माँ के बाद बेटी की बारी

मैं राजेश एक कंपनी में काम करता हूँ और मेरे साथ लड़कियाँ और औरतें भी काम करती हैं. मैंने एक माँ और बेटी दोनों को एक साथ तो नहीं पर एक ही बिस्तर पर चोदा है. वो बात अलग है कि मेरी शादी के बाद दोनों अब मुझसे नहीं चुदवाती.

बात उस समय की है जब मैं किरण नाम की 38 साल की औरत के साथ नागपुर गया और एक होटल के कमरें में रुका. पता नहीं क्यूँ किरण ने दो कमरें नहीं लिए, उसकी उम्र 38 थी और मेरी करीब 28लेकिन रात में जब दोनों एक ही बिस्तर पर सोए तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया और मैंने उसकी बाँहों में हाथ डालते हुए बोला- आ जाओ!

वो बोली सो जाओ चुपचाप! मैं यहाँ यह सब नहीं करने आई हूँ, मेरे तीन बच्‍च्‍ेा हैं.

मैंने बोला- पता है! और यह भी पता है कि तुम्हारा पति तुम्हें नहीं चोदता किसी और औरत के साथ रहता है. आज की रात रंगीन बना लो क्योंकि अगर किसी को यह पता चला कि हम एक ही बिस्तर पर सोये थे तो वह यही मानेगा कि तुम चुदी हो मुझसे! इससे अच्छा है कि चुदवा लो!

वो नहीं मानी लेकिन मैं ऊपर चढ़ गया. उसने मुझे नीचे उतार दिया.

फिर मैंने कहा- मेरा लण्ड खड़ा हो गया है, इसका क्या करूँ?

बोली- बाथरूम में जाकर निकाल कर सो जाओ.

लेकिन मैंने सोचा- अगर बगल में औरत है और लण्ड खड़ा है और उसकी चुदाई नहीं की तो मेरा मर्द होना बेकार!

थोड़ी देर बाद फिर उसके ऊपर चढ़ गया. वो इस हमले के लिए तैयार नहीं थी मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी.

वो तड़प उठी और उसने समर्पण कर दिया.

मैंने भी फटाफट अपना लण्ड उसकी चूत में डाला लेकिन लगभग तुरंत ही झड़ गया क्योंकि यह सब काफी देर से चल रहा था.

खैर उस रात मैं सो गया. फिर दूसरे दिन दोपहर में उसको पूछा- जब चुदना ही था तो इतने नखरे क्यूँ किये?

बोली- मेरे पति मुझे दस साल पहले छोड़ चुके हैं, तब रोज चुदती थी, फिर चुदाई बंद हो गई क्यूंकि वो दूसरी के पास चला गया. न चुदने का दर्द तुम नहीं समझ सकते.

खैर मेरे और उसके बीच में तय हुआ कि जब तक मेरी शादी नहीं होगी उसको चोदता रहूँगा.

उस दोपहर मैंने बोला- अभी चोदूँगा नहीं, तुम मेरा लण्ड चूस कर और हाथ से हिला कर झाड़ दो.

उस दिन के बाद मैंने उसको दर्जनों बार चोदा और हर तरह से चोदा, ब्लू फिल्म दिखा कर बिल्कुल वैसे ही चोदा, वो एकदम तजुर्बेकार थी, गाण्ड भी मरवाती थी.

मेरा लौड़ा मुँह में लेकर ऐसे चूसती थी जैसे बबल गम हो.

यह सब करीब दो महीने चला, जब मन करता उसको किसी होटल ले जाता और चोदता. वो भी मुझे बहुत मानती थी और अपनी झांटें हमेशा मेरे लिए साफ रखती थी और जब भी मौका मिलता मुझसे चुदवा लेती.

वो पंजाबी थी और पंजाबी की शादी थोड़ा जल्दी होती है इसलिए उसकी सबसे बड़ी लड़की की उम्र भी करीब 18 हो गई थी, वो भी साली एक नंबर की माल थी. मुझे पता ही नहीं चला वो कब सेट हो गई. उसके घर अकसर आना जाना होता था, माँ सोचती थी कि मैं उसके लिए आया हूँ और वो सोचती थी कि उसके लिए!

उसकी माँ को रत्ती भर भी शक नहीं था.

हम लोग एक बार किसी खास कार्यक्रम में गए, तब तक कुछ खुलापन नहीं था, लेकिन वो ऐसे चूची चिपका कर बैठी कि मेरी पीठ को पता चल गया कि उसका ब्रा का साइज़ वही है जो उसको माँ का!

