छोटे भाई की पत्नी की गांड को तबेला बनाया

desi sex stories

मेरा नाम मनोज है, मैं बड़ौदरा का रहने वाला हूं। मेरे पिता का एक बहुत बड़ा कारोबार है और हम तीनों भाई उसे संभालते हैं। हम तीनों के बीच में ही बहुत अच्छा प्रेम है और हम लोग बहुत ही अच्छे से भी रहते हैं। मेरे बड़े भाई संकेत की शादी हो चुकी है और उसकी पत्नी का व्यवहार हमारे घर पर कुछ अच्छा नहीं रहता परंतु मेरे पिता के डर से वह कुछ नहीं बोलते। मेरी मां का देहांत भी काफी वर्षों पहले ही हो चुका है जिस वजह से मेरे पिताजी घर का सारा कुछ हिसाब किताब देखते हैं और हम लोग भी उनसे बहुत डरते हैं क्योंकि उनका स्वभाव थोड़ा गुस्सैल किस्म का है। उन्हें ही छोटी छोटी चीजों में गुस्सा आ जाता है इसलिए हमें उनसे बहुत ही डर लगता है। बचपन से ही हम तीनों भाई उनसे बहुत डरते थे। उन्होंने हम तीनों भाइयों को बहुत ही अच्छी शिक्षा दी। उसके बाद उनका काम बहुत ज्यादा बढ़ता गया जिस वजह से हम तीनों को ही काम संभालना पड़ा और हम तीनों अच्छे से अपने पिता का काम संभाल रहे हैं।

मेरी शादी को भी दो वर्ष हो चुके हैं और मेरी पत्नी सारीका भी घर में अच्छे से रहती है क्योंकि उसका व्यवहार बहुत ही शांत किस्म का है इसलिए वह ज्यादा किसी से भी बात नहीं करती। मेरी भाभी और उसके बीच में बिल्कुल भी नहीं बनती लेकिन फिर भी वह दोनों मेरे पिता के डर से चुप हो जाते हैं। वह दोनों एक दूसरे को कभी भी कुछ नहीं कह पाते, यह बात मेरे पिता को भी अच्छे से मालूम है कि उन दोनों के बीच में बिल्कुल भी नहीं बनती परंतु फिर भी वह लोग बहुत ही अच्छे से मेरे पिता के सामने अपने आप को दिखाने की कोशिश करते हैं। मेरे छोटे भाई अजय की अभी तक शादी नहीं हुई है। मेरे पिता एक दिन कहने लगे अजय की भी शादी करनी पड़ेगी। उन्होंने इस बारे में जब बात की तो वह कहने लगा कि पिताजी मैं अभी शादी नहीं करना चाहता इस बात से मेरे पिताजी बहुत गुस्सा हो गये और कहने लगे कि अब तुम्हारी उम्र हो चुकी है और तुम क्यों शादी नहीं करना चाहते हो।

