जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -27

kamukta अध्याय 27
अजय घर पंहुचा सभी कलवा के आने से बहुत खुश दिख रहे थे ,खासकर सीता मौसी …
सीता मौसी और चंपा आज एक साथ ही बैठे थे पास ही कलवा भी बैठा था,वही निधि भी कान में हैडफ़ोन डाले चंपा के गोद में सोयी थी ,अजय और बाली ने जब ये सब देखा तो वो भी दिल से खुश हो गए ,ये पहली बार था जबकी बाली ने चंपा को अपनी भतीजियो पर यु दुलार दिखाते देखा था,कलवा के आने से घर में एक सकारात्मक उर्जा का संचार हो रहा था ,कालवा ने जब दोनों को देखा तो अपनी बांहे फैला कर खड़ा हो गया दोनों उसके गले से लग गए ,जब सब कुछ सामान्य हुआ तो सभी बैठकर मस्तिया करने लगे थे ,कलवा को घर के बाकी बच्चो की याद सता रही थी ,अजय ने उसे भरोसा दिया की वो बस दो दिनों में ही वापस आ जायेंगे …..सबसे खास बात आज ये थी की चंपा भी सबके साथ साथ थी ,वो किसी किसी बात पर हलके से मुस्कुरा देती ,बाली चोर नजरो से उसे देख लिया करता कभी वो चोर नजरो से बाली को देख लेती ,पर दोनों के बीच कुछ भी बाते नहीं होती ,सालो का वैमनस्य था दोनों के बीच ऐसे कैसे ठीक हो जाता ,वही कलवा दोनों की इस दुविधा को समझ रहा था ,
कालवा से आश्रम के बारे में सुन सुन कर वह की खूबसूरती की बाते सुन सुन कर निधि को फिर से वहा जाने का मन करता है और वो चंपा के गोदी से उठकर जाकर अजय को पकड़ लेती है ,
“भाई मुझे फिर से आश्रम जाना है ”
“हा चलेंगे ना ”

“अभी ”
“पागल है क्या अभी कहा जायेंगे ,कितना समय हो गया है शाम होने वाली है ”
“नहीं अभी “निधि अजय को कसकर पकड़ लेती है ,जिसे देख सभी हस पड़ते है
“और चड़ा के रख अपनी इस दुलारी को,कितनी जिद्दी हो गयी है “सीता मौसी उसकी टांग खिचती है ,सभी हस पड़ते है पर निधि को जैसे किसी की बातो से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था,अजय की दुविधा देख कलवा कहता है
“बेटा अभी नहीं जा सकते वहा और अगर चले भी गए तो क्या ही देख पाओगे ,कल सुबह चले जाना ताकि दिनभर घूम के आ जाओ ”
“अरे काका कल तो कोई भी नहीं आया होगा ,कुछ दिन बाद चल देंगे जब सभी आ जायेंगे ”
“आप लोग मुझे कही नहीं घुमाने नहीं ले जाते ,मैं घर में बैठी बोर हो जाती हु , मुझे आज के आज जाना है मैं कुछ नहीं जानती ,फिर मेरा कॉलेज चालू हो जाएगा तो कहोगे की पढाई करो ,कॉलेज छोड़कर कहा जाओगी ,”निधि का मुह फुल चूका था ,अजय को बुरा तो लगा पर वो जानता था की शाम होने को है और वहा जाना खतरों से खाली नहीं है ,और वो रात तक वापस भी नहीं आ सकते …अजय को देखकर कलवा उसे अलग से बुलाता है ,
“देखो अजय अगर निधि जिद ही कर रही है तो तू उसे वहा ले जा ,वहा आश्रम में रात को सोने का इंतजाम हो जायेगा और वहा नहीं जाना चाहोगे तो मेरी एक झोपडी है ,जहा मैं रहता था , तुम वहा रुक जाना ,जो झरना तुमने देखा था बस उसके पास ही है ,तुमने देखा भी होगा ,”
“हा काका देखा है पर ,निधि को लेकर जाना और अकेले ,मुझे सही नही लग रहा है ,और आप तो जानते है की हमारे आने जाने पर कोई नजर रखे हुए है ,हमले का डर हमेशा लगा रहता है ,और इस पागल लड़की के जिद में मैं इसे मुस्किल में नहीं डाल सकता “कलवा के चहरे पर मुस्कान आ गयी
“तुम सही कह रहे हो पर एक काम करो की तुम उसे मना कर दो ,वो रोती हुई नाराज होकर अपने कमरे में चली जायेगी तब कुछ देर बाद तुम उसके पास जाना और उसके साथ पीछे के गेट से निकल जाना ,जाने के लिए कोई ऐसी बाइक ले जाओ जिसे कोई भी पहचाने और अपने कपडे भी बदल लो ,ऐसे उस इलाके में अभी शांति है और मुझे तुम पर पूरा भरोषा है की अगर कुछ हुआ भी तो तुम सब सम्हाल लोगे ,और तुम्हे कुछ परेशानी हो गयी तो तुम बाबा जी के पास मदद को जा सकते हो ,किसी की इतनी हिम्मत नहीं है की उनके आश्रम में घुस जाए ,”
कलवा की बात अजय को समझ आ गयी और वो जाकर निधि को डांटकर मना कर देता है और सचमे निधि मुह फुलाकर वहा से चली जाती है ,

