दीदी मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है-1

indian sex story, desi kahani हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम निखिल है, मेरी उम्र 24 साल और मेरा लंड 6 इंच लंबा है। दोस्तों में हमेशा से चूत का बहुत बड़ा दीवाना पागल रहा हूँ, इस वजह से मुझे सेक्स करना सबसे अच्छा लगता है और मुझे खास करके अपने से बड़ी उम्र की लड़कियों में बहुत ज्यादा दिलचस्पी रही है और इस वजह से में उनकी तरफ कुछ ज्यादा ही आकर्षित हुआ करता हूँ। दोस्तों में पिछले कुछ सालों से कामुकता डॉट कॉम पर भी सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेने लगा। मैंने अब तक आप लोगों की ना आने कितनी सच्ची घटनाओ को पढ़कर अपने मन को शांत किया और अब यह सब करना मेरा एक शौक बन चुका है। दोस्तों मेरा घर मुंबई के बांद्रा इलाके में है और में हमेशा सुबह-शाम के समय पार्क में घूमने आने वाली दीदी, आंटी, लड़की और हर तरह की नारी के बूब्स और उनके कूल्हों को बहुत घूर घूरकर देखता हूँ और अपने घर की छत पर खड़े रहकर में बाहर निकलती हुई, दीदी के हिलते हुए कूल्हों को देखता मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आता है और मेरा लंड वो सेक्सी द्रश्य देखकर तुरंत खड़ा हो जाता है। दोस्तों कभी कभी तो कुछ दीदी इतने कसे हुए कपड़े पहनती है कि उन कपड़ो से उनके गोरे रंग के बड़े आकार के बूब्स को हिलते हुए और उनके मटकते कूल्हों को देखकर मुझे ऐसा लगता है और मेरा मन कहता है कि में अभी उनके पास जाकर उनके वो कपड़े फाड़ दूँ।

फिर मेरा मन में विचार आने लगता है कि में उनको वहीं पर पकड़कर जबरदस्ती उनकी चुदाई कर दूँ और में बहुत जमकर चुदाई के मज़े लूँ। अब इन सभी विचारों से में जोश में आकर अपना तना हुआ लंड अपने हाथ में लेकर उसको हिलाने लगता हूँ, मैंने अभी तक मेरे कॉलेज की पाँच लड़कियों को भी चोदा है वो सभी लड़कियाँ पढ़ाई में मुझसे एक साल आगे थी। दोस्तों में अपने मन की सच्ची बात बताऊँ तो वैसे भी में हमेशा ही किसी बड़ी उम्र वाली औरत की चुदाई भी चाहता था, बड़ी औरत से मेरा मतलब है कि वो उम्र में 26 से 30 साल की हो वो हरीभरी गांड वाली हो और अगर उसकी कुँवारी चूत हो तो उसके साथ यह सब करने का मज़ा दुगना आएगा। दोस्तों अब में अपनी आज की उस घटना को सुनाना शुरू करता हूँ और आप सभी को पूरी तरह विस्तार बताता हूँ। दोस्तों में हमेशा मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटियों और रिश्ते में अपनी मामी-दीदी के कूल्हों और बूब्स को बहुत ध्यान से घूरकर देखा करता था, लेकिन अब तक भी किसी औरत की चुदाई करने की मेरी इच्छा वो इच्छा अधूरी ही थी। दोस्तों मेरे पड़ोस में रहने वाली एक दीदी जो उन दिनों टीवी पर काम किया करती थी और जिसका नाम साक्षी है, वो उम्र में 28 साल की है।

अब इस समय में उसको दीदी ना कहकर साक्षी ही कहूँगा। दोस्तों बहुत सारे लोग ऐसे भी होंगे जो साक्षी के नाम की मुठ मारते है और में भी उनमे से एक हूँ, में बचपन के दिनों में छुट्टियों के समय हमेशा साक्षी के घर जाता था और वो मुझे बहुत चाहती थी, लेकिन तब में उम्र में छोटा था में भी उसको बहुत चाहता था और वो मेरी दीदी की तरह थी। फिर जब में बड़ा हुआ तब मुझे भी अब सेक्स के बारे में वो सभी बातें पता चलने लगी थी कि सेक्स कैसे और किसके साथ किया जाता है? सेक्स को करने में कितना मज़ा आता है, उसको करने से क्या होता है? अब मुझे सेक्स करने के बहुत सारे तरीके भी सेक्सी कहानियों को पढ़कर पता चल चुके थे और जब भी में अपनी हॉट सेक्सी पड़ोसन साक्षी के घर पर जाता, वो मुझे उम्र में छोटा नासमझ बच्चा समझकर मजाकिया तरीके से मेरे गालों पर चूम लिया करती और मुझे वो हर कभी अपनी बाहों में लेकर ज़ोर से भर भी लिया करती थी। अब उसके ऐसा करने की वजह से मेरा लंड भी तुरंत तनकर खड़ा हो जाता और फिर में भी मज़े लेने के लिए उसके बदन से जानबूझ कर लिपट जाता और उसकी गोरी पीठ पर अपने हाथ को घुमाने लगता।