जहाँ गए थे, वहाँ कार्यक्रम शुरू होने में देर थी इसलिए हम दोनों एक पार्क में चले गए. घूमते-घूमते उसके हाथ को पकड़ा और कोई आपत्ति नहीं हुई तो मेरी हिम्मत बढ़ी और फिर में बाद में एक रेस्टोरेंट ले गया जहाँ उसने अपना सर मेरा कंधे पर रख लिया तो मैं आसमान में उड़ने लगा कि चलो एक कुंवारी चूत का भी इन्तजाम हो गया!

लेकिन बाद में पता चला कि वो साली 18 की उम्र में भी चुदी हुई निकली. रेस्टोरेंट में कुछ खास नहीं हो पाया, फिर एक साइबर कैफे लेकर गया और केबिन बंद करने के बाद सबसे पहले मैंने उसके टॉप तो उठाकर चूचियाँ चूसी और बोला- आई लव यू!

वो शायद इसी की इन्तजार में थी, उसने मुझे अपने बदन से चिपका लिया.

तभी उसकी मम्मी का फ़ोन मेरे पास आ गया मैंने अलग जाकर उसको बोला- आ रहा हूँ!

उसकी मम्मी ने चुदने की इच्‍छा जाहिर की और उसको चोदना पड़ा. खैर वो दिन चला गया और फिर सिर्फ 4-5 दिन ही बीते थे कि उसकी मम्मी बाहर चली गई तो उसने मुझे फ़ोन किया- अगर मेरे साथ समय बिताना चाहते हो तो यहाँ चले आओ!

वो उस समय बारहवीं में पढ़ रही थी, खैर मैं पहुँचा उसकी बताई हुई जगह पर!

वो अपनी एक सहेली के यहाँ जाकर अपनी यूनीफार्म बदल कर सेक्सी से कपड़े पहन कर आई थी, मैं उसको मूवी लेकर गया जहाँ मैंने मौका देखकर उसकी चूत में ऊँगली डाल दी. वो तड़प उठी.

फिर एक सुनसान जगह ले जाकर उसकी चूची खूब चूसी लेकिन चुदाई का जुगाड़ नहीं बन पाया. अब मुझे उसकी मम्मी के कॉल से उलझन होने लगी क्यूंकि अगर 18 साल की चूत का इन्तजाम हो तो 38 साल वाली को कौन पूछता है.

एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था, उसको मैंने एक साइबर कैफे में बुलाया और ब्लू फिल्म दिखाई. फिर उसको अपने घर का पता समझा कर चला आया.

थोड़ी देर बाद उसने मेरे घर का दरवाज़ा खटखटाया, मैंने फटाफट उसको अपने कमरे में अन्दर किया लेकिन बाहर देखा तो एक पड़ोस के लड़के की नजर उस पर थी क्यूंकि वो बहुत खूबसूरत थी.

एक बार तो इज्जत का सोच कर सोचा कि जाने दूँ, लेकिन आगे कोई गर्म लड़की चुदने को तैयार हो तो उसको न चोदना बेवकूफी होगी, यह सोच कर तुरन्त एक लम्बा चुम्बन लिया, वो पहले से गर्म थी, मैंने तुरन्त पैंट खोल कर लण्ड बाहर निकाला और मेरे बिना कहे उसने चूसना शुरू कर दिया.

मैंने उसको कपड़े उतार कर नंगी किया और उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू की.

उसने चीख कर कहा- जल्दी करो!

मैंने भी आनन-फानन अपना लण्ड उसकी चूत में लगा दिया और चार तेज झटको में पूरा लण्ड अंदर था.

वो चिपक-चिपक कर चुदवा रही थी और उसकी चूत में कोई दर्द नहीं हुआ. मुझे समझ आ गया कि खेली खाई है!

फिर कुछ धक्के मार कर मैं अलग हो गया.

उसने पूछा- टॉयलेट कहाँ है?

अपनी चूत साफ करके आई और बोली- मुझे जाना है!

मैंने उसे दूसरे दरवाजे से निकाल कर एक जगह बताई कि वहाँ पहुँचो, मैं आता हूँ!

फिर मैंने साफ़ बोल दिया कि अभी मजा नहीं आया है, मुझे तुम्हें ढंग से चोदना है!

वो बोली- कभी मना किया है क्या?

उसके यह कहते ही मुझे उसकी मम्मी के शब्द याद आ गए, वो भी यही बोलती थी- तुम्हें चोदने से मना किया है क्या?

मैं एक बात बताना भूल गया कि मेरी उसकी मम्मी के साथ फ़ोन पर सेक्स की बातें होती थी, मैं अपने घर पर फ़ोन पर होता था, वो अपने बिस्तर पर अपनी चूत में उंगली डालती और मैं अपना लण्ड पकड़ कर खूब गन्दी गन्दी बातें करते थे.