उसके बाद वह कुछ भी नहीं कह सका और पिता जी ने उसके लिए लड़की देख ली, हम लोग भी लड़की को देखने के लिए गए हुए थे। लड़की का नाम आरुषि है, वह भी दिखने में बहुत ही अच्छी और स्वभाव से अच्छी प्रतीत हो रही थी इसीलिए मेरे पिताजी ने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी, वो कहने लगे कि हम लोग रिश्ते के लिए तैयार हैं और उनकी तरफ से भी अब हां हो चुकी थी इसीलिए कुछ समय बाद उन दोनों की भी सगाई हो गई। अब वह दोनों भी अक्सर फोन पर बात कर लिया करते थे और कभी उन दोनों को समय मिलता तो वह लोग मिल भी लेते थे क्योंकि आजय मेरे साथ ही दुकान में रहता था इसी वजह से मुझे उसकी सब बात पता चल जाती थी और वह अक्सर आरुषि को मिलने के लिए चला जाता था। यह बात मेरे पिताजी को भी मालूम थी लेकिन वह अजय को कुछ भी नहीं कहते थे क्योंकि अब अजय भी बड़ा हो चुका है और वह भी पूरा काम संभाल लेता है। हम लोगों का कारोबार बहुत ही अच्छे से चल रहा था और हमारा घर भी मेरे पिताजी की वजह से एक डोर में बंधा हुआ था। हम लोग बहुत ही अच्छे से भी रहते थे और हमारा काम भी तरक्की पर था लेकिन उसी समय मेरे पिता की भी तबीयत खराब होने लगी, हम लोग उन्हें डॉक्टर के पास ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि अभी इन्हें आराम करने दीजिए और इन्हें किसी भी प्रकार का कोई काम मत करवाइए, क्योंकि वह दुकान में आ जाते थे इसीलिए वह पूरा काम संभालते थे लेकिन अब हमने उन्हें घर पर ही रहने के लिए कहा। वह हमारी बात मान गए और घर पर ही रहते थे लेकिन घर पर उनका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था और वह बीच बीच में दुकान में आ ही जाते थे और हम से काम के बारे में पूछ लेते थे कि काम किस प्रकार से चल रहा है, हम उन्हें कहते कि आप घर में आराम कीजिए आप बिल्कुल भी इसकी चिंता मत कीजिए कि हम लोग किस प्रकार से काम देख रहे हैं। उसी दौरान अजय की भी शादी नजदीक आने वाली थी और हमें उसकी शादी की भी तैयारी करनी थी।

हम लोगों ने उसकी शादी की तैयारियां शुरू कर दी और मेरे पिता भी हम शादी के लिए हम लोगो की बहुत मदद कर रहे थे क्योंकि वह हमारे सारे रिश्तेदारों को पहचानते हैं इसीलिए उन्होंने हमें कहा कि तुम्हें कहां-कहां कार्ड पहुंचाने हैं, उनके नाम तुम मुझसे ले लेना और उसके बाद तुम उनके घर पर कार्ड पहुंचा देना। अब हम लोगों ने सब रिश्तेदारो के घर पर कार्ड पहुंचा दिए और शादी की भी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थी, जो थोड़ी बहुत तैयारियां बची हुई थी वह सब हमने पूरी कर ली और अब जब हमारे घर की सब तैयारी हो गई तो अजय की भी शादी बहुत ही धूम-धाम से हुई। मेरे पिताजी ने उसकी शादी में बहुत खर्चा किया क्योंकि हमारे घर में आखरी शादी थी और वह चाहते थे कि शादी में किसी भी प्रकार से कोई कमी ना रहे। उन्होंने बहुत ही अच्छे से सारी चीजें अरेंज करवाई थी और हमारे रिश्तेदार भी शादी से बहुत ही खुश थे। वह लोग भी बहुत इंजॉय कर रहे थे और सब लोग मेरे पिता की भी काफी तारीफ कर रहे थे कि उन्होंने किस प्रकार से अपने घर को संभाला, क्योंकि मेरी मां का देहांत बहुत पहले हो चुका था इसलिए सब लोग मेरे पिताजी की बहुत तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि उन्होंने ही इतने सालों से घर को एक डोर में बांधे रखा है। अब जब अजय की शादी हो गई तो सब रिश्तेदार अपने घर लौट चुके थे और हम लोग भी अपने काम में लगे हुए थे। पिता जी घर पर ही रहते थे क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती इस वजह से वह घर पर ही रहते थे।

