जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -28

antarvasna kahani अध्याय 28
इधर शहर में ………..
सोनल ,रानी ,किशन और विजय कॉलेज के लिए निकल जाते है ,किशन ने जहा एक ब्लू टी-शर्ट पहना था वही विजय ने ब्लैक वही किशन जहा ब्लैक जींस में था वही विजय डेनिम ब्लू जींस में ,,,,,कातिल और क्लासिक कॉम्बिनेशन लेकिन विजय के सामने किशन फीका ही दिख रहा था ,उनकी बहनों ने अपने भाइयो के लिए इस्पेसल शोपिंग की थी ,ये उनकी ही चॉइस थी ,विजय का गोरा रंग काले रंग में और भी खिलकर आ रहा था ,वो किसी रियासत के राजकुमार सा लग रहा था ,बस माथे पर लाल टिका और हाथो में एक तलवार की कमी थी,….उसका लम्बा चौड़ा शारीर उसमे ऐसे खिल रहा था की कोई भी देखे तो बस थोड़ी देर के लिए देखता ही रह जाय ,ऐसे तो दोनों के परिधान बहुत ही सोबर थे पर उनकी पर्सनाल्टी को देख कर माडल भी जलन खा जाते ,विजय के कसे हुए डोले चौड़ा सीना और सपाट पेट ,दुधिया गोरा तेजमय उसका शारीर ,और उसकी लम्बाई ……दूसरो की बात छोडो दोनों बहनो की ही नजर अपने भाइयो से नहीं हट रही थी ,विजय की पर्सनाल्टी के सामने किशन टिक नहीं पा रहा था लेकिन वो किसी चोकलेटी बॉय सा लुक कर रहा था ,उसका शारीर विजय जितना चौड़ा तो नहीं था पर लम्बाई और गोरा रंग मासूम सा छरहरा बदन उसे चोकलेटी लुक दे रहे थे ,उसके चहरे में वो तेज नहीं था जो विजय और अजय के रंग में था ……….
जब चारो कॉलेज में इंटर हुए तो शायद ही कोई होगा जिसने इन दोनों नए लडको को मुड कर और घुर कर नहीं देखा हो ,सोनल और रानी तो थोड़े घबरा भी गए थे ,क्योकि उन्हें पता नहीं था की उनके भाई इतने ज्यादा हैण्डसम है,की लडकिय तो लडकिय लड़के भी उन्हें घुर रहे थे ,खासकर विजय को ,एक तो उसकी लम्बाई और शारीर ही ऐसा था की वो अलग से ही दिख जा रहा था ,ऊपर से उसके अंदर का वो तेज जो शहर में रहने वाले लडको ने शायद कभी जाना ही नहीं था ,एक आजीब सा तेज होता है जो बयां नहीं किया जा सकता ये तेज आता है ,सही खाने पिने से ,व्ययाम से ,निश्चिन्त दिनचर्या से ,और कुछ कुछ अपने खानदान से …सोनल और रानी उन्हें केंटिन में ले गयी ,उनके लगभग सभी दोस्त अजय और विजय से मिल चुके थे इसलिए उन्होंने सच्चाई नहीं छुपाई और उन्हें सबसे इंट्रो कराया ,विजय उस दिन तो अजय के साथ था और इसलिए बड़ी ही शराफत से सबसे मिल रहा था पर आज इतनी लडकियों को देखकर वो बहुत ही खुश था ,ऐसा लग रहा था की शेर को खरगोशो का झुण्ड मिल गया हो ,वही किशन अब प्यार का मारा हो गया था उसे सभी के बीच सुमन की ही याद आ जाती है ,विजय अपने रंग में आ रहा था ,सोनल उसे बार बार आँख दिखाती और वो थोडा चुप हो जाता ,पता नहीं क्या था साले में की सभी लडकिय उससे जोक की तरह चिपकी जा रही थी,ऐसे की सोनल रानी किशन और खुसबू (सोनल की बेस्ट फ्रेंड जो अजय की दीवानी थी )दुसरे ही टेबल में आ गए ,और विजय सभी लडकियों से घिरा हुआ दुसरे टेबल में था ,

“तेरा भाई पागल है “खुसबू ने हस्ते हुए कहा
“तो तू भी जा ना उसी के साथ बैठ “सोनल चिड़ते हुए बोली