वही मैंने उसकी बेटी के साथ भी शुरू कर दिया.

एक दिन मैंने ड्रिंक किया और मेरी चुदाई की इच्छा हुई, रात के करीब साढ़े दस बजे थे, मैंने उसको फ़ोन किया कि मैं आ रहा हूँ तुम्हारे घर!

उसने साइड वाला गेट खोल कर अन्दर बुला लिया, उस दिन उसने वही नाइटी पहनी थी जिसको पहनकर उसकी मम्मी मुझसे चुदवाती थी.

मैं नशे में था इसलिए तुरन्त उसको नीचे गिरा दिया और लण्ड निकाल कर बोला- चूस!

उसने भी बिना देर किये मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया. उस दिन पता नहीं मेरा लण्ड मोटा हो गया था या उसकी चूत छोटी कि चोदने में उसको बहुत मजा आया. फिर तो उसको भी फ़ोन सेक्स की आदत हो गई और जब उसकी मम्मी घर पर ही होती तो भी वो कहीं एकान्त में जाकर मुझे मिस कॉल करती और और फिर हम दोनों फ़ोन सेक्स करते.

एक दिन की बात है, हम दोनों फ़ोन सेक्स कर रहे थे, उसका मन चुदने को हो गया, बोली- आ जाओ!

मैंने कहा- रात का एक बज रहा है, कैसे आ सकता हूँ?

बोली- मैं नहीं जानती! आना ही होगा!

भयंकर सर्दी के दिन थे, मैंने जैकेट पहनी और चल दिया उसके घर की ओर!

फिर घर के बाहर जाकर मिस कॉल की तो उसने गेट खोला और तभी चौकीदार की सीटी की आवाज!

मुझे छुपना पड़ा, फिर जब वो चला गया तो उसके नाना जग गए, उसने खांसने की एक्टिंग की और बोली- खांसी आ रही है, पानी पीने उठी थी.

फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपने बिस्तर पर ले गई.

उस बिस्तर पर उसकी छोटी बहन भी सो रही थी.

एकदम से उसने मेरी जैकेट उतारी और मुझसे चिपक गई. मैंने उसकी नाइटी खिसकाई तो देखा कि उसने पैंटी नहीं पहनी है.

मैंने पूछा- क्यूँ नहीं पहनी?

तो बोली- तुमसे बात करते समय उंगली मेरी चूत में थी!

फिर मैंने कहा- चलो दूसरे कमरे में!

बोली- नहीं, यहीं करो! यह कुम्भकरण है, सोती रहेगी.

मैंने बोला- नहीं, तुमको उस दिन जब चोदा था, तब तुम बहुत चीख रही थी, आज अगर चीखी तो गड़बड़ होगी.

बड़ी मुश्किल से उसको दूसरे कमरे में ला गया, जाते ही वो झपट कर मेरे सारे कपड़े उतार दिए और फिर मेरे लण्ड को लेकर चूसने लगी, कभी मेरे लण्ड को वो हाथ में लेकर सहलाती, कभी अपनी चूची में लगाती कभी मुँह में अन्दर तक लेकर चूसती.

सच बोलूं तो ज़िन्दगी में पहले बार इतना मजा आ रहा था.

फिर मैंने झपट कर उसको नीचे लिटाया और अपना मुँह रख दिया उसकी चूत पर, चूत पर हल्के-हल्के से बाल आने शुरू हो गए थे, उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रख कर मैं काफी देर तक चूत चाटता रहा और वो सिसकारती रही. फिर मैंने अपना लण्ड जो चूत पर लगा कर जोर से झटका मारा और पूरा अन्दर डाल दिया. उसने नीचे से उछलना शुरू किया और मैंने ऊपर से धक्का देना!

थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया लगभग 15 मिनट तक मैं लेटा रहा और फिर कपड़े पहनने शुरू किये तो वो मेरा लण्ड पकड़ कर बोली- अभी नहीं! और फिर ऊपर से आकर अपनी चूत को मेरे लण्ड पर रखा. लेकिन रात काफी हो चुकी थी और मैं कपड़े पहन कर चला आया.

उसके बाद कभी मौका नहीं मिला, न उसको, न उसकी माँ को चोदने का.

अब उसकी सबसे छोटी बहन जो 18 की हो रही है (उस समय वो १4 की थी) पर मेरी नजर है और मुझे पता है कि उसको भी मैं किसी न किसी दिन चोदूँगा क्यूंकि वो सब की सब चुदक्‍कड़ हैं.