दोस्त की पत्नी की आंखों में हवस

antarvasna मेरा नाम निखिल है मैं बेंगलुरु का रहने वाला हूं। मैं एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम करता हूं और मेरी उम्र 30 वर्ष है। मेरे दोस्त हमेशा ही कहते हैं कि तुम बहुत ही हंसमुख और बहुत ही अच्छे हो। मेरा व्यवहार बचपन से ही ऐसा है इसलिए मैं जिसके साथ भी रहता हूं वह मेरे साथ अपने आपको कंफर्टेबल महसूस करता है और उसे अच्छा भी लगता है। मेरे सारे रिश्तेदार भी जब हमारे घर आते हैं तो मैं उनके साथ बड़े अच्छे से बात करता हूं, मैं उनके साथ में काफी समय तक बैठता हूं। मैं हमेशा ही सब के हाल-चाल पूछ लिया करता हूं इसलिए सब मुझे समय समय पर याद कर देते हैं। मेरे ऑफिस में मेरा एक दोस्त है उसका नाम राजीव है, राजीव बहुत ही सीरियस किस्म का व्यक्ति है, वह ज्यादा ऑफिस में किसी के साथ बात नहीं करता। मैंने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, कि तुम सबके साथ फ्रेंडली रहा करो लेकिन उसके बावजूद भी उसका नेचर ऐसा ही है, वह बिल्कुल भी नहीं बदला। मैं उसे पिछले कुछ वर्षों से जानता हूं लेकिन राजीव के व्यवहार में कोई भी बदलाव नहीं है।

मैंने उसे कई बार समझाने की कोशिश की और कहा कि यदि तुम बदलोंगे नहीं तो तुम्हें बहुत ही दिक्कतें होंगी इसलिए तुम्हें बदलना चाहिए। वह कहने लगा कि मेरे नेचर की वजह से मेरी पत्नी शिखा मुझसे हमेशा झगड़ा करते रहती है, मैं भी चाहता हूं कि मैं अपने व्यवहार में थोड़ा बदलाव लाऊं लेकिन मुझसे यह सब बिल्कुल भी नहीं हो पाता क्योंकि मेरा बचपन से नेचर ऐसा ही है। वह कहने लगा कि मैं घर में भी कई बार शिखा के साथ बैठा रहता हूं लेकिन मेरी उससे इतनी ज्यादा बात करने की इच्छा नहीं होती, हमारी शादी को भी काफी वर्ष हो चुके हैं उसके बावजूद भी मैं अभी तक सिखा को नहीं समझ पाया। वह हमेशा ही मुझे सुनाती रहती और कहती है कि तुम मुझे कभी भी नहीं समझते, मैंने सिखा को कहा कि ऐसी कोई भी बात नहीं है यदि मैं तुम्हें नहीं समझता तो शायद कभी भी तुमसे शादी नहीं करता। राजीव अपने शादीशुदा जिंदगी से बिल्कुल भी खुश नहीं है और वह हमेशा ही ऑफिस में इस बारे में मुझसे बात करता है।

