फेसबुक फ्रेंड के साथ मस्ती के पल

hindi chudai ki kahani

मेरा नाम कृतिका है मैं बठिंडा की रहने वाली हूं, मैं कॉलेज में पढ़ती हूं और मेरे पिताजी पंजाब रोडवेज में क्लर्क का काम करते हैं, उन्हें काफी वर्ष हो चुके हैं। वह इस विभाग में काफी समय से काम कर रहे हैं। मेरे पिताजी और मेरे बीच में बहुत ही प्रेम है, मेरी मां हमेशा ही मेरे पिताजी से कहती है कि तुम कृतिका को इतना ज्यादा प्यार मत किया करो क्योंकि कुछ समय बाद उसकी शादी हो जाएगी उसके बाद तुम्हें ही बहुत तकलीफ होगी। मेरे पिता जी हमेशा कहते हैं कि मैं कृतिका को हमेशा ही अपने पास रखना चाहता हूं, मेरी मां कहने लगी कि यह बिल्कुल भी संभव नहीं है क्योंकि शादी के बाद कृतिका को अपने ससुराल जाना पड़ेगा, कृतिका को आप अपने पास नहीं रख सकते। मेरे पिताजी बहुत ही भावुक इंसान है और वह हमेशा ही मेरी मां की इस बात से बहुत भावुक हो जाते हैं वह कहते हैं कि वह सब बाद में देख लेंगे जब कृतिका की शादी का वक्त आएगा, उस वक्त हम लोग इस बारे में सोचेंगे।

घर में मैं बड़ी हूं इसलिए मुझे पहले से ही मेरे पिताजी और मां प्यार करते हैं, मेरी एक छोटी बहन भी है वह स्कूल में पढ़ाई कर रही है और उसके बारहवीं के एग्जाम है। मैं भी ज्यादा समय अपनी पढ़ाई में ही देता हूं और जो मेरे पास समय बचता है तो मैं अपने डांस की प्रैक्टिस कर लिया करती हूं। मैं अपने घर पर ही अपने डांस की प्रैक्टिस करती हूं, मुझे डांस करना बहुत अच्छा लगता है और मैं बचपन से ही डांस की प्रैक्टिस कर रही हूं। उस समय मैं डांस अकैडमी में गई थी लेकिन उसके बाद मैंने डांस अकैडमी छोड़ दी और घर पर ही मैं डांस की प्रैक्टिस करती हूं, मेरी छोटी बहन भी मेरे साथ डांस की प्रैक्टिस करती है। मैंने काफी समय से अपना फेसबुक अकाउंट नहीं खोला था इसलिए मैंने एक दिन सोचा कि क्यों ना अपना फेसबुक अकाउंट खोलकर देखू,  मैं उस दिन घर पर ही थी। मुझे मेरे फेसबुक का पासवर्ड भी याद नहीं था और मैंने अपने दिमाग पर काफी जोर डाला तो उसके बाद मुझे मेरा पासवर्ड याद आया, मैंने अपना फेसबुक अकाउंट खोलाकर देखा तो उसमे बहुत सारी फ्रेंड रिक्वेस्ट आई हुई थी।