फिर जब उसके बूब्स मेरी छाती पर लगते तो मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाता, लेकिन में उस समय खुद को शांत कर लिया करता और फिर में तुरंत बाथरूम में जाकर साक्षी के नाम की मुठ मार देता जिसकी वजह से मेरा लंड वीर्य के बाहर निकलते ही एकदम शांत निढाल होकर नीचे लटक जाता। दोस्तों हर रात को में सोते समय हमेशा अपने बिस्तर पर लेटकर सोचता था कि साक्षी दीदी के बूब्स कितने बड़े होंगे, मुझे उसकी झांटो से भरी चूत को चूमने और उसकी चुदाई करने में कितना मज़ा आएगा? वो साली एक बार मुझे उसकी गांड के दर्शन करा दे तो में गंगा नहा लूँ। फिर में हमेशा उसको देखा करता तब उसको साड़ी में लिपटी हुई देखकर मेरा मन उसका बलत्कार करने को व्याकुल रहता और मुझे ऐसा लगता था कि में अभी जाकर उसकी साड़ी में लिपटी हुई गांड पर अपना लंड रगड़ दूँ और उसकी साड़ी को ऊपर करके उसकी गांड को चूम लूँ, चाटकर उसके मज़े लूँ और उसकी गांड में अपनी उंगली को डाल दूँ। फिर उसको एक बार पूरी नंगी करके में उसकी चुदाई करना चाहता था और जब भी वो अपने कूल्हों को हिलाकर चलती तब मुझे ऐसा लगता था कि उसको पीछे से पकड़कर अपना लंड उसकी चूत में डालकर रंडी को चोद दूँ।

दोस्तों वो आख़िर में मेरी दीदी थी और इस वजह से में कुछ भी नहीं कर पा रहा था। फिर आखरी बार जब में साक्षी के घर गया, मैंने बाथरूम में जाकर उसकी ब्रा और पेंटी देखी और जब मैंने उसकी पेंटी को अपने हाथ में लेकर सूँघा तब मुझे उसका एक अजीब सा मदहोश कर देने वाला नशा सा होने लगा था। दोस्तों उसकी चूत की वाह क्या मस्त खुशबू थी? तब मैंने मन ही मन में सोचा कि काश में उसकी पेंटी होता, तो में उसकी चूत से पूरा दिन ऐसे ही लिपटा रहता जैसे यह किस्मत वाली पेंटी चिपककर मज़े लेती है। दोस्तों में अब अकेले में अपने आप से बोले रहा था, आ साली रंडी साक्षी दीदी तू आज मुझसे अपनी चुदाई करवा ले, तुझे तो में आज चोद चोदकर अपनी रंडी बनाकर ही तेरा पीछा छोड़ूँगा, साली छिनाल क्या गुलाबी चूत होगी तेरी कुतिया? फिर उसकी चूत के विचारों में मैंने अपना लंड अपनी पेंट से बाहर निकाल लिया और फिर मैंने अपने लंड को हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाते हुए उसको सोचकर उसकी चुदाई के विचार में मैंने अपना सारा गरम गरम वीर्य उसकी पेंटी में ही निकाल दिया। अब में एकदम निढाल बिल्कुल शांत होकर अपने कमरे में बैठा हुआ था कि तभी साक्षी दीदी अंदर आ गई।

फिर मैंने थोड़ा सा उनकी तरफ मुस्कुरा दिया, तभी उसने मुझे मेरे गालो पर चूमा और मुझे हग भी किया। अब वो किसी काम से बाहर गई थी, इसलिए वो बड़ी ही मस्त माल सेक्सी लग रही थी। अब में उसको अपनी चकित नजर से घूर घूरकर कुछ देर ऐसे ही देखता रहा और उस समय साक्षी ने जालीदार साड़ी और बिना बाँह का ब्लाउज पहना हुआ था, लेकिन वो ब्लाउज थोड़ा सा गहरे गले का था और उसको इस रूप में देखकर ही मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया तभी वो मुझे देखकर मुस्कुराते हुए मुझसे पूछने लगी।

साक्षी : क्यों निखिल कैसे हो? और यह सब क्या चल रहा है?

में : वैसे कुछ खास नहीं दीदी?

साक्षी : क्यों तुमने अब तक कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?

में : (दोस्तों में उसके मुहं से यह शब्द सुनकर एकदम चकित रह गया और फिर मैंने अपना जवाब दिया जिसको सुनकर वो भी कुछ कम चकित नहीं हुई) जी नहीं दीदी मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है।

साक्षी : अरे यार तू भी कैसा इंसान है? तेरी उम्र में तो सभी लड़के लड़कियों के आगे पीछे भागते है और तुझे इन कामों में किसी भी तरह की कोई रूचि ही नहीं लगती, तू अपना काम कैसे चलता होगा?