“अरे मैं तो तेरे अजय भईया की दीवानी हो गयी हु ,पता नहीं जब से उनको देखा है …..”खुशबु खो सी गयी अपने और अजय के बीच की गहराई को वो अच्छे से जानती थी ,वो जानती थी की अगर उनके बीच कुछ हुआ तो वही इतिहास फिर से दोहराया जाएगा जो उसके बुआ के समय में हुआ था ,वही कत्लेआम वही नफरत ………खुशबु के आँखों में फिर से पानी आ गया जिसे सोनल ने देख लिया ,
“अरे मेरी जान अब ऐसा भी क्या प्यार की जुदाई में रोना शुरू कर दो ,हा …मेरी गारंटी है की तू ही मेरी भाभी बनेगी ,”सोनल ने खुशबु के बाजुओ को हलके से चुटकी काटी की खुशबु हस पड़ी

“क्या पता बहन ,वक़्त को क्या मंजूर है ,”वो शून्य आकाश में देखने लगी थी
वही किशन एक अनजान नजरो से खुशबु को देख रहा था उसे समझ नहीं आया की आखिर ये हो क्या रहा है ,
“ये हमारी भाभी जी है,अजय भईया की गर्लफ्रेंड और होने वाली बीवी चलो पाओ छुओ “रानी को मजाक सुझा ,किशन को थोडा यकीं नहीं आया पर सोनल और खुशबू की बाते और खुसबू का इतनी गंभीरता दिखाना ….वो उठा और खुशबु के पैरो को छूता हुआ ,
“पाँव लागी भाभी जी “किशन के इस कारनामे से अपने खयालो में खोयी हुई खुशबू अचानक ही जागी और खड़ी हो गई ,उसने आसपास देखा रानी और सोनल पेट पकड़ कर हस रहे थे वही बेचारा किशन मासूम सा खड़ा था ,पुरे केंटिन में उसे देखने वाला और कोई नहीं था ,एक कोने में विजय के टेबल के आसपास लकिया ऐसे मंडरा रही थी जैसे वह कोई क्लास चल रही हो ,वो उन्हें पता नहीं क्या क्या कहानिया सुना रही थी लडकिय बीच बीच में जोरो से हस्ती ,वो किसी के गालो को किसी के बालो को छूता और वो लड़की शर्मा जाती वही बाकि जलने लगते ,ऐसा लग रहा था की कोई हैण्डसम सा प्रोफ़ेसर क्लास ले रहा हो …वही कुछ लड़के भी वहा बैठे उसे जलन की निगाहों से देख रहे थे ,
खुसबू और किशन को जब समझ आया की ये एक मजाक ही वो भी हसने लगे और खुशबु ने सोनल को एक हलके से मुक्का मारा ,
“तो तूने नितिन को बताया क्या अजय भईया के बारे में “सोनल ने बातो के दौर में ही पूछ लिया ,खुसबू ने उसे एक गंभीर सा चहरा बनाया और
“तूने बताया क्या ……….,”खुशबु का इतना ही बोलना था की सोनल ने अपनी आँखे बड़ी करके उसे रोक दिया जैसे कह रही हो कुछ भी मत कहना ,खुशबू समझ गयी थी की किशन पास ही और किसी को कुछ भी नहीं पता ,खुशबु ने टॉपिक पलट दिया
“तूने बताया क्या अजय को मेरे बारे में “सोनल और रानी ने राहत की साँस ली ,
“भाई देख ना ये विजय क्या कर रहा है ,हमें क्लास भी जाना है ,उसे बुला ला ”
“अरे दीदी वो मेरी कहा सुनेगा ”
“अरे जा ना क्यों नहीं सुनेगा “किशन उठकर विजय के पास चले जाता है ,सोनल खुशबु की तरफ रुख करती है ,
“तू पागल है क्या ,मैंने नितिन के बारे में अपने भाइयो को नहीं बताया है ,”सोनल ने धीरे से कहा ,खुशबू के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
“हा कामिनी तो तूने कैसे सोच लिया की मैं अपने भाई को तेरे भाई के बारे में बताउंगी”सोनल के चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी
