दीदी की गाण्ड

हैलो दोस्तो, मैं दिल्ली से हूँ, मेरा नाम रॉक राजपूत है, मेरी उम्र 23 साल, कद 5’6″ स्मार्ट हूँ, लंड का साइज़ 7″ से थोड़ा ज़्यादा है। मुझे चूत चोदना और चाटना बहुत पसंद है, गाण्ड चाटने का मेरा बहुत मन करता है। मुझे चूत चाटने का भी बहुत मन करता है। चूत की महक और चूत का नमकीन पानी.. अय..हय.. क्या बताऊँ..! अगर ज़्यादा दिन ना मिले तो, मैं पागल हो जाता हूँ।

आज मैं आपको अपनी एकदम सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। यह घटना 3 साल पहले की है। मेरे घर में 5 मेंबर हैं। मैं पापा, मम्मी, छोटा भाई और बड़ी दीदी जिनकी शादी हो गई थी। मेरी दीदी एकदम बेबो की तरह गठीले बदन वाली हैं। उन का 2 साल का लड़का है। उनकी चूची एकदम खड़ी रहती हैं। उनकी गाण्ड टाइट गठीली है और थोड़ी सी बाहर को निकली हुई है। उनकी उम्र 26 है। वो कुछ दिन के लिए घर आई हुई थीं। अब मैं अपनी बात पर आता हूँ। एक दिन घर पर कोई नहीं था। पापा-मम्मी मामा के यहाँ गए थे। दीदी कुछ काम से मार्किट गई थीं। मेरा मन हुआ तो मैं निक्कर से अपने लंड को बाहर निकाल कर सहला रहा था, मुठ मार रहा था। तो अचानक पता नहीं दीदी कब मार्केट से आ गईं, मैं चूतिया अपनी चुदास के चक्कर में गेट लगाना भूल गया था।

दीदी उसी वक्त मेरे रूम में आ गईं। मेरा मुँह दीवार की तरफ था। दीदी ने मुझे पीछे से देख लिया और मुझे बिना कुछ कहे बाहर निकल गईं। जब वो बाहर गईं, तब मुझे पता चला कि कोई अन्दर से बाहर गया है। मेरी तो गाण्ड फट गई। मैंने निक्कर ऊपर की और अन्दर ही बैठ गया, बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं दिल को थाम कर बाहर आया, तो देखा दीदी रसोई में थीं। मैं शर्म के मारे मर गया। यार आज क्या हो गया..! मैं वापस अपने रूम में घुस गया। मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, कैसे दीदी के सामने जाऊँ। शाम को दीदी मेरे लिए खाना लाईं और बिना बोले रख कर चली गईं। मैं अन्दर चुपचाप बैठा था, मुझे रोना आ गया। मैंने खाना नहीं खाया। रात को 10 बजे के करीब दीदी फिर रूम में आईं और खाना थाली में देख कर बोलीं- राज.. खाना क्यों नहीं खाया..!

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मैंने नज़र झुका कर बोला- भूख नहीं है दीदी..!

और इतना बोल कर रोने लगा और दीदी के सामने हाथ जोड़ कर बोला- दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे ग़लती हो गई। आगे ऐसा नहीं करूँगा।

मैंने कहा- दीदी आपने जो देखा वो किसी से मत बोलना, नहीं तो मैं मर जाऊँगा।

दीदी ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ रख कर कहा- चुप हो.. नहीं बोलूँगी..पर प्रॉमिस कर, आगे ऐसा नहीं करेगा..!

मैं खुश हो गया और दीदी को ज़ोर से अपने गले से लगा लिया और बोला- प्रॉमिस, पक्का अब नहीं करूँगा। फिर हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे।

फिर एकदम से दीदी बोलीं- राज तेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है क्या..!

मैंने कहा- नहीं है दीदी..!

वो बोलीं- क्यों तू इतना तो स्मार्ट है।

और इतना बोल कर गाल पर चुम्बन कर लिया। मैं सन्न रह गया, दीदी ने मुझे चुम्बन किया। मैंने भी हिम्मत करके दीदी के गाल पर चुम्बन करते हुए ‘थैंक्स’ बोला।

दीदी बोलीं- यह तूने क्यों किया?

मैंने कहा- जैसे आपने किया..!

वो बोलीं- अभी तो मैंने तो प्यार में चुम्बन किया !

मैं बोला- मैंने भी प्यार से चुम्बन किया।

तो वो मुस्कुराते हुए बोलीं- कौन सा वाला प्यार? दीदी वाला प्यार या ‘वो’ वाला प्यार?

मैं शर्मा गया और बोला- पता नहीं..!

दीदी बोलीं- तू बड़ा हो गया है राज..!

मैंने कहा- कैसे?

वो बोलीं- बस तेरी हरकतों से पता चल गया।

मैंने कहा- दीदी आप बार-बार वो बात बोल कर मत चिड़ाइए..!

तो वो मुस्कुरा कर बोलीं- तू निक्कर निकाल कर क्या कर रहा था..!

