जिम्मेदारी (कुछ नयी कुछ पुरानी) -21

desi sex kahani अध्याय 21
सभी के जाने के बाद विजय और किशन ही बचे थे ,मेरी और सुमन मेरी के कमरे में चले गए क्योकि मेरी ने कहा की उसके सर में दर्द हो रहा है ,
“भाई आज तू अकेला ही चले जा ना ,मेरे सर में थोडा दर्द हो रहा है,”विजय ने अपना सर पकड़ते हुए कहा ,किशन ने एक बार विजय को देखा ,
“क्या बात है आपका और मेरी मेडम का सर एक साथ दर्द दे रहा है ,”विजय के चहरे में भी एक मुस्कान आ गयी ,जिसे किशन समझ चूका था ,

“भाई बचकर वो हमारी मेहमान है ,कोई उलटी सीधी हरकत मर कर देना ”
“अबे साले हरकत तो पहले ही हो चुकी है आज तो घमासान होगा ,”विजय हसने लगा ,किशन को कुछ समझ आ चूका था की बंदी इससे पट चुकी है ,
“ओके भाई ऐश करो ,मैं भी एक दो घंटे में आ जाऊंगा “किशन के जाने के बाद विजय ने जल्दी से मेरी के रूम का रुख किया वहा सुमन को देखकर वो थोडा उदास हो गया ,
“अरे विजय आओ आओ तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी ,”मेरी ने बड़े ही मादक अंदाज में उसका स्वागत किया सुमन ने दोनों के चहरे के भावों को पढ़ लिया वो नर्वस सी हो गयी ,

“साला पूरा परिवार ही ठरकी है इनका “सुमन ने मन में ही सोचा विजय आकर मेरी के साथ एक खुर्सी में बैठ गया मेरी ने एक लाल रंग की साड़ी पहने हुए थी ,जो हमेशा की तरह उसके अंगो को छुपा कम और दिखा जादा रहा था,उसके नीले कलर के ब्लाउज में उसके बड़े बड़े स्तनों को समाने की ताकत नहीं थी फिर भी बेचारी पूरी तरह फैले हुए उन्हें समाने की कोसिस कर रहे थे,अंदर कोई अन्तःवस्त्र नहीं पहने होने के कारन उसके निप्पल का उभार साफ दिख रहा था,मेरी पास की खुर्सी पर बैठी थी और उसके पैर सुमन के हाथो में था जो की निचे बैठे उन्हें दबा रही थी ,सुमन उसके एडियो की मसाज कर रही थी ,विजय ललचाई नजरो से मेरी के स्तनों को देखता है पर सुमन का लिहाज उसे कुछ करने या कहने नहीं देता ,
“ये सुमन बहुत एक्सपर्ट है कितने अच्छे से मसाज करती है की मेरे सर का दर्द पूरी तरह से खत्म हो गया ,”
विजय में सुमन को देखा वो अपने सर निचे किये हुए बड़े प्यार से मसाज कर रही थी ,विजय की बेचैनी बढ़ रही थी उससे अब इन्तजार नहीं हो रहा था,
“बहन एक काम करो तुम आराम करो मैं यहाँ मेडम के साथ हु,किसी चीज की जरुरत होगी तो तुम्हे बुला लूँगा ,”सुमन ने सर उठा कर विजय को देखा आज फिर इस परिवार के एक शख्स ने उसे बहन कहा था ,कैसा परिवार है ये कोई इतने प्यार से बहन बोलकर मान देता है तो दूसरा उसे रंडी कहकर उसकी इज्जत पर हाथ डालता है ,ऐसे उसके दिल में अब किशन के लिए कोई भी द्वेष नहीं था ,वो जानती थी की किशन अपने किये पर कितना पछता रहा है और उसके कारण ही उसके दिल में उसके लिए एक सम्मान का जन्म हो चूका था ,वो इस परिवार से प्यार करने लगी थी सभी उसे इतना प्यार और सम्मान देते है जो उसे अपनी जिंदगी में कभी नहीं मिला था ,वो तो बस आभाव की जिंदगी जानती थी ,उसका जन्म किसी रहिस आदमी के हवस का नतीजा थी जिसने उसकी माँ को माँ बनाया था और फिर पता नहीं कहा चला गया ,और उन्हें छोड़ गया तकलीफों को भोगने के लिए और उसनके हिस्से में आई बस तकलीफे…सुमन के आँखों में आंसू की कुछ बुँदे आ गयी जिसे विजय और मेरी दोनों ने देख लिया था ,दोनों ही ऐसे तो सेक्स के भूखे थे पर एक मासूम सी लड़की के आँखों से बहते हुए आंसू ने उन्हें कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया ,विजय चाहे कितना कमीना क्यों ना हो उसका दिल बहुत ही नर्म था ,वही मेरी का भी यही हाल था ,मेरी ने झुक कर सुमन के चहरे को उठाया ,सुमन को अपने गलती का अहसास हुआ और वो अपने आंसुओ को पोछने लगी ,

