तुम मेरा ध्यान रखोगे?

Antarvasna, kamukta मैं बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं गांव में हमारी खेती भी बहुत कम है जिस वजह से मुझे शहर की तरफ रुख करना पड़ा मैं जब शहर आया तो दिल्ली में मुझे एक छोटी सी नौकरी मिल गई मैं फैक्ट्री में काम किया करता जिसके बदले में मुझे महीने में तनख्वाह दी जाती लेकिन उस तनख्वा से मेरा गुजर बसर करना मुश्किल ही था। एक दिन मुझे मेरी मां का फोन आया और वह कहने लगी सोनू अब तुम्हारी शादी के लिए हम लोग लड़की देखने लगे हैं मैंने उन्हें कहा लेकिन आप लोग इतनी जल्दी क्यों कर रहे हैं तो वह कहने लगे अब तुम्हारी उम्र हो चली है और अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए। मैंने भी उनकी बात का सम्मान किया और मैं शादी करने के लिए तैयार हो गया मैं अपने गांव चला गया और कुछ ही दिनों में मेरी शादी हो चुकी थी सब कुछ बड़े ही अच्छे तरीके से हुआ और जब मेरी शादी हुई तो मैं वापस दिल्ली चला आया मैं अपने काम को पूरी मेहनत से किया करता मेरी पत्नी गांव में ही थी। मैं जब भी बड़ी गाड़ियां और बड़े-बड़े कर देखता तो मैं सोचता था कि कभी मैं भी ऐसा कोई घर खरीद पाऊंगा और ऐसी बड़ी गाड़ी में घूम पाऊंगा लेकिन मेरे लिए तो यह सिर्फ सपना ही था।

गांव में मेरी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया हमने बच्चे का नाम आकाश रखा आकाश भी समय के साथ बड़ा होता जा रहा था और गांव में पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं थी जिस वजह से मैंने अपनी पत्नी को अपने पास ही बुला लिया हम लोगों ने आकाश का दाखिला एक छोटे से स्कूल में करवा दिया अब उसकी फीस हम लोग हर महीने भरा करते। मेरे ऊपर मेरी पत्नी और मेरे बच्चे का बोझ भी आन पड़ा था मेरी तनख्वाह इतनी ज्यादा नहीं थी तो मैं उसमें अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करता मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए तभी मैंने सोचा कि अब मुझे नौकरी छोड़ देनी चाहिए नौकरी से  मेरे जीवन में खुशहाली नहीं आ सकती इसलिए मैंने नौकरी छोड़ दी और मैंने एक छोटा सा ढाबा खोल लिया जिस जगह पर मेरा ढाबा था उसी जगह पर काफी सारे ऑफिस थे वह लोग मेरे पास ही आया करते थे मेरा काम भी अब ठीक चलने लगा था और सब कुछ ठीक होने लगा था मैंने कुछ ही समय बाद एक छोटा सा घर पर खरीद लिया।

