जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -23

antarvasna अध्याय 23
इधर घर में विजय और मेरी का घमासान जारी था,की तभी किशन भी वापस आ गया सबसे पहले उसके मन में विजय और मेरी के बारे में ही विचार आया ,वो मेरी के कमरे की तरफ जाने को हुआ ,लेकिन उसने देखा की सुमन बगीचे में एक पेड़ के निचे अकेले ही बैठी है दोनों की नजरे मिली और किशन ने अपनी नजरे झुका ली और अंदर चला गया ,मेरी के रूम में पहुचने पर उसने दोनों की आहे सुनी और मजे लेने लगा तभी उसे लगा की कोई उसके पीछे है उसने मुड़कर देखा तो सुमन खड़ी थी ,सुमन को देखकर वो फिर से झेपा और वहा से जाने लगा लेकिन सुमन ने दौड़कर उसका हाथ थाम लिया ,किशन अब भी अपने चहरे को झुकाए खड़ा था ,
“आपसे कुछ बात करनी है ”
“हा कहो ”
“यहाँ नही गार्डन में चले “सुमन उसके जवाब का इतजार करे बिना ही उसे अपने साथ गार्डन की तरफ ले जाने लगी वो किसी पुतली सा उसके पीछे पीछे आने लगा,क्या था इस लड़की में जिसने किशन जैसे कमीने लड़के को इतना कमजोर बना दिया था ,दोनों बगीचे में पहुचे उसी पेड़ के निचे जहा पर सुमन बैठी हुई थी ,पूरा बगीचा खाली था और हलकी धुप में मौसम बड़ा ही सुहाना और मनमोहक लग रहा था,किशन अब भी सर गडाए वही खड़ा था ,

“आप मेरे साथ ऐसे क्यों बिहेव कर रहे है ठाकुर साहब ,आपके इस बिहेब को घर के सभी लोग केयर कर रहे है आज ही मेरी मेडम ने भी मुझे ये पूछ लिया ,प्लीज मन की आप अपने किये पर दुखी होंगे पर मुझे किश्मत से ये परिवार मिला है ऐसी कोई हरकत मत कीजिये की किसी को आपपर शक को और वो मुझे यहाँ से निकल दे ”
सुमन की बातो से किशन चौक पड़ा और पहली बार उसके खून की धार थोड़ी तेज हुई
“तुम्हे क्या लगता है मेरी हरकत के बारे में जानकर मेरे परिवार के लोग तुम्हे निकल देंगे और मुझे शबासी देंगे ,तुमने समझ के क्या रखा है मेरे परिवार को ,यहाँ लड़की की इज्जत के बहुत मायने है ,हा हा हम कमीने है हा हम लडकियों के साथ सब कुछ करते है पर उनकी मर्जी से ,हम ठाकुर है हम बलात्कार नहीं करते ,”
अपने परिवार के बारे में बोलकर किशन का चहरा खिल गया था और सुमन के होठो पर एक मुस्कान आ गयी थी
“अच्छा तो वो क्या था जो आप ने मेरे साथ किया “सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी वही किशन झेप सा गया
“वो वो तो तुम मुझे अच्छी लगती हो इसलिए ,माफ़ी तो मांगी ना तुमसे नजर भी नहीं मिला पा रहा हु “किशन आज कुछ बोल पाया था ,सुमन खिलखिलाकर हस पड़ी किशन ने अपना चहरा उठाकर उसके चहरे को देखा पता नहीं क्या आकर्षण था उस लड़की में जो किशन उसकी तरफ खीचा जा रहा था,उसकी पर्सनल रखेल लाली भी उससे कही जादा सुन्दर थी पर कभी कभी सुन्दरता ही सब कुछ नहीं होता उसके व्यक्तित्व में एक निखर था ,एक दृढ़ता थी जो किशन को उसकी ओर आकर्षित करती थी ,किशन उसके चहरे को ऐसे देख रहा था अब झेपने की बारी सुमन की थी उसका चहरे पर शर्म उतर आई ,उसने अपने बालो की लटो से खेलना शुरू कर दिया ,उसका सावला चहरा रंगत से भर गया था,वही उसके आँखों का काजल किशन के दिल में छुरिया चला रहा था ,आजतक कोई भी लड़की ने उसके दिल पर ऐसा जादू नहीं किया था जो उसे हो रहा था ,वो आगे बढ़ना चाहता था पर अपनी आदत से बिलकुल विपरीत वो घबरा रहा था ,उसने अपने हाथ आगे कर उसके गालो को छूने की कोसिस की पर फिर कुछ सोचकर वापस खीच लिया ,ये देख सुमन के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,
“क्या हुआ ठाकुर साहब आज आप इस कनीज को छूने से भी डर रहे है “सुमन फिर खिलखिला उठी उसका खिलखिलाना जैसे किशन के दिल में जाकर लग गया उसने सुमन के कमर को पकड़ा और अपने तरफ खीचा वो कटपुतली सी उसके तरफ खिची चली आई ,सुमन की सांसे ही रुक गयी उसकी धड़कने बाद रही थी पर वो कुछ भी नही कर रही थी बस किशन का चहरा देखे जा रही थी ,किशन ने अपना चहरा उसके चहरे के पास लाया ,किशन की सांसे उसके सांसो से टकराने लगी ,दोनों की सांसो में गर्मी का अहसास आ रहा था,उसनके होठ एक दुसरे के नजदीक जा रहे थे ,सुमन के होठ फडफडाने लगे थे ,

