पहला वाइफ स्वेप अनुभव

मेरी शादी को आज तिन साल पुरे हो गए है और ऐसे तो मैं अपने विवाहित जीवन से बहुत खुश हूँ लेकिन मेरे इस विवाहित जीवन में एक रात ऐसी थी जिसे में कभी नहीं भुला…! उस रात को मैंने अपनी बीवी अनिल की बीवी के साथ स्वेप की थी, मेरी बीवी लाख मना कर रही थी लेकिन दारु के नशे ने मुझे पागल किया था और मैं नहीं माना. मैंने अनिल की बीवी संगीता को चोदो और अनिल ने मेरी बीवी तृप्ति की तो ऐसी चुदाई की की मैं देख कर दंग रह गया आइये मैं आपको मेरे आँखों के सामने हुई मेरी बीवी की चुदाई बताता हूँ…!

31 दिसम्बर थी और मैं और अनिल, उसके घर के बरामदे में बैठ कर दारु पी रहे थे. हम दोनों व्हिस्की के दो दो पेग लगा चुके थे जबकि हम एक पेग के ही आदि थे. तभी अनिल की बीवी संगीता पकोड़े देने के लिए आई, संगीता पकोड़े रख के जा रही थी और मैं जाती हुई संगीता की गांड पर नजर गडा बैठा, मुझे पता नहीं था की अनिल की नजर मेरे तरफ है. मैं उसे देख चोंका और वोह बोला, मस्त गांड है न संगीता की…! मैंने कहा नहीं यार मैं तो सीडियों को देख रहा था. उसने कहा अरे घबरा मत अगर तुझे संगीता की चुदाई करनी है तो वोह भी बता दे, मैं उसके उपर अपने दो दोस्तों को संगीता के उपर चढ़ा चूका हूँ. मैं हंसने लगा तभी अनिल ने संगीता को आवाज लगाईं, “संगीता, इधर आना बेबी…!”

संगीता आई, और अनिल बोला, “अनिरुद्ध, तुम्हारे साथ सोना चाहता है, मैंने उसे हाँ कह दिया है…”

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संगीता मेरे आश्चर्य के बिच हंसने लगी और बोली, “अरे क्यों मजाक कर रहे तो चढ़ गई है क्या, अनिरुद्ध जी कभी ऐसा नहीं कहेंगे ” उसकी नजर मेरे लंड की तरफ थी और मुझे लगा की अनिल की बात सही है, मैंने आज तक ऐसा सुना थी की मर्द अपनी बीवियां दुसरो को चोदने देते है लेकिन यह तो सच दिख रहा था. संगीता मुझ से प्यार भरी नजरे मिला के चली गई, मुझे लगा की मुझ से चुदाई का शायद उसका भी अरमान होगा. अनिल ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और बोला, “चलो आज रात हम लोग बीवी बदल लेते है, तूम संगीता कके साथ और मैं भाभी के साथ….!”

यह सुनके में सन्न रह गया, लेकिन जब मैंने दिमाग में संगीता के मटकते कुले याद किये तो उससे चुदाई का मोह मैं दूर ना कर सका. मेरी बीवी तृप्ति एक छोटे से गाँव से थी और वो लोग पति को देवता मानते थे. मुझे पता था की तृप्ति जरुर मान जाएगी. मैं घर के लिए निकला और अनिल बोला, “शाम तक ही कुछ करते है, मैं संगीता को चूत के बाल साफ़ करने को कहे देता हूँ तुम्हारे लिए…! “ मैं सीढियों की तरफ जा रहा था की संगीता मुझे दिखी किचन में, वह झुकी थी और उसकी वही गोल गोल गांड मेरे लंड को उठाने लगी. मैं घर गया और तृप्ति को यह बात बताई, वह सन्न रह गई और बोली, “नहीं नहीं ऐसा नहीं होंगा मुझ से आप प्लीज़ उलटी सीधी बातें ना करे, कह दीजिए की आप मजाक कर रहे है…!” मेरे उस दिन के शराब के नशे को में कैसे भूलूंगा जिस के प्रभाव में मैंने तृप्ति को कहा की अगर वोह अनिल से नहीं चुदवाएगी तो में उसे कभी नहीं चोदुंगा….!

