चाची की बची जवानी के मजे लिए

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मेरा नाम सतीश है और मैं भरूच का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष की है और मेरे घर पर मेरे पापा एक दुकान चलाते हैं और मेरी दो बहन है जिनकी अभी तक शादी नहीं हुई है। वह दोनों ही कॉलेज में पढ़ती है और मेरी मां घर का काम संभालती है लेकिन मुझे कई बार चिंता होती है कि मेरी बहनों की शादी कैसे होगी क्योंकि शादी में बहुत ही ज्यादा खर्चा लगता है और मेरे पापा जितना कमाते है वह सब घर के खर्चे में ही लग जाता है। वह घर का ही खर्चा उठा पाते हैं और मैं भी अब एक नौकरी करने लगा, मैं जहां नौकरी कर रहा था वहां पर मुझे ज्यादा तनख्वाह नहीं मिलती थी क्योंकि मैं वहां पर नया ही लगा था उससे पहले मैं भी अपने पापा के साथ दुकान पर बैठा करता था लेकिन जब मैंने देखा कि वहां पर सिर्फ एक आदमी का ही काम है तो मेरे बैठने का कोई भी फायदा नहीं था इसलिए मैंने सोचा कि मैं अब एक नौकरी कर लेता हूं जिससे कि घर का थोड़ा बहुत खर्चा चल जाएगा। उसके बाद मैंने नौकरी ज्वाइन कर ली।

जब मैंने नौकरी ज्वाइन की तो मुझे लगा कि उससे हमारे घर का खर्चा चल जाएगा लेकिन उससे सिर्फ मेरा ही खर्चा निकल पा रहा था और मैं सोचने लगा की इतने कम खर्चे में तो मेरा खुद का गुजारा हीं हो रहा है मैं घर वालों को कैसे पैसे दूंगा, इसी वजह से मैंने सोचा क्यों ना कुछ और काम कर लिया जाए। जब मैंने कुछ और काम शुरू किया तो उसमें मेरा घाटा हो गया और अब मैं सोचने लगा कि मैं उस घाटे की भरपाई कैसे करूंगा। मेरे समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। थोड़ा बहुत पैसा तो मैंने चुकता कर दिया लेकिन मेरे ऊपर अब भी बहुत ज्यादा पैसा बकाया था इसलिए मुझे कुछ और कर लेना चाहिए। मैंने इस बारे में अपने चाचा से बात की। मेरे चाचा अहमदाबाद में रहते हैं और उनका बहुत ही बड़ा कारोबार है। मैंने उनसे कहा कि मुझे आपकी मदद की जरूरत है। वह कहने लगे कि बताओ किस प्रकार की तुम्हें मदद चाहिए। मैंने उन्हें कहा कि मैंने कुछ समय पहले काम खोला था लेकिन वह काम बिल्कुल भी नहीं चला और उसमें मुझे घाटा हो गया। वह कहने लगे कि तुम्हें कितने पैसों की आवश्यकता है। मैंने कहा कि मुझे पैसो की नही बल्कि फिलहाल कोई नौकरी की जरूरत है।