तभी किशन उससे अलग हो गया उसने अपना सर झटका,जैसे सुमन को भी होश आया हो ,वो लाज से गडी जा रही थी पर उसने हिम्मत करके बोला
“किशन मुझे माफ़ कर दो मेरा मतलब वो नहीं था,”
उसकी बाते किशन को समझ ही नहीं आई
“मतलब ,तुम क्यों माफ़ी माग रही हो माफ़ी तो मुझे मंगनी चाहिए ”
“मतलाब की मेरा इरादा वो नहीं था की आपको अकेले में लाकर ,,,,यानि आपको फसाऊ ,आप मुझसे नजरे चुराते थे वो मुझे पसंद नहीं आ रहा था इसलिए मैंने आपको अकेले में बुला लिया ”
किशन चौक सा गया उसने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था ,
“फसाऊ मतलब ,तुम मुझे कैसे फसा सकती हो ,मेरा मतलब है की तुमने ऐसा कैसे सोचा की मैं ऐसा सोचूंगा ”
सुमन की आखे कुछ भीग गयी थी,
“शायद आप नहीं जानते पर जब एक गरीब लड़की किसी आमिर लड़के के प्यार में पड़ जाती है तो लोग कहते है की लड़की ने लड़के हो अपने जाल में फसाया है ,आप करोडो के मालिक है और मैं आपके पैरो की जुती की तरह हु,मैं वो गलती नहीं कर सकती जो मेरी माँ ने किया था एक अमीर लड़के से प्यार ,मेरे बाप ने ही उन्हें ये कहकर छोड़ दिया की तुमने मुझे मेरे पैसो के लिए फसाया है ,”
सुमन के आँखों से पानी की धार बहने लगी किशन से ये बर्दास्त नहीं हुआ और उसने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीच लिया ,वो उसके गले से लग गयी लेकिन वो अपने को छुड़ाने की कोसिस करने लगी
“नहीं ठाकुर साहब मुझ गरीब पर दया करो मुझसे प्यार ना दिखाओ ,मैं कोई ऐसा सपना नहीं देखना चाहती जो पूरा ना हो ,”
किशन उसके चहरे को बड़े ही प्यार से अपने हाथो से सहलाता है सुमन की आँखे गंगा जमुना बहा रही थी ,वो उसकी आँखों के पानी को अपने होठो में भर लेता है सुमन एक और जोरदार कोसिस छूटने की करती है ,वो प्यार में नहीं पड़ना चाहती थी ,उसे किशन का खालिस पाक प्यार साफ साफ महसूस हो रहा था,