मैं कभी भी राजीव के घर नहीं गया हूं क्योंकि मेंरे पास इतना वक्त नहीं होता कि राजीव के घर जा संकू। उसका घर ऑफिस से काफी दूरी पर है इसीलिए मैं उसके घर आज तक नहीं गया। मैंने एक दो बार ही राजीव को अपने घर पर बुलाया है इसीलिए मेरे घर वाले राजीव को पहचानते हैं। एक दिन राजीव और मैं साथ में बैठे हुए थे तो राजीव मुझसे पूछने लगा कि मुझे शिखा को खुश करने के लिए क्या करना चाहिए, मैंने उससे कहा कि तुम उसके साथ जितना ज्यादा हो सके उतना समय बिताओ और उसे अपने साथ कंफर्टेबल महसूस करवाओ, यदि वह तुमसे खुलकर बात नहीं करेगी तो तुम दोनों का रिलेशन ज्यादा नहीं चल पाएगा। राजीव कहने लगा कि मैं ज्यादा समय तक शिखा के साथ समय नहीं बिता सकता क्योंकि मेरा नेचर बिल्कुल भी उस प्रकार का नहीं है। मैं बिल्कुल भी रोमांटिक नहीं हूं और ना ही मैं ज्यादा शिखा से बात करता हूं इसीलिए तो वह मुझसे बहुत ज्यादा दुखी रहती है। मैं जब भी घर पर होता हूं तो वह अपनी फ्रेंड के साथ ही फोन पर बात करते रहती है और मुझे कहती है कि तुम्हारे साथ बात कर के कोई फायदा नहीं है क्योंकि तुम जब भी घर पर रहोगे तो तुम अपने आप में ही खोए रहोगे, तुम्हें सिर्फ अपने आप से ही मतलब है लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं हूं। मैंने राजीव से कहा कि तुम्हें थोड़ा रोमांटिक बनना पड़ेगा इसीलिए तो शिखा तुमसे बिल्कुल बात नहीं करती। राजीव मुझसे कहने लगा की मुझे भी ऐसा ही लगता है, शायद इसी वजह से वह मुझसे बात नहीं करती क्योंकि वह हमेशा ही मुझे कहती रहती है कि मेरे दोस्तों के पति बड़े ही अच्छे हैं, वह उन्हें समय-समय पर किसी ट्रिप पर लेकर जाते हैं। राजीव कहने लगा मैं जब भी कहीं घूमने का प्लान बनाता हूं तो उसी वक्त कुछ ना कुछ दिक्कते हो जाती है इसीलिए हम काफी समय से कहीं घूमने भी नहीं जा पाये। मैंने राजीव से कहा कि यह तो बहुत ही अच्छी बात है यदि तुम इतने समय से कहीं घूमने नहीं गए तो तुम्हें अब सिखा के साथ कहीं घूमने जाना चाहिए, तुम कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले लो और किसी अच्छी जगह हो आओ।

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राजीव कहने लगा मैं सोच तो काफी समय से रहा हूं लेकिन जब भी मैं छुट्टी लेता हूं उसी वक्त कुछ ना कुछ काम पड़ जाता है इसीलिए हम लोग कहीं भी नहीं जा पाते। मैंने राजीव के लिए गोवा में होटल बुक कर दिया, मैंने उसे कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए गोवा जा रहे हो और तुम सिखा को भी अपने साथ लेकर जाओगे। वह कहने लगा कि मैंने तो ऐसा कोई भी प्लान नहीं बनाया। मैंने राजीव को होटल बूमिंग ईमेल सेंड कर दी और उसे कहा कि मैंने तुम्हारे लिए होटल में रूम बुक कर लिया है, तुम अब यहां से जाने की तैयारी करो। कुछ दिन तुम शिखा के साथ अच्छे से समय बिताओ, उसके बाद ही तुम अपने काम पर आना, नहीं तो तुम्हारा रिलेशन अच्छा नहीं चलेगा। राजीव ने भी ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया और कुछ दिनों में उसकी छुट्टी को मंजूरी मिल गई। जब वह अपनी पत्नी को लेकर गोवा गया तो वह मुझे गोवा से फोन कर रहा था और बहुत ही खुश नजर आ रहा था। शिखा भी बहुत खुश थी, राजीव ने मेरी बात शिखा से करवाई तो शिखा मुझे कहने लगी कि कम से कम आप की वजह से मेरे पति मुझे कहीं घुमाने तो ले गए। शिखा मेरी बहुत तारीफ कर रही थी और मुझे उस ने कहा कि मुझे आपसे एक बार जरूर मिलना है क्योंकि आपने हमारे शादीशुदा जिंदगी में एक बार फिर से जान डाल दी, नहीं तो मैं इनसे बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी।

