लंड 90 डिग्री पर था

Hindi sex story, kamukta मैं पुणे का रहने वाला हूं मेरा परिवार पुणे में ही रहता है मेरी शादी को 4 वर्ष हो चुके हैं लेकिन मैं अपने शादीशुदा जीवन से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं क्योंकि मेरी पत्नी और मेरे बीच में बिल्कुल भी विचार नहीं मिलते। हम दोनों के बीच काफी मनमुटाव रहता है जिस वजह से मैं काफी परेशान हो जाता हूं और कभी कबार मैं बहुत तनाव में भी रहता हूं मुझे ऐसा लगता है कि जब से मेरी शादी हुई है तब से तो मैंने अपना जीवन जीना ही छोड़ दिया है। मैं सुबह अपने ऑफिस निकल जाता हूं और शाम को घर लौटता हूं लेकिन जब शाम को मैं घर लौटता तो मुझे यह नहीं मालूम होता कि मेरी पत्नी का मूड अच्छा होगा या खराब। आए दिन हम दोनों के बीच झगड़े होते रहते थे जिससे कि मेरे काम पर भी असर पड़ने लगा लेकिन मुझे उस वक्त किसी का साथ नहीं मिला मेरे पापा मम्मी भी इस बीच में कुछ नहीं कह सकते थे क्योंकि उन्ही की मर्जी से मेरी शादी हुई थी।

वह मेरी पत्नी को समझाया करते थे लेकिन उसके बावजूद भी उस पर उनकी बातों का कोई असर नहीं होता था और हमेशा वह मुझ से झगड़ने की कोशिश किया करती। मैं काफी परेशान हो चुका था लेकिन मैं उसे डिवोर्स भी नहीं दे सकता था मेरी कुछ मजबूरियां मेरे सामने खड़ी थी। उसी दौरान मैं अपने ऑफिस के टूर से घूमने के लिए जाता हूं काफी समय बाद मैं कहीं घूमने के लिए निकला था मेरे साथ मेरे जितने भी साथी थे उन सबकी पत्नियां उनके साथ थी और उनके बच्चे भी उनके साथ थे लेकिन मैं अकेला ही था। मुझे अकेले ही अच्छा लग रहा था क्योंकि काफी समय बाद मैं कहीं अकेले गया था और मैं बहुत खुश भी था उसी टूर के दौरान हमारे और भी ब्रांच के लोग आए हुए थे। हमारा ऑफिस काफी बड़ा है और उसकी काफी ब्रांच भी हैं उसी दौरान मेरी मुलाकात महिमा से हुई महिमा भी अकेली आई हुई थी। मुझे महिमा का साथ मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा मुझे ऐसा लगा की महिमा और मेरे जीवन में काफी समानताएं हैं क्योंकि महिमा के पति और उसके बीच बिल्कुल नहीं बनती है। हम दोनों तीन दिन साथ में रहे हम दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे से बड़े अच्छे से बात कर रहे थे मैंने कभी सोचा भी नहीं था की महिमा और मैं इतनी जल्दी एक दूसरे के नजदीक आ जाएंगे।