किशन ने उसके झटपटाते जिस्म को अपनी बांहों में भरा और उसके होठो में अपने होठ को डाल दिया ,सुमन रोती हुई कुछ देर तक उसका विरोध करती रही पर उसके प्यार भरे अहसास से वो टूट गयी और किशन के बांहों में समां गयी वो किशन के सर को पकडे उसका साथ देने लगी …………. दोनों जब अलग हुए तो दोनों के आँखों में पानी और होठो में मुस्कान थी,सुमन फिर किशन के बांहों में आकर समां गयी वो पेड़ के निचे बैठ गए ,
“किशन सोच लो प्यार की राह आसान नहीं होती ,कही तुम मेरा दिल ना तोड़ देना ,बहुत टूटी हु अब और नहीं सह पाऊँगी ,”
किशन उसके बालो में अपनी उंगलिया फिरता है
“प्यार अगर करने से होता तो क्या बात थी ,ये तो बस हो जाता है ,और जब तक मेरी सांसे है तब तक तुम्हारे साथ रहूँगा ,मुझे कसम है मेरे परिवार की मेरे बहनों की ,हां अगर ये सांसे ही अटक गयी तो …”
सुमन ने अपने उंगलिया उसके होठो पर रख दिए किशन उसे देख कर अपने आँखे से हसने लगा ,सुमन बिना कुछ कहे उसके पास आई और उसके होठो के निचले फांको को काट लिया ,
“ख़बरदार आप आईंदा ऐसा बोले तो ,”दोनों ने एक दुसरे की आँखों में देखा
“और हा मैं आपसे वो सब नहीं करूंगी ,वो सब शादी के बाद ,”सुमन इठलाते हुए बोली
“क्या सब “किशन भी उसके मजे लेने की फ़िराक में बोल पड़ा
“अरे वही सब जो आप उसदिन मेरे साथ करना चाहते थे और आज विजय भईया मेरी मेडम के साथ कर रही है ,और आप कमीने कही के कान लगा कर सुन रहे थे “सुमन ने एक मुक्का उसे मारा किशन हस पड़ा
“अरे मेरी जान उसमे बहुत मजा है ,”
“होगा पर मेरे साथ नहीं करोगे शादी से पहले ”
“तो किसके साथ करूँगा”
“किसी के साथ नहीं “किशन की आँखे चौड़ी हो गयी

“यार लेकिन मुझे तो इसकी आदत है हर सप्ताह एक दो बार तो करना पड़ता है ,जान या तो तुम मान जाओ या ………”सुमन ने अपनी आँखे बड़ी करके उसे देखा
“कितने कमीने हो आप लोग बस वही चलता है ना आपके दिमाग में ,”वो थोड़ी देर के लिए शांत हो गयी
“अच्छा मैं आपको इतना प्यार दूंगी की आपको उसकी जरुरत ही नहीं पड़ेगी और अगर पड़ेगी तो कर लेना किसी से भी मैं मना नहीं करुँगी “किशन उसे बड़े प्यार से देखता है
“सच्ची”
“मुच्ची”
किशन फिर उसे पकड़कर अपनी ओर खिचता है वही सुमन भी खिलखिलाते हुए उससे चिपक जाती है और किशन उसके होठो में अपने जीभ को घुसा देता है ,
ये दो प्यार के पंछी अपने में मस्त थे वही दो आँखे इन्हें देखे जा रही थी,घर की गेलरी से चंपा अपने बेटे को देख रही थी ,चंपा विजय और किशन के करतूतों के बारे में तो जानती थी पर आज मामला कुछ अलग था ,वो सुमन के लिए किशन के प्यार को पहचान पा रही थी वही उसके चहरे पर एक सुखद आश्चर्य के भाव आ गए थे ,की उसका कमीना बेटा आज प्यार में पड़ गया है ,वो दोनों को दुवाए देती अंदर चली जाती है ,