“हा यार ये भाई लोग बड़े अजीब होते है है ना ,बहनों के ऊपर जान छिडकते है ,कुछ भी करने को तैयार रहते है ,लेकिन जैसे ही किसी लड़के का नाम आया तो बस….सब प्यार की “सोनल बोलकर चुप हो जाती है ,थोड़ी देर बाद वो फिर कहती है
“एक हम बहन है जो अपने भाईयो के लिए लडकिय ढूंढते रहती है “सोनल थोडा सा चिढ जाती है ,
“अरे मेरी जान वो इसलिए क्योकि भाइ कभी भी अपनी बहनों को गलत हाथो में जाता नहीं देख सकता ,”खुशबु बड़े ही प्यार से कहती है ,
“ऐसे मुझे लगता है अजय भईया मेरे और नितिन के रिश्ते को लेकर मान जायेंगे उन्होंने कहा भी था की हम लोग जिसे पसंद करेंगे उससे हमारी शादी करा देंगे ,”सोनल ने चहकते हुए कहा ,वही खुशबु फिर अपने ही विचारो में खो गयी ,’तुझे क्या पता बहन की जब अजय को इस रिश्ते के बारे में पता चलेगा और ये पता चलेगा की हम कौन है ,ना जाने क्या भूचाल आएगा

इधर किशन विजय को बुलाने आता है ,विजय किशन का हाथ पकड़कर अपने पास खीच कर बैठा लेता है ,लेकिन किशन को इसमें कोई भी इंटरेस्ट नहीं था ,वो विजय के कानो में कहता है ,
“अबे इन्हें छोड़ बहार चल मस्त प्रोफ़ेसर है ,क्या फिगर है जैसे मेरी का था ,”विजय आँखे उठाकर किशन को देखता है ,वो जल्दी से सबको बाय कहता है और वहा से उठकर किशन के साथ हो लेता है ,मेरी का नाम सुनकर ही उसे कुछ कुछ होने लगता है ,किशन उसे सीधे सोनल के पास ले जाता है ,
“तो हो गए फुर्सत ,कमीने कही के कुछ तो बहनों की इज्जत का ख्याल करता “सोनल झुटा गुस्सा दिखाती है ,विजय किशन को घुर कर देखता है वो हलके हलके मुस्कुरा रहा था ,
“अरे मेरी बहना मैं तो तुम्हारी इज्जत बढ़ा रहा था ,अब देखना कितनी लडकिया तुम्हे मेरा नम्बर मांगती है “विजय सोनल के चहरे को प्यार से हाथो से पुचकारता है ,सोनल के होठो में एक मुस्कान आ जाती है ,
“भईया आप इतनी जल्दी लडकिय पटा कैसे लेते हो ,गाव में भी शहर में भी ,कम उम्र की भी और मेरी जैसी सेक्सी को भी “रानी हस्ते हुए कहती है ,मेरी का नाम सुनकर उसे किशन की याद आ जाती है ,
“बस बहनों तुम्हारा प्यार है तुम्हारे भाई पर ,मुझे किशन से अकेले में कुछ बात करनी है मैं आता हु “विजय किशन के कंधे को पकड़कर केंटिन से बहार ले जाता है ,किशन को पता था की वो उसे क्यों ले जा रहा है पर वो चुपचाप ही साथ चल देता है …और केंटिन से बहार निकलते ही दौड़ पड़ता है ,

“रुक साले तुझे बताता हु मैं “विजय भी किशन के पीछे पीछे दौड़ता है ,
इधर एक तेज रफ़्तार से आती हुई एक बाइक ,जिसमे दो लड़के सवार थे किशन के अचानक भागने से उनका बेलेंस डगमगा जाता है ,और तेजी से ब्रेक लगाते है ,किशन उनसे हल्का सा टकरा भी जाता है ,
“मादरचोद पागल है क्या,”बाइक चला रहे लड़के की आवाज आती है ,की विजय जाकर उसका कॉलर पकड़ लेता है ,बदले में वो शख्स भी विजय का कालर पकड लेता है