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मैंने जब वह फ्रेंड रिक्वेस्ट देखी तो उनमें से कुछ रिक्वेस्ट मैंने एक्सेप्ट कर लिया और कुछ मैंने हटा दिये। मैंने सूर्यांश की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की, मैं उसे नहीं जानती थी लेकिन वह मुझसे बात करने लगा, वह मुझसे फेसबुक चैट पर ही बात करने लगा। मैंने उसे कहा कि तुम कहां के रहने वाले हो, वह कहने लगा कि मैं नोएडा का रहने वाला हूं। मैंने सूर्यांश से पूछा कि तुम क्या करते हो, वह कहने लगा कि मैं कॉलेज में पढ़ता हूं। उसने भी मुझसे पूछा कि क्या तुम भी कॉलेज में पढ़ती हो, मैंने उसे कहा कि हां मैं कॉलेज में पढ़ती हूं। उस दिन मेरी सूर्यांश के साथ ज्यादा बात नहीं हो पाई और मैंने अपना फेसबुक अकाउंट बंद कर दिया। उसके बाद मैं अपने काम पर ही लगी हुई थी, मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। मैंने काफी दिनों तक अपना फेसबुक अकाउंट नहीं खोला, कुछ दिनों बाद मैंने अपना अकाउंट खोला तो उसमें मुझे बहुत सारे मैसेजेस आए हुए थे, सूर्यांश ने भी मुझे बहुत मैसेज भेजे थे। जब मैंने वह मैसेज खोल कर देखे तो मैंने उनका रिप्लाई नहीं किया और उसके बाद मैंने अपने अकाउंट को दोबारा से बंद कर दिया। मैंने कुछ दिनों बाद ही अपने अकाउंट को खोला तो उसमें  सूर्यांश ने मुझे दोबारा से मैसेज भेजा हुआ था, मैंने उसे रिप्लाई कर दिया लेकिन उसका रिप्लाई नहीं आया, मैं काफी देर तक फेसबुक चला रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपने अकाउंट को बंद कर दिया और उसके कुछ दिन बाद जब मैंने देखा तो सूर्यांश भी ऑनलाइन था। मैंने उसे रिप्लाई करते हुए पूछा कि मैंने तुम्हें कुछ दिनों पहले मैसेज किया था लेकिन तुमने मेरे मैसेज का जवाब नहीं दिया, वह कहने लगा कि मैं उस दिन अपने किसी रिश्तेदार के घर गया हुआ था। मेरी उससे काफी देर तक फेसबुक पर बात हुई, अब हम दोनों ने एक दूसरे का नंबर ले लिया था। मैं सूर्यांश से व्हाट्सएप पर ही बात करती थी लेकिन ना जाने क्यों मुझे ऐसा लगा कि मुझे सूर्यांश से मिलना चाहिए और वह भी मुझसे मिलने की बहुत जिद कर रहा था, मैंने उसे कहा कि मैं अभी कॉलेज में पढ़ रही हूं और मेरे पास ना तो पैसे हैं और ना ही मैं तुमसे मिल सकती हूं।

जब मैंने सूर्यांश से कहा कि क्या तुम मुझसे मिलने आ सकते हो, वह कहने लगा ठीक है मैं देखता हूं यदि तुम से मिलने आ पाऊँ तो। काफी समय तक हम दोनों बात करते रहे परंतु मैं कभी भी सूर्यांश से नहीं मिल पाई, हम दोनों की फोन पर ही बात होती थी। एक दिन मैंने सूर्यांश से कहा कि क्या हम लोग कभी मिलने वाले हैं या सिर्फ फोन पर ही बात करेंगे, वह लगा कि नहीं हम लोग जरूर मिलेंगे। अब हमारी बात को काफी समय हो चुका था, मुझे भी सूर्यांश अच्छा लगता था इसलिए मैं भी उसके साथ बात करती थी। मैंने सूर्यांश से कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली आने वाली हूं, यदि तुम्हारे पास वक्त हो तो तुम मुझसे दिल्ली में ही मिल लेना। वह कहने लगा ठीक है जब तुम दिल्ली आओ तो मुझे फोन कर देना, मैं जब दिल्ली गई तो मैं अपने रिश्तेदार के घर पर ही रूकी हुई थी क्योंकि उनके घर पर कुछ फंक्शन था इसीलिए मुझे उनके घर पर ही रुकना था। मैं जब दिल्ली पहुंची तो मैंने सूर्यांश को फोन किया और कहा कि क्या तुम मुझे मिल सकते हो, वह कहने लगा कि हां मैं तुम्हें कल मिलता हूं, आज तुम अपने रिश्तेदारों के साथ समय बिताओ, कल हम लोग मुलाकात करते हैं। जब यह बात मुझे सूर्यांश ने कहीं तो मैंने उसे कहा ठीक है हम लोग कल मुलाकात करते हैं। उसके बाद मैं अपने रिश्तेदारों से मिली और अगले दिन सूर्यांश मुझे मिलने के लिए आ गया। जब मैंने उसे पहली बार देखा तो मैं उसे मिलकर बहुत खुश हुई और मैंने उसे गले लगा लिया।