जब सब चले गए बस कलवा और बाली ही गार्डन में रह गए थे,
“अब चंपा पहले जैसी नहीं रह गयी ,मैं जब से आया हु मुझे ये देख कर ख़ुशी हुई की वो कैसे निधि को माँ जैसा प्यार कर रही थी ,”कलवा बाली की ओर देखता हुआ कहता है ,दोनों बचपन के दोस्त थे वही कलवा ही था जो चंपा को को भी बाली की शादी से पहले से जानता था,असल में तो उसे ने ही दोनों को मिलाया था क्योकि वो बजरंगी से मिलने तिवारियो के गाव जाता रहता था ,
“हा यार बात तो सही है ,मुझे भी ये देख कर बहुत ख़ुशी होती है ,पर काश वो हमेशा से ऐसी रहती तो …”बाली की आँखे नाम हो चुकी थी ,कलवा उसके कंधे पर हाथ रखता है ,

“भाई जब जागो तभी सवेरा,तुमने भी बहुत पाप किये है अपनी जिंदगी में समझ ले ये उसका ही परिणाम था ,अब उसके साथ अच्छा बरताव किया कर ,उससे बात किया कर ,और उसने जो भी किया वो तिवारियो के भड़काने पर किया था ,लेकिन जब से वीर भईया गए है ,वो उनके संपर्क में नहीं रही ,इतने सालो से वो सबसे दूर रही है ,यही उसकी सजा सजा है मेरे भाई “कलवा की बातो से बाली की मन की दुविधा जाती रही ,कुछ दिनों से वो चंपा को देख रहा था और उसका गुस्सा उसके लिए धीरे धीरे कम हो रहा था,जो अब पूरी तरह से कम हो चूका था ,पर एक दुविधा सी उसके मन में जरुरु थी जो की अब कलवा के समझाने से कम हो चुकी थी ,
“तू तो पूरा ही बाबा बन गया बे “बाली ने मजाक में कहा और दोनों हसने लगे
“चल आज मेरा भाई आया है आज दारू पीते है ,पहले की तरह ही शुद्ध देसी वाला मउहा,जगलो में जाकर ,देशी मुर्गे के साथ बिलकुल शुद्ध और प्राकृतिक ,क्या बोलता है फिर से जवानी के दिन जीते है “कलवा भी हस पड़ा
“साले तू अभी भी इन सबके शौक रखता है ”

“क्या करू भाई जब से तू गया है किसके साथ जाता ,सब छुट गया है ,याद है पहले कैसे हम दोनों भईया से छुपकर जगलो में जाया करते थे ,देसी मऊहा ,देसी मुर्गा ,और देसी लडकियों के साथ ,….हा हा हा क्या दिन थे यार वो भी ,”बाली याद कर थोडा इमोशनल सा हो जाता है ,
“हा यार क्या दिन थे ,पर अब नहीं ये सब छोड़ चूका हु मैं ,यही शराब थी जिसने ना जाने कितने गलत काम कराये है हमसे ,वीर भईया ने हमें कभी भी मन नहीं किया पर इसका हमने क्या फायदा उठाया ,पता नहीं कितनी लडकियों की जिंदगी से खेल गए ,”कवला थोडा उदास सा हो जाता है ,
“क्या गलत किया था भाई ,क्या कभी किसी लड़की को बिना उसकी मर्जी के कुछ किया है हमने ,”
“हा नहीं किया पर क्या हमने जो किया वो सही था ”
“अबे वो हमारी जवानी थी ,लडकिय भी तो अपने कपडे हमारे लिए ऐसे ही खोल दिया करती थी ,हा हा हा ”
बाली की बात सुन कर कलवा भी मुस्कुरा देता है ,
“चल बस हो गया अब हम भी बड़े हो चुके है और हमारे बच्चो के दिन आ गए है ,तू चंपा से जाकर बात तो कर ,अब उम्र के इस पड़ाव में भी क्या तू और वो अकेले ही रहोगे ,जिंदगी भर तो तूने उसे प्यार नहीं दिया अब दे दे ,”कलवा की बात बाली को समझ में तो आ चुकी थी पर इसपर अमल करना थोडा मुस्किल मामला था ……….क्योकि सालो से दोनों ने आपस में बात नहीं किया था …