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मेरे चाचा कहने लगे कि एक काम करो, मेरे पास अहमदाबाद आ जाओ, मैं तुम्हारे लिए कहीं ना कहीं नौकरी ढूंढ लूंगा। मैं जब उनके पास गया तो मैंने अपने चाचा से पूछा कि आपका काम कैसा चल रहा है। वह कहने लगे कि मेरा काम तो बहुत ही अच्छा चल रहा है, मुझे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है और मैं अपने काम से बहुत ही खुश हूं। मेरे चाचा ने भी बहुत ज्यादा मेहनत की है। मुझे उन्हें देखकर बहुत ही खुशी होती है और मैं उन्हें ही अपना आदर्श मानता हूं। उन्हें देखकर ही मैंने अपना काम खोला था लेकिन वह चल नहीं पाया उन्होंने कहा कि तुम्हें जितने भी लोगों के पैसे देने हैं वह तुम उन्हें दे दो, कल मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा तुम उन सब लोगों के पैसे वापस कर देना। मैंने कहा ठीक है मैं उन सब के पैसे दे दूंगा। मैंने उन्हें यह कहा कि आप किसी को भी इसके बारे में नहीं बताएंगे। वह कहने लगे ठीक है मैं किसी को भी इस चीज के बारे में नहीं बताऊंगा, तुम उसके लिए निश्चिंत रहो। थोड़ी देर बाद मेरी चाची भी आ गई, मेरी चाची कहीं बाहर सामान लेने गई थी। मेरी चाची का नाम बबीता है और वह भी बहुत ही अच्छी हैं। वह मुझे हमेशा ही कहती रहती थी कि तुम अहमदाबाद आ जाओ लेकिन मैं उन्हें मना कर देता और कहता था कि मैं यहीं पर खुश हूं क्योंकि वहां पर मां बाप भी है इसलिए मैं वहीं पर खुश हूं। मैंने जब चाची से बात की तो वो कहने लगी कि तुम अब यहीं पर कुछ काम शुरू कर दो। उनकी दोनों लड़कियों की शादी हो चुकी है इसलिए वह दोनों ही अब घर पर अकेले रहते हैं और वह कहने लगी कि तुम यहां पर ही रहोगे तो हमारा मन भी लगा रहेगा क्योंकि हम दोनों बहुत ही बोर हो जाते हैं, हम दोनों एक दूसरे को देख कर ही बहुत परेशान हो गए हैं। मैंने उन्हें कहा इसमें परेशानी की क्या बात है।

वह कहने लगे की तुम्हें तुम्हारी शादी के बाद सब चल जाएगा कि किस प्रकार की परेशानी होती है क्योंकि जब तुम एक दूसरे को इतने ज्यादा समय तक देखते ही रहोगे तो तुम्हें उससे बात करने की इच्छा नहीं होगी। मेरी चाची का स्वभाव भी बहुत अच्छा है और वह बहुत ही हंसमुख हैं। वह हर बात में सिर्फ मजाक करते रहते हैं, वह मुझे भी चिढाती रहती थी और कहती थी तुम तो अब बहुत ही ज्यादा जवान हो चुके हो। मैंने उन्हें कहा कि मैं जवान तो हो चुका हूं लेकिन मेरे पास अभी तक कोई अच्छा काम नहीं है इसलिए मैं किसी भी लड़की की तरफ नहीं देखता मैं सिर्फ अपने काम के बारे में ही सोचता रहता हूं। मेरे चाचा कहने लगे कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, मैं तुम्हारा लिए कहीं ना कहीं पर नौकरी का करवा दूंगा, तुम उसके लिए निश्चिंत रहो। उन्होंने अपने दोस्तों से बात कर ली थी तो उनके दोस्त ने मुझे अपने पास ही नौकरी पर रख लिया। मै उनके साथ ही काम करने लगा और मुझे काम करने में बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि मुझे अहमदाबाद में पैसे भी अच्छी मिलते थे और मैं कुछ पैसे अपने घर भी भिजवा दिया करता था जिससे कि मेरी मां भी बहुत खुश हो जाती थी। मेरे पापा अपने काम में ही बिजी रहते हैं। वह सुबह घर से चले जाते हैं और रात को ही वह अपनी दुकान से वापस आते हैं। मुझे कई बार ऐसा लगता है कि वह कुछ ज्यादा ही मेहनत करते हैं। पर अब मैं भी काम करने लगा था तो इस वजह से मैं बेफिक्र था और उन्हें हर महीने पैसे भेज दिया करता था। मैं अपनी मां से कहता था की तुम पैसे जमा करते रहो क्योंकि मुझे अपनी बहनों की शादी भी करनी है। मैं जब घर में फोन करता हूं तो मेरी मां बहुत खुश हो जाती थी और मै उनसे बात करके बहुत ही खुश होता था। मैं जहां पर काम कर रहा था वह बहुत ही अच्छे थे क्योंकि वह मेरे चाचा के बहुत ही करीबी दोस्त है इसी वजह से वह मेरे साथ भी बहुत अच्छे से रहते थे और जब भी कोई काम होता तो वह मुझे ही कहकर जाते थे। मैं उनकी दुकान का काम बहुत ही अच्छे से संभालता था।