उसके पति को नशे की बहुत गंदी आदत है जिस वजह से वह उस पर आए दिन हाथ उठाते थे लेकिन उसके बावजूद भी महिमा ने कभी हार नहीं मानी महिमा और उसके पति के बीच बिल्कुल भी रिश्ते ठीक नहीं थे। हम लोग जब एक दूसरे से बातें करते तो हम दोनों को ऐसा लगता जैसे कि हम दोनों एक दूसरे को बरसों से जानते हैं महिमा और मेरे बीच कई बार मुलाकात हो जाया करती थी हम दोनो जब भी एक दूसरे को मिलते तो मुझे और महिमा को बहुत खुशी होती। मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि हम लोगों के बीच इतनी जल्दी नजदीकियां बढ़ जाएंगे और हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगेंगे। सब कुछ बहुत ही जल्दी से हुआ इतने कम समय में महिमा मुझे अच्छे से जानने लगी थी उसे मेरे बारे में सब कुछ मालूम चल चुका था कि मुझे क्या चीज पसंद है और क्या चीज नहीं पसंद। एक दिन मेरी पत्नी को महिमा के बारे में मालूम चला तो वह मुझ पर गुस्से हो गई और कहने लगी अच्छा तो तुम आजकल अपने ऑफिस में ही गुल खिला रहे हो। उसे तो जैसे मुझसे झगड़ने का बहाना मिल चुका था और फिर वह मुझसे झगड़ा करने लगी मैंने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन मेरे समझाने का उस पर कोई असर नहीं पड़ा। वैसे भी वह मेरी बात सुनती कहां थी जो वह उस दिन मेरी बात को समझती, वह मुझे कहने लगी मुझे तो पहले से ही तुम पर शक था की तुम्हारा ना जाने किस के साथ अफेयर चल रहा है उसे तो अब सिर्फ बहाना मिल चुका था। एक तरफ से मेरे लिए भी यह सब ठीक ही हुआ क्योंकि मेरी पत्नी ने मुझे डिवोर्स देने के बारे में सोच लिया था मैं तो चाहता ही था कि उससे मेरा तलाक हो जाए क्योंकि मैं बिल्कुल भी उसके साथ रह नहीं सकता था और ना ही मैं उसके साथ रहना चाहता था। मेरे लिए बहुत ही अच्छा हुआ जो उसने मुझे कहा की अब मैं तुमसे अलग रहना चाहती हूं मैं मन ही मन बहुत खुश था और मैंने उसे डिवॉर्स देने के बारे में सोच लिया।

मैंने जब अपनी पत्नी को डिवोर्स दिया तो मैं बहुत खुश था और उस दिन मैंने महिमा को इस बारे में बताया महिमा कहने लगी चलो कम से कम अब तुम अपना जीवन तो जी सकोगे नहीं तो तुम बहुत ज्यादा परेशान थे। मैंने महिमा से कहा महिमा मुझे तुमसे शादी करनी है और जल्द से जल्द मुझे तुम्हें अपना बनाना है महिमा कहने लगी लेकिन मेरे पति मुझे तलाक नहीं दे सकते। मैंने महिमा से कहा तुम भी कुछ करो जिससे कि हम दोनों एक साथ रह सके। मैं महिमा के साथ रहना चाहता था और उसे मैं दिल से प्यार करता था लेकिन उसका पति तो उसे तलाक देने को तैयार ही नहीं था महिमा ने जब अपने पति से तलाक लेने के बारे में सोच लिया तो उसने कोर्ट में अपने पति के खिलाफ केस लड़ने की सोची लेकिन उसका पति भी अच्छा पैसे वाला है जिससे कि उसने भी एक अच्छा वकील कर लिया। उसके बाद उनका केस कोर्ट में चल रहा था मैं महिमा को भी नहीं मिल पाया था और ना ही मैं और महिमा अभी तक शादी कर पाए थे। मैं जब से महिमा से मिला तब से मैं उससे शादी करना चाहता था। हम दोनों के बीच सब कुछ सामान्य था हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे और हम दोनों के बारे में महिमा के पति को मालूम चल चुका था। एक दिन वह मुझे मिला और मुझे कहने लगा तुम्हारी वजह से ही मेरी शादीशुदा जीवन में दरार पड़ी है उसे मेरे बारे में भी सब कुछ मालूम था।