“क्या हुआ बहन रो क्यों रही है कुछ तकलीफ है क्या यहाँ तुझे ,”विजय ने अपना चहरा उसके पास लाते हुए कहा ,
“नहीं भईया कोई तकलीफ नहीं है बस आपलोगों का प्यार देखकर मुझे रोना आ गया ,इतना सम्मान और प्यार मुझे कभी किसी ने नहीं दिया ,कोई इतने प्यार से मुझे कभी भी बहन नहीं बुलाया जितना आप और अजय भईया ने बुलाया है ,”विजय ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और उसे सांत्वना दिया वो कुछ बोला नहीं क्योकि उसे खुद भी समझ नहीं आया की अपनी बहनों के अलावा उसने कभी किसी को इतने प्यार से कभी भी बहन नहीं बुलाया था ,वही मेरी के दिमाग में एक बात आ गयी
“और किशन ने वो तुझे बहन नहीं बुलाता क्या ,”मेरी के चहरे पर एक मुस्कान भी फ़ैल गयी ,वो जब से आई थी वो किशन और सुमन को नोटिस तो कर रही थी सुमन का उसे देखना और किशन का यु उससे भागना कुछ तो था इनके बीच ,,ऐसे बात तो विजय को भी समझ आ गयी थी क्योकि किशन ने इसका हिंट पहले ही दे दिया था ,उसने बात को सम्हाला
“कोई बात नहीं ठीक है अपने कमरे में जाओ आराम करो और हम सब हमेशा तुम्हारे साथ है ,और तू इतनी प्यारी और समझदार है की तू इस प्यार और सम्मान की हक़दार भी है “सुमन के चहरे पर एक ख़ुशी के भाव आये और वो अपने कमरे के लिए चले गयी उसके जाते ही विजय ने कमरे का किवाड़ बंद किया और मेरी के तरफ घुमा ,उसके मन में एक ही बात आई ,
“सनी लीओन इन साड़ी ”

मेरी भी मुस्कुराते हुए उसे देखने लगी और अपनी अदाओ का जाल फेकना शुरू किया ,उसने एक मादक अंगड़ाई ली और अपने उंगलियों को अपने मुह के अंदर बहार करने लगी विजय भी देर ना करता हुआ उसके पास पंहुचा और उसे उठा कर सीधे बिस्तर में पटक दिया ,
“अरे राजा इतनी क्या बेचैनी है ,”
“क्या करू मेरी रानी तुझपर टूटने के लिए तो कब से इन्तजार कर रहा हु ,”
“चल झूठे कही के ऐसा होता तो कल रात में ही आ जाता ना “रात की बात याद करके विजय को हसी आ गयी और सोनल का चहरा भी सामने आ गया उसने अपने सर को एक झटका दिया ,
“अरे जानेमन छोडो कल की बाते कल की बात पुरानी ,”विजय मेरी के ऊपर खुद पड़ता है और उसके गालो को अपने मजबूत हाथो से दबाकर उसके लाल रसदार होठो को चूसने लगता है ,मेरी को इससे ही उसके ताकत का अहसास हो जाता है और उसके मन में एक उमंग जग जाती है ,
“हाय तेरे जैसे मर्द के लिए ही तो मैं बनी हु,कब से तडफ रही थी तेरी बांहों में कुचले जाने के लिए ,”
“तो कुचल देते है ना “विजय ने अपने हाथो को उसके बड़े बड़े कबुतारो पर ले गया और उसे निचोड़ने लगा ,उसके ब्लाव्स को जैसे फाड़ता हुआ अलग किया और उन मखमली पहाड़ो को अपने दांतों से काटने लगा ,
“आह्ह्ह आह्ह अह कमीने साले काट मत ना ”
“चुप मदरचोद ,”विजय हवस के नशे में बोखला गया था उसका लिंग इतना तना हुआ था की उसे भी दर्द होने लगा था ,उसने उरोज को चुसना नहीं खाना शुरू किया उसके दांतों के निशान मेरी के दुधिया उरोजो को लाल कर रहे थे उसके निप्पल विजय के थूक से भीगे हुए तन कर विजय के दांतों में आ जाते और वो उन्हें हलके से काटकर मेरी को जन्नत में पंहुचा देता ,