हमेंने अपना घर खरीद लिया था तो मैंने अपने माता पिता को भी अपने साथ ही बुला लिया वह लोग भी गांव से मेरे पास रहने के लिए आ गए क्योंकि उनकी उम्र भी हो चुकी थी इसलिए मैं नहीं चाहता था कि वह लोग अब गांव में रहे इसलिए वह मेरे पास आ गए सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था मैंने अपने बच्चे का एक अच्छे स्कूल में एडमिशन करवा दिया था मेरी पत्नी भी अब खुश थी। हम लोग जब भी अपने गांव जाते तो सब लोग कहते हैं कि तुम्हारा काम अच्छे से चल रहा है, सब लोगों को हमें देख कर पता चल जाता कि मेरा काम अब ठीक चलने लगा है मेरे जीवन में बहुत जल्दी बदलाव आया यदि मैं नौकरी नहीं छोड़ता तो शायद जिंदगी भर वही पर मैं काम करता रहता और अपने परिवार का अच्छे से पालन पोषण भी नहीं कर सकता लेकिन यह सब बहुत ही जल्दी हो गया। मैं बहुत खुश भी था क्योंकि मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी कि इतनी जल्दी मेरे जीवन में इतना बड़ा बदलाव आ जाएगा। दिल्ली में जिस जगह पर मेरा ढाबा था उसी जगह पर एक व्यक्ति हमेशा ही आया करते थे वह कंपनी में मैनेजर थे और मैं उन्हें हमेशा सर कह कर बुलाता मैं उन्हें बंसल सर कह कर ही बुलाया करता था वह जब भी मेरे पास आते तो कहते तुम्हारा काम तो बड़ा अच्छा चलता है क्या तुमने किसी और जगह पर अपना काम खोलने की नहीं सोची। मैंने उन्हें कहा नहीं सर मैंने तो अभी इस बारे में कुछ नहीं सोचा है तो वह कहने लगे लेकिन तुम्हें इस बारे में सोचना चाहिए मैं उन्हें कहता मुझे यहीं से फुर्सत नहीं मिल पाती तो भला मैं कैसे कोई और काम सोच सकता हूं लेकिन उनके कहने पर मैंने दूसरी जगह काम ढूंढना शुरू कर दिया मुझे एक रेस्टोरेंट तो मिल गया था लेकिन मेरे पास काम करने के लिए कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो कि उसे अच्छे से चला पाता इसलिए मैंने उस रेस्टोरेंट का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया था और मैं अपने काम पर ही लगा हुआ था।

एक दिन मेरे साले का फोन मुझे आया और वह कहने लगा जीजा जी मैं दिल्ली आना चाहता हूं मुझे मालूम नहीं था कि उसका फोन मुझे बिल्कुल सही वक्त पर आएगा जब उसका फोन मुझे आया तो मैंने उसे कहा तुम जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी दिल्ली आ जाओ। मैंने उसे दिल्ली बुला लिया जब वह दिल्ली पहुंचा तो मैंने उसे सारी बात बताई और कहा मुझे एक रेस्टोरेंट चलाने के लिए मिल रहा है लेकिन मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो कि उसे अच्छे से चला पाए लेकिन जब तुमने मुझे फोन किया तो मुझे लगा तुम उसे अच्छे से चला पाओगे वह मुझे कहने लगा क्यों नहीं आप मुझे बता दीजिए कि मुझे क्या करना होगा। मैंने उसे सारी बात बता दी और जब मैं उसे रेस्टोरेंट में लेकर गया तो वहां पर मैंने उसे कहा तुम यहां का सारा काम संभाल लेना और अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है वह मुझे कहने लगा जीजा जी आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए मैं सारा काम संभाल लूंगा। मैंने उसे कहा तुम्हे जब भी मेरी जरूरत होगी तो तुम मुझे फोन कर देना लेकिन कुछ दिनों तक मुझे ही उस रेस्टोरेंट में भी काम संभालना था इसलिए मैं सुबह के वक्त रेस्टोरेंट में जाया करता और जब सारा कुछ सही से हो जाता तो मैं वापस अपने ढाबे पर चला जाता मेरे साले का नाम अमन है अमन काम को बड़े ही अच्छे से संभाल रहा था और मैं भी खुश था क्योंकि मेरा भी काम अब अच्छे से चल रहा था और वह रेस्टोरेंट भी अब अच्छे से चलने लगा था।