ये सुन कर मैं शर्मा गया और कुछ नहीं बोला।

दीदी बोलीं- वैसे तू अन्दर से लाल है।

मैंने कहा- कैसे?

वो बोलीं- तेरा वो लाल है..!

दीदी की बातों से मेरा लंड फनफना रहा था। वो निक्कर में तंबू बना रहा था।

मैंने अंजान बनते हुए पूछा- क्या लाल है?

वो मुस्कराते हुए मेरे को हल्का सा धक्का मार कर बोलीं- तेरा पप्पू..! मैं बेड पर लुढ़क गया और दीदी को मेरे निक्कर का उभरा हुआ हिस्सा दिखाई दे गया।

मैं बोला- नहीं दीदी, अन्दर में बहुत काला हूँ..!

वो बोलीं- नहीं मैं नहीं मान सकती, मैंने खुद देखा है।

मैंने कहा- नहीं..!

वो बोलीं- चल निकाल, फिर देखती हूँ..!

इतना सुन कर तो मैं पागल हो गया और मुझे दीदी को चोदने की उम्मीद लगने लगीं।

तो फिर मैंने कहा- दीदी, शर्म आ रही है..!

तो दीदी ने मेरे गाल पर चुटकी लेते हुए बोलीं- तब तो शर्म नहीं आ रही थी जब ‘वो’ कर रहा था..! मैं चुप हो गया और दीदी को देखा, दीदी मुस्कुरा रही थीं और मेरे निक्कर की तरफ ही नज़र किये थीं। मैंने निक्कर नीचे कर दिया और अपना लंड निकाल दिया। मेरा लंड देख कर दीदी की आँख फट गई और बोलीं- उई भगवान इतना मोटा..!

मेरे मुँह पर मुस्कान आ गई। तब दीदी ने एकदम झट से मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगीं।

मैंने कहा- क्या हुआ दीदी..!

मेरा दिल धक-धक कर रहा था।

दीदी बोलीं- राज मैं तेरी दोपहर वाली बात किसी को नहीं बोलूँगी, पर तुझे भी मेरी कसम है जो मैं करूँ, वो तू किसी से नहीं कहेगा..!

मैं समझ गया था, दीदी क्या करने वाली हैं।

मैंने कहा- दीदी आप जो मन करे.. कर लो, मैं किसी से नहीं कहूँगा।

दीदी ने मेरे गाल पर चुम्बन किया और फिर मुझसे कहा- सारे कपड़े निकाल दे..!

मैंने कहा- मुझे शर्म आ रही है.. आप भी निकालो..!

तो दीदी ने झट से अपनी ब्लैक कलर की नाईटी निकाल दी। मैं दीदी का फिगर देख कर पागल हो गया। क्या माल थी…! गोरा बदन, एकदम चिकना और काली ब्रा और नीचे जाली वाली काली पैन्टी। दीदी एकदम मुझसे चिपक गईं और मेरे लंड को हाथ से हिलाने लगीं और मेरे होंठों पर अपने गुलाबी होंठ चिपका दिए। मैं भी होंठों को चूसने लगा और अपनी दीदी की कच्छी में हाथ डाल कर उनके चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा। इतनी प्यारी गाण्ड पर हाथ फिराने में बहुत मज़ा आ रहा था। हम दोनों एक-दूसरे के होंठ पी रहे थे।

करीब 5 मिनट होंठ पी कर दीदी की मैंने ब्रा और कच्छी निकलवा दिए और खुद भी निक्कर और बनियान निकाल दिया। हम दोनों एकदम नंगे थे, दीदी ने अपना बेटा गोद में लिया और नीचे कपड़ा बिछा कर लिटा दिया।
फिर हम एक-दूसरे पर टूट पड़े, होंठ पीने लगे, दीदी पूरे जोश में आ गई थीं और तेज सांस ले रही थीं। मैंने दीदी को लिटाया और दीदी के चेहरे को जीभ से चाटने लगा और फिर गर्दन को, फिर मम्मे चाटे और फिर मैंने दीदी को ऊपर से नीचे तक़ पूरा चाटा, फिर उल्टा लिटाया और फिर कमर पर दोनों कूल्हों यानि पूरा शरीर चाटा। दीदी पागल हुए जा रही थीं।

मैंने फिर दीदी के पैर चौड़ाए और अपनी जीभ चूत में डाल दी और चूत चाटने लगा।

दीदी तेज़ आवाज़ निकालने लगीं, “आ.. चाआट हाँ तेज़ चाआट..!”

कुछ देर बाद दीदी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह अपनी चूत में दबा दिया और झड़ गईं। मैंने चूत का पानी पिया। क्या महक और पानी था..!

मैंने 10 मिनट चाटने के बाद दीदी से बोला- दीदी आप मेरा लंड पियो..!

दीदी बोलीं- तू नहीं भी बोलता तो मैं फिर भी पीती..!