“आहा हम्म आह मम मम्म आः अह्ह्ह्हह “मेरी ने जोर जोर से अपने वासना की अभिवक्ति की विजय भी अपने सर को निचे ले जाने लगा ,मेरी के सपाट पेट पर आकर रुक गया,उसकी गहरी नाभि में उसने अपने जीभ डाली और थूक से उसे गिला कर दिया ,मेरी के साड़ी को खोलने तक का सब्र विजय में नहीं था वो अपने हाथ निचे कर मेरी के साड़ी को ऊपर सरका दिया उसके ,गोर गोरे जांघ अपनी पूरी गोलइयो में अब विजय के सामने थे वो अपने जीभ से उनका स्वाद चख रहा था वही मेरी अपने आनद के शिखर पर अपनी आँखे बंद किये उसके दांतों को अपने जन्घो पर महसूस कर रही थी,उसने अपने दांत गडा दिए ,
“अआः मादर आह बहन चोओओओओ द “मेरी दर्द और लिज्जत से चीख पड़ी विजय अपने सर को उसकी साड़ी के अंदर घुसा दिया बिलकुल साफ सुथरी चिकनी और पानी से भीगी हुई रसदार मलाई की तरह उसकी चुद की पंखुडियो ने विजय को अपना रस पिने का आमंत्रण दिया ,उसकी मादक गंध विजय के लिए असहनीय हो रही थी ,वो उनपर ऐसे टुटा जैसे कोई भूखा कुत्ता हड्डी पर टूटता है ,उसने उसे मुह में भरकर अपनी जीभ से पूरा काम रस पि गया ,
“आआआआ आआआआअ आआआ आआआआअ म्म्मम्म्म्मम्म म्मम्मम्मम्म विजय आआअ आअह्ह्ह्ह विजय “मेरी के मादक लिज्जत भरी सिसकिया पुरे कमरे को भर रही थी ,विजय ने चूसते हुए ही अपने कपडे उतारे उसका लिंग ऐसे अकड़े था जैसे कोई लोहे का गर्म सरिया हो,वो जल्दी से उठा और पाने सरिये को मेरी के नर्म नर्म और गर्म गर्म छेद में घुसा दिया ,

“आअह्ह्ह्ह कितना टाइट है तेरा “विजय के मुह से अचानक ही निकल पड़ा ,ना जाने कितने दिनों बाद उसने इतने टाइट योनी में अपना लिंग घुसाया था ,
“अआह्ह्ह मेरे मालिक ,आआह्ह्ह “मेरी की एक चीख निकली और वो निढल होकर गिर पड़ी उसने अपने कामरस से विजय के लिंग को भीगा दिया था ,लेकिन खेल तो अभी शुरू हुआ था ,विजय के धक्के तो अभी अभी शुरू हुए थे ,वो अपने लिंग को बहार निकल कर पहले अच्छे से उसके चिपचिपे कामरस में भिगोता है और फिर से अपना मुसल उसके योनी में घुसा देता है ,
“आआह्ह्ह्ह विजय आह्ह्ह ”
“मेरी रंडी आज तो तुझे तबियत से चोदुंगा “विजय ने अपनी स्पीड बडाई हर धक्का रक सिसकारी छोड़ जाती थी कभी कभी विजय का ताकतवर धक्का मेरी की चीख भी निकल देता था ,
“ह्ह्ह्ह ह्ह्हम्म्म्म ह्म्म्म आह्ह आह्ह आह्ह्ह नहीं नहीं आह्ह अहहह विजय आह्ह विजय माँ माँ मर गयी आह्ह आह्ह नहीं नहीं धीरे ना कमीने आह जोर से जोर से “मेरी बडबडा रही थी
“आह्ह मदेरचोद आह्ह तेरी माँ की आह्ह “विजय भी अपनी पूरी ताकत से उसे पेले जा रहा था,

विजय उसे पलटता है ,कभी दीवाल से लगता है कभी जमीन पर ,कभी बिस्तर के कोने में ,कभी कुतिया की तरह कभी पर उठाकर ,विजय जैसे मन में आता उसे वैसे भोगे जा रहा था ,लेकिन साला झड नहीं रहा था ,मेरी को भी इसकी चिंता होने लगी की ये झड क्यों नहीं रहा है ,वो एक समय के बाद बिलकुल बेसुध सी हो गयी थी ऐसी हैवानियत भरी चुदाई का उसके लिए पहला अनुभव था ,वो कई बार झड चुकी थी और अब उसे दर्द भी होने लगा था पर वो विजय के झाडे बिना ये खेल खत्म नहीं करना चाहती थी ,विजय ने जब देखा की ये बहुत जादा दर्द में है तो किसी तरह अपने को सम्हाला ,और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,
“आआह्ह पता नहीं जान आज क्यों नहीं झड पा रहा हु ,”मेरी और विजय की सांसे उखड़ी हुई थी मेरी निढल होने के बावजूद आपने हाथो को उसके सर पर ले आती है और उसके बालो को सहलाती है ,

“जितना समय लेना है ले लो पर अब थोडा प्यार से आराम से करो ना “विजय के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है वो उसके चहरे को देखता है और उसे जोरदार किस करता है ,अब वो उठकर एक तेल की शीशी लाता है और अपने लिंग में तेल की मालिश कर उसे फिर से उसके अंदर घुसता है ,
“इससे तुम्हे दर्द कम होगा “मेरी बड़े प्यार से उसके सर को अपनी ओर खिचती है दोनों अपने होठो को एक दुसरे के होठो में समां लेते है और विजय अब धीरे धीरे अंदर बहार करने लगता है ,नहीं पता कितने देर तक जब तक की वो उसके अंदर झड नहीं जाता ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,………………..

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