मैं अमन को महीने के आखरी में कुछ पैसे दे दिया करता वह भी खुश था क्योंकि वह हमारे साथ ही रहता था इसलिए उसे कोई भी दिक्कत नहीं थी लेकिन अमन किसी लड़की के चक्कर में पड़ गया जिससे कि काम में बहुत ज्यादा दिक्कत आने लगी। उसने मुझे उस वक्त नहीं बताया वह दिन भर फोन पर ही लगा रहा था और जब भी मैं उसे फोन करता तो वह मुझे कोई जवाब नहीं दिया करता था मैंने इसके चलते अमन को एक दो बार समझाया भी और उसे कहा देखो अमन ऐसे काम नहीं चलने वाला तुम्हें पूरी मेहनत से काम करना पड़ेगा तभी काम चल पाएगा। कुछ समय से वह रेस्टोरेंट अच्छा नहीं चल पा रहा था और शायद इसमें अमन की ही गलती थी क्योंकि अमन रेस्टोरेंट में ध्यान ही नहीं दे रहा था। मैंने अपनी पत्नी से भी कहा कि तुम अमन को समझाना मेरी पत्नी ने अमन को समझाया लेकिन अमन तो उस लड़की के प्यार में पूरी तरीके से पागल हो चुका था और वह अपने काम पर ध्यान ही नहीं देता था मैंने भी सोचा क्यों ना मैं एक दिन उस लड़की से मिल ही लूं। एक दिन जब मैं गया तो मैंने देखा अमन उसी लड़की के साथ रेस्टोरेंट में बैठा हुआ था मैंने अमन से कुछ नहीं कहा अमन भी घबरा गया, उसने मुझे उस लड़की से मिलाया उसका नाम संगीता है। जब मैं संगीता से मिला तो मैंने अमन को संगीता के सामने ही कहा अमन तुम्हें मेहनत करनी चाहिए और यदि तुम अपने काम के प्रति ईमानदार नहीं रहोगे तो काम कैसे चलेगा, अमन को उस वक्त थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई और उसके कुछ देर बाद संगीता वहां से चली गई।

अमन अब काम अच्छे से करने लगा था लेकिन मुझे यह डर था कि कहीं दोबारा से वह संगीता के चक्कर में ना पड़ जाए इसलिए मैंने उसे काफी समझाने की कोशिश की परंतु अमन जैसे कोई बात समझने को तैयार नहीं था। मैंने भी सोच लिया कि मुझे संगीता से ही बात करनी चाहिए एक दिन मैंने अमन के मोबाइल से संगीता का नंबर ले लिया और उससे बात करने लगा। मैं जब संगीता से बात करता तो मुझे ऐसा प्रतीत होता कि जैसे वह एक नंबर की जुगाड़ है और जब वह मुझसे बात करती तो बडे ही मुस्कुरा कर बात किया करती थी। मैंने एक दिन संगीता से कहा मुझे तुमसे मिलना था संगीता कहने लगी आप घर पर ही आ जाइए ना। जब मैं उससे मिलने उसके घर पर गया तो मैंने उसके घर पर देखा वहां पर कोई भी नहीं था और वह अकेली थी। मैं उसके पास बैठ गया वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी, मैंने भी उसे अपनी बाहों में ले लिया। उसने मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में लेकर संकिग करना शुरू किया और बड़े अच्छे से ऐसा ही करती रही उसने ऐसा काफी देर तक किया।

जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने भी उसे नंगा करते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया, उसकी चूत मे मेरा लंड जाते ही उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह चिल्लाते हुए कहने लगी आज तो मजा आ गया। मैंने उसे कहा क्या तुमने ऐसे पहले भी कभी किया है, वह कहने लगी मैंने तो कई बार और कई लोगों के साथ सेक्स किया है। मैं बडी तेजी से संगीता को धक्के दिया जाता और उसे बहुत ही मजा आ रहा था। जब मेरा लंड पूरी तरीके से छिल गया तो वह मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी योनि का बुरा हाल कर दिया। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें बहुत खुश रखूंगा और तुम्हें जो भी चाहिए होगा वह मैं तुम्हें दे दिया करूंगा लेकिन तुम अमन से दूर रहा करो उससे मेरे काम पर असर पड़ता है। वह कहने लगी तुम मेरी खुशियों का ध्यान रखोगे तो मैं उससे दूर रहूंगी, मैं उसकी चूत की खुजली को मिटा दिया करता हूं। जब अमन को संगीता से बात करनी होती तो उसे बात करने के बारे में सोचता लेकिन वह उसका फोन ही नहीं उठाया करती थी जिस वजह से अब मेरा काम अच्छे से चलने लगा था और रेस्टोरेंट पर अमन ध्यान देने लगा था उसे यह बात नहीं पता थी कि मैंने ही संगीता को उससे अलग किया है।