शाम के कुछ 6 बजे थे और संगीता और अनिल मेरे घर पर आये, अनिल ने मुझे फोन कर के कहा था. तब भी में बियर की बोतल ले के बैठा था, जब वो लोग घर आये. तृप्ति वही बैठी थी और उसके चहेरे के होश उड़े थे. संगीता मेरे पास वाली कुर्सी में बैठी हुई थी. अनिल ने मुझे आँखों से इशारा कर के पूछा की क्या मैं तृप्ति को बताया है या नहीं. मैंने हकार में मस्तक हिलाया. अनिल ने संगीता को इशारा कर दिया और संगीता के मुहं पर अलग ही खुशी थी. मुश्किल थी की पहल कोन करेगा, पर संगीता चुदाई की शौक़ीन और इस काम में माहिर लगती थी क्यूंकि वह सीधे उठ के बोली, “अब कितना पिएँगे आप, अनिल की तरह आप भी न बस दारु के दुश्मन है….!”

उसने आके मेरे हाथ से दारु की बोतल ली और ऐसे एक्टिंग से अपने चुन्चो पर मेरा हाथ रखा की ऐसा लगे की मैंने उसके चुंचे मसले है. उसके चुंचे टाईट थे और उनमे अजब गर्मी थी, अनिल यह देख मन ही मन में हंस रहा था. तृप्ति भी देख रही थी, अब मैंने सोचा चलो सब ने देख लिया तो अब क्या प्रॉब्लम है. मैंने संगीता का हाथ पकड के उसको अपनी गोद में बिठाया और उसके चुन्चो को मसलना चालू कर दिया. संगीता का हाथ मेरे पेंट के उपर से ही मेरे लंड को दबाने लगा. अनिल अब तृप्ति के पास खड़ा था और उसने तृप्ति को छूने के लिए हाथ लंबा किया. तृप्ति पीछे हटी और अनिल बोला, “अरे भाभी घबराइये नहीं, यह तो बस हम चारो के बिच रहेगी बात, अनिरुध्द को संगीता पसंद ठिया और मुझे आप जैसे सिम्पल सोबर औरते पसंद है तो बस एक छोटी सी हेरफेर ही है.” उसने अब तृप्ति के कपडे उतारने शरु कर दिए. तृप्ति ने मेरी तरफ देखा और उसमे मुझे एक अलग ही आग नजर आई. तृप्ति खड़ी हुई और अनिल उसके कपडे निकाले उसके पहेले वह खुद ही नंगी हो गई, अनिल भी पूरा नग्न हो गया और उसने तृप्ति को गोद में बिठा लिया.

संगीता ने इधर मेरा लंड अपने मुहं में कब ले लिया मुझे पता ही नहीं चला, वह शायद मुझ से चुदाई करने के लिए बहुत उतावली थी, सच कहूँ तो मुझे संगीता की गांड भा गई थी और मुझे उसके कूलो पर दांत गड़ाने की फेंटसी सी थी, अनिल ने मुझे उसकी गांड देखते केवल आज पकड़ा लेकिन मैं जब भी संगीता गुजरती तो उसकी गांड चोरी छुपे जरुर देखता था. संगीता लंड को मस्त चला चला के चूसने लगी और साथ में मेरी झांघो पर अपने हाथ भी फेरने लगी, मैं बहुत उत्तेजित हो चूका था. मैने लंड उसके मुहं से निकाला और उसे वही सोफे पे लेटाया. संगीता अपने चूत को खोल कर उसमे लंड लेने के लिए तैयार हो रही थी लेकिन मैंने तो उसे उल्टा कर दिया और उसकी गांड के उपर अपने दांत गड़ाने लगा, संगीता हिलने लगी और बोली, “अरे बहुत गुदगुदी हो रही है, प्लीज़ आहिस्ता से मुझे काटे….आह अह्ह्ह आहा हा हा….” वो गुदगुदी होने के वजह से हंस रही थी.