और मेरा लंड मुँह में ले लिया। यार मैं ये देख कर ‘शॉक्ड’ रह गया कि पूरा लंड जड़ तक मुँह में लेकर चूसने लगीं..! बिल्कुल ब्लू-फिल्म में सन्नी लियोने की तरह वे मेरा लौड़ा चूस रही थीं। मैं तो जन्नत में पहुँच गया था और पूरे कमरे में पुचुर-पुचुर की आवाज़ गूँज रही थी। दस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था, मैंने दीदी का मुँह अलग करना चाहा, पर दीदी ने मेरे पैर कस कर पकड़ लिए और पूरा लंड अपने कन्ठ तक ले लिया और मैं एकदम से झड़ गया।

दीदी पूरा वीर्य पी गईं और हम दोनों चिपक कर लेट गए। दीदी का हाथ मेरे लंड से खेल रहा था।

मैंने दीदी से कहा- दीदी, सच बताओ, आपको मेरी कसम लो लंड चूसना कहाँ से सीखा?

दीदी हँसने लगीं और बोलीं- 12वीं क्लास से..!

मैंने कहा- पूरा डिटेल में बताओ ना..!

वो बोलीं- मेरी क्लास में मेरा बॉय-फ्रेंड था… अबराम, हर डेट पर लंड चुसवाता था। पहले थोड़ा अजीब लगता था, पर लगातार 4 साल तक उसका लंड चूसा और फिर आदत पड़ गई और फिर शादी के बाद तेरे जीजू जब भी चुदाई करते हैं, तो मैं एक बार लंड ज़रूर चूसती हूँ और अब तो बिना लंड चूसे नींद नहीं आती। यह बात सुन कर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।

मैंने दीदी से कहा- दीदी आप डॉगी स्टाइल में हो जाओ..!

तो दीदी मुस्कुराईं और डॉगी स्टायल में हो गईं। मैंने दीदी की गाण्ड के छेद को अपनी जीभ से टच किया और अन्दर मुँह घुसा कर गाण्ड का छेद मुँह में भर के चाटने लगा। दोस्तो, लड़की की गाण्ड चाटने का भी अलग ही मज़ा है। मैं गाण्ड के छेद को जीभ से चाट रहा था और दीदी अपने गाण्ड मेरे मुँह पर रग़ड़ रही थीं।

दीदी बोलीं- छेद में अन्दर जीभ डालने की कोशिश करो ना..!

मैंने दीदी से गाण्ड ढीली छोड़ने को कहा। गाण्ड ढीली होने पर मैंने जीभ अन्दर डाल दी और अन्दर से चाटने लगा। जीभ को चारों तरफ घुमा कर मैंने 15 मिनट तक गाण्ड चाटी फिर मैंने पीछे से सर अन्दर डाल कर चूत को मुँह में भर लिया।

और दीदी से बोला- दीदी थोड़ा मेरे मुँह में सुसू करो ना..!

दीदी जोश में थीं मेरी हर बात मान रही थीं, उन्होंने थोड़ी सुसू कर दी। मैं सारी सुसू पी गया.. यार ऐसा लगा जैसे गरम पानी में नमक का डिब्बा डाल दिया हो..पर सुसू पी कर सेक्स फीलिंग और ज़्यादा बढ़ गई। मैंने दीदी को सीधा लिटाया और दीदी से कहा- दीदी अब चूत में लंड लेने को तैयार हो जाओ..!

दीदी बोलीं- मैं तो कब से तैयार हूँ तू डाल तो सही..!

मैंने लंड को चूत पर लगा कर हल्का धक्का मारा, लंड का टोपा अन्दर गया।

दीदी बोलीं- अबे हरामी एक झटके में ही अन्दर तक डाल..!

मैंने अपनी गाण्ड को पीछे करते हुए एक तेज झटका मारा और लंड सटाक से अन्दर..!

दीदी के मुँह से निकला, “आआईयईई..!”

और मैंने दीदी के होंठ मुँह में भर लिए और चूसने लगा। अपने हाथ से मम्मे दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं हल्के-हल्के धक्के मारने लगा और थोड़ी देर बाद स्पीड बढ़ा दी। पूरे कमरे में चाप… फटाक…चाप फटाक.. की आवाज़ गूँज रही थी। दीदी भी अपनी गाण्ड उठा-उठा कर नीचे से मेरा साथ दे रही थीं..! कभी दीदी मुझे रोक कर अपनी चूत को जलेबी की तरह घुमातीं और मेरे होंठ को बहुत तेज़ से चूसतीं।

इस तरह 20 मिनट की चुदाई के बाद मैं दीदी की चूत में ही झड़ गया और मेरे साथ दीदी भी तीसरी बार झड़ गईं और मैं दस मिनट तक दीदी के ऊपर ही लेटा रहा।फिर उस रात मैंने दीदी को चार बार चोदा और दीदी को बहुत खुश कर दिया।

फिर हम हर रोज चुदाई करने लगे। मैंने दीदी की गाण्ड भी मारी और फिर दीदी ने मुझसे अपनी 3 सहेलियों को भी चुदवाया।