याद आया की ये तो वही नव जोड़ा है जिनकी अभी अभी शादी हुई है और वो यहाँ घुमने आये है ,पास के ही गाव से लेकिन लड़की ने तो लाल रंग की साड़ी पहने हुए थी …अजय ने नजर दौड़ाई उसे वो लाल साड़ी वही पड़े मिली साथ ही बाकि के कपडे भी सायद लड़के के कुछ कपडे और लड़की के अंदर के कपड़ो को लेटने के लिए बिछाया गया था ,उसके चूडियो से भरे हाथ अभी खन खन की आवाजे पैदा कर रहे थे दोनों की सिसकियो से पूरा माहोल मादक हो रहा था ,उन्हें लगा होगा की यहाँ अब कोई भी नहीं है और वो बिलकुल ही बेफिक्र होकर प्यार में उतर गए थे ,बारिश की बुँदे उनपर पड़ रही थी और इससे उनके जिस्म की आग और भी बड रही थी ………लड़की का गोरा बदन उस काले सांड से शारीर वाले इन्सान के निचे पिस रहा था ,और साफ साफ पता चल रहा था ,
अजय के लिंग में ये मादक दृश्य देख कर तनाव होने लगा वो निधि के साथ था उसे जैसे ही ये होश आया वो वहा से जाने लगा पर निधि ने उसका था पकड़ लिया ,,,निधि के होठो में एक चंचलता की मुस्कान थी ,कोई भी बुरा भाव उसे अभी भी नहीं पकड़ पाया था वो तो बस मजे के लिए इसे देखना चाहती थी ,निधि ने अजय को पेड़ के निचे बैठने को कहा जिससे वो तो उन्हें देख सके पर उन युगल को कुछ पता नहीं चले अजय ने आँखों से इंकार किया तो निधि ने झूठे गुस्से से उसे आँख दिखाई ,अजय को अपनी बहन की मासूमियत पर बहुत प्यार सा आया वो पगली यहाँ भी जिद कर रही है ,हारकर अजय वहा बैठ ही गया और निधि उसकी गोदी में …
अजय का लिंग अब भी पूरी ताकत से खड़ा था जो निधि के कोमल निताम्भो में चुभ रहा रहा था ,
“आपका वो चुभ रहा है ,हटाओ ना उसे “निधि ने अजय के कानो में कहा अजय बुरी तरह से नर्वस हो गया पर निधि के चहरे को देखकर उसे समझ आ गया की उसकी बहन को उससे कोई तकलीफ नहीं है ,उसने उसे अर्जेस्ट किया और निधि को अपनी बांहों में भरकर उसके गालो में एक प्यारा चुम्मन रसीद कर दिया ,निधि अपना पूरा भर अजय के ऊपर डाल दि अजय भी पेड़ से ठीक गया और अपनी बहन को अच्छे से जकड लिया निधि ने अपना सर अजय के कंधे पर ठीक रखा था दोनों की आँखे मिली और निधि ने अपने होठो को अजय के होठो पर मिला दिया …………..

प्यार का एक उफान तो सुरु हो चूका था ,दोनों ने बड़े देर तक एक दूजे के होठो का रसपान किया अजय के हाथ अनजाने में ही निधि के कोमल वक्षो पर आ गए वो उन्हें हलके हलके से मसलने लगा निधि की आँखे भी बंद हो रही थी ,अजय को जब ये होस आया की वो क्या कर रहा है तब उसने अपने हाथो को रोका और निचे ले आया पर निधि ने उसके हाथो को पकड़कर फिर अपने वक्षो में ले गयी ,बारिस से भीगा उसका बदन और अंदर अंतःवस्त्रो की कमी ने अजय को उसके कोमल और भीगे वक्षो का जो अहसास दिया उससे उसका लिंग फिर से दर्द करने लगा था ,वो निधि के निताम्भो के निचे घुटा सा जा रहा था ….