तृप्ति की चूत में अनिल का लंड पेलन करने लगा था और तृप्ति इस बड़े तगड़े लंड को मुसीबत से चूत के अन्दर पूरा ले पा रही थी. अनिल का लंड कम से कम 9 इंच लम्बा और 2-2.5 इंच चौड़ा था जो एक हब्सी के लंड से कम नहीं था, मेरी बीवी की चूत फट रही थी वोह भी मेरे सामने और मैं किसी और औरत की चुदाई में व्यस्त था. संगीता अब लंड हाथ में लेकर खडी हुई और वही उसने डौगी स्टाइल से अपने घुटने सोफे पर रख दिए. मेरे लंड को उसने अपनी चूत की तरफ दोरा और उसे चूत के छेद पर रख दिया. मैंने एक झटका दिया आने चूत को लंड से तृप्त कर दिया. मैं अब संगीता की कस के चुदाई करने लगा और मेरे हाथ उसकी गांड के उपर ही थे, मैं उसकी गांड पर हाथ के चमाटे लगा रहा था और संगीता ओह आह ओह आह ऐसा बोल रही थी. अनिल ने तृप्ति को जोर जोर से झटके दिए थे जिसकी वजह से तृप्ति चीख रही थी पर लंड उस पे जरा भी दयावान नहीं था और उसकी चूत को पेलता ही गया.

संगीता की गांड पर मैंने थूंक मला और इस गांड की फेंटसी पूरी करने के लिए उसके गांड के छेद में लंड दे दिया, मेरे हिसाब से उसकी गांड सख्त होनी चाहिए थी लेकिन उसमे मेरा लंड आसानी से घुस गया और संगीता गांड हिला हिला के मरवा रही थी लंड से. मेरी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंची और में संगीता की गांड में ही झड़ गया. संगीता और मैं दोनों खड़े हुए और कपडे पहनने लगे, मैं अब अनिल को अपनी बीवी की चूत लेते हुए देख रहा था. तृप्ति की साँसे फूली हुई थी इस तगड़े लंड के प्रहार खा खा के उसकी चूत के इर्दगिर्द लाल हो गया था और अनिल उसे अब साइड में लिटा के चुदाई कर रहा था. यह चुदाई से तृप्ति की चूत जैसे की फट रही थी और वह अभी भी वैसे ही चीख रही थी, संगीता मेरी तरफ देख के बोली, “अनिल का लंड तो टारजन है इसके आगे तो मनु की बीवी रमिला भी थक गई थी, जब की वह कितनी मांसल और मोटी है…अनिल का लंड ही ऐसा है…सच कहेती हूँ तृप्ति आज की चुदाई जिन्दगी भर याद करेगी.” मुझे पहेली बार लगा की मैंने गलत किया है लेकिन अब देर हो चुकी थी क्यूंकि में संगीता की चूत और गांड दोनों ले चूका था इसलिए अगर मैं कहेता की तृप्ति को छोड़ दो तो बात सही नहीं थी मेरी.

तृप्ति अगले दस मिनिट तक वही तीव्रता से चुदती रही, लेकिन अनिल ने इस दस मिनिट में उसे तिन अलग अलग मुद्राओ में लंड दिया था, चोथी मुद्रा डौगी तृप्ति के लिए बहुत असह्य थी इसलिए उसे इन्होने अधुरा छोड़ा था. मुझे तृप्ति के माथे पर पसीने की लहरे दिख रही थी और उसकी वही स्पीड ससे चुदाई होती रही. आखिर कार अनिल का टारजन छाप लंड शांत हुआ और उसने तृप्ति की योनी में अपना वीर्य छोड़ दिया…..! तृप्ति इतनी थक गई थी के वह वहीँ लेट गई बिना कपडे पहने, अनिल और संगीता 10 मिनिट बाद घर गए और पूरा हफ्ता मैं तृप्ति से आँखे नहीं मिला पाया और वह दो दिन ठीक से चल नहीं सकी….! मैंने अब संगीता की गांड ककी तरफ देखना छोड़ दिया है और केवल तृप्ति का ही बन के रह गया हूँ, अगर मेरे हाथ में होता तो मैं इस दिन को अपने भूतकाल से मिटा देता….!