अजय की पत्नी का व्यवहार भी अच्छा ही था क्योंकि वह भी नई नई हमारे घर पर आई थी इसीलिए वह भी ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी लेकिन मेरी भाभी का व्यवहार पहले से ही खराब था और वह हमेशा ही मेरी पत्नी और आरुषि को नीचा दिखाने की कोशिश करती रहती थी। मेरे पिता हमेशा ही मेरी भाभी को डांटते रहते थे और उसके बाद वह अपने कमरे में जाकर बैठ जाती थी। अब मेरे पिता की तबीयत भी बहुत बिगड़ने लगी और हम उन्हें हॉस्पिटल ले गए। जब हम उन्हें हॉस्पिटल ले गए तो डॉक्टर ने कहा कि अब उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। अब वह काफी दिनों तक हॉस्पिटल में ही एडमिट थे और हम लोग उनकी देखभाल कर रहे थे। कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई और उसके बाद हम तीनों भाइयों को बहुत ही दुख पहुंचा लेकिन हम तीनों को अब काम भी संभालना था इसीलिए हम तीनों काम में ध्यान देने लगे लेकिन हमारे घर का माहौल खराब होने लगा था। अजय की पत्नी भी अब बहुत ज्यादा झगड़ा करने लगी और हमारे घर में अब इतने ज्यादा झगड़े होने लगे कि हम तीनों भाइयों को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि हमें क्या करना चाहिए क्योंकि पहले हमारे पिताजी इन सारी चीजों को संभाल लिया करते थे लेकिन अब हमारे पास कोई भी रास्ता नहीं था। मेरी भाभी ने एक दिन कहा कि अब तुम तीनों भाइयों को अपनी जायदाद का बंटवारा कर लेना चाहिए और आरुषि भी उनके साथ ही थी। वह भी कह रही थी कि अब तुम्हें घर का बंटवारा कर देना चाहिए। मेरी पत्नी चुपचाप सुन रही थी और जब मुझे इस चीज के बारे में पता चला कि यह सब आरुषि ने किया है तो मुझे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि मेरी भाभी मुंह से तो बहुत ज्यादा तेज थी लेकिन वह घर का बंटवारा कभी भी नहीं चाहती थी। यह सब आरुषि ने किया था मुझे इसकी जानकारी हो चुकी थी।

मुझे उस पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था और मेरा मन कर रहा था कि मैं उसकी गांड मारू एक दिन वह नहा रही थी और उस दिन घर पर कोई भी नहीं था। मेरी पत्नी अपने कमरे में थी मैं जैसे ही उसके कमरे में गया तो वह अपने बाथरूम से बाहर निकल कर आई उसने तोलिया लपेटा हुआ था मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके तोलिए को फेंक दिया। अब मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया और उसे अपनी बाहों में समा लिया। वह छटपटाने लगी वह मुझसे छुटने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। उसके होठों को मैंने किस करना शुरू कर दिया अब वह भी मेरे आगे अपने आप को समर्पित कर चुकी थी। मैंने जैसे ही उसके बिस्तर पर उसे पटका तो वह कहने लगी कि आप मेरी चूत मार दीजिए। मैंने उसके मुंह में अपने लंड को डाल दिया वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी। उसने बहुत देर तक मेरे लंड को अपने मुंह में रखा हुआ था।

मैंने उसकी योनि को चाटते हुए जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो उसकी योनि बहुत ही टाइट थी और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और उसे बड़ी तेज धक्के मारता जाता लेकिन मेरा मन भर नहीं भर रहा था। मैंने उसे उल्टा लेटाते हुए उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी गांड में लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी और छटपटाने लगी। मैंने भी उसके चूतड़ों को कसकर पकड़ लिया और उसे बड़ी तेजी से मैं धक्के मारने लगा। मैंने उसे इतनी तेज तेज झटके मारे कि उसकी चूतड़ों से खून निकलने लगा और मुझे बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसे धक्के मार रहा था। कुछ देर बाद वह भी पूरे मूड में आ गई और अपने चूतड़ों को मुझसे मिलाने लगी लेकिन मैंने उसे इतनी तीव्र गति से झटके मारे की मेरा वीर्य उसकी गांड के अंदर ही जा गिरा और जब मेरा माल गिरा तो मैंने उसे कहा कि तुमने हमारे घर को बर्बाद करके रख दिया है। मैं उसकी गांड हमेशा ही मारता हूं और वह मुझसे अपनी गांड मरवाना बहुत ही पसंद करती है इसीलिए वह चुपचाप रहती है और किसी से भी कुछ बात नहीं करती।