एक दिन हम तीनों बैठे हुए थे। मेरे चाचा मुझसे कहने लगे कि तुम शादी के बारे में क्या सोच रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि मैं फिलहाल अभी कुछ भी नहीं सोच रहा हूं क्योंकि मुझे पहले मेरी बहनों की शादी करनी है। उसके बाद ही मैं अपने बारे में कुछ सोच पाऊंगा। मेरे चाचा कहने लगे यह तो बहुत ही अच्छी बात है जो तुम इस तरीके से सोचते हो। नही तो आजकल सब अपने बारे में ही सोचते हैं और कोई भी अपने परिवार के बारे में बिल्कुल नहीं सोचता। मेरे चाचा बहुत ही समझदार व्यक्ति हैं और वह मुझे हमेशा ही समझाते रहते हैं कि तुम भी अपने घर वालों की बहुत ही रिस्पेक्ट किया करो क्योंकि उन्हें पता है मैं अपने घर वालों को बहुत ज्यादा मानता हूं इस वजह से वह मुझे हमेशा ही कहते हैं। मैं ऐसे ही अपने काम में बिजी था और समय धीरे धीरे निकलता जा रहा था लेकिन मुझे कुछ बड़ा करना था इसलिए मैंने अपने चाचा से बात की और उन्हें कहा कि मुझे आप कुछ ऐसा काम बताइए जिससे कि मुझे बहुत ही अच्छी आमदनी हो और मैं अपना बिजनेस सेट कर पाऊं। वह कहने लगे कि तुम उसकी चिंता मत करो, तुम सिर्फ अभी काम करो  मैं तुम्हें कुछ समय बाद एक काम खोल कर दे दूंगा जिसे तुम अच्छे से चलाना और जो भी उसमें बचत होगी वह तुम अपने घर पर दे दिया करना।

मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था और अपने मोबाइल में बैठकर पोर्न मूवी देख रहा था। मैंने अपनी पैंट के अंदर हाथ डाला हुआ था और अपने लंड को हिला रहा था तभी मेरी चाची पता नहीं कहां से आ गई। उसने मुझे देख लिया मैंने जैसे ही अपने लंड को छुपाने की कोशिश की तो उन्होंने उसे अपने हाथ में ले लिया और हिलाना शुरू कर दिया। वह उसे बड़ी तेजी से हिला रही थी उन्होंने हिलाते हिलात अपने मुंह के अंदर तक ले लिया। उन्होंने मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक समा लिया और अच्छे से उसे चूस रही थी। उन्होंने मेरे लंड को इतने अच्छे से चूसा कि मेरे लंड से पानी गिरने लगा और मुझे भी अच्छा लगा लगा। मैंने उन्हें घोड़ी बनाते हुए जैसे ही अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाला तो वह बहुत ही खुश हुई। वह भी अपने चूतड़ों को मुझसे मिलाने लगी मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के दे रहा था और वह भी अपने चूतडो को मेरे लंड पर धक्के मार रही थी।

उनकी चूतडे पूरी लाल हो चुकी थी और उनकी चूत अब भी टाइट थी मेरी चाची मे अब भी पूरी जवानी बची हुई थी। मैंने अब उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया और उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह अपनी मादक आवाज निकालने लगी और पूरी मस्त हो गई। मैंने अब उनके बड़े बड़े स्तनों को चाटना शुरू कर दिया और मै उनके स्तनों को अपने मुंह के अंदर तक ले रहा था। वह बहुत ही खुश हो रही थी और मैं भी उनके स्तनों को बहुत अच्छे से चूस रहा था। मुझे उनके बड़े बड़े स्तनों को चूसने में इतना मजा आ रहा था कि उनसे कुछ दूध भी निकल रहा था मैं उसे अपने गले के अंदर लेकर चूसने लगा मै उन्हें उतनी ही तेजी से झटके दिए जा रहा था। मैं उन्हें इतनी तेज तेज झटके मार रहा था कि उनका पूरा बदन हिल रहा था और वह मेरा साथ दे रही थी। वह कह रही थी कि तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा है जब मुझे तुम चोद रहे हो तो मुझे बड़ा मजा आ रहा है वह ऐसे ही कह रही थी और अपने मुंह से मादक आवाज निकल रही थी। उसी बीच में मेरा वीर्य पतन उनकी योनि के अंदर ही हो गया और जब मेरा माल उनकी चूत में गया तो वह बहुत खुश थी। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे ही चूसने लगी। काफी देर तक उन्होंने मेरे लंड को चूसने के बाद अपने कपड़े पहन लिए और अपने कमरे में चली।

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