शिखा ने राजीव को फोन दिया और राजीव मुझसे कहने लगा कि तुमने तो मेरी बहुत मदद कि, मैं तुम्हारा बहुत ही शुक्रगुजार हूं यदि तुम मुझे यह सुझाव नहीं देते तो शायद मेरे और शिखा के बीच में दूरियां हो गई थी इसकी वजह से हमारा रिलेशन ही खतरे में नहीं पड़ जाता। मैंने राजीव से कहा कि तुम लोग एंजॉय करो मैं अभी ऑफिस में हूं और मैं तुमसे शाम को फोन पर बात करता हूं। मैं अपने ऑफिस का काम करने लगा और शाम को जब मैं घर गया तो मुझे ध्यान आया कि मुझे राजीव को फोन करना है इसीलिए मैंने राजीव को फोन किया। जब मैंने राजीव को फोन किया तो वह बहुत ही खुश था और कहने लगा कि हम लोग अभी इंजॉय कर रहे हैं। उसने मुझे अपने ट्रिप की भी फोटो भेजी। जब वह वापस आने वाला था तो उसने मुझे फोन कर दिया और कहा कि मैं कल वापस आ रहा हूं तो तुम्हे मेरे घर पर आना है, शिखा भी तुमसे मिलने के लिए कह रही है इसलिए तुम्हें मेरे घर पर आना ही पड़ेगा। मैंने उसे कहा ठीक है कल वैसे भी ऑफिस की छुट्टी है इसलिए मैं तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा। अगले दिन मैं राजीव के घर चला गया, मुझे उसका घर ढूंढने में बड़ी परेशानी हो रही थी, फिर मैंने उसे फोन किया तो वह मुझे लेने के लिए आ गया। जब मैं राजीव के घर गया तो राजीव मुझसे मिलकर बहुत खुश हुआ उसने मुझे गले लगा लिया। उसने मेरा इंट्रोडक्शन शिखा से करवाया जब हम दोनों का परिचय हो गया तो शिखा मेरी बहुत ही तारीफ करने लगी और कहने लगी कि आपकी वजह से ही इनके अंदर बदलाव आया है। मैं बहुत खुश हूं लेकिन मुझे शिखा के नजरों में हवस झलक रही थी और मैं समझ चुका था कि यह मुझसे चुदना चाहती है। राजीव और मैं उस दिन दारु पी रहे थे और हम दोनों ने बहुत शराब पी ली। राजीव अपने कमरे में ही लेट गया और उसके बाद शिखा मेरे पास आकर बैठ गई वह मेरी गोद में आकर बैठ गई। वह कहने लगी कि मै आपका इंतजार काफी समय से कर रही थी।

उसकी गांड मेरे लंड से टकरा रही थी मैंने उसे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसमें मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक समा लिया और बड़े अच्छे से चूसने लगी। उसने काफी देर तक मेरे लंड को चूसा और मेरा पानी निकाल कर रख दिया। मैंने भी उसकी सलवार को नीचे किया उसे कहा कि मुझे सरसों का तेल दे दो। उसने मुझे सरसों का तेल दिया और मैंने उसे अपने लंड पर अच्छे से लगा लिया। मैंने जैसे ही शिखा की गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी। मैंने उसे कहा कि मुझे तो बहुत मजा आ रहा है जब मैं तुम्हारी गांड के अंदर अपने लंड को डाल रहा हूं। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है मैंने उसे कहा चिंता मत करो थोड़ी देर में यह सब मजे में परिवर्तित हो जाएगा। मैंने शिखा की बड़ी-बड़ी चूतडो को पकड़ लिया और बड़ी तेजी से मैं उसे झटके मारने लगा। उसकी गांड से खून बाहर निकलने लगी वह कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। मैं उसे झटक दिए जा रहा था और उसकी गांड से गर्मी निकलने लगी मेरा माल गिर गया। मैंने उसकी गांड से लंड को बाहर निकाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। मै ऐसे ही बैठा रहा और शिखा की गांड से मेरा माल निकल रहा था लेकिन उसकी गांड को देखकर मेरे अंदर की उत्तेजना दोबारा से जागने लगी। मैंने उसे दोबारा से पकड़कर घोड़ी बना दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को शिखा की गांड में डाला तो शिखा को भी बड़ा मजा आ रहा था। वह बहुत तेजी से अपने चूतडो को मिलाने लगी काफी देर तक उसने अपनी चूतडो को मुझसे मिलाया। मुझे बहुत मजा आने लगा और मेरा भी लंड बुरी तरीके से छिल चुका था इसलिए मेरा वीर्य पतन बड़ी जल्दी हो गया। जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैं शिखा को पकड़कर काफी देर तक खड़ा रहा। शिखा ने भी अपनी गांड से मेरे माल को साफ किया। उसके बाद वह मेरे बगल में बैठ गई लेकिन उसकी गांड वाकई में बहुत ही मजेदार है मैंने आज तक कभी भी शिखा की जैसी गांड किसी की नहीं देखी।

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