सूर्यांश से मिलकर मैं बहुत खुश हुई, वह कहने लगा कि मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि हम लोग अभी मिल पाएंगे। मैंने उसे कहा कि उम्मीद पर दुनिया कायम है यदि तुम मुझसे मिलने नहीं आ पाए तो क्या हुआ मैं तो तुमसे मिलने के लिए आ गई। जब यह बात मैंने सूर्यांश से कहीं तो वह कहने लगा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम मुझसे मिलने आ गई। मैंने उसे कहा कि यह तो संयोग वाली बात है यदि हमारे रिश्तेदार की शादी नहीं होती तो शायद हम लोग कभी भी मिल नहीं पाते। सूर्यांश मुझे उस दिन एक पार्क में लेकर गया और हम लोग पार्क में बैठे हुए थे। काफी देर तक हम लोगों ने पार्क में ही बात की, मैंने उससे कहा कि मुझे तुमसे बात करना अच्छा लग रहा है और तुम्हारे साथ समय बिताना भी मुझे अच्छा लग रहा है। वह कहने लगा कि मुझे भी तुम्हारे साथ वक्त बिताना बहुत अच्छा लग रहा है, मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी और मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूं। मैंने जब सूर्यांश के हाथ पर हाथ रखा तो मुझे बड़ा अच्छा लगा और मैंने उसे कहा कि मुझे तुम्हारे साथ ही रहना है। वह मुझे कहने लगा ठीक है आज हम लोग साथ में ही रुक जाते हैं। उसने अपने दोस्त को फोन किया और उसके दोस्त ने कहा कि आज मेरे घर पर कोई भी नहीं है यदि तुम मेरे घर पर आ सकते हो तो आ जाओ। वह मुझे अपने दोस्त के घर ले गया हम दोनों ही साथ में थे। जब सूर्यांश ने मेरी कमर पर हाथ रखा तो मुझे करंट सा महसूस हुआ। सूर्यांश ने मेरे होठों को किस करना शुरू कर दिया मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे होठों को किस कर रहा था। मैंने सूर्यांश से कहा कि तुम बड़े ही अच्छे से मेरे होठों का रसपान कर रहे हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। काफी देर उसने ऐसा ही किया उसके बाद उसने मुझे बिस्तर पर लेटाया तो धीरे-धीरे उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उस दिन मैंने अपनी नई पैंटी पहनी हुई थी और जैसे ही उसने मेरी पैंटी के अंदर अपने हाथ को डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ काफी देर तक उसने ऐसा ही किया मेरे पानी बाहर आने लगा। सूर्यांश ने मुझे कहा कि मैं तुम्हारी योनि के अंदर अपने लंड को डाल रहा हूं मैंने उसे कहा कि मुझे बहुत डर लग रहा है।

वह मुझे कहने लगा डरने की कोई भी बात नहीं है तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो। उसने धीरे धीरे अपनी उंगली को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरी योनि गीली हो गई। जब उसने अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर डाला तो मेरी चूत से खून आने लगा और मुझे बहुत दर्द हुआ। उसने मेरे दोनों पैरों को कसकर पकड़ा हुआ था और मुझे बड़ी तेज गति से झटके दे रहा था। मैंने उसे कहा कि तुम धीरे धीरे मुझे झटके दो मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। वह कहने लगा कि तुम्हें थोड़ी देर में अच्छा लगने लगेगा। उसने काफी देर तक मुझे ऐसे ही चोदा और मुझे मजा आने लगा। वह मेरे स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर चूस रहा था उसने मेरे स्तनों का भी काफी अच्छे से रसपान किया। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से वह मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था। मैंने उसे कहा कि तुमने तो मेरी जवानी को सफल बना दिया मुझे नहीं पता था कि सेक्स करने में इतना आनंद आता है। मैंने उसे कहा कि अब तुम मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो उसने मुझे डॉगी स्टाइल में बना दिया उसने जैसे ही मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत दर्द होने लगा। वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के देने लगा और मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी मैं अपनी चूतड़ों को उससे मिला रही थी। वह मुझे बड़े ही अच्छे से धक्के देने पर लगा हुआ था। मैंने उसे कहा कि मुझसे बिलकुल भी तुम्हारे लंड की गर्मी को झेला नही जा रहा है। उसने मुझे कहा कि बस 2 मिनट में मेरा वीर्य तुम्हारी योनि में गिरने वाला है। उसने बड़ी तेजी से मुझे झटके दिए और 2 मिनट के बाद ही उसका वीर्य मेरी योनि में गिर गया।

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