इधर वो युगल अपनी मस्ती के चरम पर थे ,की लड़की उठी और कुतिया की पोजीशन में आ गयी ,लड़के ने अपना काला लिंग निकल कर उसके पिछवाड़े में डाल दिया ,और उसके बालो को अपने हाथो से जकड कर घुड़सवारी करने लगा ……
ये दृश्य अजय और निधि के लिए बहुत ही जादा मादक हो रहा था निधि अपना मुह खोले उन्हें एक टक देख रही थी वही अजय की सांसे भी बहुत ही तेजी से चल रही थी दोनों ही अपने आपे में नहीं थे ,अजय के हाथ जहा निधि के वक्षो पर बड़े ही तेजी से चल रहे थे वही निधि भी अपने सांसो को सम्हालने में नाकामियाब हो रही थी ,बारिस और तेज हो रहा था और उस युगल की काम लीला भी …निधि जैसे आज अचानक से जवान हो गयी हो और अजय जैसे आज अचानक से सेक्स का दीवाना हो गया हो ,निधि ने अपना हाथ बढाकर अजय के एक हाथो को पकड़कर निचे ले आई और अपने सलवार के ऊपर से अपनी योनी में उसका हाथ रगड़ने लगी अंदर तो कुछ पहना नहीं था इसलिए हाथो का सीधा संपर्क उसकी योनी से हो रहा था ,तेज होने वाली बारिस की फिकर किसे थी दोनों ही अपनी मस्ती में मस्त हो चुके थे,दोनों ही ओर हवास का नाच चल रहा था ,हा ये हवास ही था यहाँ प्यार की कोई भी संभावना बाकि नहीं थी ,अजय और निधि अपने जीवन के पहले यौनसुख में डूबे थे ,वो अपने चरम के नजदीक थे …अजय अपनी बहन की योनी को ऐसे मसल रहा था जैसे वो उसी के लिए बने हो ,बालो से भरी हुई उसकी योनी में बालो की रगड़ इतनी सुखद होगी ये ना तो अजय ने सोचा था ना ही निधि ने …..
इधर युगल अपने चरम में पहुच चुके थे और एक तेज धार के साथ ही उनकी काम लीला समाप्त हो गयी दोनों एक दूजे में लिपटे हुए अपनी सांसो को सम्हाल रहे थे वही निधि ने भी अपने जीवन का पहला काम की बौछार कर दि ,,,,,,निधि निढाल हो गयी अजय को अपने हाथो में कुछ गरम सा महसूस हुआ जैसे निधि ने पेशाब कर दिया हो वो रुका नहीं,उसकी उमंग तो अभी भी शांत नहीं हुई थी पर निधि ने उसके दोनों हाथो को अपने हाथो से रोका और नहीं में ना का इशारा अपना सर हिला कर किया …..अजय को होश में आने को कुछ समय लग गया वो अब भी उसे दबाये जा रहा था निधि निढाल होकर उसके ऊपर लेट गयी …दोनों भरी बारिस में पेड़ के निचे बैठे थे ,बारिश काफी तेज हो चुकी थी पर वासना की गर्मी से दोनों को पसीना आ रहा था ……जब अजय रुक गया और कुछ सम्हला तो निधि ने अपना सर उठा कर उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया ,ये क्या हुआ था इसकी समझ तो दोनों को नहीं थी पर जो भी हुआ वो उनके जीवन में एक नया अध्याय जरुर लिखने वाला था ऐसा अध्याय जो उनकी जिंदगी की धरा ही बदल देने वाली थी ……….

अजय जब अपनी प्यारी बहन को भरपूर किस कर के होश में आया तो उसने निधि के चहरे को देखा उसकी आँखों में पानी था ,अजय की धड़कने फिर से बड गयी उसकी आँखे किसी अनजाने डर से डबडबा गयी ,ना जाने क्या हो गया आज क्यों हो गया आज ………प्यार का तो कही भी नामोनिशान नहीं था…..था तो बस हवास की एक आज जो अब तो बुझ चुकी थी लेकिन अपने साथ कई सवाल लाकर रख दिए थे….सही गलत के फेरे से तो शायद वो निकल ही जाता पर अपनी बहन को दुःख देने के अपराध से कैसे मुक्त हो पाता……..
दोनों अपनी भरी आँखों से एक दूजे को निहारे जा रहे थे ,कोई भी बात उनके बीच नहीं हो रही थी ,इधर प्रेमी युगल वहा से जा चुके थे और ये बारिस में उस ठंडी बारिस में पसीने से भीगे हुए अपने जिस्म की तपिस लिए एक दूजे के आँखों में देख रहे थे …………
“मुझे माफ़ कर दे बहन “अजय लग्भाग रोते हुए कहा लेकिन निधि के चहरे में एक मुस्कान आ गयी और वो ऊपर होकर अजय के होठो को अपने होठो में भर ली ,और पहली बार अजय से एक समझदारी की बात कह गयी
“थैंक्स भईया ,ऐसा मजा मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था ,दुनिया कुछ भी बोले लेकिन मैं आपसे बहुत प्यार करती हु ,और ये मजा मुझे देने का हक़ सिर्फ आपका था और आपका है और आपका रहेगा ………………..”
अजय बस अपनी चंचल सी झल्ली सी दिखने वाली बहन के मुह से निकले पहले समझदारी के शब्दों का विश्लेषण करता हुआ उसके आँखों में देखता रहा …………