“गाली किसे दे रहा है मादरचोद ………….”पूरा केम्पस बस उन दोनों को देख रहा था ,ऐसे लगा की दो पहाड़ एक दुसरे से टकराने वाले है ,विजय किसी पर्वत सा विशाल लग रहा था वही सामने वाला शख्स भी कम ना था ,लम्बाई चौड़ाई में वो लगभग विजय के ही बराबर था ,काले रंग की कमीज और डेनिम ब्लू जींस पहने ,माथे में लाल रंग का लम्बा तिलक उसके गोर और चमकीले रंग में खिल कर दिखाई दे रहा था ,चहरे से किसी राजकुमार सा लग रहा था ,छाती के घने बाल उसके शर्ट से झांक रहे थे वही उसके एक सफ़ेद धागा उन्ही बालो में से देखी पड़ रहा था ,जो उसका जनेऊ था,इससे पता चल रहा था की वो एक ब्राम्हण कुल का लड़का है ,दोनों के चहरो में एक सा तेज था जैसे लग रहा हो की इनका खून एक ही है ,उस लड़के के पीछे बैठा शख्स भी अब निचे उतर चूका था पर दोनों एक दुसरे का कालर नहीं छोड़े थे ,पुरे केम्पस में एक शांति फ़ैल गयी थी ,,,लेकिन दोनों में से कोई भी कुछ कर नहीं रहा था वो बस एक दुसरे की आँखों में देखे जा रहे थे ,जैसे आँखों से ही जंग जितना चाह रहे हो ,दोनों की आँखे लाल थी जैसा की खून उतर आया हो ,उन्हें लग रहा था की जैसे ये दुश्मनी आज की नहीं ये उनके खून में थी ,खून का उबाल उनके चहरे पर साफ दिख रहा था ,दोनों ने ही एक ही रंग के कपडे पहने थे ,एक ही कद काठी एक ही जैसा तेजस्वी चहरा ……………….दोनों ही रुके हुए थे किसी ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं की दो आवाजे जोर से आई …भईया रुको
लेकिन किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ा था,दोनों को किसी ने जोरो से हिलाया ..
“भईया भईया “दोनों अपनी बहनों के तरफ मुड़े …उनके कानो में एक दूर की आवाज सी सुनाई दि …”ये सोनल का भाई है ” “ये खुशबु के भईया है ”

दोनों ने एक दुसरे को छोड़ा पर दोनों की आँखे आपस में मिली ही थी ,वो खून का उबाल अभी भी शांत नहीं हुआ था ,ना जाने क्यों ये कैसा आकर्षण था जो दोनों ही समझ नहीं पा रहे थे ,,,,किशन,रानी ,सोनल ,खुशबु और वहा खड़ा हर शख्स उनकी इस हरकत को देखकर हैरान था ,की सोनल ने पानी की बोतल ली और एक एक करके दोनों के सर में डाल दिया …..
की जैसे कोई सपने से जागे हो दोनों ही हडबडा से गए …दोनों ने आस पास देखा और एक दुसरे को देखा सब तो ठीक था फिर हुआ क्या था ,…..
“क्या कर रहे हो तुम लोग ,पागल हो गए हो क्या ….”सोनल की आवाज से दोनों का धयान उसकी तरफ गया
“नितिन ये मेरे भाई है विजय और किशन ,और विजय ये खुसबू के भाई है नितिन और राकेश “सभी एक दूजे से हाथ मिलते है सिवाय नितिन औरर विजय के दोनों अभी भी एक दूजे को देख रहे थे
“चलो हाथ मिलाओ क्या हुआ “सोनल फिर गुस्से से कहती है ,दोनों अपने हाथ आगे बढ़ाते है और एक दुसरे के हाथो को मजबूती से दबाते है सोनल और खुशबु ये देख कर डर ही जाते है ,सोनल तो हाल काफी अच्छा था पर खुसबू उसेकी तो रूह ही काप गयी ,,,वो जानती थी की ये क्यों हो रहा है ,खानदानी दुश्मनी इतनी ताकतवर होती है की खून भी अपना रंग दिखाना शुरू कर देता है ……उसके कानो में अपने दादा रामचंद्र तिवरी की बात गूंज रही थी ,”बेटा जिस दिन ये दोनों परिवार आपस मे दुशमनी छोड़कर प्यार से रहेंगे उसी दिन मेरा जीना सफल होगा,मैं अपने बच्चो के हाथो मजबूर हु पर बेटा अगर तुझे मौका मिले तो तू जरुर दोनों परिवारों को मिला देना ….मुझे मेरे नाती नतनिनो से मिला देना ”
खुशबु को लगने लगा की उसके दादा का सपना कभी भी पूरा नहीं हो पायेगा,….