वह कहने लगा तुमने अपना घर तो बर्बाद कर ही लिया है लेकिन तुमने मेरी जिंदगी भी बर्बाद कर दी मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं उसने मुझे धमकी दी और कहने लगा मैं तुम्हें देख लूंगा। उस दिन महिमा बीच में आ गई और महिमा कहने लगी तुम राजेंद्र से ऐसी बात क्यों कर रहे हो तभी महिमा के पति ने उसे एक थप्पड़ मारा जिससे की बात बहुत बढ़ गई। मैंने महिमा को समझाया और कहा यहां पर अपने पति से झगड़ा करने का कोई फायदा नहीं है मैंने महिमा को शांत कराया वह शांत हो चुकी थी और फिर महिमा अपने पति के साथ रहना ही नहीं चाहती थी। उसने अब अलग रहने का फैसला कर लिया था मैंने भी महिमा को सपोर्ट किया और हम लोगों ने उसके लिए एक फ्लैट किराए पर ले लिया, महिमा का सामान मैंने उसके साथ शिफ्ट किया। उसका पति इस बात से बहुत ज्यादा गुस्से में था और मुझे इस बात का डर भी था कि कहीं वह महिमा को कोई नुकसान ना पहुंचाए क्योंकि महिमा अकेली रहती थी। मैंने इस बारे में महिमा से बात की तो महिमा मुझे कहने लगी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं अपना ख्याल रख सकती हूं महिमा ने मुझे पूरा भरोसा दिलाया उसके बाद महिमा अकेले ही फ्लैट में रहने लगी। उसे जब भी कोई जरूरत होती तो वह मुझे कहती हम दोनों अब एक दूसरे के साथ काफी समय बिताने लगे थे मुझे महिमा के साथ में समय बिताना अच्छा लगता क्योंकि हम दोनों के ख्यालात बिल्कुल एक जैसे ही थे शायद इसी वजह से हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा प्यार था। मैं महिमा का बहुत खयाल रखा करता था और महिमा भी मेरा काफी ध्यान रखती थी।

एक दिन महिमा कहने लगी मुझे कुछ सामान लेकर आना था मैंने महिमा से कहा ठीक है हम लोग साथ ही चलते हैं और हम दोनों साथ में चले गए और सामान लेकर वापस लौटे तो मैं और महिमा एक साथ ही थे। जब मैंने महिमा की जांघ पर हाथ रखा तो उस दिन पहली बार हम दोनों के अंदर बेचैनी सी जाग उठी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और महिमा ने उसे अपने हाथों में लिया और हिलाना शुरू किया वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से हिलाती। जब उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लिया तो वह उसे अच्छे से चूसने लगी मेरे अंदर की उत्तेजना भी जागने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसे भी बहुत मजे आ रहे थे मैंने जैसे ही महिमा की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी। उसके अंदर इतनी ज्यादा गर्मी भरी हुई थी कि मैंने उसे तेज गति से धक्के देने शुरू किया और जैसे ही मैं उसे धक्के मारता तो उसके मुंह से सिसकिया निकल जाती और उसकी सिसकियो से मै उत्तेजित हो जाता। मैं अपने आप पर भी काबू नहीं कर पाया और मेरा वीर्य उसकी योनि में जा गिरा उसने मेरे लंड को दोबारा से सकिंग किया और दोबारा से मेरे लंड को उसने 90 डिग्री पर खड़ा कर दिया।

जब मेरे अंदर बेचैनी बढ़ने लगी तो मैंने महिमा को घोड़ी बनाते हुए चोदना शुरू किया जब मैं उसे तेजी से धक्के मारता तो वह भी अपनी बड़ी और गोरी चूतड़ों को मुझसे मिलाती। मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था और वह मेरा पूरा साथ देती जाती, मैंने महिमा के साथ काफी देर तक सेक्स का आनंद लिया और जब हम दोनों की इच्छा पूरी तरीके से भर गई तो मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सका और महिमा भी पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी। वह कहने लगी मेरी इच्छा पूरी हो चुकी है लेकिन मैं उसे धक्के मारता रहा जैसे ही मेरे लंड से तेजी से वीर्य बाहर की तरफ निकला तो उसे बहुत मजा आया और मुझे भी बड़ा आनंद आया। उसके बाद तो यह सिलसिला कई बार चलता रहा महिमा का डिवोर्स हो चुका है वह और मैं साथ में रहते हैं। हम दोनों बहुत ही खुश हैं मैं महिमा के साथ अपना जीवन बड़े अच्छे से बिता रहा हूं और महिमा मेरी हर एक जरूरतों को बड़े अच्छे से पूरा करती है। वह मेरा बहुत ध्यान रखती है और मुझे इस बात की खुशी है कि महिमा मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जब भी मुझे सेक्स की जरूरत होती है तो वह मेरे लिए हमेशा तैयार रहती है और मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट करती है।