अब मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर सिर्फ शरम से अपनी गर्दन को नीचे झुका दिया और में अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बोला। तभी उसका मोबाइल फोन अचानक हाथ से छूटकर नीचे गिर गया और वो उसको उठाने के लिए नीचे झुकी और उसी समय उसकी साड़ी का पल्लू भी नीचे गिर गया और मेरी नज़र अब साक्षी के नीचे झूलते हुए बूब्स पर थी। वो एकदम लटकते हुए आम की तरह नजर आ रहे थे और वो द्रश्य देखकर मेरा मन डोलने लगा था, वो वाह क्या मस्त सेक्सी द्रश्य था? में किसी भी शब्दों में लिखकर वो बता नहीं सकता। फिर जब उसने देखा कि मेरी नज़र उसके बूब्स पर है, तब उसने अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक किया और वो सीधी होकर चली गई। फिर उसके बाद में भी कुछ देर बाद अपने घर पर उसके बारे में सोचते हुए उस द्रश्य को अपनी आँखों में लेकर में वापस चला आया। फिर उस रात को मैंने उसके बारे में सोचकर अपना लंड हिलाकर उसको शांत किया। फिर में दूसरे दिन सुबह उसके घर पर दोबारा अपने मन में कुछ अच्छा होने की उम्मीद लेकर पहुंच गया और उसने मुझे बैठने के लिए कहा और में बैठ गया।

फिर कुछ देर बाद जब वो मेरे लिए नाश्ता लेकर आई और उसको वो टेबल पर रख रही थी तो उसी समय उसने जानबूझ कर अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया। अब उस वजह से मेरी नज़र एक बार फिर से उसके बूब्स पर थी और वो मुझे अपने बूब्स को घूर घूरकर देखता हुआ देख बोली क्यों ऐसे क्या घूरकर देख रहे हो? तुम्हे अगर पसंद आ गए हो तो तुम मुझे बता दो? तब मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर मन ही मन में सोचा कि मेरे लिए यही एकदम सही मौका है, अभी तक इस साली की शादी भी नहीं हुई है और यह लंड के लिए बहुत तड़प रही होगी? कुतिया साली इसको अपनी चूत को शांत करने के लिए मेरा लंड चाहिए और मुझे भी इसकी चूत चाहिए यह काम करने के बाद ही मेरे लंड को आराम मिलेगा। फिर मैंने हिम्मत करके उसको बोल दिया कि अगर एक बार चूसने को मिल जाता तो मुझे जीवन जीने का पूरा मज़ा आ जाता। अब साक्षी ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए अपनी साड़ी को खोल दिया, जिसकी वजह से अब वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में मेरे सामने थी और में पहली बार इतने कम कपड़ो में उसके गोरे मुलायम पेट और एकदम गोलमटोल बड़े आकार के बूब्स को देखकर बिल्कुल पागल हो चुका था और फिर में उठकर उसके पास जाकर चिपक गया।

अब मैंने अपनी सारी हदे पार कर दी, मैंने उसी समय अपने एक हाथ को साक्षी के बूब्स पर रख दिया और फिर में अपने एक हाथ से उसके पेटीकोट के ऊपर से उसके बिल्कुल गोल गोल कूल्हों को धीरे धीरे सहलाने लगा था, मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और देखकर मुझे अंदाजा लगने लगा था कि उसकी भी खुशी का कोई ठिकाना ना था और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी थी। अब में उसके नरम गुलाबी रसभरे होंठो को पागलों की तरह चूमने लगा और उस काम में उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया, हम दोनों होंठो को चूसते हुए दूसरी दुनिया में जा चुके थे हमें कुछ भी होश नहीं था। फिर थोड़ी ही देर के बाद मैंने उसके ब्लाउज को उतार दिया, लेकिन उसने मुझसे कुछ भी नहीं कहा और फिर मैंने सही मौका देखकर अब उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी उसका गदराया हुआ गोरा बदन ब्रा पेंटी में देखकर में अपने बचे हुए होश भी खो बैठा। अब में उसके कामुक बदन को अपने हाथों से सहलाकर उसको गरम करने लगा और वो मेरी बाहों में आकर हल्की हल्की सिसकियाँ लेने लगी।

अब में उस बदन को देखकर सोचने लगा था कि में जैसे यह सब सपने में कर रहा हूँ और मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं था कि जिसको में छुप छुपकर देखा करता था, आज वो मेरी बाहों में है। अब उसने मेरे लंड को पकड़कर ज़ोर से दबा दिया और में अपनी नींद से जाग गया। फिर मैंने बिना देर किए उसकी गरम चुदाई की जल्दी को तुरंत समझकर अपनी पेंट को भी उतार दिया और अब मैंने उसके कान में धीरे से कहा कि में कब से तुम्हे चाहता हूँ और में तेरी चूत को मारना चाहता था, में कितने दिनों से इस सपने को पूरा करने के बारे में सोच रहा था, लेकिन मुझे ऐसा कोई भी मौका नहीं मिल रहा था जिसका में फायदा उठाकर तुम्हारे साथ यह सब करता। साक्षी तू मेरी जान है और में आज तेरी बहुत जमकर चुदाई करूंगा जिसको तू हमेशा याद रखेगी।

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