दीदी के साथ सुहागरात

दोस्तो, मेरा नाम समीर है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, अब मैं आपको अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरे घर के पास ही मेरी दीदी रहती हैं। उनकी शादी को 8 साल हो गए और 5 साल पहले ही जीजा जी की मौत हो गई। अब दीदी अकेले रहती थीं। जीजा जी के गुजरने के बाद सबके कहने पर वो मेरे साथ मेरे फ्लैट में आ गईं। मैंने उनकी नौकरी अपनी ही कंपनी में लगवा दी। हम दोनों ही सुबह ऑफिस को निकल जाते और शाम को आते।

उनका नाम चारू था, वो 30 साल की थीं, उनका कद 5 फ़ुट 4 इंच, उनका फिगर 37-30-38 का होगा। वो बड़ी ही सेक्सी थीं ! अब मैं कहानी पर आता हूँ। रात को घर में सिर्फ हम दोनों ही होते थे। जब भी हम साथ में खाना खाता, मैं बस उनके मम्मों को ही देखता रहता था, पर दीदी को शक नहीं होता था। एक दिन मेरे दिमाग में एक आईडिया आया। मैंने कुछ ब्लू-फिल्म की सीडी टीवी पर रख दीं और ऑफिस चला गया। शाम को मैं घर आया और तैयार होने लगा।

तो चारू दीदी बोलीं- समीर, तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेंड है?

मैंने कहा- नहीं।

तो वो बोलीं- यह सीडी तुम्हारी हैं, यह मूवी तुम देखते हो?

मैंने नाटक करते हुए कहा- हाँ..! पर आपको यह कहाँ मिल गईं?

उसने फिर पूछा- उसके बाद तुम्हारा मन नहीं करता कुछ करने को?

मैंने कहा- करता तो बहुत है, पर कर भी क्या सकता हूँ?

इस पर वो बोलीं- फिर तुम क्या करते हो?

मैंने शर्म के मारे अपना सर झुका लिया तो वो बोलीं- शरमाओ नहीं, क्या हाथ से हिलाते हो?

मैंने कहा- हाँ…!

“अगर तुम्हें जरूरत हो तो मेरे पास आ जाना, मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। वैसे भी अब हम दोस्त हैं।”

तब मैंने पूछा- दीदी, आप मेरी मदद कैसे कर सकती हो?

वो बोलीं- कैसी मदद चाहते हो?

मैंने कहा- दीदी, मैंने आज तक किसी भी औरत या लड़की को असल में नंगी नहीं देखा है। क्या मैं आपको देख सकता हूँ?

उसने कहा- जरूर !

और खड़ी हो गई, बोलीं- लो, तुम खुद देख लो जैसे देखना हो।

उन्होंने खुद ही मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया और बोलीं- यह पसंद है? लो दबाओ और मज़ा लो।

मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा। बड़ी टाइट और मस्त चूचियाँ थी। मजा आ गया था। फिर मैंने उनकी नाइटी उठाई और उनकी चिकनी टांगों को सहलाने लगा तो वो मेरे करीब आ गई और जींस के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगीं। वो इतनी गरम हो गईं कि उन्होंने खुद ही अपना गाउन उतार दिया। मैं उनको पैर से लेकर सर तक चूमता रहा। फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। पूरे बदन में एक भी दाग नहीं था। मैं उन्हें देख कर पागल हो गया था। उन्हें उनके बेडरूम में ले गया और उनको बिस्तर पर पटक दिया। उनको चूमने और चाटने लगा।

मैं उनकी चूत को चाटने लगा तो उन्होंने मुझे अपने पैरों से दबा लिया। बोलने लगीं, “चाटो मेरे राजा.., मैं बहुत प्यासी हूँ.. मेरी प्यास बुझा दो !

पाँच मिनट में ही वो मेरे मुँह में झड़ गईं और मैं उनके चूत के रस को अमृत समझ कर चाट गया। फिर उन्होंने उठ कर मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड देख कर वो घबरा गईं और बोलीं- यह तो बहुत बड़ा है..!

मेरा लंड 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर चाटने लगीं।

कुछ देर बाद मैंने कहा- चारू दीदी, मेरा होने वाला है !

तो उन्होंने कहा- मेरे मुँह में झड़ो ! मैं भी तुम्हारा अमृत पीना चाहती हूँ ! मैं उनके मुँह में झड़ गया।

वो मेरा लंड लगातार चूस रही थी, जब तक मेरा लंड दोबारा खड़ा नहीं हो गया। उसके बाद वो बेड पर चित्त लेट गईं और मुझे अपने ऊपर ले लिया और मेरे लंड को अपनी चूत में रगड़ने लगीं।

मैंने पूछा- दीदी ! क्या मैं आपको चोद सकता हूँ?

वो बोलीं- और नहीं तो क्या तेरा लौड़ा मैं अपनी चूत पर इसी लिए तो घिस रही हूँ.. बहनचोद चोद मुझे.. !

मैंने कहा- क्या आपको गन्दी बात करना पसंद है?

तो वो बोलीं- इसी में तो असली चुदाई का मजा है। खूब गालियाँ देकर मुझे चोद और अपनी रखैल बना ले मुझे।

फिर मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और अपना लौड़ा उनकी चूत में डालने लगा। अभी 3 इंच लंड ही अन्दर गया था कि दीदी चिल्लाने लगीं, “अरे भोसड़ी के ! फ्री की चूत समझ कर फाड़ने लग गया। अरे मादरचोद.. ! आराम से चोद.., मैं कोई भागे थोड़ी जा रही हूँ..हरामी..! मेरी चूत फट रही है.. अपना लौड़ा निकाल बहन के लौड़े…, मुझे नहीं चुदवाना तेरे से ! साले लौड़ा है कि मूसल …! आआआई .. मर गई ..! पर मैंने उनकी एक न सुनी और एक तेज़ धक्का मारा और अपना पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया और उनकी चूची के रस को पीने लगा। मैंने अपना लंड थोड़ा निकाला और एक बार फिर से पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया और उन्हें जम कर चोदने लगा और वो भी बहुत बड़ी चुद्दकड़ थी। अपने चूतड़ों को खूब उछाल कर चुदवा रही थी और साथ में गालियाँ दे रही थी, और जोर से चोदने को कह रही थी।

मैंने उन्हें चालीस मिनट तक खूब जम कर चोदा और वो लगातार, “अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह और पेलो.. फाड़ दो मेरी चूत को… चिथड़े उड़ा दो.. आज इस निगोड़ी के.. !”

अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- दीदी मैं झड़ने वाला हूँ।

वो बोलीं- मेरी चूत में झड़ो, मुझे तुमसे बच्चा पैदा करना है।

और मैं उन्हें चोदते-चोदते उनकी चूत में ही झड़ गया और उन्हीं के ऊपर लेट कर उनको चूमने लगा।

दोस्तो, अब मैं रोज दीदी को चोदता हूँ.. अब वो मेरी रखैल हैं और अब वो मेरे बच्चे की माँ भी बनने वाली हैं। वो अब मुझसे काफी खुश भी हैं और मुझे ही अपना सब कुछ मानती हैं…। और क्यों न हों..! जो भी मेरे लौड़े का स्वाद चख लेती है, वो मेरी मुरीद बन जाती है…!